Crash and Survival - 5 in Hindi Thriller by Shaziya Khan books and stories PDF | क्रैश एंड सर्वाइवल (अमेज़न डायरीज़) - 5

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क्रैश एंड सर्वाइवल (अमेज़न डायरीज़) - 5

एपिसोड 5 (दरिंदों की जंग)


चट्टान की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए उस ब्लैक जगुआर के पंजों की सरसराहट अब गुफा के मुहाने तक पहुँच चुकी थी। गुफा के अंदर सन्नाटा ऐसा था कि सबकी धड़कनें साफ़ सुनी जा सकती थीं। बिल ने अभी भी रोज़ी का मुंह कसकर दबा रखा था, जिसकी आँखों से डर के मारे आँसू बह रहे थे। ऐशली मैट के पीछे दुबक कर थर-थर कांप रही थी। पॉल और टोनी की तो मानो सांसें ही रुक गई थीं। सब जानते थे कि अगर इस खूंखार दरिंदे ने गुफा के अंदर कदम रख दिया, तो इनमें से कोई भी सुबह का सूरज नहीं देख पाएगा।


लारा की नज़रें गुफा के बाहर की तरफ़ टिकी थीं। उसने देखा कि जगुआर ने अपना भारी सिर गुफा के मुहाने के अंदर डाला। उसकी पीली, चमकदार आँखें अंधेरे को चीरती हुई सीधे लारा की आँखों से टकराईं। जगुआर ने एक धीमी सी घुर्राहट पैदा की। वह आगे बढ़ने ही वाला था कि लारा ने अपनी फुर्ती दिखाई। उसने गुफा के फर्श पर पड़ी एक भारी नुकीली चट्टान उठाई और अपनी पूरी ताकत लगाकर उसे गुफा से दूर, नीचे विमान के मलबे की तरफ़ फेंक दिया।


वह भारी पत्थर नीचे गिरे विमान के एक लोहे के पतरे पर जाकर लगा—'क्लैंड!' जंगल के उस सन्नाटे में वह आवाज़ किसी धमाके की तरह गूंज उठी। ठीक उसी पल, मलबे के पास लगे ईंधन के ढेर में जो हल्की सी आग बची थी, वहाँ एक छोटा सा शॉर्ट-सर्किट हुआ और बची-कुची बिजली की तारों में से चिंगारियां निकलने लगीं। मलबे की तरफ़ हुई इस अचानक हलचल और तेज़ आवाज़ ने जगुआर का ध्यान भटका दिया। उसने झटके से अपना सिर पीछे खींचा, गुफा से मुंह मोड़ा और एक ही छलांग में नीचे चट्टान से मलबे की तरफ़ कूद गया।


गुफा के अंदर सबने एक साथ राहत की सांस छोड़ी, लेकिन उनका डर अभी खत्म नहीं हुआ था। वे सब रेंगते हुए गुफा के किनारे तक आए और नीचे का नज़ारा देखने लगे। नीचे का दृश्य ऐसा था कि उनके रोंगटे खड़े हो गए। मलबे के पास सिर्फ़ जगुआर ही नहीं था। वहाँ की दलदली नदी के किनारे से निकलकर एक विशालकाय, लगभग 18 फीट लंबा 'एनाकोंडा' रेंगता हुआ मलबे की गंध का पीछा करते हुए आ पहुँचा था। वह खूंखार सांप मलबे के पास मरे हुए पायलट के केबिन की तरफ़ बढ़ रहा था।


ब्लैक जगुआर को लगा कि वह एनाकोंडा उसका शिकार छीनने आया है। जगुआर ने अपनी पीठ सिकाई, अपने नुकीले दांत दिखाए और एक भयानक दहाड़ मारी जिससे पूरा जंगल काँप उठा। लेकिन वो विशालकाय सांप पीछे हटने वाला नहीं था, उसने अपना फन हवा में चार फीट ऊपर उठाया और फुफकारने लगा। दोनों खूंखार शिकारी एक-दूसरे के सामने आ चुके थे।


"ओह माय गॉड... वो सांप कितना बड़ा है! हम यहाँ मर जाएंगे मैट, हमें यहाँ से निकालो!

