अध्याय 10 : हवेली का भूत और पहली किस
पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया था। हवेली की लाइट चली गई थी।
रुद्र नित्या के ऊपर था, और किसी तीसरे का हाथ रुद्र के कंधे पर था।
ठंडा... बर्फ जैसा ठंडा हाथ।
नित्या चीख पड़ी, "रुद्र! पीछे कोई है!"
रुद्र ने बिजली की तेजी से पलट कर उस हाथ को पकड़ा।
"कौन है?" रुद्र दहाड़ा।
टॉर्च की रोशनी जली।
सामने 70 साल की एक बूढ़ी औरत खड़ी थी। हवेली की सबसे पुरानी नौकरानी - दादी अम्मा।
"मालिक... लाइट चली गई... मैं मोमबत्ती लाई थी..." बूढ़ी औरत कांप रही थी।
रुद्र ने गुस्से में उसका हाथ छोड़ दिया, "बिना खटखटाए अंदर क्यों आई?"
"मालिक... नीचे आराध्या बिटिया फिर से चिल्ला रही थी... कह रही थी कोई उसे खींच रहा है..."
नित्या उठकर बैठ गई, "दीदी!"
वो भागकर अपने कमरे में गई। रुद्र भी पीछे गया।
आराध्या बेड पर नहीं थी। वो कोने में सिकुड़ी हुई बैठी थी, पसीने से भीगी हुई।
"वो... वो आई थी... वो औरत आई थी..." आराध्या कांप रही थी।
"कौन सी औरत?" नित्या ने पूछा।
"लाल साड़ी... लाल साड़ी वाली... वो कह रही थी... इस हवेली की बहू बनेगी तो मरेगी..."
रुद्र का चेहरा पत्थर जैसा हो गया।
"दादी अम्मा, इसे इसके कमरे में ले जाओ। और रात भर इसके पास ही रहना।"
दादी अम्मा आराध्या को ले गई।
अब कमरे में फिर से नित्या और रुद्र अकेले थे। लाइट आ चुकी थी।
नित्या ने पूछा, "कौन है लाल साड़ी वाली औरत? क्या सच में इस हवेली में भूत है?"
रुद्र ने सिगरेट जलाई, "भूत नहीं... मेरी माँ है।"
नित्या चौंक गई।
"मेरी माँ... 10 साल पहले इसी हवेली में जल कर मर गई थी। लोगों ने कहा एक्सीडेंट था। पर मैं जानता हूँ... मेरे चाचा ने मारा था... संपत्ति के लिए। तब से सब कहते हैं उसकी आत्मा इसी हवेली में है। वो किसी भी नई बहू को बर्दाश्त नहीं करती।"
"तो तुमने मुझे यहाँ क्यों रखा? मुझे भी मारना चाहते हो?"
रुद्र ने सिगरेट फेंकी और नित्या के पास आया।
"मैं तुझे बचाने के लिए ही तुझे अपनी बीवी बनाकर लाया हूँ। मेरी माँ सिर्फ राजावत खानदान की बहुओं को परेशान करती है। पर अगर वो बहू... मुझसे सच्चा प्यार करती हो... तो माँ उसे कुछ नहीं कहती।"
"तो तुम चाहते हो मैं तुमसे प्यार करूँ... ताकि तुम्हारी माँ की आत्मा मुझे ना मारे?"
"हाँ।" रुद्र ने उसका चेहरा पकड़ा। "कर ले प्यार। मुझसे। मैं तुझे हर बुरी चीज से बचा लूंगा। भूत से भी, इंसान से भी।"
नित्या की आँखें भर आईं, "तुम पागल हो रुद्र। पूरी तरह पागल।"
"तेरे लिए हूँ।"
रुद्र ने पहली बार बिना जबरदस्ती के, बिना धमकी के, नित्या के माथे को चूमा। बहुत देर तक।
नित्या ने उसे धक्का नहीं दिया।
उसके दिल में पहली बार रुद्र के लिए थोड़ा सा दर्द जागा।
"तुम्हारी पीठ का निशान..." नित्या ने धीरे से कहा, "वो... वो चाचा ने दिया था?"
"नहीं।" रुद्र ने कहा, "मेरी माँ के मरने के बाद, चाचा ने मुझे जलते हुए घर से निकाला नहीं। मैं खुद आग में कूद गया था माँ को बचाने। तब का है।"
नित्या की आँखों से आँसू बहने लगे। उसने अनजाने में रुद्र के सीने पर हाथ रख दिया।
रुद्र ने उसका हाथ पकड़ा और उसकी आँखों में देखा।
"नित्या... क्या मैं तुम्हें किस कर सकता हूँ? सिर्फ एक बार? इजाजत से?"
नित्या कुछ नहीं बोली। पर उसने आँखें बंद कर लीं।
ये हाँ थी।
रुद्र ने धीरे-धीरे, बहुत प्यार से, नित्या के होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
ये जबरदस्ती नहीं थी। ये पहली किस थी... जिसमें दोनों की रजामंदी थी।
नित्या ने भी पहली बार उसका साथ दिया।
5 मिनट तक कमरे में सन्नाटा था। सिर्फ दो दिलों की धड़कनें।
जब दोनों अलग हुए, तो नित्या का चेहरा टमाटर जैसा लाल था।
रुद्र मुस्कुराया, "अब तो थोड़ा प्यार आ गया ना इस पागल पर?"
नित्या ने शर्म से मुंह फेर लिया, "हटो... बेशर्म।"
तभी नीचे से फिर से चीखने की आवाज आई। इस बार दादी अम्मा की।
"मालिक! बचाओ! आराध्या बिटिया को कोई खिड़की से खींच रहा है!"
रुद्र और नित्या भागे।
*अगले अध्याय में क्या होगा?*
क्या सच में कोई भूत आराध्या को खींच रहा है या हवेली में कोई इंसान ही भूत बनकर घूम रहा है? क्या नित्या की पहली किस के बाद रुद्र सुधर जाएगा? और लाल साड़ी वाली औरत का राज क्या है?
जानने के लिए पढ़िए - अध्याय 11 : लाल साड़ी का सच