रात के लगभग दस बज रहे थे। लोधी रोड स्थित CBI Special Crime Division के office से बाहर निकलते हुए शक्ति ने अपनी SUV स्टार्ट की। पिछले छह घंटों से चल रहे operation ने उसे थका दिया था, लेकिन उसका दिमाग अब भी trafficking case में उलझा हुआ था। शक्ति ने उस समय साधारण कुर्ती और जींस पहन रखी थी और उसने अपने बालों का जुड़ा बनाया हुआ था।
तभी उसके फोन की घंटी बज उठी। उसकी नज़र बगल वाली सीट पर रखे फोन पर गई। स्क्रीन पर उभरता हुआ नाम देखते ही उसके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान तैर गई।
बिना देर किए उसने कॉल उठा ली। लेकिन दूसरी तरफ की बात सुनते ही उसके चेहरे के भाव बदल गए।
अगले ही पल उसने ब्रेक पर ज़ोर से पैर मारा, जिससे SUV एक झटके के साथ सड़क किनारे रुक गई। स्क्रीन पर उभरता हुआ नाम देखते ही शक्ति के चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान उभरी, लेकिन वह मुस्कान रहस्यमयी थी—उसे देखकर किसी के लिए भी उसके मन में चल रहे विचारों का अंदाज़ा लगा पाना आसान नहीं था।
शक्ति ने कॉल रिसीव की। कुछ पल तक वह खामोश रही, मगर अगले ही पल उसके चेहरे पर सख्ती उतर आई।
शक्ति: “Just wait for me… I’ll be there in a few minutes.”
इतना कहकर शक्ति ने कॉल काट दी और बिना एक पल गंवाए तुरंत दो कॉल मिलाए। उसने दोनों तरफ़ कुछ ज़रूरी हिदायतें दीं। बातचीत खत्म होते-होते उसकी आँखों में गंभीरता और गहरी हो चुकी थी।
अगले ही पल उसने एक्सीलरेटर पर दबाव बढ़ाया और उसकी SUV दिल्ली की सड़कों पर तेज़ी से दौड़ने लगी।
कुछ देर बाद, जब शक्ति की SUV ट्रैफिक भरे इलाके से गुजर रही थी, उसकी नज़र सड़क किनारे हो रही एक बहस पर पड़ी। दो ट्रैफिक हवलदार एक लड़के को रोककर खड़े थे और तीनों के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस चल रही थी। लड़के के पास खड़ी लग्ज़री कार उसकी हैसियत साफ़ बता रही थी।
आस-पास खड़े लोग उत्सुकता से तमाशा देख रहे थे, जिससे सड़क पर हल्का-सा जाम लग गया था।
शक्ति ने हल्की-सी भौंहें सिकोड़ लीं और अपनी SUV की रफ्तार धीमी कर ली। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर मामला क्या है। अगले ही पल उसने अपनी गाड़ी सड़क किनारे लगाई। वह उस लग्ज़री कार से कुछ दूरी आगे जाकर रुकी और गाड़ी से उतरकर धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ने लगी।
पास पहुँचते ही उसने देखा कि दोनों हवलदार अब भी उस लड़के के साथ बहस में उलझे हुए थे और उसे डराने की कोशिश कर रहे थे। तीनों की आवाज़ें इतनी ऊँची थीं कि आसपास खड़े लोग अब भी उनकी बातों को गौर से सुन रहे थे।
हवलदार: “बोला ना, गाड़ी साइड में लगाओ। अब ये थाने ले जानी पड़ेगी।”
लड़का: “लेकिन सर, अब तक आपने कोई वजह नहीं बताई। बस थाने-थाने की रट लगाए हुए हैं। पहले ये तो बताइए कि आखिर किस वजह से आप हमारी गाड़ी थाने ले जा रहे हैं?”
हवलदार कुछ बोलने ही वाला था कि तभी शक्ति वहाँ पहुँच गई। उसने बिना कोई दखल दिए कुछ सेकंड तक उनकी बातें सुनीं।
फिर उसने एक नज़र सब पर डाली और शांत लेकिन अधिकारपूर्ण स्वर में पूछा—
शक्ति: “क्या हो रहा है यहाँ?”
