अध्याय 1: वह कंचा जो लुढ़कना नहीं चाहता था
निको को चीज़ें इकट्ठा करने का बहुत शौक था।
लेकिन वह बाकी बच्चों जैसा संग्रहकर्ता नहीं था।
उसके दोस्त डाक टिकट, चमकीले पत्थर, सिक्के और खिलौने जमा करते थे।
निको कुछ और ही इकट्ठा करता था।
वह इकट्ठा करता था—“लगभग।”
वह काम जो लगभग पूरा हुआ था।
वह सपना जो लगभग सच हुआ था।
वह गीत जिसका आखिरी सुर लगभग गाया गया था।
वह माफ़ी जो लगभग माँगी गई थी।
और वह साहस जो लगभग जुटाया गया था।
उसके कमरे में एक छोटी-सी लकड़ी की पेटी थी।
उस पर उसने खुद लिखा था—
“वे चीज़ें जो लगभग हो गई थीं।”
एक दिन उसे सड़क किनारे एक चमकीला चाँदी का कंचा मिला।
उसने उसे उठाया।
कंचा बिल्कुल गोल था।
सुंदर था।
लेकिन अजीब बात यह थी कि वह लुढ़कता नहीं था।
निको ने उसे मेज़ पर रखा।
कंचा थोड़ा आगे बढ़ा…
फिर रुक गया।
उसने ज़ोर से धक्का दिया।
कंचा फिर थोड़ा आगे गया…
फिर रुक गया।
“तुम भी एक Almost हो,” निको ने मुस्कुराकर कहा।
उस रात कंचा चमकने लगा।
और पहली बार…
उसके कमरे की दीवार पर एक छोटा-सा दरवाज़ा दिखाई दिया।
अध्याय 2: शायद से भरी जेब
दरवाज़ा बहुत छोटा था।
इतना छोटा कि निको उसमें से रेंगकर ही जा सकता था।
उसने दरवाज़ा खोला।
दूसरी तरफ एक लंबा गलियारा था।
दीवारों पर सैकड़ों दरवाज़े थे।
एक दरवाज़े के ऊपर लिखा था—
“वह गीत जो कभी पूरा नहीं हुआ।”
दूसरे पर—
“वह दोस्ती जो लगभग शुरू हुई।”
तीसरे पर—
“वह बच्चा जो लगभग उड़ गया।”
निको ने आश्चर्य से आँखें फैला दीं।
तभी पीछे से किसी ने कहा—
“तुम देर से आए हो।”
निको घूम गया।
वहाँ एक छोटी चाँदी जैसी लोमड़ी खड़ी थी।
उसकी पूँछ बादल जैसी सफेद थी।
“तुम कौन हो?” निको ने पूछा।
“मेरा नाम क्विल है।”
“और यह जगह?”
लोमड़ी मुस्कुराई।
“यह Almosts का हॉल है।”
अध्याय 3: इंतज़ार करती घड़ी
क्विल निको को एक पुराने कमरे में ले गया।
कमरे के बीच में एक बड़ी पीतल की घड़ी थी।
उसमें कोई नंबर नहीं थे।
सिर्फ शब्द थे—
शायद।
कभी।
फिर से।
कल।
घड़ी अचानक टिक-टिक करने लगी।
उसकी सुइयाँ घूमीं और एक शब्द पर रुक गईं—
ध्यान दो।
निको ने धीरे से पूछा,
“किस चीज़ पर?”
घड़ी ने कोई उत्तर नहीं दिया।
लेकिन कमरे की दीवार पर एक तस्वीर चमकने लगी।
एक लड़की बादलों के बीच कूद रही थी।
वह उड़ना चाहती थी।
वह लगभग उड़ गई थी।
लेकिन डर गई।
तस्वीर धुँधली हो गई।
निको ने पूछा,
“क्या मैं उसकी मदद कर सकता हूँ?”
