The Truth Behind the Mask in Hindi Love Stories by Ritu kumari books and stories PDF | प्यार का जाल - 7

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प्यार का जाल - 7

तस्वीर देखते ही रिया के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगीं। जो आँखें अब तक मासूमियत और चंचलता से छलकती थीं, उनमें अब साफ़ तौर पर डर और पकड़े जाने की बौखलाहट दिख रही थी। कैफे का खुशनुमा माहौल आरव के लिए एक दमघोंटू सन्नाटे में बदल चुका था। बाहर बारिश तेज़ हो रही थी और कांच की खिड़कियों पर टकराती बूंदें किसी खतरे की घंटी जैसी लग रही थीं।
आरव ने ठंडी और सख्त आवाज़ में दोबारा पूछा, "अब भी कुछ कहना बाकी है, रिया? या फिर तुम्हारा असली नाम भी कुछ और है?"
रिया ने एक गहरी सांस ली। उसने इधर-उधर देखा, फिर अपनी कांपती उंगलियों से टेबल पर रखे पानी के ग्लास को छुआ। उसका सारा आत्मविश्वास ताश के पत्तों की तरह बिखर चुका था। उसने अपनी आँखें झुका लीं और बहुत धीमी आवाज़ में बोली, "मेरा नाम रिया ही है, आरव... लेकिन तुमने जो देखा, वह सच है। मैं विक्रम मेहरा के लिए काम करती हूँ।"
आरव को लगा जैसे किसी ने उसके सीने में खंजर घोंप दिया हो। सच सुनना, शक करने से कहीं ज़्यादा दर्दनाक था। आरव ने अपनी मुट्ठियाँ भींच लीं। "क्यों, रिया? आखिर मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था? तुमने मेरे प्यार का, मेरे भरोसे का इस्तेमाल उस इंसान के लिए किया जो देश के करोड़ों रुपये डकार कर बैठा है?"
रिया की आँखों में आँसू छलक आए, लेकिन इस बार आरव का दिल पिघलने वाला नहीं था। रिया ने अपनी थराती आवाज़ में कहना शुरू किया, "आरव, मेरे पास कोई रास्ता नहीं था। विक्रम मेहरा ने मेरे छोटे भाई को अपने जाल में फँसा रखा है। उस पर भारी कर्ज़ का झूठा इल्ज़ाम लगाकर उसे जेल भिजवाने और जान से मारने की धमकियाँ दी जा रही हैं। विक्रम को पता चला कि तुम्हारी कंपनी उसके घोटाले का डिजिटल फॉरेंसिक ऑडिट कर रही है और उस डेटा की मुख्य चाबी (Access Key) तुम्हारे पास है। उसने मुझे शर्त दी थी—अगर मैं तुमसे वह डेटा लाकर दे दूँ, तो वह मेरे भाई को छोड़ देगा।"
आरव ने अविश्वास से सिर हिलाया। "और इसके लिए तुमने मुझे चुना? मुझसे प्यार का झूठा नाटक किया?"
"पहली मुलाकात वाकई इत्तेफ़ाक़ थी, आरव!" रिया ने रोते हुए आरव का हाथ पकड़ने की कोशिश की, लेकिन आरव पीछे हट गया। रिया ने गिड़गिड़ाते हुए कहा, "शुरुआत में मैं सिर्फ विक्रम के कहने पर तुम्हारे करीब आई थी, लेकिन जैसे-जैसे तुम्हें जाना... मुझे सच में तुमसे प्यार हो गया। मैं हर पल इस अपराधबोध (Guilt) में जी रही थी। मैं कल रात तुम्हें सब बताने ही वाली थी, लेकिन विक्रम के आदमियों ने मुझे रोक लिया।"
आरव चुपचाप रिया की बातें सुन रहा था। उसका दिमाग दो हिस्सों में बँट चुका था। एक तरफ रिया की आँखों के आँसू थे जो सच्चे लग रहे थे, तो दूसरी तरफ वह खौफनाक सच था कि उसकी वजह से आरव का पूरा करियर और ज़िंदगी दांव पर लग चुकी थी।
"अगर तुम सच बोल रही हो, तो कल रात मेरी आईडी से डेटा लीक करने की कोशिश किसने की?" आरव ने तीखे लहजे में सवाल किया।
रिया चौंक गई। उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। "डेटा लीक? नहीं आरव, मैंने तुम्हारे लैपटॉप या फोन को कभी हाथ नहीं लगाया! मैंने विक्रम को साफ मना कर दिया था कि मैं तुम्हारे साथ धोखा नहीं कर सकती। इसीलिए उसने मुझे डराने के लिए कल रात रोके रखा था।"
आरव के दिमाग में अचानक एक नया धमाका हुआ। अगर रिया ने डेटा डाउनलोड नहीं किया, तो फिर वह अनजान मैसेज भेजने वाला और कंपनी के सर्वर से डेटा चुराने वाला तीसरा इंसान कौन था? क्या यह जाल सिर्फ आरव के लिए नहीं, बल्कि रिया और आरव दोनों के लिए बिछाया गया था?