Muhabbat Ek Sabaq - 21 in Hindi Love Stories by Afariya Faruqui books and stories PDF | Muhabbat Ek Sabaq - 21

Featured Books
  • نیم بسمل

    حرف آغاز بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَنِ الرَّحِيمِجب درخت سے آخر...

  • शायद उसी दिन मैं मर गया

    शायद उसी दिन मैं मर गयालगता है जैसे मेरा सपना मुकम्मल हो गया...

  • Safar e Raigah - 19

    منظر ۔آیت نے دھیرے سے اپنے کمرے کا دروازہ کھولا اور اندر داخ...

  • والدین کے فرائض

    والدین کے فرائضتحریر۔شاہد شکیلوالدین اور اولاد کا رشتہ محض خ...

  • زندگی کی صلیب

    حالات خدا کی حوصلہ افزائی سے، میں نے اپنے حالات بدل لیے ہیں۔...

Categories
Share

Muhabbat Ek Sabaq - 21

लगभग सब ही लोग उसको उसके इसी निक नेम से बुलाते थे सिर्फ चुनिंदा लोग या फिर फील्ड में वह अपने पूरे नाम से जाना जाता था। लेकिन अपना यह निक नेम उसे आज से पहले इतना खूबसूरत कभी नही लगा था जितना आज उसके मुंह से लग रहा था। 

"हैलो , कहां खो गये "...???

उसने उसकी आँखों के आगे हाथ हिला कर पूछा तो वह कुछ शर्मिंदा सा हो गया। 

"जी, नही कुछ नहीं, बताएं क्या कह रही थीं आप" ....?? 

"यह देखें और बताएं कैसे हैं"??

उसने दूसरे हाथ में पकड़े ड्रैसेस आगे किये थे। 

"मैं "...??

उसने कुछ हैरानी से उसकी तरफ देखा। 

"जी हां , तो और कौन शेरी है यहीं जिस से मैं पूछुं यह" ...??? 

"सॉरी, लेकिन मुझे इस क़िसम का कोई एक्सपीरिएंस नही है इसलिए जो आपको बेहतर लगे वह ले लें"....???

उस ने माज़रत (सॉरी) की थी। 

"यह मैं अपने लिये नहीं , फुप्पो के लिये ले रही हूं। और इसीलिये आप से पूछा भी है। क्योंकि मुझ से ज़्यादा आप को उन के टेस्ट का अंदाज़ा है" ....... 

वह दो तीन ड्रैसेज़ हाथ में लिये सब पर नज़र डालती बोली। 

"लेकिन अम्मी के लिये क्यों "....??

उसने कुछ ना समझी से पूछा। 

"ऐसे ही , मैं घर पर भी कभी मार्केट जाती हूं तो अम्मी के लिये कुछ ना कुछ ज़रूर खरीद कर लाती हूं" .......

वह सब सूटस पर नज़र डालते हुए कुछ सोचते हुए बता रही थी। 

शहरयार को खुद पर शर्मिंदगी हुई। 

उसने कभी खुद से माँ के लिए कुछ नही खरीदा था। जबकि वह हमेशा उसकी हर छोटी बड़ी बात का ख्याल रखती थीं। उस से जुड़ी हर चीज़ उन्हें याद रहती उसके हर मौक़े पर चाहे वह रिज़ल्ट हो या उसका बर्थ डे या और कोई भी ओकेजन , वह कभी उसके लिये तोहफा लाना नही भूलतीं लेकिन आज एहसास हो रहा था कि वह बाप की वजह से हुई महरूमियों की वजह से माँ को बिलकुल भूल ही गया था। उसने यह तक नही सोचा कि उनके भी तो वह एकलौती औलाद है , उसके रवैये पर उन्हें कैसा महसूस होता होगा। 

वह जी भर कर खुद पर शर्मिंदा हुआ था। 

"यह ले लीजिए "

उसने पीच कलर का ऐक खूबसूरत सा नफीस (सोबर) सूट उठा कर शिफ़ा को पकड़ाया था। 

"वॉव ब्यूटीफुल" !!!! 

