Muhabbat Ek Sabaq - 11 in Hindi Love Stories by Afariya Faruqui books and stories PDF | Muhabbat Ek Sabaq - 11

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Muhabbat Ek Sabaq - 11

शहरयार नें भी उसे देख लिया था वह गाड़ी वहीं रोक कर बाहर निकल आया 
शिफ़ा क्या हुआ है … .. ???? 

उसके चेहरे का रंग उड़ा हुआ था और भागने की वजह से सांस भी फूल रही थी वह उसे देख कर परेशान हो गया।
"आप बस घर चलें" !! 
 वह जल्दी से फ्रंट डोर खोल कर अंदर बैठ गई तो शहरयार ने भी दूसरी तरफ से घूम कर आ कर ड्राइविंग सीट संभाल ली।
"आप पहले पानी पियें और रिलेक्स हो जाएं " !!

उसने बदहवास होती शिफ़ा को पानी की बॉटल पकड़ाई थी।
"मुझे कुछ नही पीना आप घर चलें बस"!! 

उसका लहजा अब भी रूआंसा था।
"क्या हुआ है कुछ तो बताएं … ??  
शहरयार का पूछना था कि उसके सब्र का पैमाना भर गया और उसने उसके बाज़ू से लग कर धुआंधार रोना शुरू कर दिया।
शहरयार ने भी उस से कुछ नही पूछा बस रोने दिया। थोड़ी देर बाद रो कर जब हल्की हुई तो अपनी इस बेसाख्ता हरकत पर शर्मिंदा हो गई
एम सॉरी कहते वह झेंप कर सीधी हो बैठी।
"इट्स ओके , यह लें पानी"!! 

 उसने उसकी शर्मिंदगी को कम करने के लिये एक बार फिर पानी की ऑफर की।
"थैंक्स"!! 

कहते हुए उसने पानी की बॉटल पकड़ ली।
"चलें अब , घर पर सब परेशान हो रहे होंगे"!!

पानी पी कर वह हवासों में आई तो सब से पहले घर वालों का ख्याल आया था।
"घर में किसी को कुछ नही मालूम है , सब तैयारियों में लगे हुए थे। वह तो अम्मी का फोन मेरे पास था , तो मुझे आप का मालूम हो गया। और मैंने किसी को कुछ नही बताया है , बस अदील भाई से कीज़ ले कर खुद ही इधर आ गया। वैसे मेरा ख्याल है अभी आपको भी किसी को कुछ नही बताना चाहिये , सब परेशान हो जाएंगे फंकशन भी सही से अटैंडड कर नही पाएंगे" !!

उसने कहते हुए गाड़ी स्टार्ट कर दी। 
ठीक हैं …….

शिफ़ा ने हाथ में पकड़ी बॉटल झुक कर पीछे सीट पर रखते हां में सर हिला दिया उसके बाद उनके बीच कोई बात नही हुई और घर तक का रास्ता बिलकुल खामोशी से गुज़रा था।

☆ ☆ ☆
"कहां थीं तुम कब से कॉल्स किए जा रही हूं रेंज से बाहर जा रहा है फोन भी"!!

घर पहुंचते ही अम्मी ने फिक्रमंदी से पूछा।
"मुमानीजान यह मेरे साथ थीं"!!

वह घबरा कर सच कह देती इस्से पहले ही शहरयार बोल उठा।
"तुम्हारे साथ कैसे ?? ? 

उन्होंने कुछ ना समझने वाले अंदाज़ में पूछा।
" अस्ल में यह कैब करके आ रही थीं वह रास्ते में खराब हो गई। इन्होंने फिर अम्मी वाले फोन पर कॉल किया , और इत्तेफाक़ से वह मेरे ही पास था तो मैं खुद ही चला गया इनको लेने" !!

शहरयार ने आधा सच आधा झूट मिला कर बात बना कर अम्मी को मुतमईन कर दिया तो उसकी भी जान में जान आई थी। 
अच्छा शिफ़ा तुम जा कर देखो ज़रा साथ ले जाने वाला सामान रखा गया है क्या गाड़ी में मैंने अनस और रज़ा को कहा था रखने के लिए" !!