क्विल ने कहा,
“यही तो तुम्हारा काम है।”
अध्याय 4: वह लड़की जो लगभग उड़ गई थी
लड़की का नाम लिनी था।
वह एक छोटी-सी मशीन बनाती थी।
पंखों वाली मशीन।
पहले उसने लकड़ी के पंख बनाए।
फिर कागज़ के।
फिर पुराने साइकिल के पहिए लगाए।
हर बार मशीन गिर जाती।
लोग हँसते।
लिनी ने आखिरकार मशीन बनाना बंद कर दिया।
निको उसके पास गया।
“तुमने कोशिश करना क्यों छोड़ा?”
“क्योंकि मेरी मशीन कभी उड़ती नहीं।”
निको ने मशीन को देखा।
“क्या तुमने उसे फिर से बनाया?”
“नहीं।”
“तो तुम्हें कैसे पता कि वह कभी नहीं उड़ेगी?”
लिनी चुप रही।
उसने फिर मशीन उठाई।
उस दिन मशीन नहीं उड़ी।
दूसरे दिन भी नहीं।
तीसरे दिन…
वह तीन सेकंड के लिए हवा में उठी।
लिनी की आँखें चमक उठीं।
“मैं उड़ गई!”
निको हँस पड़ा।
“नहीं।”
“तुमने कोशिश करना सीख लिया।”
अध्याय 5: वह दरवाज़ा जो सिर्फ एक बार खुलता था
एक दिन निको को एक ऐसा दरवाज़ा मिला जिस पर कोई नाम नहीं था।
क्विल ने उसे रोक दिया।
“इसे मत खोलना।”
“क्यों?”
“क्योंकि यह दरवाज़ा सिर्फ एक बार खुलता है।”
निको ने धीरे से पूछा,
“अगर इसके पीछे कोई ऐसा हो जिसे मदद चाहिए?”
क्विल चुप हो गया।
दरवाज़ा अपने आप खुल गया।
अंदर एक छोटा कमरा था।
कमरे में एक बच्चा बैठा था।
उसके हाथ में एक पत्र था।
उसने कभी अपनी माँ से माफ़ी नहीं माँगी थी।
निको ने कहा,
“अभी भी देर नहीं हुई।”
बच्चे ने पत्र पूरा किया।
दरवाज़ा चमकने लगा।
और पहली बार निको समझा—
कुछ Almosts समय से नहीं, साहस से पूरे होते हैं।
अध्याय 6: वह शहर जो दूसरी बार मौका नहीं देता था
निको एक ऐसे शहर पहुँचा जहाँ कोई किसी को दूसरा मौका नहीं देता था।
अगर कोई गिरता—लोग कहते, “तुम असफल हो गए।”
अगर कोई गलती करता—“अब कभी मत करना।”
अगर कोई सपना देखता—“यह तुम्हारे लिए नहीं है।”
शहर के बीच एक विशाल घंटाघर था।
उसकी घंटी बजते ही हर व्यक्ति अपनी गलती भूल जाता।
लेकिन साथ ही…
वह उससे सीखने का मौका भी खो देता।
निको ने घंटी रोक दी।
शहर के लोग पहली बार अपनी पुरानी गलतियों को याद करने लगे।
एक आदमी रो पड़ा।
“मैंने बहुत गलतियाँ कीं।”
निको ने कहा,
“गलतियाँ आपकी कहानी का अंत नहीं हैं।”
“वे अगला अध्याय लिखना सिखाती हैं।”
उस दिन शहर में पहली बार दूसरा मौका मिला।
अध्याय 7: बादल नंबर सत्रह
निको बादलों के एक बाग में पहुँचा।
वहाँ हर बादल एक सपना था।
एक बादल पर लिखा था—
“एक दिन मैं गाऊँगा।”
दूसरे पर—
“एक दिन मैं यात्रा करूँगा।”
एक छोटा बादल अकेला था।
उस पर लिखा था—
“एक दिन मैं किसी का दोस्त बनूँगा।”
निको ने उसे छुआ।
बादल बारिश बनकर नीचे गिरा।
लेकिन वह साधारण बारिश नहीं थी।
जहाँ उसकी बूँदें गिरीं, वहाँ लोग एक-दूसरे से बात करने लगे।
एक अकेला बच्चा दूसरे बच्चे के पास गया।
“क्या हम दोस्त बन सकते हैं?”
