एपिसोड 49: आर्यन कौन था?
कमरे की दीवार पर चमक रहे शब्द अब भी सबको डरा रहे थे—
THE ANCHOR REMEMBERS.
आर्यवीर अपनी हथेली को देख रहा था।
उस पर बना काला निशान धीरे-धीरे धड़क रहा था।
जैसे उसकी त्वचा के नीचे कोई जिंदा चीज सांस ले रही हो।
साँवी उसके बिल्कुल पास खड़ी थी।
उसने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया।
“आर्यवीर…”
आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।
लेकिन उसकी आँखों में वो पहचान नहीं थी जो कुछ पल पहले तक थी।
उसकी आँखों के सामने जैसे कोई और दुनिया चल रही थी।
एक बच्चा…
एक कमरा…
एक औरत…
और एक छोटी-सी लड़की।
फिर अचानक उसके सिर में तेज दर्द उठा।
“आह!”
वह अपना सिर पकड़कर घुटनों पर बैठ गया।
साँवी तुरंत उसके पास बैठ गई।
“आर्यवीर!”
राघव आगे बढ़ा।
“उसे मत छुओ!”
साँवी ने गुस्से से उसकी तरफ देखा।
“क्यों?”
“उसका Anchor Mark activate हो चुका है।”
“तो?”
“अगर अभी किसी ने उसे touch किया तो memory और तेज हो सकती है।”
साँवी ने आर्यवीर की तरफ देखा।
वह दर्द में था।
उसने धीरे से कहा—
“मुझे… उसे याद करना है।”
साँवी ने उसका हाथ नहीं छोड़ा।
“तो याद करो।”
राघव चौंक गया।
“साँवी, तुम समझ नहीं रही—”
“मैं समझ रही हूँ।”
उसने आर्यवीर की हथेली पर अपना हाथ रख दिया।
“अगर मेरी वजह से उसे ये याद आ रही है… तो मैं उसका साथ नहीं छोड़ूँगी।”
जैसे ही दोनों के हाथ जुड़े—
चमक!
कमरे में सुनहरी रोशनी फैल गई।
काला निशान अचानक शांत हो गया।
आर्यवीर ने आँखें बंद कर लीं।
और इस बार उसकी memory साफ दिखाई देने लगी।
---
21 साल पहले…
एक बड़ा कमरा।
दीवारों पर Project S-21 के चिन्ह।
एक छोटी बच्ची खिड़की के पास बैठी रो रही थी।
उसके हाथ में एक छोटा-सा कपड़े का खिलौना था।
दरवाजा खुला।
एक छोटा लड़का अंदर आया।
उसकी उम्र करीब छह साल थी।
उसके हाथ में नागमुद्रा का निशान बना हुआ था।
वह बच्ची के सामने जाकर बैठ गया।
“रो क्यों रही हो?”
बच्ची ने आँसू पोंछते हुए कहा—
“मुझे अपनी माँ के पास जाना है।”
लड़के ने कुछ पल सोचा।
फिर अपनी जेब से एक छोटी-सी लकड़ी की गुड़िया निकाली।
“ये लो।”
बच्ची ने गुड़िया ली।
“ये क्या है?”
“मेरी दोस्त।”
बच्ची पहली बार मुस्कुराई।
“तुम्हारी दोस्त?”
“हाँ।”
“तुम्हारा नाम क्या है?”
लड़का कुछ बोलने ही वाला था कि बाहर से किसी ने पुकारा—
“आर्यन!”
लड़का तुरंत दरवाजे की तरफ देखने लगा।
बच्ची ने पूछा—
“आर्यन?”
लड़के ने मुस्कुराकर कहा—
“हाँ।”
बच्ची ने धीरे से अपना नाम बताया—
“साँवी।”
आर्यन ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“तुम डरना मत।”
“क्यों?”
“क्योंकि मैं हूँ।”
बच्ची मुस्कुराई।
तभी दरवाजा जोर से खुला।
एक आदमी अंदर आया।
उसकी उंगली में नागमुद्रा की रिंग थी।
उसने दोनों बच्चों को साथ देखा और गुस्से में चिल्लाया—
“तुम दोनों को एक साथ किसने छोड़ा?”
आर्यन तुरंत साँवी के सामने खड़ा हो गया।
आदमी ने आर्यन को पकड़ने के लिए हाथ बढ़ाया।
लेकिन तभी एक महिला दौड़कर आई।
मीरा।
उसने आर्यन को अपनी बाहों में ले लिया।
“इसे हाथ मत लगाना!”
