विधि हाथ मे फोन लिए उसकी फोटो देख कर रोने लगी..."कितना प्यार करती हूँ
तुम्हे अंश"...!! लेकिन तुम्हें उस प्यार की कोई कद्र नहीं है।
तुम्हें तो बस..??
क्या समझा था तुम्हें और तुम क्या निकले
कहते हुए और जोर से रोने लगी।
रोते रोते कब सो गयी उसे पता भी ना चला।।
रात को मम्मी ने डिनर के वक़्त विधि को आवाज लगायी।।
विधि बेटा खाना लग गया है आओ हम सब वेट कर रहे हैं।
मम्मी की आवाज से विधि की आँखे खुल गई तो उसने वही से आवाज लगाई।
"मुझे भूख नहीं है मम्मी आप लोग खा लो"...।
विधि बार बार फोन चेक करती रही, कहीं अंश का कोई मैसेज ना आया हो लेकिन उनसे कोई मैसेज नहीं किया था।।
सुबह भी उठते ही पहले उसने फोन चेक किया लेकिन अब भी उसका कोई मैसेज नहीं था, यह देख उसे अंश पर गुस्सा आ रहा था और बुरा भी लग रहा था।।
क्योंकि गलती उसकी थी और उसने एक बार भी विधि को सॉरी नहीं कहा था।
आज विधि बिलकुल चुप थी उसने अपनी तयारी की और कॉलेज के लिए निकल गयी।
दादी और मम्मी दोनों एक दूसरे की तरफ देख कर इशारा करते रहे के इसे आज क्या हुआ है।
ये इतनी चुप क्यों है... लेकिन किसी ने पूछा नहीं उसे जाने दिया।
विधि कॉलेज की लाइब्रेरी मे जाकर बैठे गयी।
निशा कॉलेज पहुँची तब, विधि उसे क्लास मे नही मिली तो वह उसे ढूंडते हुए लाइब्रेरी पहुँची।
विधि वहा बैठी पढ़ाई कर रही थी यह देख निशा को हँसी आयी और वो विधि से कहने लगी।।
ओह्हो..!! मैडम, आज मन लगा कर पढ़ाई कर रही है, कही मै सपना तो नहीं देख रही हूँ....!!
या आज सूरज पुरब के बजाय पश्चिम से तो नहीं निकला आया।।
विधि का मूड पहले से ही खराब था
एक तो अंश ने अब तक ना उसे कोई मैसेज किया ना कॉल उपर से निशा
मजाक उड़ा रही थी।
तो विधि ने गुस्से मे उसे डांटा और कहा..
"यहाँ पढ़ाई करने ही आते है सब और अब कुछ दिनों मे एग्जाम है तो तु भी चुप बैठ कर अपनी पढ़ाई कर"...!!
फालतू की बकवास मे टाइम ना वेस्ट कर।।।
निशा समझ गयी कुछ ना कुछ बात तो जरूर है...ये ऐसे यहा नहीं बैठ सकती।
एक तो अंश की बातें करती या उसके साथ ही घूमती रहती, यहा लाइब्रेरी मे तो ये रह नहीं सकती थी।
हा..!!
पहले की बात और थी जब वो पढ़ाई मे मन लगाती थी।
लेकिन जब अंश उसकी लाइफ मे आया था वो तो कभी कभी ही पुरा दिन कॉलेज करती थी।
पढ़ाई करनी हो तो बस रात को घर पर ही करती थी।
निशा फिर उसके पास आकर बैठ गयी और आराम से उस से पूछने लगी की क्या हुआ।
निशा : कुछ तो बात जरूर है..!!
तु ऐसी चुप नहीं रह सकती।
तूने फिर से मुझे पराया कर दिया उस अंश के मिलते ही जो मुझे नहीं बता रही क्या हुआ।।
विधि : गुस्से में बोल पड़ी उस अंश का नाम मत ले।
निशा : क्यों..ऐसा क्या हुआ...?? जो उसका नाम लेते ही तुम भड़क रही हो।।
विधि : कुछ नहीं..!! तुझे पढ़ाई करनी है तो यहाँ बैठ नहीं तो मुझे पढ़ने दे तु जा सकती हैं।।
निशा समझ गयी इन दोनो के बीच कुछ तो हुआ है तभी ये उसका नाम लेते ही गुस्सा हो रही हैं।।
निशा ने विधि का हाथ अपने हाथ मे लेकर प्यार से पूछा...
