from soil to destination in Hindi Short Stories by Bihari Lal Chouhan books and stories PDF | माटी से मुकाम तक

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माटी से मुकाम तक


माटी से मुकाम तक

बिहारी और सुमति की प्रेम कहानी

बरगवां गांव की कच्ची गलियों में पला-बढ़ा बिहारी चौहान गरीब जरूर था, लेकिन उसके सपने बहुत बड़े थे। संयुक्त परिवार की जिम्मेदारियां, पिता हरिराम की मेहनत, मां कमला का त्याग और घर की आर्थिक तंगी उसके रास्ते की सबसे बड़ी चुनौतियां थीं। फिर भी बिहारी मानता था कि गरीबी इंसान की किस्मत नहीं, सिर्फ एक परिस्थिति है।

उच्च शिक्षा के लिए जब वह शहर पहुंचा तो उसकी दुनिया बदल गई। चमकती इमारतें, महंगे कपड़े और बड़े-बड़े सपने देखकर उसे अपनी साधारण जिंदगी छोटी जरूर लगी, लेकिन उसने हार नहीं मानी।

इसी शहर में उसकी मुलाकात सुमति मलार्ज से हुई।

पहली मुलाकात किसी फिल्मी मुलाकात जैसी नहीं थी। तेज बारिश में सड़क किनारे सुमति के हाथों से कुछ जरूरी कागज गिर गए। बिहारी ने बिना कुछ सोचे उन्हें उठाकर उसके हाथ में दे दिया।

सुमति ने मुस्कुराकर कहा,
“थैंक्यू... आजकल इतनी मदद करने वाले लोग कम मिलते हैं।”

बिहारी हंसकर बोला,
“मदद करने के लिए अमीर होना जरूरी नहीं, इंसान होना जरूरी है।”

सुमति उस जवाब को सुनकर कुछ पल उसे देखती रह गई।

धीरे-धीरे दोनों की मुलाकातें बढ़ने लगीं। सुमति एक सफल और आत्मनिर्भर लड़की थी, जबकि बिहारी संघर्ष करते हुए अपनी पहचान बनाने में जुटा था। दोनों की दुनिया अलग थी, लेकिन सोच एक जैसी थी।

बिहारी दिन में पढ़ाई करता और रात में रेस्तरां में काम करता। कई बार भूखा रह जाता, फिर भी सुमति के सामने मुस्कुराता रहता।

एक दिन सुमति ने पूछा,
“तुम इतना सब अकेले कैसे संभाल लेते हो?”

बिहारी ने कहा,
“क्योंकि मेरे पीछे मेरा परिवार है... और अब शायद तुम भी।”

सुमति चुप हो गई। उसकी आंखों में भावनाएं थीं।

समय के साथ सुमति को बिहारी की सादगी से प्यार होने लगा। उसे बिहारी का संघर्ष कमजोरी नहीं, उसकी सबसे बड़ी ताकत दिखाई देने लगा। वहीं बिहारी को महसूस हुआ कि सुमति सिर्फ उसकी प्रेमिका नहीं, बल्कि उसके सपनों पर विश्वास करने वाली पहली साथी है। दोनों ने तय किया कि हालात चाहे कितने भी कठिन हों, वे एक-दूसरे का हाथ कभी नहीं छोड़ेंगे।

लेकिन प्यार की राह आसान नहीं थी।

बिहारी के गांव की जमीन पर दबंग रुद्र प्रताप सिंह की नजर थी। परिवार पर संकट बढ़ने लगा। दूसरी तरफ सुमति को पता चला कि उसके अपने परिवार का पुराना संबंध भी रुद्र प्रताप से जुड़ा हुआ है।

सुमति के सामने सवाल था—क्या वह अपने परिवार के खिलाफ जाकर बिहारी का साथ देगी?

और बिहारी के सामने सवाल था—क्या वह अपने प्यार को बचाते हुए अपने परिवार की जमीन भी बचा पाएगा?

एक रात सुमति ने बिहारी का हाथ पकड़कर कहा—

“तुम्हारे पास शायद दौलत नहीं है, लेकिन तुम्हारे पास वो दिल है जिसके साथ मैं पूरी जिंदगी बिताना चाहती हूं।”

बिहारी की आंखें नम हो गईं।

उसने धीरे से कहा—

“मैं तुम्हें महल नहीं दे सकता सुमति... लेकिन वादा करता हूं, अपनी मेहनत से ऐसा घर जरूर बनाऊंगा जहां हमारे प्यार के अलावा किसी डर की जगह नहीं होगी।”

सुमति ने उसका हाथ और मजबूती से पकड़ लिया।

“मुझे महल नहीं चाहिए बिहारी... मुझे बस तुम्हारा साथ चाहिए।”

दोनों एक-दूसरे को देखते रहे।

दूर कहीं बादल गरज रहे थे।

और उसी रात रुद्र प्रताप को खबर मिली—

“बिहारी और सुमति अब एक-दूसरे के साथ हैं।”

रुद्र प्रताप मुस्कुराया और बोला—

“तो अब लड़ाई जमीन की नहीं... उनके प्यार की होगी।”

यहीं से शुरू हुई उस प्रेम कहानी की असली परीक्षा, जिसने आगे चलकर बिहारी को माटी से मुकाम तक पहुंचाना था।

इस तरह सुमति और बिहारी में आपसी मेल जोल बढ़ता गया और आखिर सुमति ने हिम्मत करके एक दिन बिहारी से अपने प्यार का इजहार कर ही दिया ।
बड़ी हिम्मत से बिहारी से कहा कि बिहारी मैं तुमसे प्यार करती हूं और मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकती मैं तुम्हारे बिना आगे भी नहीं बढ़ सकती मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं आई लव्यू बिहारी आई लव्यू