Muhabbat Ek Sabaq - 10 in Hindi Love Stories by Afariya Faruqui books and stories PDF | Muhabbat Ek Sabaq - 10

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Muhabbat Ek Sabaq - 10

तैयार हो कर रज़ा भाई को कॉल लगाने के बाद फोन कान से लगाते हुए उसने सामने लगे आईने में अपना जायज़ा लिया

सही कहती हैं अम्मी मशरिक़ी लुक की बात ही कुछ और होती है ,अनस की च्वाइस वाक़ई ज़बरदस्त थी और ड्रैस उसे सूट भी बहुत कर रहा था ….

 वह आईना देखते हुए मुस्कुराने लगी

"ओफ्फोह !!! क्या मुसीबत है कोई भी फोन रिसीव नही कर रहा है…. .. .

वह पार्लर में तैयार होने आई थी और वापसी में रज़ा ने उसे पिक करना था लेकिन अब वह फोन ही नही रिसीव कर रहा था , उसने बारी बारी हसन, आज़मीन, अनस सबको कॉल लगा दिए लेकिन किसी ने भी फोन रिसीव नही किया 

"अब क्या करूं ??? छ: बज रहे हैं सात बजे निकलना है सबने, इंतेज़ार का तो वक़्त नही है…… 

 वह परेशानी से सोचने लगी। 

"कैब कर लेती हूं यही लास्ट ऑपशन है , अब इतना तैयार हो कर बाहर जाकर ऑटो करने से तो रही"!! 

 सोचते हुए उसने कैब बुक कर दी। 

दस मिन्ट के इंतेज़ार के बाद कैब आ गई थी वह एड्रैस समझा कर बैठ गई 

"यह कौनसा रास्ता है भाई ???

 कुछ देर बाद उसने रास्ते पर ध्यान दिया तो बिलकुल अजनबी रास्ते पर कार को दौड़ते देख कर उसकी खौफ से जान ही निकल गई। 

"बीबी आपने तो मुझे यही रास्ता बताया था ……

 ड्राइव करने वाला लड़का शायद नया था या झूट बोल रहा था वह अंदाज़ा नही लगा सकी। 

"आप मुझे यहीं उतार दें मैं खुद चली जाउंगी"!! 

कह कर उसने कार रूकवा दी वह बुरी तरह डर गई थी लेकिन अपना डर उस अजनबी पर हावी नही होने देना चाहती थी। 

"मगर बीबी आप जो रास्ता बता रही हैं वह तो यहां से काफी दूर है आप जाएंगी कैसे पैदल ???  

पता नही किस इरादे से कह रहा है खैर जो भी हो मुझे नही जाना इसके साथ। 

 वह पक्का इरादा करके कार से निकल कर खड़ी हो गई और उसको पैसे दे कर जाने के लिए कह दिया। 

"मैं एक बार फिर कह रहा हूं बीबी, वक़्त देखें....यहा खड़े रहना मुनासिब नही है आप चलें मैं छोड़ देता हूं आपको ……

 उस ड्राइवर ने ऐक बार फिर कहा। 

"तुम्हें बात समझ नही आती क्या , मैंने कहा ना कि मैं खुद चली जाउंगी…..

इस बार वह इंतेहाई गुस्से से बोली। 

"लो जी भलाई का तो ज़माना ही नही है। मैं तो ख्याल कर के कह रहा हूं , और मोहतरमा के मिज़ाज ही नही मिल रहे.....ठीक है जी , मुझे क्या चला जाता हूं मैं"!! 

वह बड़बड़ाता पैसे जेब में रखता हुआ चला गया। 

" या अल्लाह अब क्या करूं यहां तो वाक़ई कोई सवारी नज़र नही आ रही दूर से दूर तक" !! 

 उसने डर कर घड़ी पर नज़र डाली जहां पौने सात बज रहे थे। 

उसने कॉल करने की कोशिश की तो नेटवर्क गायब। 

 वह रूआंसी हो गई । 

"प्लीज़ अल्लाह पाक मदद कर दें प्लीज़" !! 

उसने रोते हुए दुआ की। 

एक बार और कोशिश करके देखती हूं शायद कॉल लग जाए। 

 उसने खुद को ढारस बंधाते हुए एक बार फिर कॉल की इस बार बैल जाती रही लेकिन किसी ने भी फोन रिसीव नही किया था। 

अंधेरे के साथ साथ उसकी टेंशन में भी इज़ाफा होता जा रहा था। 

"फुप्पो का नम्बर मिला कर देखती हूं शायद वह उठा लें फोन "!! 

उसने दुआ करते हुए कॉल मिलाई। 

बैल जाती रही कोई फोन रिसीव नही कर रहा था उसके रोने में मज़ीद इज़ाफा हो गया फोन तक़रीबन कटने ही वाला था कि किसी ने फोन रिसीव कर लिया। 

उसको थोड़ी तसल्ली हुई थी। 

"हैलो मैं शिफ़ा बात कर रही हूं प्लीज़ मेरी फुप्पो से बात करा दें"!! 

 उसने तक़रीबन रोते हुए कहा था। 

 हैलो , आप रो क्यों रही हैं ???? 

फोन किसी लड़के ने उठाया था लेकिन आवाज़ उसे जानी पहचानी नही लग रही थी। 

" आप मेरी फुप्पो...मेरा मतलब है आमना बेगम , या किसी घर वाले से बात करा दें मैं बहुत परेशानी में हूं" !! 

उसने ज़िंदगी में शायद पहली बार किसी से इतने पोलाइटली बात की होगी। 

"देखें इस वक़्त यहां कोई नही है , आप मुझे बताएं क्या बात है मैं शहरयार बात कर रहा हूं … .

