Konichiva my Desi Love - 1 in Hindi Short Stories by Kajal Soam books and stories PDF | कोन्निचिवा: माय देसी लव - 1

Featured Books
Categories
Share

कोन्निचिवा: माय देसी लव - 1

एपिसोड 1: गुलाबी शहर की धूप और टोक्यो की यादें
दृश्य 1: जापान (टोक्यो) – निहाल का पेंटहाउस – सुबह का समय
टोक्यो की सुबह हमेशा की तरह मशीनी और तेज़ थी। खिड़की के बाहर चमकती मेट्रो ट्रेनें और ऊँची इमारतें एक अंतहीन दौड़ का हिस्सा लग रही थीं। निहाल चौहान, जो टोक्यो की एक टॉप टेक-कंसल्टेंसी में सीनियर प्रोजेक्ट मैनेजर है, अपने सफेद शर्ट के बटन बंद करते हुए आईने में खुद को देख रहा था। उसका व्यक्तित्व बिल्कुल जापानी वर्क-कल्चर जैसा था—सटीक, शांत और वक्त का पाबंद।
तभी उसकी नज़र अपनी माँ, हेमा चौहान पर पड़ी, जो लिविंग रूम की बड़ी सी कांच की खिड़की के पास खड़ी थीं। उनके हाथ में चाय का प्याला तो था, लेकिन उनकी नज़रें कहीं दूर थीं।
निहाल अपनी कलाई घड़ी बांधते हुए पास आया। "Mom, again? आप फिर से वही सोच रही हैं? मैंने आपसे कहा था कि अगर आपको यहाँ अकेलापन लगता है, तो हम इस वीकेंड 'क्योटो' घूमने चलेंगे। वहाँ आपको शांति मिलेगी।"
हेमा जी ने एक लंबी ठंडी सांस भरी। "निहाल, शांति क्योटो के मंदिरों में नहीं, अपनी जड़ों में होती है। आज तुम्हारे पापा की बरसी है, और मुझे रह-रहकर जयपुर की वो गलियां याद आ रही हैं। बेटा, I have a question. क्या तुम्हारी लाइफ में कोई लड़की है? या तुम किसी को पसंद करते हो? देखो, मैं तुम पर शादी के लिए दबाव नहीं डाल रही, बस पूछ रही हूँ।"
निहाल थोड़ा ठिठका, फिर हल्की मुस्कान के साथ बोला, "Hahaha... Mom! You know my life. ऑफिस, मीटिंग्स और कोडिंग। यहाँ लड़कियों के पास करियर के अलावा किसी चीज़ के लिए वक्त नहीं है। पर माँ, आप अचानक ये सब क्यों पूछ रही हैं?"
हेमा जी ने निहाल का हाथ पकड़ा और उसे सोफे पर बैठाया। "बेटा, तुम्हारे पिता के जाने के बाद और दादी के गुजरने के बाद, मैं इस घर में बहुत घुटन महसूस करती हूँ। मुझे तुम्हारे पिता के पुराने दोस्त, विनोद सिंह जी का फोन आया था। उनकी बेटी, शिवानी... मुझे वो बहुत पसंद है। मैं चाहती हूँ कि वो हमारे घर की रोशनी बने। So, are you free from Monday to Wednesday? हम इंडिया जा रहे हैं।"
निहाल को पता था कि जब माँ इस लहजे में बात करती हैं, तो बहस का कोई फायदा नहीं। उसने एक पल के लिए अपनी फाइलें देखीं और फिर बोला, "Mom! When you’ve already planned everything, why are you even asking me? मैं आपको दुखी नहीं करना चाहता। ठीक है, मैं आपके साथ इंडिया चलूँगा। पर मेरी एक शर्त है, अगर मुझे लड़की पसंद नहीं आई या हमारी सोच नहीं मिली, तो आप मुझ पर ज़ोर नहीं डालेंगी।"
हेमा जी के चेहरे पर एक चमक आ गई। उन्होंने निहाल के गाल थपथपाए। निहाल हंसते हुए उठा, "Okay then, I’m late for office. Bye Mom!" पर जाते-जाते उसके मन में एक ही ख्याल था—'इंडिया और शादी? क्या यह मुमकिन होगा?'
दृश्य 2: भारत (जयपुर) – शिवानी का घर और कॉलेज
