bank robbery in Hindi Thriller by Arun Singla books and stories PDF | बैंक रॉबरी

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बैंक रॉबरी

बैंक रॉबरी

आज इंडियन सेंट्रल बैंक की श्यामनगर की साखा में एक अजीब  किस्म का सन्नाटा छाया हुआ था, हालाँकि सुबह के ग्यारह बजे थे और क्योंकि साखा बाज़ार के बीच में स्थित थी तो इस  समय बैंक में ग्राहकों की भरपूर चहल पहल रहती थी, परुन्तु आज ना तो बैंक में ग्रहकों की भीड़ था ना ही कोई शोर सराबा था जो आमतोर पैर इस समय रहता था. और इसका कारण था कल ही इस बैंक के बशाखा में रॉबरी की घटना हुई थी और  वो भी दिन दिहाड़े हुई थी और तब से पुलिस कार्यवाई चल रही थी.

हुआ यूं था की कल सुबह जेसे ही बैंक के चीफ मेनेजर वरुण कंसल जल्दी जल्दी क्या लगभग दोड़ता हुआ बैंक के मेन डोर पहुंचा तो  तो उसके मुख से एक मोटी सी गाली निकली क्योंकि बैंक का मेन डोर अंदर से  बंद था, एक तो वह पहले हे लेट था दुसरे अब दरवाजा अंदर से बंद था . उसने दरवाजा खटखटाते हुए बैंक के आर्म्ड गार्ड शंकर को आवाज़ लगाईं पर अंदर से ना  तो कोई जवाब आया ना ही दरवाजा खुला, हे भगवान् क्या मामला है, आज बैंक के जनरल मेनेजर बैंक की साखाओं का दोरा कर रहे थे, कहीं आज मेरी ब्रांच का नंबर तो नही आ गया, उसने सोचा.

बैंक के बाहर लगभा 8-10 नियमित ग्राहक खड़े थे और वे भी परेशान थे और बैंक का दरवाजा खुलने का इन्तजार कर रहे थे और उनमे से लगभग सभी बैंक मेनेजर वरुण  को पहचानते थे, मेनेजर को देख उन्होंने राहत की सांस ली की अब तो दरवाजा खुलेगा, और तभी दरवाजा खुला भी दरवाजे पर बैंक का गार्ड नजर आया, मेनेजर  साहब आप अंदर आ जायें . उसने थोड़ा सा ग्रिल वाला दरवाजा खोला ताकि उसमे से एक ही व्यक्ति अंदर आ सके, बाकी ग्राहक बभी जब अंदर जाने लगे तो उसने ग्रिल गेट बंद कर दिया और उत्सुक ग्र्हाकों को बताया की अंदर किसी ग्राहक का बेग चोरी हो गया है, इसलिए पुलिस बुलाई गई है और अब चोर का पता लगाने की पुलिस कार्यवाई चल रहे है , जो जल्द ही समाप्त हो जायेगी, इस लिए थोड़ा धर्य  रखें.

जेसे ही वरुण ने बक के अंदर कदम रखा किसी ने उसे जोर का धक्का दिया और वह मुंह के बल फर्श पर जा गिरा. “मेनेजर साहब खड़े हो जाइए “

तभी उसके कानो में आवाज आई ,और जेसे ही वह खड़ा हुआ और जो नजारा उसने देखा उसके होश उड़ गये . सामने हाल में लगभग ४०-50 ग्राहक मुह फर्श की तरफ किये और हाथ गर्दन  के पीछे बंधे हुए जमीन पैर लेटे थे. और 4-5 नकाबपोश उनकी तरफ गन ताने हुए थे .

“मेनेजर साहब नाक से खून पोंछ ले, बाकी नजारा बाद में देख लेना”,उसके सामने खड़े नकाबपोश ने कहा, वरुण के होश हवास इस कदर उड़े हुए थी की कब उसकी नाक से खून बहना शुरू हुआ उसे पता ही नहीं चला.

“आइये आप के केबिन में चल कर बात करते हैं” उसी नकाबपोश ने कहा और दोनों कोने में बने चीफ मेनेजर के केबिन में दाखिल हो गए.

“बैंक रॉबरी के शूटिंग हाल चल रही है, और मुख्य किरदार आप ही हैं, ये तो आप समझ ही गए होंगें: नक़ाब पॉश ने शरारती लहजे में कहा।.

“हम आप का ही इंतजार कर रहे थे, क्योंकि हमे बताया गया है की सेफ की एक चाबी केशियर के पास है और दुसरी आप के पास है , क्योंकि आप पहले ही लेट आये हैं तो तुरंत हमे चाबी दे और हम रोकडा ले कर यहाँ से तुरंत रुखसत हो सके. और हमारा क़ीमती समय बचा सकें, मेनेजर साहब आप नही समझते रोबीरी में टाइम की क्या कीमत है , जो आप के लेट आने वजह से पहले ही काफी बर्बाद हो चुका है , उसने मजाक भरे लहजे में कहा .