उसकी आवाज़ सुनते ही वहाँ एकदम सन्नाटा छा गया और सबकी नज़रें उसी की ओर उठ गईं।
लड़का: “मैडम, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा कि बात क्या है। मैं इनसे कई बार पूछ चुका हूँ कि आखिर मामला क्या है। अगर मुझसे कोई violation हुआ है, तो बताइए, चालान काटिए... लेकिन बिना वजह गाड़ी थाने ले जाने की बात मेरी समझ से बाहर है।”
उसकी बात सुनकर शक्ति ने संदेह भरी नज़रों से दोनों हवलदारों की ओर देखा। उनकी बातों में उसे कुछ अजीब-सा महसूस हो रहा था।
वह एक कदम आगे बढ़ी और गंभीर स्वर में पूछ बैठी—
शक्ति: “क्या बात है? आप लोगों ने इन्हें रोका क्यों है?”
दोनों हवलदारों ने एक-दूसरे की तरफ देखा, फिर उनमें से एक बोला—
हवलदार: “मैडम, गाड़ी suspicious लग रही थी... इसलिए हमने इन्हें रोक लिया। जाँच के लिए थाने ले जाने को कहा है।”
शक्ति: “Suspicious कैसे? कोई complaint, कोई alert या कोई violation है इनके खिलाफ?”
शक्ति के लगातार सवाल सुनकर दोनों हवलदार साफ़ तौर पर घबरा गए। कुछ सेकंड के लिए उनके पास कोई जवाब नहीं था। वे बस एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे, जैसे सही शब्द तलाश रहे हों।
वहीं सामने खड़ा लड़का भी अब उस लड़की को एक अलग नज़रिए से देख रहा था। अभी तक उसके लिए वह बस एक अनजान राहगीर थी, लेकिन जिस आत्मविश्वास और अधिकार के साथ वह सवाल कर रही थी, उससे साफ़ था कि वह कोई आम लड़की नहीं थी।
अभी कुछ देर पहले तक जो लड़की उसे एक साधारण-सी राहगीर लग रही थी, अब उसी में उसे कुछ अलग नज़र आने लगा था। उसके आत्मविश्वास, सवाल पूछने के तरीके और चेहरे पर झलकती दृढ़ता ने अनजाने ही उस लड़के का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था।
हालाँकि, सामने खड़ा हवलदार अंदर ही अंदर घबराया हुआ था, लेकिन अपनी घबराहट छिपाते हुए उसने शक्ति को एक आम लड़की समझकर उसे हड़काने की कोशिश की।
वह रौब झाड़ते हुए बोला—
हवलदार: “तू है कौन? अपने आपको बहुत बड़ी पुलिस वाली समझ रही है? चल, निकल यहाँ से... वरना अभी तुझे अंदर कर देंगे। पता नहीं कहाँ-कहाँ से मुँह उठाकर आ जाते हैं। चल, निकल... फिर तेरे घरवाले तेरी जमानत करवाते फिरेंगे।”
हवलदार का लहजा सुनकर आसपास खड़े लोगों ने एक-दूसरे की तरफ देखा। माहौल अचानक और भारी हो गया।
वहीं सामने खड़ा लड़का भी कुछ सेकंड के लिए जैसे जड़ हो गया। उसे अंदाज़ा नहीं था कि बात इतनी आगे बढ़ जाएगी। वह धीरे से शक्ति के करीब आया और उसके कान के पास धीमे स्वर में बोला—
लड़का: “मैडम... आप यहाँ से चली जाइए। वरना बेवजह आप भी हमारी वजह से मुसीबत में पड़ जाएँगी।”
उसकी आवाज़ में फिक्र साफ़ झलक रही थी। शायद वह नहीं चाहता था कि उसकी वजह से कोई और परेशानी में पड़े।
लेकिन हवलदार की बात सुनते ही शक्ति की आँखों में गुस्सा साफ़ उभर आया। उसके चेहरे की शांति एक पल में गायब हो गई। उसकी नज़रें सीधे हवलदार पर टिक गईं और उसका चेहरा पहले से कहीं ज्यादा कठोर हो उठा।
बिना कोई भाव दिखाए शक्ति ने अपना फोन निकाला और एक नंबर डायल किया। दो ही रिंग में कॉल उठा ली गई।
शक्ति ने कड़क लहजे में कहा—
शक्ति: “यहाँ एक चेक पोस्ट पर पुलिस अधिकारी अपनी authority का misuse कर रहे हैं। तुरंत किसी senior officer को भेजा जाए।”
दो सेकंड रुककर उसने अपनी लोकेशन बताई, फिर सामने खड़े दोनों हवलदारों की नेम प्लेट पर नज़र डालकर उनके नाम भी साफ़-साफ़ बता दिए। उसके बाद उसने बिना एक शब्द और कहे कॉल काट दिया।
शक्ति की बात सुनते ही दोनों हवलदारों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। अब उन्हें समझ आ चुका था कि जिसे वे अब तक एक आम नागरिक समझकर हड़का रहे थे, वह कोई साधारण लड़की नहीं थी।
तभी शक्ति ने उस लड़के की तरफ देखा और इस बार उसकी आवाज़ पहले से कहीं नरम थी—
शक्ति: “आप जा सकते हैं। आपको कहीं थाने जाने की ज़रूरत नहीं है।”
इतना सुनते ही एक हवलदार ने बीच में बोलने की कोशिश की—
हवलदार: “लेकिन मैडम… verification का क्या?”