वह अब शिफ़ा से मुखातिब थीं।
"जी अच्छा" !! 

कह कर वह अपने कमरे की तरफ बढ़ गई।
गनीमत थी कि मेकअप वॉटर प्रूफ था इसलिये ज़्यादा फर्क़ नही पड़ा। 

उसने शीशे में देखते हुए बालों पर बस हल्का हल्का ब्रश किया और बाहर आ गई रज़ा उसे सामने बरामदे में ही मिल गया था।
" रज़ा भाई वह अम्मी पूछ रही हैं सामान रखवा दिया है क्या आपने गाड़ी में ??? 
वह दोपट्टा सम्हालती उस्से पूछने लगी।
" हां रखवा दिया है मैंने, बाक़ी जो रह गया था वह अनस रखवा रहा था। तुम उस से मालूम कर लो" !!
रज़ा शूज़ के लेस बाधंता हुआ बोला।
"आपी , ये नॉट बना दें मेरी" !!

हसन टाई लिये उसके पास आया था।
"अरे माशाअल्लाह , मेरा भाई तो टॉम क्रूज़ लग रहा है आज"!!

वह उसके गले में टाई डाल कर नॉट बनाते हुए शरारत से बोली।
"और आप रपुंज़ल लग रही हैं आज"!!

हसन ने उसका मज़ाक समझ कर दू बा दू जवाब दिया था।
"अरे मैं मज़ाक नही कर रही"!!
" जी मैं भी मज़ाक़ नही कर रहा आपी , आप वाक़ई बहुत प्यारी लग रही हैं यह ड्रैस बहुत सूट कर रहा है आपको" !!

उसके लहजे में बहन के लिये मुहब्बत थी।
शहरयार जो रज़ा के रेडी होने के इंतेज़ार में बैठा उन लोगो की नोंक झोंक एंज्वाय कर रहा था उस ने हसन के कहने पर ग़ौर से शिफ़ा को देखा।
"ब्लैक गाउन के साथ ओपन प्रिंसेस हेयर स्टाइल बनाकर उसे फ्लावर क्राउन से सैट किया गया था। जिसमे से दो बारीक लटें उसके चेहरे पर झूल रही थीं। साथ में ब्लैक ही कलर के स्टोन वाले डिज़ाइनर चोकर नैक्लैस और रिंग के साथ ब्लैक ही कलर के ऐंटीक कलीरों ने उसकी खूबसूरती को मज़ीद चार चाँद लगा दिए। साथ में पहनी रेशम के वर्क वाली हमरंग जूती ऐसी लग रही थी जैसे उसी के लिए बनी हो।
" हां भाई शेरी चलें ???? 

 रज़ा की आवाज़ उसे होश की दुनिया में लाई थी।
" जी....

वह झेंप कर पलटा और बाहर निकल गया तो रज़ा भी पी़छे हो लिया। 
☆ ☆ ☆
सब हॉल पहुंच चुके थे।
अनूशे ( दुल्हन) ने बेबी पिंक कलर का लहंगा जिस पर पर्ल वर्क का बहुत नाज़ुक मगर दिलकश काम बना हुआ था पहन रखा था। 
स्टेज पर बैठी वह एक नाज़ुक बार्बी डॉल लग रही थी।
दादु ने मंगनी की अंगूठी पहना कर रस्म अदा की तो हॉल तालियों से गूंज उठा फिर बारी बारी बेगम असद और बेगम आसिम ने दुल्हन को मिठाई खिला कर पैसे दिये।
उसके बाद यंग जेनरेशन ने भी अनूशे के साथ बहुत सारी सेल्फिया ली। 
शिफ़ा भी दादु को स्टेज से उतारने के बाद अम्मी और बड़ी अम्मी के पास बैठा कर वहां से निकलते हुए अब अनूशे के पास जा रही थी जब उसे खुद पर किसी की नज़रों की तपिश महसूस हुई। 
थोड़ी ही दूर नज़र दौड़ाई कि शहरयार की नज़रों को खुद पर फोकस देख कर उसे 440 वॉलट का करंट लगा था।
वह नज़र अंदाज़ करती स्टेज की तरफ बढ़ी ही थी कि रास्ते में अनस ने रोक लिया।
"आज तो कोई क़यामत ढा रहा है" !!

