what will people say in Hindi Women Focused by Shilpa exam tips books and stories PDF | लोग क्या कहेंगे

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लोग क्या कहेंगे

कोई कहता: "इसकी शादी नहीं होगी, curse लग गया है।"

मम्मी रोती थी। मैं उनको हंसाती थी: "मम्मी, शादी से पहले IAS बन जाऊंगी तो सबसे बड़ी दहेज लेके आऊंगी - इज़्ज़त।"

मम्मी डांट देती: "पागल हो गई है। लड़कियां IAS नहीं बनती।"

31 का birthday था मेरा। उसी दिन result आया। मैं डरते-डरते net खोल रही थी।

Roll number डाला... Enter दबाया...

और screen पे अपना नाम देखा। Rank 47. IAS.

मम्मी का हाथ से अचार का डब्बा गिर गया।

"मम्मी... हो गया," मैंने बस इतना कहा।

मम्मी ने मुझे गले लगा लियालोग क्या कहेंगे

"मुन्नी, 30 की हो गई। अब तो शादी कर ले। कौन लेगा बूढ़ी को?"

मोहल्ले की आंटी हर सुबह यही ताना मार के जाती थी। मैं मुस्कुराकर चाय का कप पकड़ा देती थी। अंदर से टूट जाती थी, पर दिखाती नहीं थी।

नाम मेरा मीरा था। UPSC का सपना था। पर "लोग क्या कहेंगे" के चक्कर में सपना दबा दिया था।

पापा चले गए थे जब मैं 20 की थी। मम्मी ने कहा: "बेटिया, अब शादी कर ले। पढ़ाई में क्या रखा है। लोग बात करेंगे कि लड़की घर से निकलती है।"

मैंने B.A. के बाद पढ़ाई छोड़ दी। टेलरिंग सीख ली। दिन भर घर का काम, रात को कपड़े सिलना। मम्मी खुश थी। मोहल्ले वाले कहते: "संस्कारी लड़की है।"

पर रात को जब सब सो जाते, मैं चुपके UPSC की बुक खोलती थी। 100 रुपये जोड़-जोड़ के लक्ष्मीकांत की बुक ली थी। 2 साल तक चुप-चाप पढ़ती रही।

लोग कहते: "30 की हो गई, कोई रिश्ता नहीं आता। नखचढ़ी है।"

कोई कहता: "इसकी शादी नहीं होगी, कर्स लग। रोती रही 10 मिनट तकलोग क्या कहेंगे

"मुन्नी, 30 की हो गई। अब तो शादी कर ले। कौन लेगा बूढ़ी को?"

मोहल्ले की आंटी हर सुबह यही ताना मार के जाती थी। मैं मुस्कुराकर चाय का कप पकड़ा देती थी। अंदर से टूट जाती थी, पर दिखाती नहीं थी।

नाम मेरा मीरा था। UPSC का सपना था। पर "लोग क्या कहेंगे" के चक्कर में सपना दबा दिया था।

पापा चले गए थे जब मैं 20 की थी। घर में अकेली मम्मी और मैं। मम्मी ने कहा: "बेटिया, अब शादी कर ले। पढ़ाई में क्या रखा है। लोग बात करेंगे कि लड़की घर से निकलती है। समाज क्या कहेगा?"

मैंलोग क्या कहेंगे

"मुन्नी, 30 की हो गई। अब तो शादी कर ले। कौन लेगा बूढ़ी को?"

मोहल्ले की आंटी हर सुबह यही ताना मार के जाती थी। मैं मुस्कुराकर चाय का कप पकड़ा देती थी। अंदर से टूट जाती थी, पर दिखाती नहीं थी। आंखें नम हो जाती थीं।
सच बताऊं, उस दिन समझ आया कि "लोग क्या कहेंगे" सिर्फ एक डर है। एक झूठा डर। जब तुम कुछ बन जाते हो, तो वही लोग तुम्हारी कहानी सुनाते फिरते हैं। कहते हैं "हमारी
नाम मेरा मीरा था। UPSC का सपना था। पर "लोग क्या कहेंगे" के चक्कर में सपना दबा दिया था। बचपन से पढ़नेआज मैं जब शीशे में देखती हूं, तो वो 20 साल की मीरा दिखती है जो रो रही थी। पर अब वो रोती नहीं। मुस्कुराती है। क्योंकि उसने "लोग क्या कहेंगे" को हरा दिया।

तो तुम भी हार मत मानो। दुनिया बोलेगी, बोलने दो। तुम बस अपना काम करो। एक दिन तुम्हारी कहानी भी किसी के लिए प्रेरणा बनेगी।

याद रखो - लोग बदल जाते हैं, पर जो खुद को बदल लेता है, वही इतिहास बनाता है। IAS मीरा की जय!