उसने अपनी बात पूरी भी नहीं की थी कि शक्ति ने हाथ उठाकर उसे चुप रहने का इशारा किया। उसकी नज़रों में इतनी सख्ती थी कि हवलदार तुरंत खामोश हो गया।
अगले ही पल शक्ति ने हाथ के इशारे से उस लड़के को जाने को कहा। शक्ति की चिंता देखकर उसने बिना कुछ कहे अपनी कार स्टार्ट की और वहाँ से निकल गया।
अब शक्ति की नज़रें फिर उन हवलदारों पर टिक गईं—इस बार गुस्से से भरी हुई।
शक्ति: “मैं जानती हूँ, तुम ये सब घूस के चक्कर में कर रहे हो। लेकिन अब तुम्हें अपने इस गुनाह की सज़ा ज़रूर मिलेगी।”
इतना कहकर वह वहाँ से मुड़कर जाने लगी। लेकिन जैसे ही वह पलटी, दोनों हवलदार उसके सामने आकर हाथ जोड़कर माफी माँगने लगे।
हवलदार: “मैडम, हमें माफ कर दीजिए… आगे से ऐसा नहीं होगा। हम कसम खाते हैं।”
शक्ति ने उनकी तरफ एक बार भी नहीं देखा। बिना कुछ बोले वह उन्हें नज़रअंदाज़ करती हुई अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गई।
वह अपनी SUV के पास पहुँची ही थी कि तभी चेक पोस्ट के अंदर बैठी एक महिला कॉन्स्टेबल, जो अब तक शायद अपने काम में व्यस्त थी, तेज़ी से भागती हुई उसके पास आई और हाँफते हुए बोली—
महिला कॉन्स्टेबल: “मैडम… आप कौन हैं? आप कोई मामूली इंसान तो नहीं लगतीं…”
उसकी बात सुनकर शक्ति ने अपनी जींस की जेब से अपना ID कार्ड निकाला और उसकी तरफ बढ़ा दिया।
जैसे ही महिला कॉन्स्टेबल की नज़र उस ID पर पड़ी, उसके साथ-साथ बाकी कॉन्स्टेबलों के भी होश उड़ गए। अगले ही पल सबने एक साथ शक्ति को सैल्यूट किया।
उन्हें अब समझ आया कि जिसे वे अब तक साधारण सिविल ड्रेस में एक आम लड़की समझ रहे थे… वह कोई और नहीं, बल्कि Shakti — Crime Branch की Special Officer, DIG शक्ति थी।
शक्ति ने अपनी घड़ी पर नज़र डाली। उसके पास वक़्त बहुत कम था। बिना एक पल और गँवाए वह तुरंत अपनी SUV में बैठी और उसी दिशा में निकल गई… जहाँ से उसे पहला कॉल आया था।
इसे और ज़्यादा gripping और suspenseful बनाने के लिए ऐसे लिख सकती हो:
आखिर शक्ति इतनी जल्दबाज़ी में कहाँ जा रही थी? और वो कौन था, जिसका एक कॉल शक्ति के चेहरे की शांति को पल भर में गंभीरता में बदल गया?
इन सारे सवालों के जवाब जानने के लिए पढ़ते रहिए — शक्ति के शिव…