हवेली चारों तरफ से टूटी-फूटी, बेलों और धूल से ढकी हुई है।
बिजली चमकती है — और दीवारों पर पुराने चित्र झिलमिलाते हैं।
हवा में अजीब सी ठंडक है। करन धीरे-धीरे अंदर कदम रखता है।
उसकी चाल में कुछ रहस्य है — जैसे वो किसी चीज़ की तलाश में आया हो।)
(दरवाज़ा चरमराता है।।हवेली के अंदर सन्नाटा है।
पीछे-पीछे सिमरन धीरे-धीरे आती है, उसके कदम काँप रहे हैं।
वो परदे के पीछे छिपकर करन को देखती है।)
सिमरन (धीरे से खुद से) बोली -
ये यहाँ क्या करने आए हैं?… इतनी रात को…
(अचानक — करन के कदम रुकते हैं।।वो जैसे कुछ महसूस करता है। सिमरन साँस रोक लेती है। लेकिन अगले ही पल — करन वहाँ से गायब हो जाता है!)
सिमरन (चौंककर) बोली -
करन?! …
(चारों ओर देखती है)
बोली -
… कहाँ गए ये?
(सन्नाटा…फिर पीछे से किसी की मज़बूत बाँहें उसे जकड़ लेती हैं।
सिमरन के होंठों से हल्की चीख निकलती है। वो दर्द से तिलमिला उठती है।)
सिमरन (घबराई हुई) बोली -
कौन है?! छोड़ो मुझे!
(उसके कानों के पास किसी की गर्म साँसें महसूस होती हैं —
धीरे-धीरे उसकी गर्दन को छूती हुई। वो काँप उठती है।)
करन (धीमे, गहरी आवाज़ में) बोला -
शांत हो जाओ… मैं हूँ…
(सिमरन उसकी आवाज़ पहचान लेती है।नउसकी धड़कनें तेज़ हो जाती हैं। वो उसके सीने से सटी हुई है — और महसूस करती है कि उसके अंदर किसी तूफान का सैलाब है।)
सिमरन (फुसफुसाते हुए) बोली -
करन… आप यहाँ क्या कर रहे हो?
करन (रहस्यमयी स्वर में) बोला -
सुरक्षा… कुछ लोग मेरा पीछा कर रहे हैं। हमें छिपना होगा।
(तभी दरवाज़े के बाहर कुछ आवाज़ें गूँजती हैं —
कई वैंपायर हवेली के अंदर घुसते हैं। उनकी आँखें लाल, नुकीले दाँत चमकते हुए।)
वैंपायर 1 (गुस्से से) बोला -
वो यहीं कहीं है…आज उस गद्दार को हम ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे!
(करन तुरन्त सिमरन का हाथ पकड़ता है और पास रखे एक पुराने सन्दूक की ओर भागता है।।वो सन्दूक खोलकर सिमरन को अंदर खींच लेता है और खुद भी उसके साथ अंदर घुस जाता है।
सन्दूक के ढक्कन से हल्की सी दरार से बाहर का अँधेरा दिखता है।)
(सन्दूक के अंदर बहुत कम जगह है। सिमरन करन के सीने पर लेटी है। वो बुरी तरह डरी हुई है — उसके हाथ काँप रहे हैं।
उसके चेहरे से पसीने की बूँदें गिर रही हैं।)
सिमरन (धीरे-धीरे, काँपती आवाज़ में) बोली -
करन… साँस नहीं ले पा रही… बहुत घुटन हो रही है…
करन (धीरे से, उसे सान्त्वना देते हुए) बोला -
बस कुछ पल…मैं यहीं हूँ… तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगा…
(वो उसका सिर अपने सीने से लगा लेता है।
बाहर वैंपायरों की आवाज़ें पास आ रही हैं —
“सूँघो… खून की महक यहीं है।”
सिमरन डर से उसका कॉलर पकड़ लेती है और अपना चेहरा उसकी गर्दन में छिपा लेती है।)
