Srushthi in Hindi Love Stories by Radha books and stories PDF | सृष्टि - 5

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सृष्टि - 5

सृष्टि ध्रुव को पहले से ही जानती थी लेकिन वो सामने नहीं आना चाहती थी जबकि उसने ध्रुव को 3-4 बार देख लिया था।

ध्रुव से उसकी पहली बार बात 2 साल पहले हुई थी ज़ब उसने अपनी स्कूल कम्पलीट की। अनजाने मे ही सही लेकिन वो  फ़ोन के जरिये मिल चुके थे उस रात सृष्टि ने कॉल तो कट कर दिया था लेकिन कॉल कट करने के बाद भी उसकी धड़कने उसी स्पीड से धड़क रही थी जितनी उसकी आवाज़ को सुन कर धड़की थी वो जल्दी से दौड़ कर अपने बेड पर जाकर सो गयी और सोने की कोशिश करने लगी लेकिन उसका मन उस अधूरी बात पर ही अटका हुआ था उसका बस चले तो अभी कॉल करके पूछ ले की तुम कौन हो ?? लेकिन उसने अपने पर काबू कर रखा था आधी रात उसके ख्यालो मे ही गुजर गया फिर जैसे तैसे करके सो गयी 

        अगली सुबह उसकी नींद उडी उसने धीरे धीरे अपनी आँखे खोली लेकिन देखो तो उसकी आँखे खुलने से पहले ही उसके चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान आ गयी वो बहुत अच्छी सुबह थी फिर उसने धीरे से अपनी आँखे खोली और सामने देख आँखे इतनी बड़ी करके बिस्तर उठ कर बैठ गयी। सामने देखा तो उसका वो छोटा भाई आदी उसके करीब खड़ा था और उसे ही देख रहा था मैंने गुस्से मे बोला - क्या है, मुझे डरा क्यों रहे हो??

- क्या दीदी, मै कहा डरा रहा हुँ, बहुत लेट हो गया है इसलिए मै तो आपको उठाने आया था ।

- तो इतना घूर घूर कर कौन देखता है??

 - दीदी, आपको पता है, मै क्या देख रहा था।

 - क्या ????

- आपके चेहरे पर इतनी मोटी सी जो मुस्कान आ रही थी वो दूर पहाड़ पर खड़े इंसान को भी दिख जाये।

सृष्टि अपने चेहरे के भाव को बदलते हुए कहा - क्या बात कर रहे हो, मै क्यों स्माइल करूंगी।

- वो तो आप ही बताएंगी ना मुझे तो !!

- तू क्यों मेरा दादा बना बैठा है उठ गयी हुँ ना मै, अब तो तू जा। मै आ रही हुँ।

ठीक है जाता हुँ। ( मुँह को फुला कर )

       सृष्टि का पूरा दिन रोज की तरह ही निकल जाता है लेकिन रात होते ही वो फिर से अपने फ़ोन को देखे जा रही थी जैसे किसी का बेसब्री से इंतज़ार कर रही हो। ऐसे ही फ़ोन को देखते देखते आधा घंटा बिता फिर एक घंटा निकला फिर 2  घंटे हो गए उसे पता था की वो सिर्फ एक गलती थी लेकिन पता नहीं क्यों वो उसे दुबारा सुनना चाहती थी आधी रात बीत गयी इंतज़ार करते करते उसे नींद आ गयी

         अगली सुबह उसने धीरे धीरे अपनी आँखे खोली आज उसके चेहरे पर उदासी और थकान दिखाई दे रही थी आज भी आदी उठाने आया था उसने सृष्टि से कहा - दीदी आज तो स्माइल ही गायब हो गयी।

- स्माइल गयी तेल लेने, तू क्यों आया है।

- अपनी ड्यूटी करने के लिए, आपको उठाने के लिए। फिर थोड़ा सा रुक कर बोला - दीदी, गिरगिट तो रंग बदलता है आप तो पूरा रूप ही बदल लेते हो कल क्या था और आज क्या।

 - तू जा यार, आदी !!!