बादल चमक उठा।
अध्याय 8: अधूरे गीतों का जंगल
जंगल में पेड़ों पर पत्तों की जगह संगीत के सुर उगते थे।
हवा चलती तो पूरा जंगल गाने लगता।
लेकिन हर गीत आखिरी सुर से पहले रुक जाता।
वहाँ एक बूढ़ा संगीतकार रहता था—मास्ट्रो रोवन।
उसने निको को बताया,
“अधूरा गीत भूला हुआ गीत नहीं होता।”
“वह बस किसी के अगले सुर का इंतज़ार करता है।”
अचानक काले कपड़े पहने तीन प्राणी जंगल में आए।
वे विशाल कैंची से संगीत के सुर काट रहे थे।
क्विल चिल्लाया,
“Dream Pruners!”
निको ने चाँदी की छोटी घंटी बजाई।
एक साफ़ सुर पूरे जंगल में फैल गया।
कटे हुए सुर वापस पेड़ों पर आ गए।
जंगल फिर गाने लगा।
अध्याय 9: वह लड़का जो लगभग अदृश्य हो गया था
स्कूल में निको ने एक लड़के को देखा।
उसका नाम थियो था।
कोई उससे बात नहीं करता था।
कोई उसे खेल में नहीं बुलाता था।
धीरे-धीरे लोग उसे देखना ही भूलने लगे।
वह लगभग अदृश्य हो रहा था।
निको ने उससे दोस्ती की।
थियो ने कहा,
“मुझे लगता है कि मैं किसी के लिए ज़रूरी नहीं हूँ।”
निको ने उत्तर दिया,
“किसी को याद किए जाने के लिए पहले खुद को मिटाना बंद करना पड़ता है।”
थियो ने फिर चित्र बनाना शुरू किया।
एक बच्चा उसके चित्र के पास रुका।
“यह बहुत अच्छा है।”
फिर दूसरा आया।
फिर तीसरा।
थियो फिर दिखाई देने लगा।
अध्याय 10: कभी न होने वाला बाज़ार
पूर्णिमा की रात निको Never Market पहुँचा।
वहाँ ऐसी चीज़ें बिकती थीं जो कभी नहीं होनी चाहिए थीं।
बिना गलती का जीवन।
कभी असफल न होने की गारंटी।
कभी दुखी न होने का वादा।
लोग उन्हें खरीद रहे थे।
लेकिन उनके चेहरों पर खुशी नहीं थी।
वहाँ निको की मुलाकात एक रहस्यमय व्यक्ति से हुई।
उसका नाम था—
एलियास।
वह पहला Collector था।
उसने कहा,
“मैंने लोगों को दुख से बचाने की कोशिश की।”
“लेकिन मैंने उन्हें जीवन से भी बचा दिया।”
अध्याय 11: खाली पन्नों की लाइब्रेरियन
निको एक ऐसी लाइब्रेरी पहुँचा जहाँ सारी किताबें खाली थीं।
वहाँ की लाइब्रेरियन थी—मीरा।
उसने कहा,
“ये किताबें खाली नहीं हैं।”
“इनमें वे कहानियाँ हैं जो अभी लिखी नहीं गईं।”
तभी Dream Pruners आए।
वे खाली किताबों को मिटाने लगे।
निको ने चाँदी की घंटी बजाई।
सभी पन्नों से सुनहरी रोशनी निकली।
कहानियाँ बच गईं।
फिर एक किताब निको के सामने आकर खुली।
उसके कवर पर लिखा था—
“लगभगों को इकट्ठा करने वाला बच्चा।”
निको चौंक गया।
“यह मेरी कहानी है?”
मीरा मुस्कुराई।
“हाँ।”
“लेकिन इसके आखिरी पन्ने खाली हैं।”
“क्योंकि तुम्हारा भविष्य अभी लिखा नहीं गया।”
अध्याय 12: वह नक्शा जो कल बनाता था
मीरा ने निको को एक जादुई नक्शा दिया।
उस पर देशों के बजाय संभावनाएँ बनी थीं।
पहली हँसी की घाटी।
एक और कोशिश का पहाड़।
बहादुर सवालों का पुल।
हर रास्ता किसी चुनाव से बनता था।
फिर नक्शे पर एक धूसर धब्बा फैलने लगा।
“यह क्या है?”
