Ghost hunters - 21 in Hindi Horror Stories by Rishav raj books and stories PDF | Ghost hunters - 21

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Ghost hunters - 21



अचानक शांति टूट गई पेड़ के भीतर से एक भयंकर धमाका हुआ और जमीन ऐसे हिली जैसे नीचे कुछ ज़िंदा हो मंडल की रेखाएँ एक साथ फट पड़ीं और इस बार दीपक एक-एक करके बुझते चले गए हवा ठंडी नहीं रही अब उसमें हिंसा थी आरव ने तुरंत चिल्लाया 

आरव- सब पीछे हटो अभी!

लेकिन देर हो चुकी थी पेड़ का तना बीच से फट गया और काली धुंध के साथ वही आकृति इस बार पूरी ताकत से बाहर फेंकी गई।इस बार वो गिरा नही सीधे अपने पैरों पर खड़ा हुआ

उसकी गर्दन एक झटके से तिरछी हुई और अगली ही सेकंड वो बिजली की तरह आगे बढ़ा सीधा रोहित की तरफ
निशा चीख पड़ी।

निशा- रोहित!

लेकिन उससे पहले कि कोई कुछ कर पाता, आकृति ने लंबी छलांग लगाई आरव ने बिना सोचे उसके सामने आकर रोहित को धक्का देकर गिरा दिया

धड़ाम!

आकृति का हाथ आरव के कंधे से टकराया और वो दूर जा गिरा।उसके कंधे से खून निकल आया कबीर गुस्से में चिल्लाया

कबीर- अब बहुत हो गया!

उसने अपनी थैली से लोहे की छोटी छड़ निकाली जिस पर मंत्र खुदे थे और सीधे उस आकृति की तरफ दौड़ा।आकृति ने मुड़कर उसे देखा और जैसे ही कबीर पास पहुँचा उसने एक झटके में उसका हाथ पकड़ लिया कबीर की साँस अटक गई आकृति की पकड़ इंसान जैसी नहीं थी वो जैसे हड्डियाँ तोड़ दे मीरा ने तुरंत गंगाजल उसकी तरफ फेंका

मीरा- छोड़ उसे!

जैसे ही बूंदें उस पर पड़ीं, आकृति ने जोर से चीख मारी और कबीर को फेंक दिया कबीर जमीन पर लुढ़कता हुआ दूर जा गिरा तांत्रिक ने पहली बार अपनी जगह छोड़ी।

तांत्रिक- अब ये सीमा के बाहर आ चुका है

उसकी आवाज में अब गंभीरता नहीं खतरा था उसने अपनी कमर से एक लंबा काला धागा निकाला, जिस पर छोटे-छोटे ताबीज बंधे थे।वह धीरे-धीरे आगे बढ़ा

दूसरी तरफ अंधेरे में खड़ा अजनबी तांत्रिक फिर से दिखाई दिया इस बार वो भागा नहीं


अजनबी तांत्रिक- यही चाहता था मैंअब देखता हूँ तुम्हारी असली ताकत

आकृति अब पागलों की तरह इधर-उधर नहीं भाग रही थी।वो समझ रही थी शिकार चुन रही थी उसकी नजर इस बार मीरा पर टिक गई मीरा पीछे हटने लगी

मीरा- ये मेरी तरफ आ रहा है

आरव ने दर्द सहते हुए खुद को उठाया

आरव- मीरा भागो मत साइड हो जाओ!

लेकिन वो चीज़ अचानक गायब हो गई एक पल के लिए कुछ नहीं था फिर

धड़ाम!

वो मीरा के ठीक पीछे प्रकट हुआ उसका हाथ उसके कंधे तक पहुँच चुका था मीरा जड़ हो गई उसी क्षण तांत्रिक ने काला धागा पूरी ताकत से उसकी तरफ फेंका

तांत्रिक- बंध!

धागा हवा में फैलकर उस आकृति के शरीर पर लिपट गया जैसे किसी ने उसे जंजीरों में बाँध दिया हो।आकृति वहीं रुक गई बस कुछ इंच दूर मीरा से मीरा वहीं गिर पड़ी, उसकी सांसें तेज हो गईं।

आकृति जोर-जोर से छटपटाने लगी।हर झटके के साथ धागा कसता जा रहा था लेकिन वो टूट भी सकता था


अजनबी तांत्रिक ने गुस्से में हाथ उठाया अजनबी तांत्रिक- ये ज्यादा देर नहीं टिकेगा तांत्रिक ने जवाब नहीं दिया उसने अपने दोनों हाथ जमीन पर रखे और जोर से मंत्र बोला

तांत्रिक- ॐ क्षौं कालभैरवाय बंधन फट्!

धागा चमकने लगा आकृति की चीख अब और भयानक हो गई आरव ने मौका देखा

आरव- कबीर अभी!

कबीर ने दर्द के बावजूद खुद को उठाया और लोहे की छड़ लेकर दौड़ा।उसने पूरी ताकत से छड़ उस आकृति के सीने में घुसा दी

एक भयानक चीख गूंजी काली धुंध चारों तरफ फट गई आकृति बुरी तरह काँपने लगी अजनबी तांत्रिक की आँखें पहली बार डर से फैल गईं।

अजनबी तांत्रिक- नहीं!

लेकिन देर हो चुकी थी तांत्रिक ने आखिरी मंत्र बोला।

तांत्रिक- मुक्त!

एक तेज़ झटके के साथ आकृति का शरीर फटकर धुएं में बदल गया चारों तरफ सन्नाटा छा गया धागा जमीन पर गिर गया कबीर वहीं घुटनों पर बैठ गया मीरा काँपते हुए पीछे सरक गई आरव ने गहरी सांस ली लेकिन उसकी नजर अभी भी अंधेरे पर थी

क्योंकि अजनबी तांत्रिक अब भी खड़ा था और इस बार वो मुस्कुरा रहा था

अजनबी तांत्रिक- अच्छा था लेकिन तुमने बस एक मोहरा तोड़ा है हवा फिर से भारी हो गई आरव धीरे से बोला।

आरव- मतलब अभी खत्म नहीं हुआ।

अजनबी तांत्रिक ने एक कदम आगे बढ़ाया

अजनबी तांत्रिक- अब असली खेल शुरू होगा।

इस बार लड़ाई सीधे उससे होने वाली थी.......