सच बता क्या हुआ है उसने कुछ कहा क्या तुझे..?? क्या हुआ बता, जब तक तु कुछ नहीं बतायेगी मै यहा से नहीं जाउंगी और ना तुझे पढ़ाई करने दूगी।।
विधि भी अब ओर चुप नही रह सकती थी।
विधि : "अब क्या बताऊ तुझे बता"
एक बात बता निशा.. क्या सच में प्यार ऐसा ही होता है..?? जैसे सुना था की यह रुलाता ज्यादा है और हँसाता कम है ।।
निशा : तु साफ साफ बतायेगी क्या हुआ है..???
विधि : "वो ऐसे कैसे कर सकता है निशा"...??
मैंने उसे क्या समझा था और वो क्या निकला।।
निशा : क्यो ऐसा क्या किया उसने..??
विधि : प्यार तो दिल की एक खूबसूरत फीलिंग है...दिल का प्यारा सा एहसास है फिर यह, जिस्म क्यो बीच में आ जाता हैं।
क्या..?? प्यार मे वो सब जरूरी है....!!
क्या...?? उसने सिर्फ उसी वजह से मुझसे प्यार किया था ...!!
क्या..?? बाकी सभी इसी के लिए प्यार करते हैं..!!
और कहते हुए रोने लग गयी।।
निशा : बाकी लोगो का मै नही जानती मगर वो लड़का ऐसा नहीं है और तुम दोनों एक दूसरे से जब इतना प्यार करते हो तो थोड़ा बहुत चलता है।
क्या..?? तुम्हें उस पर विश्वास नहीं है..!!
तुम्हें क्या लगता हैं वह तुम्हें दिल से प्यार नही करता..सच बताओ।।
विधि : ऐसा तो कभी नही लगा की वो
कुछ गलत है या उसके दिल मे मेरे लिए प्यार नहीं है।
ना कभी पहले उसने ऐसा बिहेव् किया था मगर कल पता नहीं उसे क्या हुआ था।
अगर वो ऐसा नहीं है तो एक बार सॉर्री तो कहता मगर उसने एक मैसेज भी नहीं किया तो अब तु ही बता, उसपर कौन यकीन करे और जब तक वो सॉर्री नही कहेगा मै भी उसे कोई मैसेज नहीं करुगी ना कॉल...!! गलती उसकी है मेरी नहीं।
निशा : अरे,,तो तुझे कौन कह रहा है उसे माफी मांगने के लिए, तेरा भी सही है,
तेरा भी कुछ स्वाभिमान है...प्यार करते हैं इसका मतलब ये नहीं की हम उनकी हर बात मान ले।
मगर तु भी सोच..."तुम दोनो प्यार करते हो एक दूसरे से"...जब वो तुम्हारी हर ख़ुशी का ख्याल रखता है, तो तुम्हे भी उसकी कुछ ख्वाईश का ख्याल रखना चाहिए और विश्वास भी करना चाहिए उस पर तभी वह प्यार सफल होगा नहीं तो यही होगा तुम यहा वो वहा।।
विधि : मै तो उसे सच मे बहुत प्यार करती हु और उसकी ख़ुशी मे ही मेरी खुशी है मगर उस वक़्त मै, उस बात के लिए तैयार नहीं थी, तो शायद इसीलिए मुझे इतना बुरा लगा अब तुम कहती हो तो मै उसे माफी मांग लुंगी।।
निशा : नही...कोई जरूरत नही उसे माफी मागने की, अगर वो सच मे तुम्हें प्यार करता है, तो वो जरूर आयेगा
उसे भी उसकी गलती का एहसास होना चाहिए नही तो वह ये गलती फिर से करेगा।
जब तक वो नही कुछ कहता तुम भी माफी नही माँगोगी ।।
ठीक है..!! अब थोड़ा मुस्कुराओ, नही तो कितना भी पढ़ोगी दिमाग मे कुछ नही जायेगा ...