मीरा बोली,
“Silence।”
“जब लोग सपने देखना बंद कर देते हैं, यह बढ़ता है।”
निको ने नक्शे पर अपने शहर को देखा।
वहाँ भी धूसर रंग फैल रहा था।
अध्याय 13: ‘अगर’ की नदी
निको एक चमकती नदी के पास पहुँचा।
उसका नाम था—
What-If की नदी।
इस नदी में हर लहर एक संभावना दिखाती थी।
“अगर मैं असफल हो गया तो?”
निको ने पूछा।
नदी ने उसे दिखाया—
वह गिरा…
फिर उठा।
“अगर लोग मुझ पर हँसे तो?”
नदी ने दिखाया—
कुछ लोग हँसे।
लेकिन किसी और बच्चे ने उसकी हिम्मत देखकर अपना सपना शुरू किया।
नदी के किनारे एक स्त्री रहती थी।
वह सवालों को तोड़ देती थी।
निको ने उससे पूछा,
“आपने सवाल पूछना क्यों छोड़ा?”
उसने कहा,
“क्योंकि मैं चोट नहीं खाना चाहती थी।”
निको ने मुस्कुराकर पूछा,
“अगर सवाल पूछना ही आपको फिर से खुश कर दे तो?”
उसकी आँखों में चमक लौट आई।
नदी फिर बहने लगी।
अध्याय 14: Almosts के हॉल का आखिरी दरवाज़ा
निको हॉल के सबसे अंत में पहुँचा।
वहाँ एक साधारण लकड़ी का दरवाज़ा था।
उसने दरवाज़ा खोला।
अंदर कोई खजाना नहीं था।
एक छोटा-सा बगीचा था।
वहाँ एक बच्चा बीज बो रहा था।
“ये क्या हैं?”
“पहली कोशिशों के बीज।”
उसने निको को एक चमकता बीज दिया।
“इसे तभी उगाया जा सकता है जब कोई निश्चितता के बजाय उम्मीद चुने।”
अचानक आकाश काला हो गया।
एक विशाल दरार खुली।
Silence वहाँ पहुँच चुका था।
अध्याय 15: पहला Collector
एलियास ने अपना पुराना जीवन निको को बताया।
वह कभी पहला Collector था।
वह सभी Almosts को बचाना चाहता था।
लेकिन धीरे-धीरे उसे लोगों की गलतियों से डर लगने लगा।
उसने सोचा—
अगर कोई असफल ही न हो…
तो कोई दुखी नहीं होगा।
इसलिए उसने लोगों से उनकी अनिश्चितता छीननी शुरू कर दी।
लेकिन उसने उनके सपने भी छीन लिए।
निको ने कहा,
“आपने उन्हें सुरक्षित रखा… लेकिन उन्हें जीने नहीं दिया।”
एलियास की आँखों में आँसू आ गए।
“मैं भूल गया था कि जीवन का मतलब सिर्फ सुरक्षित रहना नहीं है।”
अध्याय 16: जिस दिन दुनिया ने चुनाव करना बंद कर दिया
एक दिन दुनिया के सामने दो रास्ते आ गए।
पहला था—
निश्चितता।
दूसरा—
कोशिश।
निश्चितता वाले रास्ते पर कोई गलती नहीं थी।
लेकिन वहाँ कोई नई खोज भी नहीं थी।
कोशिश वाले रास्ते पर गिरना था।
हँसी थी।
असफलता थी।
और नए सपने भी।
एलियास ने पहली बार अपना पुराना जादुई बीज आसमान में छोड़ दिया।
हजारों रोशनियाँ पूरी दुनिया में फैल गईं।
लोगों ने फिर से चुनाव करना शुरू किया।
किसी ने फिर चित्र बनाया।
किसी ने फिर गाना गाया।
किसी ने फिर दोस्ती की।