वरुण के मुख से एक भी शब्द बाहर ना निकला, मामला क्या है क्योंकि केश की दुसरी  चाबी तो  उसके अधीनस्थ मेनेजर जयपाल ढांडा के पास रहती जो इस समय अपनी शीट पर हाथ उपर उठाये खड़ा था .

“घबराएं मत  चाबी तुरंत हमारे हवाले करे हम चुपचाप अपना काम कर के चले जायेंगे,आप भी सुरक्षित रहेंगे और हम भी” .

परन्तु वरुण की समझ में नही आ रहा था, क्या जवाब दे, चाबी तो उसके पास थे ही नही

“देखिये आप मेरे सब्र का इम्तिहान ना ले, नकाबपोश की आवाज अब तेज हो चली थी .

“मेरे पास चाबी नही है, उसने मिमयाते हे कहा”  

“ये साला यूं ना मानेगा”, तभी दुसरे नकाबपोश की आवाज़ आई जो ना जाने कब दरवाजे पर आ खड़ा हो गया था, फिर उसने वरुण को एक जोरदार झापड़ लगाया, वब वरुण के मुख से भी खून बहने लगा.

“दूर आपनी जगह पर जाओ, तुम से चुप रहने के और अपनी जगह पर रहने को कहा गया था”, पहले नकाबपोश न उसे घूरते हुए कहा.

“पर भाई साहब देर होने पर हम सब पकड़े जाएंगे”, दुसरे नकाबपोश ने गुहार की.

“अपनी जगह जाओ”, पहले नकाबपोश ने तल्ख़ आवाज में आदेश दिया, और फिर वरुण की र्तरफ मुड़ते हुए कहा

“तो क्या चाबी के गुम होने के रिपोर्ट पुलिस में करें”

“ये बात नही है चाबी मेरे पास होती ही नहीं है, पर आप को अभी की अभी चाबी मीलेगी”, वरुण ने दोनों गाल हाथ से ढकते हुए जवाब दिया  

“तो किसके पास होती है.” उसने हैरानी भरी आवाज में कहा, “अब ये न कहना, दूसरी चाबी हेड ऑफिस में या पुलिस के पास होती है. हमे तो आपके केशियर ने बताया की सेफ दो चाबी से खुलेगी एक चाबी उसके पास है, और दुसरी मेनेजर के पास  रहती है “,

“उसने सही कहा था”  

“सही कहा था तो चाबी निकाल देर क्यों कर रहा है”

“मेरे पास चाबी नही है,दुसरी चाबी, मेनेजर के पास रहती है”

“अरे, पर मेनेजर  तो आप हैं“, नकाबपोश ने लगभग चिल्लाते हुए कहा

“मै चीफ मेनेजर हूँ, मेनेजर मिस्टर डांडा है जो मेरे नीचे काम करता है, चाबी उसकी के पास रहती है “

“नंबर दो, ये डांडा कौन है उसे बुलाओ” दुसरा नकाबपोश जो अभी अंदर आया था शायद उसका नाम नंबर दो था, और रोबेरी  के समय आपस में बातचीत करने के लिए और अपनी पहचान छुपाने के लिए ये कोड नेम रखे थे. और पहला नकाबपोश शायद नंबर वन था जो उनका लीडर नज़र आ रहा था .

“अरे डांडा कोन है, खड़ा हो जा”. नंबर दो हाल में जा कर चिल्लाया, तभी लगभग एक पचास पचपन की उम्र का बैंक कर्मचारी कापता हुआ खड़ा हो गया।

“चाबी तुम्हारे पास थी और तुमने हमसे झूठ बोला “,नंबर वन ने कहा

“मैंने नही कैशियर ने झूट बोला”

“इस साले का पास चाबी थे और यु इतने देर से हमने चूतिया बना रहा था “, नंबर दो ने डांडा को जोरदार लात लगाई और फिर उस पर घूँसों की बारिस कर दी

“बस कर अगर ये मर गया तो चाबी कहाँ से लेंगे”

तभी डांडा ने  पॉकेट से चाबी निकाल कर उनके हवाले कर दी.

इसी बीच बैंक से बाहर खड़े कस्टमर्स में बेचेनी बड़ती जा रही थी , तभी एक अधेड़ उम्र का कस्टमर ने बैंक के सर्किल ऑफिस को फ़ोन लगा कर पूछना चाहा की क्या बात है, और ये बैंक का दरवाजा बंद क्यों है, पर उधर से किसी ने फ़ोन नही उठाया।