Pole Star - Part 11 in Hindi Love Stories by Anamika books and stories PDF | ध्रुव की तारा - भाग 11

The Author
Featured Books
Categories
Share

ध्रुव की तारा - भाग 11

ध्रुव की तारा

भाग - ११

लेखिका "अनामिका"

​हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने के बाद जब विजय और ध्रुव, सुमन को संभालते हुए घर के अंदर ला रहे थे, तब सुमन ने हल्का सा मुस्कुराते हुए दोनों को देखा।

​"तुम दोनों तो मुझे ऐसे पकड़कर ला रहे हो जैसे मैं बहुत ज़्यादा बीमार हूँ," सुमन ने धीमी आवाज़ में कहा, "बस एक छोटा सा पेट दर्द ही तो था, अब मैं बिल्कुल ठीक हूँ। मुझे इतना क्यों संभाल रहे हो?"

​विजय ने गहरी साँस लेते हुए कहा, "सुमन, चुपचाप चलकर बेड पर बैठो। अब से तुम्हें कोई काम करने की ज़रूरत नहीं है, हम तुम्हारा पूरा ध्यान रखेंगे।"

​सुमन बेड पर बैठ गई और उसने पास खड़े ध्रुव का हाथ पकड़ा। उसकी आँखों में चिंता और सख़्ती दोनों साफ़ दिख रही थी, "ध्रुव, मेरे पीछे परेशान होने की ज़रूरत नहीं है। एक-दो दिन में तुम्हारा 12th का बोर्ड रिज़ल्ट आने वाला है, सारा ध्यान अपनी पढ़ाई पर लगाओ। और हाँ... यह खेलकूद और स्विमिंग अब हमेशा के लिए छोड़ दो।"

​ध्रुव कुछ पलों के लिए शांत रहा। उसके दिमाग में अस्पताल के बाहर सुनी वह बात गूँज रही थी, पर माँ को परेशान न करने के लिए उसने धीरे से सिर हिला दिया, "ठीक है मम्मी, अब से आप जैसा कहोगी, मैं वैसा ही करूँगा।"

​उसने कह तो दिया, लेकिन चेहरे के उदास भाव बता रहे थे कि उसके अंदर का तूफ़ान शांत नहीं हुआ था। विजय ने ध्रुव के चेहरे की उस खामोशी और गहरी सोच को ध्यान से देखा। वह समझ गए कि ध्रुव के मन में कुछ और ही चल रहा है, पर उन्होंने उस वक्त टोकना सही नहीं समझा।

​दो दिन बाद...

​तारा के घर में सुबह से ही एक अलग सी हलचल थी। 10th बोर्ड का रिज़ल्ट आ चुका था। तारा लैपटॉप की स्क्रीन के सामने बैठी थी और पास ही आनंद और सुधा सांसें रोके खड़े थे।

​जैसे ही स्क्रीन पर रिज़ल्ट लोड हुआ, तारा खुशी से उछल पड़ी, "मम्मी! पापा! देखिए!"

​तारा हमेशा की तरह पूरे स्कूल में टॉप-5 में आई थी। आनंद ने खुशी के मारे तारा को गले से लगा लिया और गर्व से बोले, "देखा सुधा! आखिर बेटी किसकी है!"

​सुधा ने हंसते हुए ताना मारा, "हाँ-हाँ, क्यों नहीं! ऐसे मौके पर तो सिर्फ आपकी ही बेटी होगी। मेरी भी तो बेटी है! आज तो मैं तारा की पसंद का पूरा खाना बनाऊँगी।"

​घर में जश्न का माहौल था, लेकिन तारा के चेहरे पर पूरी खुशी नहीं थी। उसकी आँखें बार-बार फोन की तरफ जा रही थीं, उसका पूरा ध्यान सिर्फ ध्रुव के 12th के रिज़ल्ट पर अटका हुआ था।

​उधर ध्रुव के घर में सन्नाटा पसरा हुआ था। कंप्यूटर स्क्रीन के सामने ध्रुव, सुमन और विजय बैठे थे। विजय ने ध्रुव का रोल नंबर डाला और उसके 12th बोर्ड का रिज़ल्ट स्क्रीन पर आ गया।

​रिज़ल्ट देखते ही सुमन और विजय की आँखें फटी की फटी रह गईं।

​ध्रुव, जो हमेशा बस जैसे-तैसे पास होता आया था, इस बार उसने 12th बोर्ड में इतने बेहतरीन मार्क्स हासिल किए थे कि किसी भी अच्छे कॉलेज में उसका एडमिशन आसानी से हो सकता था।