सिमरन (फुसफुसाते हुए) बोली -
अगर कुछ हो गया तो…
करन (धीमे स्वर में) बोला -
तो पहले मुझे होगा…
(उसके शब्दों में ठंडक थी — लेकिन उनमें सुरक्षा की गर्मी भी थी।
सिमरन की साँसे तेज़ हैं। उसका चेहरा करन की गर्दन से लगा है,
और उसे महसूस होता है — करन की धड़कन अब इंसानों जैसी नहीं रही। धीमी… ठंडी… पर बेहद स्थिर।)
(बाहर वैंपायरों के कदम पास आते हैं, फिर धीरे-धीरे दूर चले जाते हैं। अंधेरे में कुछ मिनटों का सन्नाटा छा जाता है।)
(सिमरन हिलने की कोशिश करती है, पर करन के हाथ उसके चारों ओर हैं जैसे कोई सुरक्षा कवच हो। घुटन और डर के बीच भी उसे उस आलिंगन में एक अजीब सुकून महसूस होता है।)
सिमरन (धीरे से) बोली -
करन… ये जगह… बहुत अँधेरी है…
करन (धीमी आवाज़ में) बोला -
अँधेरा ही तो हमारी असली दुनिया है सिमरन…
बस फर्क इतना है — तुम उसमें भी रोशनी जैसी लगती हो…
(सिमरन की आँखें नम हो जाती हैं। उसकी साँसें घुटने लगती हैं — वो धीरे-धीरे बेहोश होने लगती है। करन उसे अपनी बाँहों में कस लेता है, उसके बालों पर हाथ फेरता है।)
करन (फुसफुसाते हुए) बोला -
मैंने वादा किया था न… तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगा…
(अँधेरे में हवेली की टूटी दीवारों पर लाल रोशनी झिलमिलाती है —
शायद किसी और रहस्य की आहट।)
“प्यार और डर के इस खेल में अब सन्दूक बंद था…
पर उसके अंदर दो दिल एक साथ धड़क रहे थे —
एक इंसान का… और एक वैंपायर का।”
मद्धम चाँदनी खिड़की से अंदर आ रही है। कमरे में सन्नाटा है।
बाहर हवा के झोंके पुराने पेड़ों की डालियों को हिला रहे हैं।)
(दरवाज़ा धीरे से खुलता है — करन अंदर आता है।
उसकी बाँहों में सिमरन बेहोश पड़ी है। उसके चेहरे पर डर और थकान दोनों झलक रहे हैं।)
(करन सिमरन को धीरे से बिस्तर पर रखता है। उसका माथा सहलाता है — और उसके पास बैठ जाता है। उसकी आँखों में अजीब सी बेचैनी है, जैसे अपने अंदर के राक्षस से लड़ रहा हो।)
करन (धीरे से खुद से) बोला -
क्यों हर बार जब मैं इसे बचाता हूँ… तो खुद से हार जाता हूँ?
(वो अपना सिर झुकाता है, और धीरे से सिमरन का हाथ पकड़ लेता है। उसकी धड़कन सुनता है — और उसकी साँसें गहरी होने लगती हैं।।फिर वो भी धीरे-धीरे उसकी बगल में लेट जाता है।)
(घड़ी की सुई 3 पर रुकती है। हल्की नीली रोशनी कमरे में फैली है। सिमरन की आँखें धीरे-धीरे खुलती हैं। वो करवट लेती है — और जो देखती है, उसकी साँस अटक जाती है।)
(करन उसे बहुत कसकर पकड़कर सोया हुआ है।नउसकी बाँहें उसके चारों ओर ऐसे लिपटी हैं जैसे कोई चीज़ छीन जाने का डर हो।
उसका चेहरा सिमरन की गर्दन में छिपा है। उसकी ठंडी साँसें सिमरन की त्वचा को छू रही हैं।)
सिमरन (धीरे से खुद से) बोली -
ये… क्या कर रहे हैं? कहीं… ये मेरा खून तो नहीं पीने वाले?
