चलो दूर कहीं.. 24
"मैं तो कहता हूं इन्हें यहीं छोड़ कर चलो तब इनके अक्ल ठिकाने आएगी..!" गुस्सा से लाल पीला होते हुए रोहन ने कहा और दरवाजा खोलकर ड्राइविंग सीट पर बैठा और एक झटके से दरवाजा बंद करते हुए कहा," तुम्हें जाना है तो जल्दी से गाड़ी में बैठो..!"
"लेकिन रोहन.. इस अनजान जगह में अनाह और छोटू को छोड़कर कैसे चले जाएं.. थोड़ी देर रुको न वे आते ही होंगे..!"
"न जाने तुमने कौन से जंगली जानवर को उठा लाई हो ..न उन्हें समय का कद्र है और न लोगों के भावनाओं का.. ऑलरेडी तुम्हारे कारण मैं बहुत लेट हो चुका हूं.. और लेट नहीं कर सकता..! " रोहन ने बोलते हुए अपने पर्स से 500 का दो नोट निकाला और प्रतीक्षा के ओर बढ़ाते हुए कहा," ये कुछ पैसे रखो और जब वे दोनों आ जाएं तो टैक्सी या बस से आ जाना..!"
रोहन के बातों को सुनकर प्रतीक्षा की आंखें भर आईं उसने भारी कंठ से कहा," मैं ये पैसे नहीं ले सकती रोहन.. हमें यहां तक लाने के लिए शुक्रिया.. तुम जाओ .. तुम्हें देर हो रही है, हम यहां से किसी तरह से चले जाएंगे..! तुम बहुत बदल गए हो रोहन.. पहले तो मेरी एक झलक पाने के लिए घंटों पलक पांवड़े बिछाए रहते थे.. भला इन दो महीने में ऐसा क्या बदल गया कि अब कुछ मिनट का इंतजार भी नागवार गुजर रहा है..?"
" ऐसी कोई बात नहीं है प्रतीक्षा.. समझने की कोशिश करो .. आज आफिस में बहुत इंपोर्टेंट मीटिंग है इसलिए मुझे समय से पहुंचना बहुत जरूरी है.. और वे दोनों कब तक आएंगे ये भी नहीं मालूम..!
अभी रोहन बोल ही रहा था कि उसे छोटू हाथ में थैला लिए आता हुआ दिखाई दिया, उसके पीछे पीछे अनाह हिलते डुलते मस्ती में चला आ रहा था, दोनों पर नजर पड़ते ही उसका पारा सातवें आसमान पर था । छोटू थैला लिए दौड़ते हुए जैसे ही गाड़ी के पास पहुंचा रोहन तैश में नीचे उतरा और छोटू के गाल पर एक जोरदार तमाचा रसीद करते हुए चीखा,"तुम्हें समझ नहीं आता कि कहीं जाने से पहले बता कर जाएं..! तुम दोनों के कारण हम कितने परेशान हैं तुम्हें पता है..?"
छोटू के गाल पर तमाचा पड़ते ही उसकी आंखें भर आईं थीं, प्रतीक्षा लपककर उसके पास पहुंची और उसके गालों को सहलाते हुए तीखे स्वर में बोली,"ये तुमने ठीक नहीं किया रोहन..!"
प्रतीक्षा अभी बोल ही रही थी कि वहां पहुंचते ही अनाह ने पूछा, "क्या हुआ प्रतीक्षा.. मि. रोहन इतने गुस्से में क्यों है..?"
"तुम बिना बताए कहां चले गए थे अनाह.. तुम दोनों के लिए ही रोहन गुस्सा हो रहा है..!"
"ये तो ऊंट निगलने और मच्छर छानने वाली बात हुई.. हम तो इनके इज्जत में बट्टा न लगे उसी के व्यवस्था में गए थे..!"
"ये पहेलियां बुझाना छोड़ो अनाह और साफ साफ बताओ कि तुम दोनों कहां गए थे और इस थैले में क्या है..?" प्रतीक्षा अनाह के बातों को काटते हुए बोली तो उसने कहा, "सभ्य लोगों की दुनिया में एक आम इंसान की कीमत उसके कपड़ों से आंकी जाती है प्रतीक्षा.. हमारे रोहन बाबू को हमसे और हमारी हैसियत से गिल्टी फील हो रहा था..! इस हाल में हमें साथ ले जाने में इन्हें शर्मिंदगी महसूस हो रही थी..! सभ्य लोगों के समाज में तुम्हारे अच्छे विचार, अच्छा व्यवहार और नेकनीयत का कोई मोल नहीं है प्रतीक्षा.. इनके चमचमाते कपड़े और पुती हुई रंगत में इनकी सारी बदनीयती छुप जाती है..! खैर छोड़ो इन बातों को इनके साथ जाना है तो इनके जैसा बनना पड़ेगा..!"
