Paretni's Wedding - 3 in Hindi Horror Stories by Sapna Badh books and stories PDF | परेतनी की शादी - 3

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परेतनी की शादी - 3

वे वस्त्र किसी राज महाराज को भी मात करने वाले वस्त्र थे। रेशमी रंग असली सोने की कढ़ाई वाले 

चमचमाते हुए वस्त्र ! जैसे अभी के अभी सीलकर आए हो। मैंने पहना और बिल्कुल मेरी साईज के थे वे।

ऐसा लगा। जैसे नाप लेकर सीले ग‌ए हो।

तभी आवाज आई,आओ चले,,,,,,

मैंने मुड़कर देखा तो वही सुन्दर युवती ने राजकुमारी के जैसे परिधान पहने खड़ी थी। मैं मंत्रमुग्ध सा उसकी ओर बढ़ा चला। उसने मेरा हाथ पकड़ा और आगे बढ़ गई।वो मुझे एक बड़े से डाइनिंग टेबल पर ले ग‌ई ।उस टेबल पर ढेर सारे पकवान और खाद्य पदार्थों से भरा पड़ा था।

मैंने पहली बार ऐसे छप्पन भोग देखे थे। जिसमें क‌ई प्रकार की मिठाईयां विभिन्न प्रकार के फल और अलग-अलग खाने की सामग्रियां रखी हुई थी।

इतनी सारी खाने की सामग्रियों को देखकर मेरे मन में लालच आ गया, मैं ये सोच सोचकर खुश हो रहा था कि ये सबकुछ मुझे मिलेगा खाने के लिए मै आगे बढ़ने लगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ कर रोक दिया। मैंने प्रश्नवाचक निगाहों से उसकी ओर देखा,,,,

ये सबकुछ तेरा ही है, लेकिन तुझे मेरी एक शर्त माननी पड़ेगी।

मैं तो भरपेट खाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार था। मैंने कहा ठीक है मुझे तुम्हारी हर शर्त मंज़ूर है, बताओं तुम्हारी शर्त क्या है ?

उसने कहा तुम्हें भैरु बाबा को हमारे पास लेकर आना होगा,,,,।

यह मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं थी, क्योंकि भैरू‌बाबा को मैं बहुत अच्छी तरह से जानता था।

लेकिन भैरू बाबा और मेरी उम्र में बहुत फासला था लेकिन फिर हम दोनों एक दूसरे के मित्र जैसे थे।

बचपन से ही मुझे भैरू बाबा से अलग ही लगाव था। पिताजी के मरने के बाद उनके दोस्त होने के नाते भैरू बाबा हमेशा जरूरत पडने पर हमारी मदद भी कर दिया करते थे।वे मुझे घूमने के लिए भी लेकर जाते थे।

लेकिन ! मेरी समझ में यह बात नहीं आई कि उस खूबसूरत राजकुमारियां जैसी औरत को भला भैरू बाबा से क्या काम हो सकता है ?

इसलिए मैंने भी उससे पूछ लिया, तुम भैरू बाबा से क्यों मिलना चाहती हो , और अगर भैरू बाबा को बुलाना चाहती हो तो तुम भी तो जा कर बुला सकती हो ?भैरू बाबा तो किसी के बुलाने पर आ जाते हैं 

उसने कहा - अगर मैं उसे बुला सकती तो  तुम से ना कहती।अब तुम देखलो।

अगर इस स्वादिष्ट भोजन का मजा लेना चाहते हो तो भैरू बाबा को मेरे पास लाना ही पड़ेगा।

एक चरवाहे के बराबर बुद्धी थी मेरी। फिर मैंने सोचा कि भैरू बाबा को बुलाकर लाना तो कोई बड़ी बात नहीं और मैं जब बुलाऊंगा तो भैरू बाबा तो आ ही जाएंगे।हो सकता है इसकी कोई समस्या हो,उसका हल निकालना चहती हो, और मैंने हामी भर दी।

मेरे हामी भरते ही वो मुझे लेकर उस टेबल पर ले आई।

तब तक दोनों अधेड़ उम्र के व्यक्ति भी वहां पर सेवा के लिए उपस्थित हो चुके थे। मेरे लिए यह बड़ी ही अजीब सी बात थी कि वे दोनों एक दम से कभी भी कहीं भीआचनक से ग़ायब हो जाते थे।

और अचानक से प्रकट हो जाते थे। उस वक्त सामने रखा भोजन मेरे लिए बहुत मायने रखता था।