Muhabbat Ek Sabaq - 14 in Hindi Love Stories by Afariya Faruqui books and stories PDF | Muhabbat Ek Sabaq - 14

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Muhabbat Ek Sabaq - 14

वह दोनों तैयार हो कर नीचे आईं तो सब लॉन में बैठे चाय पी रहे थे।
"गई नही तुम दोनों अभी तक , क्या बात है" ?? 
बेगम आसिम ने बेटियों को तैयार खड़े देख कर पूछा। 
"जी वह नादिया लोगो के आते ही निकल जाऐंगे और वह बस पहुंचने ही वाले है" !!

शिफ़ा ने बताया।
"अनस कहां है,उसको लेकर जाना तुम लोग अकेले नही जाओगे" !!!

असद साहब ने चाय खत्म करके कप टेबल पर रखते हुए कहा।
"जी बड़े पापा हमने बोला था अनस भाई को साथ जाने के लिये ,पर उनहोंने मना कर दिया" !!

जवाब शिफा के बजाए आज़मीन ने दिया था।
"क्यों" ??? 

असद साहब को उसका इंकार सुन कर गुस्सा आ गया।
"पता नही , आप खुद मालूम कर लें वह आ गए हैं भाई" !!!

वह दरवाज़े की तरफ इशारा करती हुई बोली 
"जी बर्खुदार कहां गये थे आप " ???

उनहोंने तनी हुई आईब्रो के साथ बेटे से सवाल किया। 
"जी वह दोस्त की तरफ था" !!!

उसने बहुत आहिस्ता से जवाब दिया।
"शाबाश !!! दोस्तो के साथ वक़्त खराब कर लोगे लेकिन बहनों को लेकर नही जा सकते" !!

उन्होंने उसकी तरफ देख कर शदीद गुस्से से कहा।
"जी नही मैंने तो वह" ……………

अनस बाप के गुस्से की वजह से बौख्ला गया था।
"कोई ज़रूरत नही है कोई बहाना बनाने की , जाओ फौरन इन लोगों के साथ" !!!

असद साहब ने गुस्से से हुक्म दिया। 

"जी"!!

उस ने हाँ में सर हिला दिया।

"रज़ा तुम भी जाओ साथ में " !!!

उनहोंने कहा तो वह भी मोबाइल पॉकेट में रखता जल्दी से खड़ा हो गया। 
"चलो"!!! 

उसने दाँत पीस कर उन तीनों को इशारा किया तो तीनों उसके पीछे चल दिये।
"क्या ज़रूरत थी तुम्हें अंदर यह बकवास करने की के वह नही जा रहा है हमारे साथ" ???

बाहर निकलते ही शिफ़ा ने आज़मीन को घूर कर पूछा।
"तो और क्या कहती जब उनहोंने पूछा था" !!

 वह बेचारगी से बोली।
अभी वह और कुछ कहने ही वाली थी कि नादिया का कॉल आ गया वह लोग पहुंच चुके थे बाहर कार खड़ी थी वह दोनों भी जल्दी जल्दी निकल गईं।

माहिद ने ड्राइविंग सीट संभाली हुई थी रज़ा उसके पास ही बैठ गया। लड़कियां सब पीछे बैठ चुकी थीं तो अनस के बैठने की जगह नही बची थी वह और किल्स गया।
"एड्रैस दो मुझे" ?? 

उसने शिफ़ा से कहा लहजा ऐसा था जैसे एहसान कर रहा हो ।
"दोज़ख का एड्रैस ले लो तुम तो" !!!

वह बुरी तरह चिढ़ कर बोली थी।

"तुम पहुंचो मैं पीछे आ रहा हूं" !!

वह भी ज़हर भरे लहजे में कह कर दूसरी साइड से जाकर रज़ा से एड्रैस पूछने लगा था।
☆ ☆ ☆

सब लोग रेस्टोरेंट पहुंच चुके थे वहां फैली भीनी भीनी महक और फिज़ा में चलते हल्के हल्के म्यूज़िक ने माहौल को काफी खुशगवार बना रखा था।

नादिया के साथ उसकी कज़िन ज़रनिश भी मौजूद थी।

अंदर पहुंच कर रज़ा ने एक खाली टेबल की तरफ इशारा किया तो चारों लड़कियां वहीं चली आईं रज़ा भी बराबर में रखी दूसरी टेबल पर बैठ गया। माहिद का अर्जैंट कॉल आ गया था वह अटैंड करने बाहर चला गया और अनस अभी पहुंचने ही वाला था।

"शिफ़ा, चिल यार मूड सही करो अपना, यह कोई पहली बार तो नही है तुम्हारी और अनस भाई की लड़ाई तो होती रहती है फिर तुम क्यों एंज्वायमेंट स्पॉइल कर रही हो अपना ऐसे" !!!