आदमी ने कहा—
“ये बच्चा Project का Anchor है।”
मीरा ने जवाब दिया—
“ये मेरा बेटा है।”
आदमी हँसा।
“तुम्हारा बेटा?”
फिर उसने साँवी की तरफ देखा।
“और ये?”
मीरा ने साँवी को भी अपनी तरफ खींच लिया।
“ये मेरी बेटी है।”
आदमी ने ठंडी आवाज में कहा—
“तो फिर तुम्हें पता है कि इन दोनों को अलग क्यों रखा गया है।”
मीरा की आँखों में आँसू आ गए।
“पता है।”
“फिर भी तुम इन्हें मिलने दे रही हो?”
मीरा ने आर्यन और साँवी को देखा।
“क्योंकि बच्चे किसी Project का हिस्सा नहीं होते।”
आदमी ने नागमुद्रा वाली रिंग उठाई।
“लेकिन ये दोनों मिलकर वो कर सकते हैं… जो Project S-21 को पूरा करेगा।”
मीरा ने डरते हुए पूछा—
“क्या?”
आदमी ने कहा—
“Control.”
और तभी memory टूट गई।
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“आर्यवीर!”
उसने अचानक आँखें खोल दीं।
उसकी सांस तेज चल रही थी।
साँवी उसके सामने थी।
उसने उसका चेहरा दोनों हाथों में थाम लिया।
“तुम ठीक हो?”
आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।
“तुम…”
साँवी ने पूछा,
“क्या?”
“तुम वही बच्ची थीं।”
साँवी की आँखें भर आईं।
“क्या?”
“मैंने तुम्हें पहले देखा था।”
“कहाँ?”
आर्यवीर ने उसकी हथेली को देखा।
“इसी जगह।”
राघव चौंक गया।
“इसका मतलब…”
आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।
“हाँ।”
उसकी आवाज में अब पहले वाली उलझन नहीं थी।
“हम बचपन से जुड़े हुए थे।”
साँवी की आँखों से आँसू गिर पड़े।
“फिर हमें अलग क्यों किया गया?”
कोई जवाब नहीं दे पाया।
तभी राजवीर ने धीरे से कहा—
“मीरा ने तुम्हें बचाने के लिए ऐसा किया होगा।”
आर्यवीर ने उसकी तरफ देखा।
“लेकिन मेरी माँ ने मुझे भी छुपाया था।”
राजवीर ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
“क्यों?”
राजवीर चुप रहा।
राघव ने आखिरकार कहा—
“क्योंकि Founder तुम्हें इस्तेमाल करना चाहता था।”
आर्यवीर की आँखें सिकुड़ गईं।
“मेरे जरिए?”
“हाँ।”
“कैसे?”
राघव ने फाइल खोली।
“Anchor किसी व्यक्ति की शक्ति को activate कर सकता है। लेकिन Key के बिना Anchor अधूरा है।”
साँवी ने पूछा—
“और Key कौन है?”
राघव ने उसकी तरफ देखा।
“तुम।”
कमरे में खामोशी छा गई।
आर्यवीर ने साँवी का हाथ पकड़ लिया।
“अगर ये सच है…”
साँवी ने उसकी तरफ देखा।
“तो?”
“तो शायद Founder हमें अलग नहीं करना चाहता था।”
“फिर?”
“वो चाहता था कि हम एक-दूसरे के करीब आएँ।”
साँवी के चेहरे पर डर उतर आया।
“क्यों?”
राघव ने फाइल का अगला पन्ना खोला।
उस पर एक diagram था।
तीन circles—
SAANVI
AAROHI
NAINA
और उनके बीच एक चौथा circle—
ANCHOR
चारों को जोड़ने वाली एक लाइन थी।
नीचे लिखा था—
THE FOURTH SUBJECT ACTIVATES THE SISTERS.
आरोही ने घबराकर पूछा—
“Fourth Subject… आर्यवीर?”
राघव ने धीरे से सिर हिलाया।
“हाँ।”
नैना ने अपनी नागमुद्रा वाली रिंग उतार दी।
“तो ये रिंग हमें control करने के लिए थी?”
