Pole Star - Part 21 in Hindi Love Stories by Anamika books and stories PDF | ध्रुव की तारा - भाग 21

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ध्रुव की तारा - भाग 21

ध्रुव की तारा
भाग - २१
लेखिका "अनामिका"
​ध्रुव ने गहरी सांस ली और धीरे-धीरे कदम बढ़ाता हुआ तारा के ठीक करीब पहुँच गया। तारा ने मुड़कर उसकी तरफ देखा और मुस्कुराते हुए पूछा, "क्या हुआ ध्रुव? ऐसे लगातार क्या देख रहे हो?"
​ध्रुव ने अपनी धड़कनों को काबू करने की कोशिश करते हुए धीरे से कहा, "तारा... क्या पार्टी के बाद थोड़ी देर के लिए बाहर पार्क में मिल सकती हो? मुझे तुमसे कुछ ज़रूरी बात करनी है।"
​तारा ने अचरज से अपनी आँखें बड़ी कीं, "ज़रूरी बात? अभी क्यों नहीं बता देते? और इस वक्त बाहर... सब घर पर ही तो हैं।"
​"प्लीज़ तारा, सिर्फ दस मिनट... मना मत करना," ध्रुव की आवाज़ में एक अजीब सी मिन्नत और संजीदगी थी। उसकी आँखों का गंभीर भाव देखकर तारा का दिल अचानक ज़ोर से धड़क उठा। वह समझ नहीं पाई कि ध्रुव इतना अजीब व्यवहार क्यों कर रहा है, लेकिन उसकी आँखों में छिपी उलझन को देखकर उसने चुपचाप हाँ में सिर हिला दिया।
​पार्टी का माहौल अपनी मस्ती में रवां था। आनंद और विजय अपनी पुरानी यादों के किस्से सुनाकर ठहाके लगा रहे थे, वहीं सुधा और सुमन केक बाँटने और मेहमानों की खातिरदारी में व्यस्त थीं।
​इसी चहल-पहल के बीच, ध्रुव ने मौका देखा और बिना किसी की नज़र में आए चुपके से मुख्य दरवाज़े से बाहर निकल गया।
​तारा की नज़रें शुरुआत से ही ध्रुव पर टिकी थीं। जैसे ही उसने ध्रुव को बाहर जाते देखा, उसके सीने में घबराहट की एक तेज़ लहर दौड़ गई। 'आखिर इसे हुआ क्या है? यह इस तरह चुपचाप क्यों चला गया?' तारा का मन किसी अनजानी हलचल से बेचैन हो उठा।
​उसने एक नज़र व्यस्त परिवार पर डाली, अपना फोन उठाया और धड़कते दिल के साथ, सबसे नज़रें बचाते हुए दबे पाँव बाहर की तरफ कदम बढ़ा दिए।
​ठंडी रात की खामोशी में, पार्क की मद्धम लाइट के नीचे ध्रुव अकेला टहल रहा था। उसकी आँखें उसी रास्ते पर टिकी थीं जहाँ से तारा को आना था। हर बीतते सेकंड के साथ उसके दिल की धड़कनें बेकाबू हो रही थीं... आज वह अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सच तारा के सामने रखने जा रहा था।
​पार्क की मद्धम लाइट के नीचे ध्रुव टहल ही रहा था कि तारा तेज कदमों से उसके पास पहुँची। माथे पर हल्की शिकन लिए उसने आते ही सवालों की झड़ी लगा दी, "ध्रुव! यह सब क्या है? तुम यहाँ अकेले क्या कर रहे हो और मुझे क्यों बुलाया? अंदर इतनी बड़ी पार्टी चल रही है, सब साथ हैं... अगर किसी ने देख लिया कि हम दोनों गायब हैं, तो सब क्या सोचेंगे? क्या बात है?"
​ध्रुव ने मुस्कुराते हुए अपने होंठों पर उंगली रखी और बोला, "अरे... सांस तो ले लो! कितना बोलती हो तुम, चश्मिश!"
