Mr. Ms. Fake - Episode 13 in Hindi Comedy stories by kajal jha books and stories PDF | Mr. Ms. Fake - एपिसोड 13

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Mr. Ms. Fake - एपिसोड 13

Mr. & Ms. Fake

Episode 13 – The Rain Date

रात के लगभग साढ़े नौ बजे...

पार्टी खत्म हो चुकी थी।

सिंह हाउस के बाहर मेहमान एक-एक करके जा रहे थे।

आर्यवीर अपनी कार निकालने ही वाला था कि दादी ने आवाज़ दी—

"आर्य!"

"जी दादी?"

"सान्वी को इतनी रात में अकेले मत भेजना। उसे घर छोड़कर आना।"

सान्वी तुरंत बोली—

"दादी, मैं कैब से चली जाऊँगी।"

दादी ने प्यार से उसकी ठोड़ी उठाई।

"जब हमारा पोता साथ है, तो कैब की क्या ज़रूरत?"

सान्वी मुस्कुरा दी।

"ठीक है, दादी।"

कार सड़क पर दौड़ रही थी।

दोनों चुप थे।

रेडियो पर धीमा-सा रोमांटिक गाना बज रहा था।

सान्वी ने खिड़की के बाहर देखते हुए कहा,

"तुम्हारा परिवार... बहुत अलग है।"

आर्यवीर मुस्कुराया।

"अच्छे या बुरे?"

"बहुत अच्छे।"

कुछ पल रुककर वह बोली—

"इतना अपनापन... मैंने बहुत समय बाद महसूस किया।"

आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।

उसकी आँखों में पहली बार हल्की-सी उदासी थी।

"तुम्हारे घर में कौन-कौन है?"

सान्वी कुछ सेकंड चुप रही।

फिर धीरे से बोली—

"बस... पापा।"

"और माँ?"

सान्वी ने बाहर देखते हुए कहा,

"मैं दस साल की थी... तब उनका एक्सीडेंट हो गया था।"

आर्यवीर का दिल भर आया।

"आई एम सॉरी..."

सान्वी हल्का-सा मुस्कुरा दी।

"अब आदत हो गई है।"

तभी...

गर्रर्र...!

आसमान में तेज़ बिजली चमकी।

कुछ ही सेकंड में मूसलाधार बारिश शुरू हो गई।

वाइपर पूरी स्पीड से चल रहे थे।

सड़क लगभग दिखाई नहीं दे रही थी।

आर्यवीर ने कार एक छोटे-से ढाबे के सामने रोक दी।

"बारिश थोड़ी कम हो जाए, फिर चलते हैं।"

दोनों कार से उतरकर टीन की छत वाले ढाबे के नीचे आ गए।

ढाबे वाला मुस्कुराया।

"भैया-भाभी, चाय दूँ?"

दोनों एक साथ बोले—

"हम पति-पत्नी नहीं हैं!"

ढाबे वाला हँस पड़ा।

"अच्छा... अभी नहीं होंगे। शादी के बाद फिर आ जाना।"

पास बैठे लोग भी हँसने लगे।

सान्वी धीरे से फुसफुसाई—

"जहाँ जाते हैं, सब हमें पति-पत्नी ही समझ लेते हैं।"

आर्यवीर हँसते हुए बोला—

"लगता है हमारी एक्टिंग बहुत अच्छी है।"

दोनों ने कुल्हड़ वाली गरम चाय ली।

बारिश लगातार हो रही थी।

अचानक सामने कुछ बच्चे बारिश में भीगते हुए नाचने लगे।

एक छोटा लड़का फिसलकर गिर गया।

सान्वी तुरंत दौड़कर उसके पास पहुँची।

"अरे... लगी तो नहीं?"

उसने बच्चे को उठाया, उसके कपड़े झाड़े और मुस्कुराकर कहा—

"हीरो लोग रोते नहीं।"

बच्चा मुस्कुरा दिया।

आर्यवीर दूर खड़ा यह सब देख रहा था।

उसके चेहरे पर अनजानी मुस्कान थी।

"ये लड़की सिर्फ़ अच्छी एक्टर नहीं... बहुत अच्छा इंसान भी है..."

कुछ देर बाद...

बारिश थोड़ी हल्की हुई।

दोनों वापस कार की तरफ बढ़े।

तभी सान्वी का पैर कीचड़ में फिसल गया।

"आह!"

वह गिरने ही वाली थी कि आर्यवीर ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया।

इस बार वह पूरी तरह उसकी बाँहों में आ गई।

दोनों की आँखें मिलीं।

बारिश की बूँदें...

ठंडी हवा...

और कुछ पल की ख़ामोशी...

सान्वी की धड़कनें तेज़ हो गईं।

आर्यवीर भी उसे देखता रह गया।

तभी पीछे से ढाबे वाला ज़ोर से बोला—

"अरे भैया! फ़िल्म बाद में शूट करना... पहले छाता ले जाओ!"

दोनों एकदम अलग हो गए।

सान्वी शर्म से लाल हो गई।

आर्यवीर हँसी रोकने लगा।

दोनों फिर से हँस पड़े।

उसी समय...

सड़क के दूसरी तरफ़ एक काली कार खड़ी थी।

उसके अंदर बैठी रिया यह सब देख रही थी।

उसने अपने मोबाइल से दोनों की तस्वीर खींच ली।

"अब समझ आया..."

"...ये रिश्ता सिर्फ़ कॉन्ट्रैक्ट नहीं रहा।"

उसने किसी को फोन लगाया।

"कल सुबह सिंह हाउस में पहुँच जाना।"

"जो फाइल मैंने दी है... वही लेकर आना।"

फोन के दूसरी तरफ़ से जवाब आया—

"ठीक है मैडम।"

रिया ने मोबाइल बंद किया और धीमे से मुस्कुराई।

"अब देखते हैं..."

"...जब पूरे परिवार के सामने सान्वी के कॉन्ट्रैक्ट की सच्चाई आएगी, तब ये प्यार कैसे बचता है।"

उधर...

आर्यवीर ने सान्वी को उसके घर के सामने छोड़ा।

जाते-जाते उसने कहा,

"गुड नाइट।"

सान्वी मुस्कुराई।

"गुड नाइट... और..."

"आज की चाय मेरी तरफ़ से थी।"

आर्यवीर हँस पड़ा।

"अगली बार कॉफी मेरी तरफ़ से।"

सान्वी ने पहली बार बिना सोचे कहा—

"पक्का।"

वह घर के अंदर चली गई।

लेकिन दरवाज़ा बंद करने से पहले उसने एक बार फिर पीछे मुड़कर देखा।

आर्यवीर की कार अभी भी वहीं खड़ी थी।

दोनों मुस्कुरा दिए।

उन्हें पता नहीं था...

कि अगली सुबह उनकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी परीक्षा उनका इंतज़ार कर रही थी।