नादिया ने उसका मूड बहाल करने की कोशिश की।

"हाँ शिफ़ा, नादिया बिलकुल सही कह रही है ,कज़िंज़ में तो यह चलता रहता है तुम इस तरफ ध्यान ही मत दो वरना गुस्सा बढ़ता ही रहेगा यह लो तुम ऑर्डर करो कौन सा फ्लेवर पसंद है तुम्हें " !!!

ज़रनिश ने भी उसे समझाया था

"जी आपी "

उसने रस्मी सी मुस्कुराहट के साथ कह कर सर हिलाते हुए कार्ड थाम लिया।

उसकी बात पर पास बैठे रज़ा ने एक नज़र उस समझदार सी लड़की पर डाली।

पिंक कलर के स्टाइलिश ट्राउज़र और घुटनो से नीचे तक आती लॉंग शर्ट के साथ शैफून का हमरंग दोपट्टा लेकर कमर से नीचे तक आते लंबे बालो को गूंध कर ढीली ढाली चोटी बनाई हुई थी जिसमें से दो घुंघरयाली लटें उसके चेहरे पर आबशार जैसी लग रही थीं कानो में स्टोन के टॉप्स और मेकअप से पाक चेहरे पर पड़ते सूट के शेड ने उसकी खूबसूरती को और ज़्यादा बढ़ा दिया था।

रज़ा को यह नाज़ुक पदमिनी सी लड़की मुस्तक़बिल की डॉक्टर तो कहीं से भी नही लग रही थी वह सोच कर ही मुस्कुरा दिया।

"क्या बात है रज़ा भाई किस सोच में गुम हैं"????

माहिद फोन पर बात करके वापस आया तो उसे सोचों में गुम पाकर हौले से उसका हाथ हिला कर पूछने लगा।

"कहीं नही बस ऐसे ही" !!!

वह शर्मिंदा हो कर सीधा हो बैठा।

अनस भी पहुंच चुका था उन लोगो को देख कर वह भी उधर ही आ गया।

"ऑर्डर करें भाई " !!

माहिद ने मैन्यू कार्ड रज़ा के हाथ में पकड़ाते हुए कहा तो वह भी अस्बात में सर हिलाकर ऑर्डर करने लगा था।

☆ ☆ ☆

"दादू आप सोईं तो नही हैं" ?? 

अनस रात को सबके कमरों में जाने के बाद दादू के पास आया था।

"नही तो , क्या बात है बच्चे सब खैरियत है "???

दादू लेटे से उठ बैठीं।

"आप से बात करनी है कुछ" !!

वह कुछ कशमकश में लग" रहा था।

"इधर आओ मेरे पास मेरी जान " !!!

उन्होंने पोते को बहुत मुहब्बत से पास बुलाया।

"जी " !!

वह सर झुका कर उनके पास बैठ गया।

"बताओ क्या बात है, परेशानी है कुछ" ??

उन्होंने उस के सर पर हाथ फेर कर पूछा।

"नही परेशानी नही है कोई " !!!

उसने नहीं में सर हिला कर इशारे से जवाब दिया था।

"फिर क्या बात है "???

" दादू, मैं आपसे कुछ मांगू तो आप मना तो नही करेंगी" ??

उसने पूछा।

"नही चन्दा बोलो क्या बात है "???

"पहले वादा करें कि मना नही करेंगी आप मुझे"

वह बच्चों की तरह मचला।

"ठीक है पक्का वाला वादा, नही करूंगी मैं मना , अब बताओ क्या बात है " ??

उन्होंने उसे बच्चों की तरह ही पुचकारा था।

"मुझे शादी करनी है शिफ़ा से" !!!

उसने झिझकते हुए सर झुका कर आखिर कह ही डाला।

वह ज़माना पहचानने वाली औरत थीं एकदम ही मुआमले की तह तक पहुंच गईं।

"मां से बात की तुमने अपनी" ???

उन्होंने कुछ सोचते हुए पूछा।

"जी की थी" !!

उसने मां की कही हुई बातें दुहरा दी।

"हम्म"!!!!

वह पूरी बात सुन कर कुछ सोच में पड़ गईं।

"क्या सोच रही हैं दादू"? ??

"कुछ नहीं , तुम अपने कमरे में जाओ मैं सुबह बात करती हूं इस बारे में सब से " !!

उनहें उसकी बात सही लगी थी। और सबसे बड़ी बात यह थी कि वह अपनी लखते जिगर को खुद से अलग नहीं करना चाहती थीं।

"थैंक्यू दादू मुझे आपसे यही उम्मीद थी, लव यू वैरी मच"

वह बच्चो की तरह खुश हो कर उनके दोनो हाथ चूमने लगा था।
☆ ☆ ☆