(वो हल्का सा हिलने की कोशिश करती है — पर करन नींद में और कसकर उसे बाँहों में भर लेता है। उसके होंठ सिमरन की गर्दन से लग जाते हैं। सिमरन की साँसें तेज़ हो जाती हैं। उसका दिल डर से धड़क उठता है।)
(वो डर के मारे आँखें बंद कर लेती है। पर करन कुछ नहीं करता — बस यूँ ही उसे थामे रहता है। धीरे-धीरे सिमरन को भी एक अजीब-सा सुकून महसूस होने लगता है। उसका डर कम होता है…और वो करन के सीने की धड़कन सुनते-सुनते सो जाती है।)
(सूरज की हल्की किरणें कमरे में आती हैं। चिड़ियों की आवाज़ सुनाई देती है। सिमरन की आँखें खुलती हैं — वो करवट लेती है।)
(वो देखती है कि करन बिस्तर के किनारे खड़ा है — उसकी पीठ उसकी ओर है। उसके हाथ काँप रहे हैं। उसकी साँसें भारी हैं।
धीरे-धीरे वो पलटता है — और सिमरन के होश उड़ जाते हैं।)
(उसकी आँखें फिर से लाल हो चुकी हैं। उसके दाँत नुकीले हो गए हैं। उसके होंठों पर हल्की लाल लकीर — जैसे किसी के खून का निशान।)
सिमरन (धीरे से, टूटी आवाज़ में) बोली -
करन… आप फिर… वही बन गए?
(करन गहरी साँस लेता है, अपनी मुट्ठियाँ भींचता है। उसकी आँखों में दर्द है, पर वो खुद को रोक नहीं पा रहा।)
करन (गुस्से और पीड़ा में) बोला -
मैंने कोशिश की थी…हर बार कोशिश की…पर ये श्राप मुझे चैन से जीने नहीं देगा सिमरन!
(वो चीखता है — और दीवार पर मुक्का मार देता है।
उसकी उँगलियों से खून बहने लगता है, पर वो खून भी तुरंत सूख जाता है जैसे वो खुद उसे पी गया हो।)
सिमरन (रोते हुए उसके पास जाती है) -
नहीं करन…आप मुझसे वादा करो, आप खुद को मुझसे दूर मत करो…मैं इस श्राप को मिटाकर रहूँगी!
(करन उसकी ओर देखता है —
उसकी आँखों में अब इंसान और वैंपायर दोनों की लड़ाई चल रही है।)
करन (धीरे से) बोला -
अगर मैं खुद को नहीं रोक पाया तो… तुम्हें खो दूँगा सिमरन।
सिमरन (आँखों में आँसू लिए) बोली -
तो खोने से पहले मैं आपको बचा लूँगी… चाहे जान चली जाए!
(संगीत धीरे-धीरे तेज़ होता है —
दोनों की आँखों में आँसू, डर और एक अधूरा वादा चमकता है।)
(खिड़की के बाहर फिर वही पुरानी हवेली दिखती है…और आसमान में सूरज की रोशनी के साथ एक काली परछाई उड़ती दिखाई देती है —जैसे कोई शक्ति अब लौट आई हो…)
"रात ने फिर अपने पंख फैला लिए थे…
प्यार ने फिर एक राक्षस को जगाया था…
पर इस बार, सिमरन के दिल में एक वादा था —
वो अपने करन को हर हाल में इंसान बना कर रहेगी।"
बाहर गरजते बादल। खिड़कियों पर बारिश की बूँदें ज़ोर से टकरा रही हैं। कमरे के अंदर बस एक टिमटिमाती लाल मोमबत्ती जल रही है।
उसकी लौ, दीवारों पर भयानक परछाइयाँ बना रही है।)
(दरवाज़ा धड़ाम से बंद होता है — और सिमरन ज़मीन पर गिरती है।
उसकी आँखों में डर है। वो देखती है कि करन दरवाज़े के पास खड़ा है — उसकी आँखें गहरी लाल हैं, जैसे उनमें आग जल रही हो।
उसकी साँसें भारी हैं, चेहरा गुस्से और प्यास से भरा हुआ।)
सिमरन (रोते हुए, काँपती आवाज़ में) बोली -
करन… ये आप क्या कर रहे हो?