- जाता हुँ वो दरवाजे तक पंहुचा ही था की सृष्टि ने एक उम्मीद से फिर से फोन की तरफ देखा स्क्रीन पर अनजान न. से गुड मॉर्निंग का नोटिफिकेशन आ रखा था उसे देख सृष्टि की आँखे खुशी से बड़ी हो गयी और चेहरे पर स्माइल आ गयी इतना ही नहीं वो जोर चिल्ला दी।उसकी आवाज़ सुन आदी पीछे मुड़ा उसके चेहरे के एक्सप्रेशन अब बिल्कुल अलग थे उसने फिर चिढ़ाते हुए कहा - गुरगिट भी फेल है इतना बोल कर वो चला गया।

उसके जाते ही उसने अपना फ़ोन हाथ मे लिया और चेक करने लगी उसने मैसेज ओपन किया और न. मिलाये वो उसी के न. थे पता नहीं क्यों लेकिन वो बहुत खुश हुई उसने भी गुडमॉर्निंग टाइप किया और वापिस हटा दिया और सोचने लगी थोड़ा रूकती हुँ जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए। उसने लम्बी सांस ली और फिर शांति से सोचा फिर उसे लगा की मै इसे बिल्कुल नहीं जानती मुझे ब्लॉक कर देना चाहिए और वो मन मार कर ब्लॉक करने लगी और हिम्मत करके कर दिया कुछ देर उसके बारे मे सोचती रही और उससे रहा नहीं गया उसने फिर से ब्लैकलिस्ट से न. को निकल दिए और गुडमॉर्निंग का मैसेज कर दिया।

कुछ देर मै रिप्लाई आया - कैसे हो?

सृष्टि - आप कौन ??? 

ध्रुव - मै हुँ, जिससे आपकी बात एक अनजाने मे हुई थी।

सृष्टि - अब क्यों कॉल किया?? 

 ध्रुव - आपसे बात करनी थी।

सृष्टि - मुझसे क्या बात करनी है। 

ध्रुव - इतने सारे सवाल कर रहे हो, पहले ये बताओ की पहचाना नहीं तो गुडमॉर्निंग कैसे बोला ! कही आप भी मुझे ही याद कर रहे थे??

सृष्टि - मै आपको क्यों याद करूंगी भला !!

ध्रुव - नहीं, मै तो ऐसे ही बोल रहा था क्योंकि मै कल से आपसे बात करना चाहता था लेकिन मुझे लगा की आपको लगेगा की मै पीछे पड़ गया इसलिए मैसेज नहीं किया।

सृष्टि - तो अभी कैसे किया।

ध्रुव - आपने भी तो किया। 

सृष्टि - आपने किया इसलिए रिप्लाई किया मैंने तो।

ध्रुव - जरूरी तो नहीं है की मै मैसेज करूंगा तो आपको करना ही पड़ेगा।

सृष्टि - मेरी बात अलग है।

ध्रुव - अलग कैसे है ???

सृष्टि - बस है।

ध्रुव - ठीक है, मैंने मैसेज किया क्योंकी मै आपसे बात करना चाहता था मै फिर से आपकी आवाज़ सुनना चाहता था। आपकी आवाज़ मे मुझे अपनापन लगा जो बहुत स्पेशल था इसलिए मैंने मैसेज किया। मुझे नहीं पता की आप कौन हो कहाँ से हो, कैसे हो,कितनी उम्र है,शादीसुदा हो या नहीं ?? बस मन किया इसलिए बात प्रणाम चाहता था अगर मैंने आपको परेशान किया हो तो मुझे माफ कर देना। आज के बाद अब से मै आपको परेशान नहीं करूगाँ।

सृष्टि अब सोचने को मज़बूर हो गयी की अब क्या रिप्लाई करे अगर बात को ख़तम कर दी तो वो दुबारा कभी उससे नहीं मिल पाएगी और जान पहचान बना ली तो भी प्रॉब्लम है क्योंकि वो अनजान है और तभी उसकी मा ने आवाज़ लगायी की रूम से सृष्टि बाहर आओ। उसने बिना कोई रिप्लाई दिए चली गयी।

क्रमशः ........…।