राघव ने कहा,
“शायद।”
तभी साँवी ने कुछ देखा।
फाइल के आखिरी पन्ने पर एक छोटा-सा निशान था।
वही निशान जो उसके सपने में मीरा के पीछे दिखाई दिया था।
उसने उंगली से उसे छुआ।
“रुको…”
सब उसकी तरफ देखने लगे।
“ये निशान मैंने पहले देखा है।”
“कहाँ?” आर्यवीर ने पूछा।
“मेरी माँ के लocket में।”
राजवीर ने तुरंत पूछा—
“कौन सा locket?”
“जो अनन्या के पास था।”
राघव ने कहा—
“वो locket अभी कहाँ है?”
साँवी ने जवाब दिया—
“मेरे पास।”
उसने अपनी जेब से locket निकाला।
जैसे ही locket कमरे की रोशनी में आया—
तीनों बहनों की रिंग चमकने लगी।
और आर्यवीर की हथेली का काला निशान भी।
धक!
Locket अपने आप खुल गया।
उसके अंदर कोई फोटो नहीं थी।
बल्कि एक छोटा-सा metallic chip था।
राघव ने उसे देखते ही कहा—
“ये कोई साधारण locket नहीं है।”
आर्यवीर ने पूछा—
“तो?”
“ये access key है।”
साँवी ने पूछा—
“किस चीज की?”
राघव ने दीवार पर बने S-21 चिन्ह की तरफ देखा।
“उस कमरे की… जहाँ Project S-21 शुरू हुआ था।”
अचानक पीछे से आवाज आई—
“नहीं।”
सब पलट गए।
दरवाजे पर…
आरोही खड़ी थी।
लेकिन उसकी आँखों में कुछ अजीब था।
वह धीरे-धीरे आगे बढ़ी।
“ये सिर्फ Project का access key नहीं है।”
साँवी ने पूछा—
“तो फिर क्या है?”
आरोही ने अपने सिर को पकड़ लिया।
“मुझे… मुझे कुछ याद आ रहा है।”
“क्या?”
आरोही की आँखों से आँसू बहने लगे।
“मीरा…”
उसने दीवार की तरफ देखा।
“वो हमें अलग नहीं कर रही थी।”
सब चौंक गए।
“तो?”
आरोही ने कांपती आवाज में कहा—
“वो हमें…”
वह अचानक रुक गई।
आर्यवीर उसके पास गया।
“क्या?”
आरोही ने उसकी तरफ देखा।
और अगले ही पल उसके मुँह से निकला—
“वो हमें Founder से नहीं… तुम्हारे पिता से बचा रही थी।”
आर्यवीर जैसे जम गया।
“मेरे पिता?”
आरोही ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
“लेकिन मेरे पिता तो…”
आरोही ने उसकी बात काट दी।
“तुम्हें जो कहानी बताई गई है…”
उसकी आँखें डर से फैल गईं।
“…वो झूठ है।”
कमरे की सारी लाइटें अचानक बंद हो गईं।
और अंधेरे में एक आवाज गूँजी—
“बहुत देर से छुपाया हुआ सच अब बाहर आ ही गया।”
साँवी ने तुरंत आर्यवीर का हाथ पकड़ लिया।
आवाज फिर आई—
“लेकिन अगर तुमने उसके पिता का सच जान लिया…”
कुछ सेकंड की खामोशी।
फिर—
“…तो तुम ये भी जान जाओगी कि आर्यवीर को मैंने नहीं चुना था।”
आर्यवीर ने अंधेरे में पूछा—
“तो किसने चुना?”
इस बार आवाज बिल्कुल पास से आई।
“तुम्हारी माँ ने।”
अचानक लाइट वापस आई।
लेकिन कमरे में कोई नहीं था।
सिर्फ फर्श पर एक पुरानी फोटो पड़ी थी।
आर्यवीर ने उसे उठाया।
फोटो में…
मीरा थी।
उसकी गोद में छोटा आर्यवीर था।
और उसके पास खड़ी थी छोटी साँवी।
लेकिन फोटो के पीछे एक लाइन लिखी थी—
“जब ये दोनों मिलेंगे, तब सच जागेगा।”
आर्यवीर ने फोटो साँवी की तरफ बढ़ाई।
साँवी ने फोटो को देखा।
फिर आर्यवीर की तरफ।
दोनों की आँखों में एक ही सवाल था—
अगर उनका मिलना ही इस रहस्य को जगाने वाला था… तो क्या उनका प्यार भी उसी योजना का हिस्सा था?
और कमरे की दीवार पर धीरे-धीरे एक नई लाइन उभर आई—
“THE FIRST MEMORY WAS ONLY THE BEGINNING.”
जारी रहेगा…