वह उसकी पसंद की क़ायल हो गई थी। 

"सूट को ले कर वह अब बॉयज़ सेक्शन की तरफ बढ़ी थी" 

"यहां से क्या लेना है आपको"...??? 

शहरयार ने कुछ हैरानी से पूछा। 

"अब बारी है आपके लिये ड्रैस सेलेक्ट करने की" 

 वह मुस्कुरा कर अंदर की जानिब बढ़ गई। 

"लेकिन मेरे लिये क्यों" ???

वह बेइंतेहा खुश होने के साथ साथ हैरान भी था। 

"क्यों मतलब क्या ,कल आपका बर्थ डे है ना" ...??? 

वह पता नहीं बता रही थी या पूछ रही थी। 

"आपको कैसे मालूम है ,अम्मी ने बताया होगा" ?? 

उस ने खुद सवाल कर के खुद ही जवाब दे दिया। 

"जी" ....

वह शॉर्टस सा जवाब देते हुए कई सारी शर्ट्स और जींस ले कर उसकी तरफ आई थी। 

"लगा कर दिखाएं यह" ....

उसने एक शर्ट उसकी साइड बढ़ाई तो वह हैरानी और खुशी की मिली जुली कैफ़ियत में उसके हाथ से शर्ट ले कर मिरर में देखते हुए लगा कर ट्राई करने लगा था। 

काफ़ी सारी शर्टस ट्राई करने के बाद उसको दो पसंद आ गईं। 

"यह फाइनल कर दें" ...???

उसने उस से पूछा। 

"ओके" !!! 

वह वॉलेट पॉकेट से निकालते हुए बोला था। 

शॉपिंग करने के बाद वह बाहर निकले तो सामने आइस क्रीम पार्लर था। 

"क्या ख्याल है आइस क्रीम खा ली जाए अगर" ....???

आज शहरयार खामोशी के साथ उसकी सारी बातें मान रहा था तो यही मौक़ा उसे सही लगा था अपनी बात मनवाने का। 

"आप चलें मैं सामान गाड़ी रख कर आता हूं"....

वह एक बार फिर खामोशी के साथ उसकी बात मान गया था। 

वह वापस आया तो आइस क्रीम सर्व की जा चुकी थी। 

"कल के सेलिब्रेशन का क्या सोचा है आपने" ??

उसने आइस क्रीम खाते हुए पूछा। 

"सेलिब्रेशन नही करता हूं मैं , हम सिर्फ फ्रैंज़ लोग बाहर कहीं हो आते हैं ट्रीट मेरी साइड से हो जाती है" . . . . . .

. वह अपने होश में शायद पहली बार किसी लड़की से बिना किसी उलझन के इतमीनान और तफ़सील के साथ बात कर रहा था। 

"आपने फुप्पो की परेशानी को नोटिस किया है" ???

उसने दोबारा बात शुरू की। 

"जी हां , लेकिन मैंने उन्हें मना किया हुआ है कि वह बे वजह परेशान ना हुआ करें" !!!! 

"शेरी मना करने वाली क्या बात है। माँ हैं वह आपकी, टेंशन तो होगी ना उन्हें और आप खुद देखें ना क्या रूटीन हो रही है आपकी। पूरा पूरा दिन अकेले रूम में बैठे हो जाता है और अब तो आप दोस्तों की तरफ भी नही जा रहे हैं अपने"...... 

उसने अपनी बात कह कर उसकी तरफ देखा। 

"आपको किसने कहा यह" ...??

उसने शिफ़ा की आखिरी बात पर चौंक कर उस की तरफ देखा था। 

"कल घर के लैंड लाइन पर कॉल आया था आप के फ्रेंड यासिर का उन्होंने बताया कि ना तो आप उनका कॉल रिसीव कर रहे हैं और सब दोस्तों से मिले हुए भी काफ़ी वक़्त हो गया है आपको" 

उस ने अपनी बात की क्लीयरिफिकेशन दी। 

"ठीक है मैं कर लूंगा बात उस से" ........