दुनिया जाग गई।
अध्याय 17: जब Almost उम्मीद बन गया
निको अपने शहर लौट आया।
सब कुछ पहले जैसा दिख रहा था।
लेकिन लोग बदल चुके थे।
एक बेकर नई रोटी बनाने की कोशिश कर रहा था।
पहली रोटी इतनी कठोर थी कि क्विल ने उसे दरवाज़े की तरह इस्तेमाल किया।
दूसरी जली हुई थी।
तीसरी…
स्वादिष्ट थी।
लिनी ने अपनी उड़ने वाली मशीन फिर बनाई।
थियो ने रोबोट बनाया।
एक लड़की ने कागज़ की नाव नदी में छोड़ी।
नाव उलट गई।
वह हँसी।
फिर उसने दूसरी बनाई।
निको समझ गया—
Almost कोई असफलता नहीं है।
Almost वह जगह है जहाँ अगली कोशिश जन्म लेती है।
अध्याय 18: वह बच्चा जिसने कल को जीवित रखा
समय बीतता गया।
निको बड़ा हुआ।
लेकिन उसने अपने Almosts को कभी नहीं भुलाया।
उसने एक नोटबुक बनाई।
उसके कवर पर लिखा—
“वे चीज़ें जिन्हें आज़माना चाहिए।”
उसने उसमें अपनी सारी यात्राएँ लिखीं।
लेकिन आखिरी पन्ना खाली छोड़ा।
किसी ने पूछा,
“अंत क्यों नहीं लिखा?”
निको मुस्कुराया।
“क्योंकि कहानी अभी चल रही है।”
कई साल बाद, एक छोटी लड़की उसके पास आई।
उसके हाथ में एक अजीब-सी मशीन का चित्र था।
उसमें पंख थे।
पहिए थे।
और एक बड़ा छाता भी।
लड़की ने कहा,
“यह शायद काम नहीं करेगा।”
निको ने चित्र देखा।
फिर मुस्कुराया।
“अच्छा है।”
लड़की हैरान हुई।
“अच्छा?”
“हाँ।”
“क्यों?”
निको ने आसमान की ओर देखा।
एक छोटा-सा चाँदी का पंख हवा में तैरता हुआ नीचे आया।
उसने उसे पकड़ लिया।
“क्योंकि सबसे अच्छी चीज़ें अक्सर एक सवाल से शुरू होती हैं।”
लड़की ने पूछा,
“कौन-सा सवाल?”
निको ने कहा—
“अगर?”
उस रात निको ने अपनी पुरानी पीतल की घड़ी देखी।
वह वर्षों से बंद थी।
अचानक—
टिक।
फिर—
टिक।
घड़ी की सुइयाँ चलने लगीं।
वे एक शब्द पर जाकर रुक गईं।
कल।
निको मुस्कुराया।
दुनिया अभी भी Almosts से भरी थी।
अधूरे सपने।
अधूरे गीत।
अधूरी दोस्तियाँ।
अधूरी कोशिशें।
लेकिन अब वह जानता था—
हर Almost को पूरा होना ज़रूरी नहीं।
कुछ Almost हमें सिखाते हैं।
कुछ हमें बदलते हैं।
कुछ हमें नई राह दिखाते हैं।
और कुछ…
हमें याद दिलाते हैं कि—
कल अभी तय नहीं हुआ है।
जब तक कोई बच्चा सवाल पूछने की हिम्मत रखता है…
जब तक कोई फिर से कोशिश करता है…
जब तक कोई सपना देखने से इनकार नहीं करता…
कल जीवित रहेगा।
और शायद…
कहीं किसी छोटे से कमरे में…
एक और बच्चा अपने डिब्बे में अपनी पहली Almost रख रहा होगा।
एक छोटी-सी चीज़।
एक बड़ी-सी उम्मीद।
और उसकी कहानी…
अभी शुरू ही हुई होगी।
समाप्त
लेकिन Almosts की कहानियाँ कभी सचमुच खत्म नहीं होतीं।