आपी , दादु ने बुलाया है आप को”…. . …
आज वह काफी देर से सो कर उठी थी इसलिये नाशता भी कमरे में ही मंगा लिया ,अभी नाशता कर ही रही थी कि हसन ने आ कर बताया
“ठीक है आती हुं मैं , तुम चलो”…. .
उसने हसन को जाने का इशारा किया।
उसके जाने के बाद उसने जल्दी जल्दी नाशता खत्म किया और मॉसी को कमरे की सफाई का कह कर दादु के कमरे में चली आई।
“जी दादु बुलाया आपने “??
“हां , सब बच्चों ने अपनी अपनी शॉपिंग दिखा दी मुझे लेकिन तुमने नही दिखाई “???
दादु ने कुछ नाराज़गी से पूछा
“की ही नही है मैने कैसे दिखाऊं” ????
उसने बेचारा सा मुंह बना कर बताया
“की ही नही है ??? कुछ खुदा का खौफ करो लड़की कल फंकशन है मंगनी का और तुम अब तक कपड़े ही नही लाई हो “???
दादु ने उसकी बात सुनकर सर पकड़ लिया
“सॉरी दादु वह अम्मी फ्री ही नही थीं जो मैं उनके साथ जा कर ले आती और घर पर होती हैं तो भी मसरूफ रहती हैं”….. .. .
वह मिनमिनाई
“चलो जा कर तैयार हो जाओ फटाफट मैं रज़ा या अनस को बोलती हूं ले जाए तुम्हें”
दादु ने हुक्म दिया।
“रज़ा भाई घर पर नही हैं वह तो पापा के साथ फंकशन की तैयारियों में मसरूफ हैं”
“ठीक है फिर अनस को भेजो मेरे पास, और तुम जा कर जल्दी से तैयार हो जाओ मेरा बेटा”!!!
दादु हमेशा वाली मुहब्बत से बोलीं
वह अभी कमरे से निकल ही रही थी कि वह वहीं आ गया
“लीजिये दादु शैतान का नाम लिया और शैतान हाज़िर”
उसने शरारत से दादु को देखा
“और अपने बारे में क्या ख्याल है तुम्हारा क़बरिस्तान से भागी हुई चुड़ैल लगती हो बिलकुल” ???
वह उधार रखने वालो में से नही था
“अच्छा बस अब यहां पानीपत का मैदान मत लगा कर बैठ जाना तुम दोनो”
दादु ने हाथ उठा कर उन दोनो को रोका।
“जाओ शिफ़ा तुम जा कर तैयार हो , और अनस तुम इसे बाज़ार ले जाओ शॉपिंग करनी है इसको कल के लिये”
दादु उसे हुक्म दे कर अनस की तरफ पलटीं
“अम्बरैला ज़रूर ले लेना साथ में बाहर बहुत तेज़ धूप है और सर में दर्द हो भी बहुत जल्दी जाता है तुम्हारे”
अनस ने पीछे से आवाज़ दे कर कहा तो वह जवाब दिये बग़ैर ही खामोशी के साथ निकल गई।
वह तैयार हो कर पोर्च में आई तो वह गाड़ी टर्न किये उसका वेट कर रहा था।
“मैडम ड्राइवर नही हूं आपका आगे तशरीफ ले आएं फ्रंट सीट पर “… .. …..
वह पीछे का दरवाज़ा खोल कर बैठने लगी तो अनस ने टोका।
वह पीछे का दरवाज़ा बंद करती कुछ कहे बग़ैर ही आगे आ कर बैठ गई
“कितनी अच्छी लगती हो जब यूं खामोशी से मेरी बात मान लेती हो तुम” ….. . ….
अनस ने दबी दबी मुस्कुराहट से कहते हुए गाड़ी स्टार्ट कर दी।
पूरा रास्ता खामोशी से गुज़रा था
“तुम क्लॉथ सेक्शन पहुंचो मैं आता हुं पार्क कर के गाड़ी को”……..
मॉल पहुंच कर वह गाड़ी से उतरी तो अनस कहने लगा जिस पर वह हां में सर हिलाती आगे बढ़ गई
वह कई ड्रैस निकाल चुकी थी जब तक अनस वापस आया
“इन सब में से बताओ कौन सी अच्छी है” ??
उसने हाथ में पकड़े हैंगर्स उसे पकड़ाए
“यह छोड़ो” !!!
