Prime Minister's joke in Hindi Magazine by Virendra Dewangan books and stories PDF | प्रधानमंत्री का मजाक

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प्रधानमंत्री का मजाक

देश के करोड़ों मतदाताओं के द्वारा चयनित प्रधानमंत्री की मिमीक्री! वो भी नेता प्रतिपक्ष के द्वारा!! सर्वथा निंदनीय कृत्य है। इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी को लेकर प्रधानमंत्री की ओछी मिमीक्री वही मतिहीन शख्स कर सकता है, जो निहायत ही घटिया सोच, हद दर्जे का ओछा, तुच्छ मानसिकता का हो।

वह भी उस प्रधानमंत्री का, जिसने देश में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, देशभक्ति, विकास व विश्वास की लहर पैदा करके हर सच्चे भारतीय के ह्दय में देशप्रेम की भावना का बीजारोपण कर दिया है।

जिसने ढीठ पाकिस्तान का टेंटुआ दबाकर आतंकवाद पर न केवल नकेल कसा है, वरन् नक्सलवाद का समूल नाश करवा दिया है। उसने सर्जिकल समेत एयर स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर करके व सिंधु जल समझौते को रद्द करते हुए पाकिस्तान जैसे बिगडैल पड़ोसी को ऐसा सबक सिखाया है कि वह भारत के नाम से खौफ खाने लगा है।

जिस प्रधानमंत्री ने अपने 12 साल के कार्यकाल में जितने शौचालयों का निर्माण, एयरपोर्ट, रेल्वे स्टेशन व रेलगाड़ियों का कायाकल्प, विधुत उत्पादन, रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता व सैन्यशक्ति में वृद्धि, मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, एक्सप्रेसवे व हाईवे, अर्थव्यवस्था का उन्ययन, बंदरगाह का विकास व नवनिर्माण करवाया है, उतने तो आजादी के बाद की सरकारों ने अपने 68-70 साल में भी नहीं किया है।

उसने नोटबंदी करके भारत में आर्थिक अस्थिरता फैलानेवाले देशद्रोहियों के मंसूबों को तार-तार कर दिया है। उसने जन-धन खाता जीरों चार्ज में खुलवा कर हर उस गरीब भारतीय को सीधे बैंकिग प्रणाली से जोड़ दिया है, जो कभी बैंक की दहलीज नहीं लांधे थे। इसी वजह से आज भारत डिजिटल ट्रांजेशन में दुनिया में अव्वल बन गया है।

यह वह प्रधानमंत्री है, जो कोरोना संकट का सामना बड़ी चतुराई से किया और देश को बहुत बड़े संकट से न सिर्फ उबार दिया, अपितु विदेशों में सहायता पहुंचाकर उनके दिलों में भारतीयों के लिए जगह बनवा दिया।

मिमीक्री करते वक्त क्या नेता प्रतिपक्ष को यह नहीं सूझा कि इसी प्रधानमंत्री की बदौलत जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 से मुक्ति मिली और जम्मू-कश्मीर देश के मुख्यधारा में समाहित हो गया है?

उसने न केवल तीन तलाक को समाप्त करवाकर मुस्लिम माताओें व बहनों को सम्मानजनक जीवन जीने का हक दिलवाया, वरन् सीएए लागू करके उन लाखों हिंदुओं, सिखों, जैनियों, बौद्धों, पारसियों को नागरिकता दिलवाया, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से भारत देश को अपना समझकर यहां शरण लिए थे।

वक्फ बोर्ड में व्यापक संशोधन भी उनकी बड़ी उपलब्धि कही जा सकती है। वक्फ बोर्ड उन मौकापरस्त मुसलमानों की जागिर बनी हुई थी, जो अपनी दुकानदारी चला रहे थे और देश की लाखों एकड़ जमीनों व परिसंपत्तियों पर अवैध कब्जा कर अपनी तिजोरियां भर रहे थे।

‘वंदे मातरम’ की गरिमा को स्थापित करना उसकी एक और बड़ी उपलब्धि है। वो वंदे मातरम, जिसके तराने गाकर देश के रणबांकुरे आजादी की लड़ाई में हंसते-हंसते प्राणों की आहुति दे दिया करते थे। अब वंदे मारतम् ‘‘राष्ट्रीय गीत’’ का दर्जा प्राप्त कर चुका है और इसका सम्मान करना कानूनन जरूरी हो गया है।

लगता है मिमीक्री करते वक्त ट्यूबलाइट नेता प्रतिपक्ष भूल गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पार्टी को देश के करोड़ों मतदाताओं ने चुना है। तभी वे देश के तीसरी मर्तबा प्रधानमंत्री बने हैं। बहुमत से चुने हुए प्रधानमंत्री की ओछी मिमीक्री जनभावना व जनादेश का अपमान नही ंतो और क्या है?

हां, यह संभव है कि प्रधानमंत्री से कुछ गलतियां हो सकती हैं, लेकिन उनकी नीति व नीयत में खोट कतई नहीं है। उनके 12 साल के शासनकाल में उनकी सरकार पर भ्रष्टाचरण व भाई-भतीजावाद का एक भी आरोप नहीं लगा है। यही वजह है कि उनकी पार्टी उनके नेतृत्व में एक के बाद एक राज्यों में जीत हासिल करती जा रही है।

नेता प्रतिपक्ष शायद यह भूल रहे हैं कि नरेंद्र मोदी को जब-जब गाली (दर्जनों की संख्या में) दिया गया, तब-तब वे जहां दोगुने उत्साह व उल्लास से आगे बड़े हैं, वहीं देश का मतदाता गालीबाजों व उनके साथ बदतमीजी करनेवालों को वोट के माध्यम से सबक सिखाता आ रहा है। वस्तुतः, वे जननेता होकर देश की आशाओं व अभिलाषाओं के प्रतिबिंब बन चुके हैं।

विरोधियों की आलोचनाओं के बावजूद उनकी लोकप्रियता दिन दुनी रात चौगुनी बढ़ रही है। पर, विपक्षियों को इतिहास से कोई सबक सीखना नहीं है, इसीलिए उनकी पार्टियों की दुर्गति हुई जा रही है।

नेता प्रतिपक्ष की मिमीक्री को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसलवाल ने कहा है,‘‘भारत-इटली के संबंध मजबूत हैं। दोनों देशों की मित्रता और रिश्तों को हमेशा आदरपूर्ण दायरे में रखना जरूरी है।’’

वहीं, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है,‘‘ नेता विपक्ष ने जो बातें कहीं हैं, वो अत्यंत निम्नस्तरीय है। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में मैंने किसी भी नेता प्रतिपक्ष का ऐसा अभद्र और अकल्पनीय व्यवहार कभी नहीं देखा है। ऐसा आचरण देश में स्वस्थ लोकतंत्र के लिए एक गंभीर खतरे का संकेत है।’’

सांसद व भाजपा के धांसू प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा है,‘‘अब कंुठा में वह सभी पराकाष्ठाओं को पार करते चले जा रहे हैं।’’
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