वह शरारत से बोला।
"दफ़ हो जाओ तुम यहां से , जब मुझे ज़रूरत हो तब तो मयस्सर ना हुआ करो। बाक़ी हर वक़्त तुम्हे मेरे सर पर मुसल्लत रहना होता है"!! 

वह बुरी तरह चिढ़ कर बोली।
" यार सॉरी , मेरा फोन साइलेंट था जब तुमने कॉल की और मैं काम में बिज़ी था। इसलिये नही देख सका फोन प्लीज़ मुआफ कर दो" !!

अनस का अंदाज़ इल्तिजाइया था।
"बिल्कुल सही , बंदा कितनी ही परेशानी में हो लेकिन तुम्हें फोन रिसीव नही करना है। वह तो अल्लाह का शुक्र हुआ , कि शहरयार सही वक़्त पर पहुंच गए नही तो पता नही क्या होता"!!
उसने सच्चाई बताई लेकिन अनस को उसके मुंह से किसी और की तारीफ हज़म नही हुई थी।
"अब खम्बे की तरह क्यों अढ़ गये हो रास्ते में"!! 

वह उसे घूरती हुई साइड से हो कर जाने लगी।
"अच्छा एक मिन्ट ना आज मैचिंग हो रहे हैं हम लोग , ऐक सैल्फी तो बनती है"!!

वह जेब से मोबाइल निकालते हुए बोला।
" तुम्हें किसने कहा था मेरे साथ मैचिंग करने के लिये" !!

उसने अनस को सर से पांव तक देख कर एक बार फिर घूरा था।
उसने भी ब्लैक ही कलर का कुर्ता शलवार पहना हुआ था। हल्की हल्की बढ़ी शेव और फोल्ड आस्तीनों मे़ वह वाक़ई डैशिंग लग रहा था। 
"बस भी करो , अब नज़र लगाओगी क्या, पता है मुझे मैं बहुत ज़बरदस्त लग रहा हूं" !!

उसने उसके यूं घूरने पर कहा तो शिफ़ा बुरी तरह झेंप गई।
" काला कुत्ता लटका लो गले में , फिर नही होगी नज़र तुम्हें" !!

वह कह कर जाने लगी।
" अच्छा रूक तो जाओ सेल्फी तो लेने दो एक" !!

अनस ने हाथ पकड़कर रोक लिया।
"मुंह तोड़ दुंगी तुम्हारा आइंदा यह छिछोरी हरकत की होगी तो"!!
वह इंतेहाई गुस्से से बोली लेकिन वह अनस ही क्या जिस पर उसके गुस्से का असर हो जाए।
" आज तो दिल चाह रहा है सारी जिंदगी के लिये मांग लूं चचा जान से यह हाथ" !!

उसका हाथ अभी तक अनस के हाथ में ही था। 
" अनस और बकवास की होगी तो मैं सर फाड़ दूंगी तुम्हारा" !!
हाज़िर है जनाब !!

अनस उसके सामने सर झुकाते हुए बोला।
" ऐसे नही मानोगे तुम रूको एक मिन्ट" !! 

शिफ़ा ने कहकर दूसरे हाथ से उसके बहुत तेज़ च्यूंटी भरी थी।
"आााााा ……… 

चीख के साथ अनस ने फौरन उसका हाथ छोड़ दिया।
इसलिये ही कहती हूं रसानियत में मान जाया करो।

उसने अपनी कलाई की तरफ देखते हुए कहा जहां अनस की उंगलियों के निशान हो गये थे।
" जंगली बिल्ली हो तुम बिल्कुल ,कोई एक भी तो इंसानो वाली हरकत नही है तुम में" !!! 

 वह अपना हाथ सहलाते हुए बोला।
" पंगे मत लिया करो मुझसे इसीलिए कहती हूं मैं" !!

 वह फख्रिया अंदाज़ मे कहती चली गई तो वह भी मुस्कुरा दिया।

☆ ☆ ☆