​"यह... यह तो चमत्कार है!" विजय हैरानी और खुशी से चिल्ला उठे।

​कमरे का माहौल एकदम बदल गया, लेकिन ध्रुव चुपचाप स्क्रीन को देखता रहा। अचानक उसके दिमाग में तारा का चेहरा घूम गया—किस तरह उसने दिन-रात एक करके ध्रुव को पढ़ाया था, डांटा था और हर एक कॉन्सेप्ट समझाया था। ध्रुव के होठों पर एक हल्की सी मुस्कान तैर गई।

​विजय और सुमन ने उसकी मुस्कान नोटिस कर ली। विजय ने हंसते हुए उसके कंधे पर हाथ मारा, "क्या हुआ बेटा? बस एक छोटी सी मुस्कान? हम लोग यहाँ तुम्हारा 12th का रिज़ल्ट देखकर खुशी से पागल हो रहे हैं, अब तुम एक अच्छे कॉलेज में जाओगे और तुम इतने शांत हो? अरे खुलकर हँसो और एंजॉय करो!"

​ध्रुव ने अपने पापा को देखा, लेकिन उसके दिल में खुशी से ज़्यादा तारा के प्रति शुक्रिया और माँ की बीमारी का अनजाना डर एक साथ उमड़ रहा था।

​रिज़ल्ट के बाद, ध्रुव के कमरे में तारा और ध्रुव लैपटॉप के सामने बैठकर कॉलेज के ऑनलाइन फॉर्म्स सर्च कर रहे थे।

​तारा उत्साह से स्क्रीन पर उंगली रखते हुए बोली, "ध्रुव, यह वाला कॉलेज देखो! यह पढ़ाई के लिए तो अच्छा है ही, साथ ही इसका स्पोर्ट्स और स्विमिंग ट्रैक भी बहुत बेहतरीन है। तुम्हारे लिए यह बिल्कुल परफेक्ट रहेगा।"

​तारा की बात सुनकर ध्रुव ने बिना कुछ कहे कर्सर को थोड़ा नीचे किया और एक ऐसा कॉलेज सेलेक्ट कर लिया जहाँ स्पोर्ट्स का दूर-दूर तक कोई अच्छा चांस नहीं था।

​तारा ने हैरान होकर उसकी तरफ देखा, "यह क्या कर रहे हो ध्रुव? इस कॉलेज में तो स्विमिंग की कोई अच्छी फैसिलिटी भी नहीं है! तुम इसे क्यों चुन रहे हो?"

​ध्रुव ने स्क्रीन से नज़रें हटाकर धीमी आवाज़ में कहा, "कोई बात नहीं तारा... मुझे अब बस पढ़ाई पर ध्यान देना है।"

​तारा की आँखें फटी की फटी रह गईं। वह अच्छी तरह जानती थी कि ध्रुव स्विमिंग के लिए कितना पागल था; उसे पानी से इतना लगाव था जैसे वह पानी में ही पैदा हुआ हो और वहीं पला-बढ़ा हो। उसके मुँह से ऐसी बातें सुनना तारा के लिए किसी सदमे से कम नहीं था।

​"ध्रुव... क्या हुआ है? तुम ऐसी बातें क्यों कर रहे हो?" तारा ने घबराकर पूछा।

​ध्रुव ने एक गहरी साँस ली और उसकी आँखों में एक अजीब सी लाचारी तैर गई, "मुझे एहसास हो गया है तारा... जब मम्मी अचानक अस्पताल में भर्ती हुईं, तो मुझे लगा जैसे यह सब मेरी लापरवाही की वजह से हुआ है। आगे चलकर मुझे मम्मी-पापा का ध्यान रखना है। अगर मैं स्विमिंग और खेलकूद में ही उलझा रहा, तो कभी उनके पास नहीं रह पाऊँगा। मैं बस एक नॉर्मल पढ़ाई करके, एक अच्छी सी जॉब पाना चाहता हूँ ताकि घर पर रहकर मम्मी का ख़याल रख सकूँ। मुझे अब कहीं बाहर नहीं जाना।"

​तारा कुछ पल के लिए बिल्कुल खामोश हो गई। वह ध्रुव के चेहरे की उदासी को साफ़ महसूस कर सकती थी। उसे दिख रहा था कि अपने सपनों को मारकर ध्रुव का दिल अंदर से पूरी तरह टूट चुका है। तारा उसे संभालना चाहती थी, सांत्वना देना चाहती थी, लेकिन उसका गला सूख गया और मुँह से एक शब्द भी नहीं निकला। ध्रुव के इस छिपे हुए दर्द को महसूस करके तारा का अपना दिल भी घबराहट से भर गया था।

ग्यारहवाँ भाग समाप्त, कहानी जारी है....