मुझे बाहर जाने दो… please…
(करन धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ता है। उसके कदमों की आवाज़ डर पैदा कर रही है। वो बिना कुछ बोले उसके बहुत पास आता है।)
करन (धीमे पर खौफनाक लहज़े में) बोला -
बाहर?
अब तुम बाहर नहीं जा सकती, सिमरन…क्योंकि बाहर की दुनिया मेरे लिए ज़हर है…और तुम… मेरे लिए खून हो।
(सिमरन की साँस रुक जाती है। वो पीछे हटती है, लेकिन पीछे दीवार है। अब भागने की कोई जगह नहीं।)
सिमरन (डरते हुए) बोली -
करन… आपको याद है ना…आपने कहा था कि मैं आपकी “परी” हूँ?
तो अपनी परी को चोट मत पहुँचाओ, करन…
कृपया, खुद पर काबू रखो…
(करन की आँखों में एक पल के लिए झलक आती है — पुराना करन।
वो कुछ पल रुकता है, लेकिन फिर उसके अंदर की वैंपायर प्यास जीत जाती है।)
करन (गहरी आवाज़ में) बोला -
परी नहीं…अब तुम सिर्फ़ मेरी प्यास हो।
(वो झपटकर सिमरन को अपनी बाँहों में खींच लेता है।
सिमरन डर से काँप जाती है। वो उसकी गर्दन के पास झुकता है — उसकी ठंडी साँसें सिमरन की त्वचा को छूती हैं।)
सिमरन (चीखते हुए, आँखों में आँसू लिए) बोली -
नहीं करन!! आप ये नहीं कर सकते!
आप ऐसे नहीं हो!
(वो ज़ोर से उसे धकेलती है। करन दीवार से टकराता है, और एक पल को रुक जाता है। उसके चेहरे पर उलझन है — मानो दो शख्स उसके अंदर लड़ रहे हों।)
करन (दर्द भरी आवाज़ में) बोला -
मैं… मैं नहीं चाहता था…
पर ये प्यास… ये मुझे जला रही है सिमरन!
(वो अपने सिर को पकड़ता है, ज़मीन पर गिर पड़ता है। उसकी चीखें कमरे की दीवारों में गूँजने लगती हैं। सिमरन दौड़कर उसके पास जाती है, उसके गालों पर हाथ रखती है।)
सिमरन (रोते हुए) बोली -
आप मुझसे लड़ो मत करन…अपने अंदर के अंधेरे से लड़ो!
मैं यहाँ हूँ…मैं आपको छोड़कर नहीं जाऊँगी…
(करन की साँसें तेज़ हैं। वो उसकी आँखों में देखता है —
पहली बार उसकी आँखों में कुछ सेकंड के लिए फिर नीला रंग झलकता है, जैसे उसका इंसान रूप लौटने की कोशिश कर रहा हो।)
करन (थरथराती आवाज़ में) बोला -
अगर मैं हार गया तो?
अगर मैं खुद को रोक न पाया तो, सिमरन?
सिमरन (धीरे से उसके माथे पर हाथ रखते हुए) बोली -
तो मैं हार जाऊँगी… पर आपको नहीं हारने दूँगी।
(वो उसे गले लगा लेती है। करन की साँसें कुछ धीमी होती हैं। कमरे में सन्नाटा छा जाता है। मोमबत्ती की लौ झिलमिलाती है — जैसे रोशनी अंधेरे से लड़ रही हो।)
"प्यार का सबसे कठिन इम्तिहान वही होता है —
जब अपने ही हाथों से हमें अपने प्यार को अंधेरे से बचाना पड़ता है।
सिमरन जानती थी…
अब करन को सिर्फ़ उसका प्यार ही नहीं,
उसकी आत्मा बचा सकती है।"