ऐशली ने रोते हुए मैट का हाथ झटकना चाहा, लेकिन मैट खुद अपने घायल पैर को पकड़कर बेबसी से नीचे देख रहा था। रोज़ी ने बिल का हाथ अपने मुंह से हटाया और लारा को नफ़रत से घूरते हुए फुसफुसाई,


"यह सब तुम्हारी वजह से हो रहा है लारा! तुम हमें यहाँ इस नर्क में मरवाने के लिए लेकर आई हो। अगर हम यहाँ से बच गए ना, तो मैं पुलिस में तुम्हारे खिलाफ केस करूँगी।


लारा ने मुड़कर रोज़ी को देखा, उसकी आँखों में कोई डर नहीं था। लारा ने ठंडे लहजे में कहा,

"चुप रहो रोज़ी! अगर पुलिस तक पहुँचना है, तो पहले अगली सुबह तक ज़िंदा रहना सीखो। तुम्हारी ये बकवास सुनने में मुझे कोई दिलचस्पी नहीं है।

सोफिया ने लारा का हाथ पकड़ लिया,

"लारा, इस पर ध्यान मत दे, नीचे देखो!"


नीचे मलबे के पास अब असली खूनी खेल शुरू हो चुका था। जगुआर ने हवा में छलांग लगाई और सीधे एनाकोंडा की गर्दन पर अपने मज़बूत जबड़े गड़ा दिए। सांप दर्द से तड़प उठा और उसने अपनी भारी-भरकम पूंछ को हवा में लहराकर जगुआर की पीठ पर दे मारा। वह वार इतना तेज़ था कि जगुआर दूर जाकर गिरा। लेकिन वह तुरंत उठा और उसने दोबारा हमला किया। एनाकोंडा ने फुर्ती दिखाते हुए जगुआर के पूरे बदन को अपने शिकंजे में लपेटना शुरू कर दिया। दोनों दरिंदे एक-दूसरे को मार डालने के लिए कीचड़ और मलबे में बुरी तरह लड़ रहे थे।


गुफा में बैठे ये ६ अमीर बच्चे अपनी जिंदगी में पहली बार मौत का ऐसा तांडव लाइव देख रहे थे। टोनी का दर्द के मारे बुरा हाल था, लेकिन वह भी इस खौफ को देखकर अपनी चीख दबाए बैठा था। पॉल और बिल एक-दूसरे का हाथ पकड़े थर-थर काँप रहे थे। इस भयानक लड़ाई को देखकर उनके मनों में यह डर बैठ गया था कि अगर ये जानवर आपस में इतने खूंखार हो सकते हैं, तो इंसानों का इस जंगल में क्या हश्र होगा।
अंत में, एनाकोंडा की पकड़ मज़बूत होने लगी और जगुआर की हड्डियाँ टूटने की आवाज़ आई। अधमरा होकर जगुआर किसी तरह सांप के शिकंजे से छूटा और अपनी जान बचाकर लंगड़ाता हुआ घने जंगल के अंधेरे में गायब हो गया। एनाकोंडा भी इस लड़ाई में बुरी तरह जख्मी हो चुका था, वह मलबे के पास ही हांफता हुआ सुस्त पड़ गया।


गुफा में अब फिर से वही जानलेवा सन्नाटा छा गया था। रात के 2 बज चुके थे। लारा ने मुड़कर ग्रुप की तरफ़ देखा और कहा,

"खतरा टल गया है, लेकिन सुबह होने तक कोई भी अपनी जगह से हिलेगा नहीं। और हाँ, रोज़ी और ऐशली... यह सोचकर खुश मत होना कि मैंने तुम्हारी जान बचाई है। मैंने जो किया वो सिर्फ़ सोफिया और खुद के लिए किया है, तुम लोगों के लिए मेरे मन में कल भी नफ़रत थी और आज भी है।

लारा की इस बात ने रोज़ी और ऐशली के घमंड को ठेस तो पहुँचाई, पर वे चुप रहने पर मजबूर थीं। दुश्मनी और नफ़रत की दीवार अब और ऊँची हो चुकी थी... (जारी है)
लेखक _समीर खान