शहरयार ने बात खत्म करने के लिये जवाब दिया। 

"और फुप्पो का क्या" ??? 

"अम्मी को आप समझाएं प्लीज़ कि वह मेरी तरफ से बेफिक्र हो जाएं मैं बिलकुल ठीक हूं। परेशानियां वक़्त के साथ साथ जाती हैं मैं भी ठीक हो जाउंगा खुद ही" ......... 

उसने अपनी तरफ से उसे इतमीनान दिलाने की पूरी कोशिश की या फिर वह खुद को समझा रहा था। 

"जो भी है , आप प्लीज़ उन के सामने नॉर्मल रहें वरना उनको टेंशन होती है तो फिर उनका बी पी हाई हो जाता है" ........

उस के लहजे में फुप्पो के लिये बे इंतेहा मुहब्बत थी। 

शहरयार एक बार फिर अपनी क़िसमत पर मातम कर के रह गया। 

"आप बताएं क्या करूं मैं ऐसा कि उन की टेंशन दूर हो जाए" ....???

आइसक्रीम खाने के बाद वह टिशू से हाथ साफ करता हुआ पूछने लगा था। 

"कल तो आप यह करें कि वह आप की बर्थडे का फंक्शन करना चाह रही हैं , तो आप उन को मना नही करें इस से उन को भी लगेगा कि आप खुश हैं" ............

उस ने बात पूरी की। 

"ठीक है जैसा आप लोगों को ठीक लगे वह करें। लेकिन प्लीज़ मेक श्योर कि ज़्यादा गैदरिंग नही हो मुझे उलझन होती है "..........

वह खड़े होते हुए बोला। 

"ओके चलें " .....

वह भी साथ ही खड़ी हो गई। 

"स्टॉप स्टाप "

शिफ़ा ने एक जगह गाड़ी रूकवाई। 

"यहाँ से क्या लेना है "??? 

उसने स्पीड कम करते हुऐ कार साइड में लगाई थी। 

"दादू की मैडिसिन्स खत्म हो रही थीं यह। वहां मैडिकल स्टोर से ले लें प्लीज़"…. . …

उसने बाहर की तरफ सामने बने मैडिकल स्टोर की तरफ ई़शारा किया। 

"परेस्क्रिप्शन दें" 

वह सीट बैल्ट हटाते हुए कहने लगा। 

"परेस्क्रिप्शन नहीं है वह तो मैं कल जब उनको मैडिसिन्स दे रही थी , तो जो खत्म हो गई थी मैंने पिक्चरज़ फोन में ले ली थी उन सब की

उसने बताया तो शहरयार ने एक बार फिर उस की तरफ देखा था। 

"मतलब आप खुद से ले जा रही हैं"….. .? ???

वह लड़की अपने हर काम से शहरयार अहमद को हैरान कर रही थी। 

"जी हाँ फुप्पो से पूछ लिया था मैंने कि यह चेंज तो नही होनी है तो वह कहने लगीं कि यह वाली मैडिसिन्स रेगुलर चलती हैं उनकी 

उसके बताने पर वह ऐक बार फिर दिल से उसकी अक़्लमंदी का कायल हो गया। 
☆ ☆ ☆

दरवाज़ा नॉक हो रहा था। 

"इस वक़्त कौन है" ???? 

उसने वक़्त देखा घड़ी रात के बारह बजा रही थी वह उठ कर दरवाज़ा खोलने लगा। 

"आप , इस वक़्त" … ??

दरवाज़े के दूसरी तरफ खड़ी शिफ़ा को देख कर वह हैरान हुआ था

"मैनी मैनी हैप्पी रिटर्न्स ऑफ यौर बर्थ डे" 

उसने विश किया।