​तारा ने अपनी चश्मा थोड़ी ऊपर खिसकाई और आँखें मटकाते हुए बोली, "अरे वाह! खुद यहाँ चुपचाप बुलाकर सस्पेंस बना रहे हो और उल्टा मुझे ही सुना रहे हो? बचपन से यही नाम चिपका रखा है, कम से कम आज तो सीधे-सीधे बात बता दो कि बात क्या है!"
​ध्रुव की मुस्कान धीरे-धीरे शांत हुई और उसने गंभीर होकर तारा की आँखों में देखा, "मज़ाक नहीं कर रहा तारा... तुमसे कुछ ऐसा कहना था, जो मैं अंदर उन सब लोगों के शोर में कभी नहीं कह पाता।
तारा के दिल की धड़कनें अचानक तेज़ हो गई थीं। जो ध्रुव हर वक्त मज़ाक-मस्ती में मस्त रहता था, उसकी आँखों में ऐसी गंभीरता उसने पहले कभी नहीं देखी थी। तारा ने घबराते हुए पूछा, "ध्रुव... क्या हुआ? तुम इतने सीरियस क्यों हो रहे हो? सब ठीक तो है ना?"
​ध्रुव ने गहरी सांस ली, एक कदम आगे बढ़ाया और तारा का हाथ थामते हुए बोला, "तारा, थोड़ी देर शांत रहो और बस मेरी बात सुनो... बीच में मत बोलना।"
​उसने तारा की आँखों में झांकते हुए कहा, "हम बचपन से साथ हैं। मैं हमेशा तुम्हें प्रोटेक्ट करता आया हूँ, तुम पर कभी कोई आंच नहीं आने दी। मुझे लगता था कि मैं यह सब सिर्फ इसलिए करता हूँ क्योंकि तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो। यहाँ तक कि जब मैं बाकी लड़कियों के साथ फ्लर्ट करता था, तब भी मुझे समझ नहीं आता था कि तुम्हारे मामले में मैं इतना ओवर-पजेसिव क्यों हो जाता हूँ। लेकिन जब हम कॉलेज के लिए दूर हुए और मैंने तुम्हें हर पल मिस किया, तब मुझे एहसास हुआ... जो फीलिंग्स मेरे दिल में थीं, वे सिर्फ दोस्ती नहीं थीं। मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ तारा, और इस बात का पूरा एहसास मुझे अब जाकर हुआ है।"
​ध्रुव के शब्द सुनते ही तारा फटी आँखों से उसे देखती रह गई। उसके अंदर भावनाओं का बवंडर उठ खड़ा हुआ। सच तो यह था कि तारा को ध्रुव से बहुत पहले ही प्यार हो गया था, लेकिन उसने हमेशा यही सोचा कि ध्रुव उसे सिर्फ एक दोस्त मानता है। आज अचानक जब उसकी बरसों पुरानी चाहत सच होकर उसके सामने खड़ी थी, तो खुशी और हैरानी के मिले-जुले अहसास से उसकी आवाज़ गले में ही अटक गई।
​तारा की आँखों में नमी तैरने लगी और पलकों के कोर से आंसू छलक कर गालों पर बह निकले।
​तारा को रोते देख ध्रुव पूरी तरह घबरा गया। उसे लगा कि उसने जल्दबाज़ी कर दी और अपनी दिल की बात कहकर अपनी सबसे अच्छी दोस्ती भी दांव पर लगा दी। उसने घबराहट में तारा के दोनों हाथ अपने हाथों में थामे और संभालने वाले लहज़े में कहा, "तारा, प्लीज रोओ मत... अगर तुम्हारे दिल में ऐसा कुछ नहीं है तो कोई बात नहीं। हम जैसे थे वैसे ही रहेंगे, हमारी दोस्ती पर कोई असर नहीं पड़ेगा। तुम बिल्कुल परेशान मत हो।"
​ध्रुव लगातार उसे सांत्वना दिए जा रहा था, और तारा अपने बहते आंसुओं के बीच बस उसे देखे जा रही थी—अपने दिल का हाल ज़ुबान पर लाने की कोशिश करती हुई, लेकिन शब्द जैसे उसका साथ ही छोड़ चुके थे।
इक्कीसवां भाग समाप्त, कहानी जारी है....