अनाह के बातों को सुनकर रोहन जैसे आकाश से धड़ाम से जमीन पर गिर पड़ा.. वह आंखें फाड़े अनाह को घूर रहा था उसे समझ नहीं आ रहा था कि जो बातें वह अपने मन में सोच रहा था वही बातें अनाह को कैसे मालूम चला..! रोहन को गंभीर मुद्रा में देख अनाह ने थैला से एक बहुत बढ़िया नया सलवार सूट निकाल कर प्रतीक्षा की ओर बढ़ाते हुए कहा," इसे पहन लो प्रतीक्षा.. ताकि मि. रोहन की इज्जत बच जाए..!"
"मैं चोरी का माल नहीं पहनूंगी.. तुम जाओ रोहन तुम्हें देर हो रही है.. बाद में हम सब चले जाएंगे..!"
रोहन को जैसे काठ मार गया था, उसके कंठ से कोई शब्द नहीं निकल रहा था । उसे चुप देख अनाह ने शरारत भरे लहजे में कहा," चोरी..छी:..छी..कैसी बात करती हो प्रतीक्षा.. भला मैं तुझे चोर दिखता हूं...? अरे भाई मैं कपड़े के साथ दुकानदार का क्यू आर कोड स्कैनर भी ले आया हूं..मि. रोहन के पास पैसे की कोई कमी है क्या.. अभी तुरंत पैमेंट कर देंगे.. क्यों मि. रोहन मैं ठीक बोल रहा हूं न..?"
रोहन जैसे सपने से जागा हो हकलाते हुए कहा,"हां.. हां.. क्यों नहीं...! लेकिन अभी तो सभी दुकानें बंद होगी..फिर तुम इतनी सुबह-सुबह ये कपड़े किस दुकान से उठा लाए..?"
" आम खाने से मतलब रखिए न मि. रोहन.. गुठली गिनने से क्या फायदा.. वैसे आप खुश तो है न अब आपकी इज्जत तो बच जाएगी.. इसलिए अगर आप कपड़े का भुगतान करना चाहते हैं तो करिए वर्ना मुझे क्या गरज पड़ा है.. जहां से लाया हूं वहीं रख आता हूं..चल छोटू..!"
कहकर अनाह आगे बढ़ा ही था कि रोहन ने छोटू के हाथ से थैला छीनते हुए कहा," अरे यार तुम तो बड़े मूडी लगते हो.. रुको पैमेंट करता हूं..!" और कपड़े में लगा टैग को देखकर कपड़ा प्रतीक्षा को देते हुए कहा," जब अनाह ने इतनी मेहनत से लाया है तो इसे पहन लो..!
प्रतीक्षा चुपचाप कपड़ा ली और बगल में चली गई.. थोड़ी देर बाद जब वो कपड़े पहन कर सामने आई तो रोहन उसे देखता रह गया..उस कपड़े ने मानो जैसे उसका कायाकल्प कर दिया था..वह बहुत खूबसूरत लग रही थी। रोहन को प्रतीक्षा को घूरते देख अनाह ने कहा,"अब देर नहीं हो रहा है मि. रोहन..?"
"अरे हां.. हां.. चलो सभी बैठो गाड़ी में बैठो..! एक बात मानना पड़ेगा अनाह तुम्हारी च्वाइस लाजबाव है..!"
रोहन ने ड्राइविंग सीट पर बैठते हुए कहा तो अनाह उसे देखकर मुस्कुरा दिया, और उसके पास वाली सीट पर बैठ गया .." तुम्हें कहां पता मि.रोहन, अनाह की च्वाइस हमेशा लाजबाव ही होती है..! ये सारे लोग संयोग से नहीं मिले हैं, ये प्रयोग है.. और इन सबके साथ साथ तुम भी हमारे लाजबाव च्वाइस में शामिल हो मि. रोहन..! खेल तो अब शुरू होगा.. !" सोचते सोचते वह खुशी से झूम उठा जैसे किसी बिगड़ैल बच्चे को उसका मनपसंद खिलौना मिल गया हो..!
क्रमशः...