कहते हुए हँसने लगी।।
थैंक्स निशा...!! सच मे तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो।
कहते हुए विधि ने फिर से फोन चेक किया लेकिन अंश का कोई मैसेज नही था।
ऐसे ही दो चार दिन बीत गए लेकिन अंश ने कोई मैसेज नही किया अब विधि को भी लगने लगा की सच मे उसने बहुत बड़ी गलती की है मगर निशा की बाते याद आती तो लगता था की अंश ही गलत है और उसने विधि से कभी सच्चा प्यार किया ही नहीं।।
ऐसे ही दो चार दिन बीत गए लेकिन अंश
ने कोई मैसेज नही किया अब विधि को
भी लगने लगा की सच मे....उसने बहुत बड़ी गलती की है मगर निशा की बाते याद आती तो लगता था की अंश ही गलत है और उसने विधि से कभी सच्चा प्यार
किया ही नहीं।।
कुछ दिनों बाद, सुबह जब विधि ने फोन देखा तो वहा अंश का मैसेज दिखा उसने अपनी गलती के लिए विधि से माफी
मांगी थी।
उसे अपनी भूल का पछतावा था और
वो विधि से मिलना चाहता था।
विधि जब कॉलेज पहुँची वही गेट के
पास अंश अपनी बाईक लेकर खड़ा था उसे देख विधि मन ही मन खुश हो गयी लेकिन उसे अनदेखा कर के आगे चली गयी।
अंश : विधि..!! विधि सुनो...
विधि नही रुकी तो अंश दौड़ते हुए विधि
के पास आता है तो विधि रुक जाती हैं।
अंश : सॉर्री..!! अब माफ कर दो, प्लीज़...
सच मे बहुत बढ़ी गलती की है मैंने, तुम्हे हर्ट किया है...तुम्हारा विश्वास तोड़ा है
मगर अब उस गलती का एहसास हुआ
है मुझे।
अब तुम भी माफ़ कर दो, आज के बाद कभी ऐसी गलती नही करुगा...जिस
वजह से तुम्हारा दिल
टूटे या तुम्हारा विश्वास।।
आज के बाद कोई गलती फिर नहीं
होगी और जो तुम कहोगी वही होगा,
कहते हुए अंश ने अपने कान पकड़
लिए और विधि के आगे आकर माफ़ी मागने लगा।।
विधि ने पहले तो ना कहा...लेकिन बाद
मे उसे माफ कर दिया।
उसने तो अंश को कभी का माफ कर
दिया था मगर वो सिर्फ अंश के लौट आने की राह देख रही थी और अब उसका
अंश फिर से उसके पास लौट आया था।
आज उसे यकीन हो गया था की अंश
का प्यार सच्चा है उसका प्यार दिखावा
या झुट नही है।
प्यार अगर सच्चा हो तो दो प्यार करने
वाले भले ही कुछ दिन एक दूसरे से रूठ सकते है लेकिन दूर नही रह सकते।
आज फिर से अंश, विधि को वही...
उसी पहाड़ी पर ले गया जहाँ वो पहली
बार ले गया था ...वैसे अक्सर वह दोनों वहा जातें , लेकिन आज बात कुछ ओर
थी वो दोनों वहा जाकर घण्टों बैठे रहते।।
आज फिर वह दोनों पहले से और ज्यादा करीब आ गये थे।
आज विधि बहुत खुश थी उसका प्यार फिर से उसके पास था उसका अंश फिर
से लौट आया था।
विधि घर पहुँची तब उसने देखा, घर में
कुछ मेहमान बैठे थे उनमे कोई जान पहचान वाले दिख नहीं रहे थे...तो विधि सीधे किचन मे गयी और मम्मी से पुछने लगी..
"मम्मी क्या बात है "..!! कौन है ये सब और किस लिए आये है..??
मम्मी : वो सब तुम्हारा रिश्ता लेकर
आये हैं, तुम्हारे पापा के कोई पहचान
वाले हैं।
मम्मी की ये बात सुन कर विधि का चेहरा पुरा उतर गया उसे तो समझ नही आ रहा था इस बात पर मम्मी से क्या कहे।
"मम्मी, आप ने पहले बताया नहीं कुछ"...मुझसे पूछा भी नही और ऐसे
कैसे सीधा घर पर आ गये..
