वो रात एक आम रात जैसी ही थी, हम दोनों पार्टी से वापस लौट रहे ... मैं शर्लिन को उसके घर वापस ड्रॉप करने जा रही थी। मेरे बीएमडब्लू में धीमा म्यूजिक बज रहा था और मैं लागातार उसे स्वप्निल देव रॉय को लेकर खूब छेड़ रही थी । तभी अचानक से ड्राइवर ने एक झटके में ब्रेक लगा कर गाड़ी रोक दी। यूँ अचानक ब्रेक लगने के कारण गाड़ी पूरी तरह डिसबैलेंस हो गई, राहत की बात सिर्फ़ इतनी थी कि एक्सीडेंट नहीं हुआ, किसी को जरा सा भी नुकसान नहीं पहुंचा ... कार को भी नहीं । पर हमारी साॅंसें जैसे अटक गईं थीं, थोड़ी देर के लिए मैं और शर्लिन गाड़ी से बाहर निकल आये। मैं पूरी तरह अपना आपा खोकर ड्राइवर पर चिल्ला उठी,
" नशे में गाड़ी चला रहे थे क्या ? इस तरह अचानक से ब्रेक क्यों लगाया? "
ड्राइवर सहम कर बोला,
" पता नहीं मैडम जी । "
उसके जवाब से मैं और भड़क उठी।
" पता नहीं? क्या मतलब है पता नहीं ? "
" पता नहीं मैंने अचानक से ऐसा क्यों किया मैडम जी। ऐसा लगा जैसे किसी ने जबरदस्ती मुझसे यह करवाया हो। "
" आहहहह ..... ! "
उसका घटिया बहाना सुन के मेरी मुठ्ठीयाॅं भींच गईं, मेरा मन उस ड्राइवर का सिर फोड़ देने का कर रहा था पर तभी मुझे अहसास हुआ कि शर्लिन मेरे आस - पास नहीं है। मैं एकदम से घबरा उठी, अब ये लड़की कहाँ चली गई। लेकिन मुझे उसे ढूँढने कहीं जाना नहीं पड़ा, वो पीछे के रास्ते पर ही दस कदम की दूरी पर थी। मैं लगभग दौड़कर उसके पास पहुॅंची लेकिन मेरे कुछ कहने से पहले ही वो बोल पड़ी।
" तुमने वो आवाज सुनी? "
मैंने चौंक कर अगल-बगल देखते हुए पूछा,
" आवाज ... कैसी आवाज ? "
" घुॅंघरू की ! "
" घुॅंघरू ... रियली शर्ल ! "
" जरूर कोई तो था यहाँ। "
" इतनी रात गए, ऐसी सुनसान जगह पर भला कौन होगा। कोई भी तो दिखाई नहीं दे रहा और घुॅंघरू की आवाज ... शर्ल इतनी सुनसान सड़क पर घुॅंघरू पहनकर कोई भी लड़की या औरत क्यों चलेगी । "
शर्लिन ने न जाने क्यों चौंक कर मेरा चेहरा देखा और फिर धीमी - खोई हुई सी आवाज में बोली,
" हाँ तुमने सही कहा। शायद मुझे वहम हुआ होगा, चलो चलते हैं ... सचमुच बड़ी ही वीरान जगह है ये । "
इस दुर्घटना के बाद हमारी सारी मस्ती हवा हो गई, गाड़ी में अजीब सा सन्नाटा पसर गया। मैंने शर्लिन को उसके घर ड्रॉप किया और फिर अपने घर आ कर थकी - हारी अपने बेड में घुस गई।
आइये अब जरा फिर से सिंहल पैलेस की ओर रुख़ करते हैं, आखिरकार यह कहानी तो इसी राजघराने की है। पार्टी खत्म हो चुकी थी, स्वप्निल बगैर कपड़े बदले हमेशा की तरह वैसे ही खिड़की का सहारा लिए खामोश खड़ा चाॅंद को निहार रहा था। तभी दरवाजा खटखटाने की आवाज आई, स्वप्निल ने आजिज़ नजरों से दरवाजे को घूरा क्योंकि उसे पता था कि इस पैलेस के राजा साहब यानि उसके दादा जी का बुलावा आया है। शायद इसलिए उसने कोई जवाब देने की जहमत नहीं उठाई। चंद मिनटों बाद बड़ी ही तमीज से दरवाजा दुबारा खटखटाया गया, इस बार स्वप्निल को न चाहते हुए भी 'कम इन' बोलना पड़ा। नौकर राजा साहब का संदेश दे कर चला गया। स्वप्निल जानता था कि वो भाग नहीं सकता, उसे अपने दादा जी का सामना तो करना ही पड़ेगा। काल करे सो आज कर, आज करे सो अब ... स्वप्निल तुरंत ही अपने दादा जी से मिलने उनके कमरे की ओर चल पड़ा। राजा साहब अपने कमरे में हमेशा की तरह किंग चेयर पर बड़े शान से बैठे थे। स्वप्निल को देखते ही वो बोले,
