My biggest mistake in Hindi Women Focused by Shilpa exam tips books and stories PDF | मेरी सबसे बड़ी गलती

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मेरी सबसे बड़ी गलती

मेरी सबसे बड़ी गलती ये थी कि मैंने अपने सपनों से समझौता कर लिया था।

बात दस साल पुरानी है। मैं बारहवीं में थी। पढ़ने में तेज थी, सपने बड़े थे। टीचर बनना था, अपने नाम की पहचान बनानी थी। पापा कहते थे - "बेटा, तू पढ़ ले, मैं सब कर दूंगा।" उनकी आंखों में मेरे लिए बहुत उम्मीद थी।

फिर रिश्ता आ गया। लड़का अच्छा था, घर अच्छा था। रिश्तेदार कहने लगे - "लड़की की उम्र निकल रही है, हां कर दो।"मेरी सबसे बड़ी गलती ये थी कि मैंने अपने सपनों से समझौता कर लिया था। बात दस साल पुरानी है। मैं बारहवीं में थी। पढ़ने में तेज थी, सपने बड़े थे। टीचर बनना था, अपने नाम की पहचान बनानी थी। पापा कहते थे - "बेटा, तू पढ़ ले, मैं सब कर दूंगा।" उनकी आंखों में मेरे लिए बहुत उम्मीद थी।

फिर रिश्ता आ गया। लड़का अच्छा था, घर अच्छा था। रिश्तेदार कहने लगे - "लड़की की उम्र निकल रही है, हां कर दो।" मम्मी भी बोल रही थी - "शादी के बाद भी पढ़ लेना। कौन रोकता है।" मैं डर गई। सोचा अगर मना कर दिया तो कोई और रिश्ता नहीं आएगा। लोग क्या कहेंगे? पापा पर बोझ ना बन जाऊं? इसी डर में मैंने हां कर दी। अपने कॉलेज के एडमिशन का फॉर्म फाड़ कर रख दिया। उस दिन लगा था मैंने समझदारी दिखाई है। वो मेरी सबसे बड़ी गलती थी दी।

शादी के दो साल तक सब ठीक था। फिर धीरे धीरे मेरी दुनिया छोटी होने लगी। सास कहने लगी - "बहुएं पढ़ कर क्या करती हैं? घर संभालो।" पति भी कहते - "जरूरत क्या है जॉब की? मैं कमा रहा हूं ना। तुम घर देखो।" मैं चुप हो गई। अपनी किताबें बंद कर दी। अपने सपने अलमारी में रख दिए। रोज सोचती थी कल से पढ़ूंगी,अपनी किताबें बंद कर दी। अपने सपने अलमारी में रख दिए। रोज सोचती थी कल से पढ़ूंगी, पर कल कभी नहीं आया। मन मारकर जीने लगी। अंदर से घुटन होती थी, पर किसी से कह नहीं पाती थी। सबके सामने हंसती थी, अकेले में रोती थी।

एक दिन बेटी हुई। उसकी आंखों में देखा तो अपना बचपन दिख गया। वो बड़ी हो कर मुझसे पूछेगी - "मम्मी आप क्या बनना चाहती थीं?" मैं क्या जवाब देती? कि मम्मी 

`डर गई थी? कि मम्मी ने अपने सपने बेच दिए थे? उसी दिन समझ आया - मैंने सिर्फ अपनी गलती नहीं की, मैं अपनी बेटी को भी ये सिखा रही थी कि लड़कियां सपने नहीं देखतीं। बस शादी करो, बच्चे पालो और बस।

बस। उसी दिन उठा दिया अपना हाथ। पति से लड़ कर, सास की बात टाल कर, मैंने दोबारा एडमिशन लिया। रात को बेटी को सुलाकर पढ़ती थी। बिजली चली जाती तो लालटेन जला कर। लोग हंसते थे - "अब क्या उखाड़ लेगी बुढ़ापे में? चार बच्चे संभालो।" मोहल्ले की औरतें ताने मारती थीं। पर मैंने कान बंद कर लिए। 

पर मैंने हार नहीं मानी। चार साल बाद बी.एड पूरा किया। रिजल्ट आया तो सबसे पहले पापा को फोन किया। वो रो पड़े। बोले "मेरी बेटी शेरनी है। मुझे गर्व है तुझ पर।" उस दिन लगा मेरी सारी मेहनत सफल हो गई।

आज मैं उसी स्कूल में पढ़ाती हूं जहां कभी खुद पढ़ती थी। बच्चों को पढ़ाते समय जब वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हैं, तो लगता है जिंदगी सार्थक हो गई। आज जब मेरी स्टूडेंट मुझसे कहती है - "दी आप मेरी इंस्पिरेशन हो" तो मेरी आंख भर आती है। वो एक लाइन मेरी सारी थकान उतार देती है। गलती मैंने की थी, पर उस गलती से सीख भी मैंने ही ली। गिरकर संभलना सीख लिया।

आज अगर कोई लड़की मुझसे पूछे कि शादी के बाद सपने पूरे होते हैं क्या? तो मैं कहती हूं - होते हैं। बस हिम्मत चाहिए। और वो हिम्मत तुम्हारे अंदर ही है। दुनिया रोकेगी, लोग ताने मारेंगे, पर तुम रुकना मत। संघर्ष करोगी तो जीत पक्की है। अपने सपनों के लिए लड़ना सीखो। क्योंकि जिंदगी एक बार मिलती है और वो भी खुद के लिए जीने के लिए।

मेरी सबसे बड़ी गलती ने मुझे सबसे बड़ी सीख दी - अपने लिए जीना कभी गलत नहीं होता। खुद को खोकर किसी को खुश करना, ये सबसे बड़ी बेवकूफी है। आज मैं जीती हूं, अपने लिए, अपनी बेटी के लिए, और उन लाखों लड़कियों के लिए जो डर रही हैं। जो सोच रही हैं कि अब कुछ नहीं हो सकता। मैं उनसे कहना चाहती हूं कि देर से उठो पर उठो जरूर। क्योंकि हर सुबह एक नया मौका लेकर आती है। बस उसे पकड़ना आना चाहिए। आज मैं गर्व से कह सकती हूं कि मैंने अपनी गलती सुधार ली। और तुम भी सुधार सकती हो। बस हिम्मत मत हारो। अपना वजूद मत खोना। क्योंकि तुम कमजोर नहीं, तुम शेरनी हो