 उसने अपना इंटरोडक्शन दिया था। 

"देखें मुझे नही पता मैं इस वक़्त कहां हूं , और यहां नेटवर्क भी नही आ रहे हैं। अब भी फोन मुश्किल से कनेक्ट हुआ है , आप प्लीज़ मुझे लेने किसी को भेज दें …….

उसने रोते रोते सारी सूरते हाल बताई। 

"आप टेंशन ना लें लोकेशन पिन करें मुझे अपनी क्विक , कभी नेटवर्क फिर से चले जाएं मैं अभी आ रहा हूं वहां"!! 

उसने उसे तसल्ली देते हुए कहा। 

"ठीक है मैं कर देती हूं पिन , लेकिन प्लीज़ आप जल्दी आ जाएं आउट ऐरिया है मुझे डर लग रहा है बहुत ….

उसका रोना लगातार जारी था। 

ग़नीमत थी कि नेटवर्क गए नही थे उसने जल्दी जल्दी शहरयार को लोकेशन पिन कर दी। 


"तौबा तौबा !!! क्या ज़माना आ गया है , देखो तो सही जवान जहान लड़कियां भला यूं तैयार हो कर जाती हैं सड़कों पर ना कोई पर्दा ना कुछ"!! 

दो औरतों ने पास से गुज़रते हुए कहा। 

"क्यों भई इंसान पहली बार देखे हैं क्या आप लोगों ने ….. आप लोग खुद क्या बंदरो के खानदान से हैं" ??? 

उसने लिहाज़ मुरव्वत ताक पर रख कर जवाब दिया तो दोनो औरतें खिसिया गईं। 

अस्तग़फिरूल्लाह … .. . ज़बान देखो कैसी कैंची है लड़कियों की तो इतनी होनी भी नही चाहिये आखिर को अगले घर भी जाना है। 

"तो अगले घर आप चलियेगा मेरे साथ जवाब देने के लिए"!!

हमेशा की तरह उसके मुंह से औल फौल निकल रहा था। 

"हद है उलटा चोर कोतवाल को डांटे चलो सलमा चलें हम तो  ……. 

वह औरतें मुंह बनाती वहां से चली गईं। 

उफ्फ यह हिटलर कहां रह गया आया क्यों नही अब तक .??? 

उसने आने वाले रास्ते पर दूर तक नज़रें दौड़ाईं जहां दूर दूर तक कोई आता नही दिख रहा था। 

क्या बात है मैडम आया नही वह , जिसके इंतेज़ार में इतना बन ठन कर खड़ी हैं आप?????

 पास से गुज़रते दो लोफर से लड़कों मे से एक ने कमेंट पास किया था। 

अरे मुझे तो लगता है आएगा भी नही वह अब तो वैसे भी दिन खत्म होने वाला है। 

 दूसरे लड़के ने पहले वाले की तरफ देख कर कहा फिर दोनो आपस में हाथ पर हाथ मार कर हंसने लगे। 

शिफ़ा को खौफ़ के साथ साथ शदीद गुस्सा भी आया था। लेकिन उसने चुप ही रहना बेहतर समझा। क्योंकि वैसे भी वह अकेली थी कोई स्पोर्ट भी नही था साथ में इसलिए जवाब दे कर मज़ीद कोई परेशानी नही खड़ी कर सकती थी अपने लिये इसलिये वह मुंह दूसरी तरफ करके खड़ी हो गई। 

"ओह्हो भई शौकत.....मैडम शायद नाराज़ हो गई हैं हम से ……….

दूसरा वाला लड़का बोला। 

"मुझसे बकवास करने से बेहतर कि आप जा कर अपनी बहन को देखें कहीं उसे तो कोई नही पूछ रहा कि वह नाराज़ तो नही है"!! 

उसकी बर्दाशत से बाहर हो गया तो जवाब देना पड़ा। 

"हमारी बहन की फिक्र ना करें ,वह यूं मग़रिब के वक़्त बन सवंर कर सड़कों पर नही निकलती है"!! 

पहले वाले लड़के ने उसे तक़रीबन घूरते हुए कहा तो बेइज़्ज़ती के ऐहसास से उसकी आँखो में फिर से आँसू आ गए। 

क़रीब ही था कि वह ज़ोर ज़ोर से  रोना शुरू कर देती कि फोन की बैल बजी थी। 

हैलो, जी शहरयार कहाँ हैं आप ???? 

उसने फोन रिसीव करते ही कहा। 

"जी मैं पहुंच गया हूं ,यह तो काफी आउट ऐरिया है कहां हैं आप"!! 

उसकी आवाज़ आई। 

"जी मैं..... 

 उसने चारों तरफ देखा लेकिन आस पास कुछ भी ऐसा नही था जो वह लैंडमार्क बना कर बता देती। 

"जी बस एक बरगद का पेड़ खड़ा है यहां तो और कुछ भी नही है"!! 


 उसे ऐक तो उन लड़कों से डर लग रहा था उपर से बढ़ता अंधेरा उसे मज़ीद खौफ में मुब्तिला कर रहा था इसलिये कुछ भी समझ नही आ रहा था। 

"आप डरें मत मैं बस पहुंच ही रहा हूं"!! 

 शहरयार को उसके लहजे में छुपा खौफ महसूस हो गया था। 

"जी आ जाएं"!! 

उसने रूआंसे लहजे में कह कर फोन रख दिया। 

करीब ही थी कि वह लड़के उस पर मज़ीद कोई कमेंट करते उसने सामने से आती अदील भाई की कार को पहचान लिया। 

हैलो… ..  हैलो....


  वह हाथ हिला कर कार को अपनी तरफ मुतवज्जह करती तक़रीबन बिजली की तेज़ी से भागती हुई उस तरफ बढ़ी थी। 

☆ ☆ ☆