Pyar ki Paribhasha - 10 in Hindi Love Stories by Rishav raj books and stories PDF | प्यार की परीभाषा - 10

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प्यार की परीभाषा - 10

शादी का दिन सुबह का समय था मंदिर के आँगन में हल्की धूप उतर रही थी हवा में अगरबत्ती और फूलों की मिली-जुली खुशबू थी कोई शोर-शराबा नहीं… न ढोल, न बैंड… बस मंत्रों की धीमी गूंज और कुछ गिने-चुने लोग।

सब कुछ वैसा ही था जैसा तुषार चाहता था साधारण, शांत लेकिन भीतर की हलचल किसी को नहीं दिख रही थी मंदिर के एक कोने में तुषार खड़ा था सफेद धोती-कुर्ता पहने, माथे पर हल्का सा तिलक लेकिन चेहरे पर कोई खुशी नहीं, सिर्फ एक दबा हुआ तनाव

उसके हाथ आपस में बंधे हुए थे, उंगलियाँ बार-बार एक-दूसरे को कस रही थीं महेश पास खड़े पंडित से कुछ बात कर रहे थे

पंडित - मुहूर्त में ज्यादा समय नहीं है, दूल्हा तैयार रहे,

तुषार ने बस हल्का सा सिर हिला दिया दूसरी तरफ मंदिर की सीढ़ियों के पास रवीना खड़ी थी हरे रंग की साड़ी में वही साड़ी जो शॉपिंग वाले दिन चुनी गई थी उसके बाल सादे तरीके से बंधे हुए थे, हल्का सा गहना और चेहरे पर घबराहट साफ दिख रही थी वो देखता ही रहा 

सरोज उसके पास खड़ी थी, बार-बार उसकी साड़ी ठीक कर रही थी

सरोज - सीधा खड़ा रह… झुक मत… लोग देख रहे हैं,

रवीना ने सिर हिला दिया नेहा थोड़ी दूर खड़ी सब देख रही थी नेहा खुश दिख रही थी 


पंडित - लड़की को बुलाइए,

सबकी नजरें एक साथ रवीना की तरफ मुड़ गईं उसके कदम अपने आप आगे बढ़े हर कदम भारी था जैसे वो सिर्फ आगे नहीं बढ़ रही, बल्कि अपनी पूरी जिंदगी बदलने जा रही हो

वो मंडप तक पहुँची और चुपचाप बैठ गई कुछ ही पल बाद तुषार भी उसके सामने आकर बैठ गया पहली बार इतने करीब दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा बस एक सेकंड के लिए फिर दोनों ने नजरें झुका लीं मंत्र शुरू हो गए

आवाज़ धीमी थी लेकिन हर शब्द जैसे सीधा दिल पर पड़ रहा था गाँठ बांधी गई तुषार के हाथ हल्के से कांपे लेकिन उसने खुद को संभाला।

रवीना ने कुछ महसूस किया  फेरे शुरू हुए पहला फेरा तुषार आगे था, रवीना पीछे उनके कदम एक जैसे नहीं थे कभी तुषार तेज़, कभी रवीना धीमी

लेकिन धीरे-धीरे दोनों का कदम एक लय में आने लगे जैसे अनजाने में ही वो एक साथ चलना सीख रहे हों हर फेरे के साथ उनके बीच की दूरी कम नहीं हुई थी लेकिन एक रिश्ता बनता जा रहा था

आखिरी रस्म मंगलसूत्र पंडित ने इशारा किया तुषार ने वो मंगलसूत्र उठाई वही जो उसने खुद चुनी थी उसके हाथ फिर से हल्के कांपे रवीना ने अपनी आँखें बंद कर लीं।

एक पल के लिए और उसने वो मंगलसूत्र उसके गले में पहना दिया सब कुछ खत्म हो गया या शायद सब कुछ शुरू हुआ।

पंडित - अब से आप दोनों पति-पत्नी हैं,

चारों तरफ हल्की सी हलचल हुई कुछ लोगों ने मुस्कुराकर देखा कुछ ने बस औपचारिकता निभाई पायल दूर खड़ी थी उसके चेहरे पर साफ लिखा था ये सब उसे मंजूर नहीं है

सुषेला ने एक नजर रवीना पर डाली फिर नजरें फेर लीं महेश ने गहरी सांस ली जैसे उन्होंने जो ठान लिया था, वो पूरा हो गया और तुषार वो वहीं खड़ा था उसके पास अब रवीना थी।

इतनी करीब कि अब वो उससे बच नहीं सकता था रवीना ने एक पल के लिए उसकी तरफ देखा उसकी आँखों में ना शिकायत थी, ना उम्मीद बस एक शांत सा सवाल अब…?

तुषार ने नजरें झुका लीं शायद उसके पास अभी भी कोई जवाब नहीं था...