उस ने उसके हाथ से सारी ड्रैस ले कर ऐक साइड रख दी
“यह ज़्यादा सूट करेगा तुम्हें ,यह ट्राई करो”… …
उसने सामने लगे ड्रैस को उठा कर शिफ़ा को पकड़ाया तो वह दिल से उसकी पसंद को दाद दिए बग़ैर ना रह सकी
“ठीक है एक तो यह डन कर देते है , अब दूसरा बताओ”….
“ऐक यह देखो कैसा है”? ??
काफी ड्रैस दे़खने के बाद उसने एक उठा कर उसे दिया था
“फंटास्टिक!!! यह भी बहुत अच्छा है” …………….
.वह बहुत खुश हो गई ,इस बार भी उसकी पसंद बहुत लाजवाब थी
“चलें अब शू सेक्शन में” ???
अनस ने दोनो ड्रैसैस पैक कराने के बाद पूछा
“हां चलो फिर ज्वैलरी भी तो लेनी है”
“हां जी बिलकुल , और तुम्हे तो हर चीज़ मैचिंग ही चाहिये भी होती है ले कर हेअर पिन से और नोज़ पिन तक”
अनस ने उस को छेड़ने वाले अंदाज़ में कहा
“कैसे याद रहती है तुम्हे मेरी हर बात हर आदत” ????
वह कुछ हैरानी से बोली
“इसको ही मुहब्बत कहते हैं डियर कज़िन “….…
वह गंभीर अंदाज़ में कहता हुआ उसके बिल्कुल क़रीब से गुज़र कर शू सेक्शन की तरफ बढ़ गया तो वह भी अपने हवास बहाल करते हुए पीछे पीछे चल पड़ी।
☆ ☆ ☆
“दादु अम्मी ने कहा है आप प्लीज़ यह लिस्ट चैक कर लें कि कही कोई कमी तो नही है” ….. .. .
उसने शाम में लड़की वालो के यहां ले जाए जाने वाले सामान की लिस्ट दादु को पकड़ाई थी
“ऐ हे , मेरा तो चशमा भी पता नही कहां रखा गया है!!! शिफ़ा यह तुम ही पढ़ कर सुना दो बच्चे”
दादु ने आसपास नज़रे दौड़ाई लेकिन चशमा ना पा कर वह लिस्ट वापस उसे ही थमा दी
“जी ठीक है” ….
. वह लिस्ट पढ़ कर सुनाने लगी
“लिफाफे कहां हैं, लिफाफे तो नही हैं इसमें जबकि मैंने कौसर को कहा भी था मंगवाने के लिए” ???
दादु ने पूरी लिस्ट ध्यान से सुनने के बाद पूछा
“कैसे लिफाफे दादु”???
“अरे शाम में जब रस्म करने जाएंगे तो पैसे नही देने हैं बच्ची को”… .? ???
“ठीक है मैं बता देती हूं अम्मी को”
वह कहते हुए उठी थी
“अरे उसको क्या बताना है बस और बहुत काम है उन लोगों के सर , तुम यूं करो कि कौसर से पूछो उसने मंगवा लिए होंगे ज़रूर लिफाफे वह ले कर आज़मीन को भेज दो मेरे पास मैं उस्से नाम भी लिखवा लूंगी साथ के साथ उन पर”
दादु उसे कह कर फिर से अपना चशमा ढूंढने में लग गई
“जी ठीक है”
कह कर वह उठ गई।
“आपी बात सुनें”!!!
वह आज़मीन को ढूंढती हुई कमरे की तरफ जा रही थी कि लाउंज में हसन ने रोक लिया
“बोलो” ….. .. ??
वह जल्दी में थी
“यह कपड़े मुझे शाम में पहनने है आयरन कर के अपने ही रूम में रख लें मैं शाम में आप ही से ले लूंगा” ……
उसने कपड़े शिफ़ा को थमाए।
“ठीक है ले लेना”
वह कपड़े ले कर अपने और आज़मीन के कंबाइन रूम की तरफ चल दी
“मीनू तुम्हे दादु बुला रही हैं”….. .
आज़मीन कमरे में बैठी अपनी ज्वैलरी से उलझ रही थी
“अभी जा रही हूं आपी मुझे इयर रिंग नही मिल रहे मेरे मैचिंग वाले, ज़रा वह देख लू”
वह परेशान थी
“मैं न्यू इयर रिंग्स लाई हूं हैदराबाद से वह देख लेना चल जाएंगे तुम्हारे ड्रैस के साथ , अब जाओ जा कर देखो दादु वेट कर रहीं हैं तुम्हारा, और सुनो जाते हुए बड़ी अम्मी से लिफाफे लेती जाना “…….
उसने कहा तो आज़मीन हां मे सर हिलाती उठ गई
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