" आहह ... स्वप्निल, आ गए आप । अरे ये क्या, आपने अभी तक कपड़े भी नहीं बदले ! "
स्वप्निल का कुछ भी कहने - सुनने का मन नहीं था पर क्या करे मजबूरी थी। उसे यूँ खामोश खड़ा देख राजा साहब खुद ही बोले,
" खैर ! हमने देखा, आपने पार्टी में अपना सारा समय उस नीली ड्रेस वाली लड़की के साथ बिताया। आपने हमारी बात मानी, अच्छा लगा हमें। इससे भी बड़ी खुशी की बात ये है कि आपको कोई लड़की पसन्द तो आई। वैसे नाम क्या था उस लड़की का ? "
स्वप्निल के होठों के कोने पे एक हल्की सी मुस्कान आयी और गायब हो गई। वो कुछ ऊँचे स्वर में बोला,
" शर्लिन डी'क्रूज़ ! "
राजा साहब को जैसे झटका लगा, वो धीमे स्वर में बुदबुदाये,
" डी'क्रूज़ !!! "
" हाँ, इनवाइटेड गेस्ट नहीं थी। अपनी फ्रेंड के जिद्द की वजह से यहाँ पार्टी में उसके साथ आई थी। राइटर है ... पहली ही बुक ' The Dark Side ' बेस्टसेलिंग थी, मैंने भी पढ़ी है, मुझे काफ़ी पसन्द आई थी किताब। "
राजासाहब कच्चे खिलाड़ी नहीं थे, वह स्वप्निल का खेल समझ गए। उन्होंने अगले ही पल खुद को नॉर्मल कर लिया और मुस्कुरा कर बोले,
" बहुत खूब ! ब्यूटी विद ब्रेन, आपकी पसन्द वाकई लाजवाब है, बड़ी ही प्यारी बच्ची थी ... लाखों या करोड़ों में नहीं अरबों में एक। अब सिंह हो, पंडित हो या डी'क्रूज़ हो, क्या फर्क पड़ता है। आज के जमाने में जाति - धर्म का कोई मायना नहीं रह गया है, है ना स्वप्निल। "
अब चौंकने की बारी स्वप्निल की थी। उसने मन ही मन चिढ़ कर सोचा,
' हाँ ! सही है, बली का बकरा किसी भी धर्म का हो आपको क्यों फर्क पड़ेगा दादा जी । '
इधर राजा साहब बड़े गौर से स्वप्निल को देख रहे थे अंततः उसे पुकारते हुए बोले,
" कहाँ खो गए बेटा ? "
" सॉरी दादा जी। दरअसल मैं बुरी तरह थक गया हूँ, दिन भर बिजनेस मीटिंग्स और शाम को ये पार्टी .....! "
" कोई बात नहीं मेरे बच्चे, हम समझते हैं। हम कभी और बात करेंगे, आप जाइए आराम किजिए। "
" थैंक्स दादा जी । "
राजा साहब केवल मुस्कुराये, स्वप्निल तुरंत उनके कमरे से बाहर निकल गया। उसके जाने के बाद राजा साहब खुद से ही बात करते हुए बोले,
' लड़की का धर्म कोई मायने नहीं रखता, मुझे बस इस राजघराने का वंशज चाहिए .... एट एनी कॉस्ट । '
इधर स्वप्निल अपने कमरे में आ कर सिर पकड़ कर बैठ गया ... बहुत देर तक सोच में डूबे रहने के बाद बड़बड़ाया,
' मिस डी'क्रूज़ से मिलना होगा, इससे पहले की वो दादा जी के जाल में फंसे। ये सब समझाना मुश्किल होगा, यक़ीन दिलाना तो और भी मुश्किल होगा पर मैं कोई रिस्क नहीं ले सकता वरना हालात खतरनाक हो जायेंगे। किसी की जान से खेलने का हक़ किसी को नहीं है ! "
स्वप्निल ने अपना फोन उठाया और किसी को मैसेज करने लगा।
क्रमशः............................