जयपुर की दोपहर सुनहरी और गर्म थी। 'जयपुर स्कूल ऑफ आर्ट एंड डिजाइन' के बाहर लड़कियों का हुजूम था, लेकिन शिवानी सबसे अलग दिख रही थी। उसने एक साधारण सा कुर्ती-जींस पहना था, लेकिन उसके गले में लटका 'मेजरिंग टेप' और हाथों में पकड़े स्केच-बुक उसकी पहचान बता रहे थे। शिवानी फैशन डिजाइनिंग की फाइनल ईयर की टॉपर थी। उसके लिए कपड़े सिर्फ तन ढंकने का जरिया नहीं, बल्कि एक कला थे।
उसकी सहेली और छोटी बहन यामी दौड़ती हुई आई। "दीदी! आप अभी तक यहीं हैं? पापा का पांच बार फोन आ चुका है। आज वो जापान वाले मेहमान आने वाले हैं ना? मम्मी कह रही थीं कि घर की साफ-सफाई में हाथ बंटाना है।"
शिवानी ने एक थान (कपड़े का रोल) ठीक करते हुए कहा, "यामी, रुक यार! देख ये 'सांगानेरी प्रिंट' कितना क्लासी है। अगर मैं इसके साथ ऑर्गेंजा सिल्क का फ्यूजन करूँ, तो मेरा फाइनल प्रोजेक्ट इंटरनेशनल लेवल का लगेगा। और रही बात उन मेहमानों की... तो पापा को पता है कि मुझे इन सब 'लड़का देखने' वाले प्रोग्राम्स में कोई दिलचस्पी नहीं है। मुझे अपना करियर बनाना है, अपना बुटीक खोलना है।"
यामी ने उसे चिढ़ाते हुए कहा, "अरे, सुना है निहाल जी जापान में बहुत बड़े अफसर हैं। स्मार्ट भी बहुत हैं। क्या पता, वो तुम्हें पेरिस फैशन वीक ले जाएं!"
शिवानी ने एक फीकी मुस्कान दी। "सपने और हकीकत में फर्क होता है यामी। इंडिया की शादियां अक्सर सपनों की बलि ले लेती हैं। खैर, चल घर चलते हैं वरना मम्मी का गुस्सा सातवें आसमान पर होगा।"
दृश्य 3: रात का समय – जापान (निहाल का घर)
काम से थककर निहाल घर लौटा। घर में सूटकेस पैक रखे थे। हेमा जी डाइनिंग टेबल पर बैठी एक तस्वीर देख रही थीं।
निहाल: "Mom, I'm back। पैकिंग हो गई आपकी?"
हेमा: "हाँ बेटा। सब तैयार है। और देखो, मेरे पास तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है... शिवानी की फोटो। तुम्हारी होने वाली पत्नी!"
निहाल ने जैकेट उतारते हुए कहा, "What picture? आप मुझे फोन पर भेज देना, मैं बाद में देख लूँगा।"
हेमा ने उसे छेड़ते हुए कहा, "बड़े आए बिजी आदमी! अपनी दुल्हन को देखने का भी वक्त नहीं? बिलकुल अपने पापा पर गए हो—अक्खड़ कहीं के! (Asshole! - वह मज़ाक में कहती है)"
निहाल अपने कमरे में गया और दरवाजा बंद कर लिया। उसने बिस्तर पर लेटकर फोन चेक किया। माँ ने फोटो भेज दी थी। जैसे ही उसने फोटो खोली, उसकी धड़कन एक पल के लिए रुकी। फोटो में एक लड़की जयपुर के हवा महल के सामने खड़ी थी। उसकी आँखों में एक अजीब सी बेबाकी और चमक थी। वह पारंपरिक लहंगे में भी बहुत 'कॉन्फिडेंट' लग रही थी।
निहाल के दिमाग में बचपन की कुछ धुंधली यादें ताज़ा हो गईं—मिट्टी के घर, पतंगबाजी और एक छोटी सी लड़की जो हमेशा उसे चिढ़ाती थी। उसने फोटो को ज़ूम किया और मुस्कुराया।
निहाल (मन में): "तो तुम हो शिवानी... देखते हैं, जयपुर की ये हवाएं मुझे क्या रास आती हैं।" उसने फोन बगल में रखा और सोने की कोशिश करने लगा, पर उसकी आँखों में अब उस अजनबी लड़की का चेहरा बस गया था।