अभी तो मेरी एक्साम भी नही हुयी और मुझे अभी शादी नही करनी।।
अरे,,, अरे,, कितना बोलेगी और ये सब अपने पापा को जाकर कहो उनके सामने किसी की चलती हैं क्या.. कभी...??
अब जाओ जल्दी रेडी हो जाओ वो सब तुम्हारा इंतजार कर रहे है।
जाओ..जल्दी कपड़े बदल कर आओ।
विधि गुस्से में पैर पटकते हुए अंदर चली गयी।
"अभय"...जो विधि के पापा के किसी
दूर के पहचान वाले का लड़का था अच्छे अमीर खानदान का एकलौता देखने मे हैंडसम ऊचाँ गोरा।।
ये रिश्ता विधि के दादा जी ने चलाया था और अभय ने विधि को देखा तो नहीं था बस फोटो देखी थी जो उसके मम्मी ने दिखाई थी तभी से अभय विधि को
पसन्द करने लगा था।।
विधि तयारी कर के जब पापा ने बुलाया
तो सामने आकर बैठ गयी।
विधि ने तो एक बार भी आँख उठा कर अभय की तरफ नही देखा।।
अभय ने विधि को फोटो मे देखा था मगर आज साड़ी मे उसे सामने देख कर अभय के तो होश उड़ गए वो बस
विधि को ही देख रहा था।
तभी विधि के पापा ने अभय से कहा. . .
"कुछ पूछना हो तो विधि से पूछ सकते
हो बेटा"..!! बाकी सब तो आप लोग जानते ही हो।
अभय : "नहीं.. अंकल"..!!!
मुझे कुछ नहीं पूछना।
अभय की आवाज सुन कर विधि ने जरा सी आँख उठा कर अभय की तरफ देखा, तो अभय विधि को ही देख रहा था यह देख विधि ने फिर ने नजरे नीचे कर ली।।
कैसे देख रहा है.. जैसे कभी कोई लड़की देखी ही नही हो।
विधि मन ही मन कहने लगी।
तुम दोनो अकेले में बात करना चाहते
हो तो कर सकते हो...!! बेटी अभय
को अपना रूम दिखाओ।
विधि के पापा ने कहा।
अभय :" नही अंकल"... !!
यही ठीक है, मुझे तो कोई बात नहीं
करनी अगर विधि को कुछ पूछना हो
तो कह सकती हैं।
अभय के मम्मी ने विधि को कहा, बेटा आप जा सकते हो।
विधि फिर अंदर चली गयी।
कुछ देर अभय के पापा ने विधि के पापा
से कुछ बाते की और बाद मे सब चले गए।।
उनके जाते ही विधि पापा से कहने लगी..
"पापा आपने एक बार भी मुझे बताया नहीं की वो लोग आने वाले है"..मुझसे बिना पूछे ही, आपने मेरा रिश्ता पक्का
कर लिया।
"पापा आप ऐसे कैसे कर सकते हो"..!!
विधि ने मायूस होकर कर कहा।
"बताने के लिए वक़्त ही नहीं मिला बेटा", तेरे बर्थ डे के दिन जब उसके
पापा-मम्मी घर आये थे तब उन्होंने तुम्हें देखा था। फिर दादी ने ही तुम्हारी बात चलायी थी अब दादी को कैसे मना कर सकते हैं।
"वैसे अभय को तुम पसन्द हो"..!!अच्छा लड़का हैं वह, अपने ही जान पहचान का है...अच्छा खानदान भी हैं उनका तो और क्या चाहिए तुम्हें।।
विधि : मगर पापा मेरी पढ़ाई अभी पूरी नहीं हुईं हैं मुझे और आगे पढ़ना है।।
पापा : उनको सब पता है और वे लोग सब बातों के लिए राजी है। जब तक तुम पढ़ना चाहो पढ़ सकते हो वो रुकने को तैयार है अब तो ठीक है।।
अब विधि के पास कहने के लिए कुछ
नहीं था। शादी के लिए मना करें तो कैसे करें उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था...
अंश की बात भी अभी ऐसे अचानक नहीं बता सकती थी, लेकिन बतानी भी जरूरी थी ऐसे बहुत सारे सवाल उसे दिमाग में चल रहे थे।।।
क्रमश:........