Hotel Haunted - 6 in Hindi Horror Stories by Prem Rathod books and stories PDF | हॉंटेल होन्टेड - भाग - 6

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हॉंटेल होन्टेड - भाग - 6

'Film Reel कहां गई?' निकुंज की आवाज में परेशानी थी क्योंकि फिल्म जो प्रोजेक्टर में होनी चाहिए थी वह वहां पर नहीं थी। निकुंज ने वहां रूम में ढूंढना शुरू किया पर वह Reel उसे कहीं दिखाई नहीं दी। नीचे सब इंतजार कर रहे थे कि तभी वहां चल रही सभी लाइट्स ऑफ हो गई और रूम में अंधेरा छा गया। एक अजीब सी आवाज के साथ प्रोजेक्टर स्टार्ट हो गया,उसने से रोशनी निकली जो सामने स्क्रीन पर जा टकराई और सभी के सामने एक पिक्चर ऊपर कर आ गई।

स्क्रीन पर सभी को सामने एक पुरानी सी हवेली दिखाई दी।सामनेेे कुछ पलों तक वहां हवेली ही दिखती रही,हवेली के सामने एक छोटा सा फाउंटेन था तभी उसने एक लड़का नजर आया, जो धीरेे-धीरे हवेली की तरफ बढ़ रहा था। उसने जाकर हवेली का दरवाजा खटखटाया।एक लड़की ने आकर दरवाज़ा खोला,उन दोनों में थोड़ी बातें हुई और फिर दोनों अंदर चलेे गए। दोनों एक कमरे में बैठकर आपस में बातें कर रहे थे कि अचानक लड़का जमीन पर गिर गया। उस लड़की ने उसे उठाने की बहुत कोशिश की पर वह नहीं उठा तभी अचानक 4 आदमी कमरे में खुश करें जिसे देखकर लड़की चौक गई, उनमें से दो आदमी होने उसे पकड़ लिया, उन चारों में से एक आदमी के हाथ में रोड थी,जिससे उसने जमीन पर पड़े लड़के को पीटना शुरू कर दिया। वो उस लड़के को बेरहमी से पीटा जा रहा था,जिसे देखकर लड़की रो रही थी, चिल्ला रही थी पर उसकी बात सुनने वाला वहां पर कोई नहीं था।उन दोनों ने उस लड़की को जमीन पर लेटा दिया और उसके साथ जबरजस्ती शुरू कर दी। वह चारों जोर जोर से हंस रहे थे तभी एक आदमी उस लड़की की तरफ बढ़ा। पर अचानक ही उसके सर में एक जोरदार वार हुआ और वह नीचे गिर गया। उसने पीछे देखा तो वही लड़का खून में लथपथ हाथ में वही रोड लेकर खड़ा था। उसने बिना वक्त गंवाए एक के बाद एक तीनों को मार मार के वहीं पर ढेर कर दिया और अंत में वहीं पर गिर गया। लड़की ने उस लड़के को उठाने की बहुत कोशिश की पर वह नहीं उठा।वो लड़की उसके पास बैठ कर रोती रही।
कुछ देर तक सामने स्क्रीन पर अंधेरा छा गया, सबकी आंखें खुली हुई थी, सब बिना पलक झपकाए देख रहे थे। कुछ देर बाद वापस से एक पिक्चर उभर कर आई। जहां पर वही लड़की उसी रूम के Fan पर लटकी हुई थी, उसके बाद स्क्रीन पर कुछ लाशे दिखाई देने लगी, कोई आधा कटा हुआ था तो कोई बिना हाथ पैर के वहीं पड़ा हुआ था।उसके बाद एक और तस्वीर नजर आई जहां पर हवेली में आग लगी हुई थी और वह लगभग टूट चुकी थी।उसके सामने एक लड़का पड़ा था जिसके शरीर से बहुत खून बह रहा था,उसके साइड पर एक लड़की उस लड़के के चेहरे को समेटे हुए थी और रो रही थी।
एक बार फिर से स्क्रीन पर अंधेरा छा गया।इसी बीच "यह सब क्या है राजीव?" धवल ने राजीव से पूछा, वह कुछ बोल नहीं वाला था कि तभी एक बार फिर स्क्रीन पर रोशनी फैल गई और वह पल सामने आया जहां पर सभी लोग काम कर रहे थे। जिसे देखकर राजीव के सांस में सांस आई "कैसे.....कैसे उन सब ने मेहनत से इस जगह को बनाया वह सब कुछ दिखाया जा रहा था" सब कुछ सही चल रहा था कि तभी उन सबके सामने एक अजीब सा सीन आ गया।
खुदाई की मशीन एक जगह पर खोजने की बहुत कोशिश कर रही थी पर वहां पर खुदाई हो ही नहीं रही थी। वहां पर मिट्टी टस से मस नहीं हो रही थी, उसके अंदर बैठे आदमी ने और जोर लगाया तो मशीन एक धमाके के साथ पूरी टूट कर बिखर गई,वहां पर काम कर रहे सभी लोग धमाके की वजह से चौक गए पर ताज्जुब की बात तो यह थी कि उस आदमी को एक खरोच तक नहीं आई थी।
इस सीन को देखने के बाद धवल ने राजीव की तरफ देखा पर राजीव कुछ नहीं बोला, वह बस बिना पलक झपकाए स्क्रीन की तरफ ही देखे जा रहा था।उसे खुद पता नहीं था कि यह सब क्या हो रहा है?
तभी स्क्रीन पर होटल दिखाई दिया जो बिल्कुल पूरी तरह बनकर तैयार था। कुछ सेकंड ऐसे ही बीते रहे उसके बाद जो पल सबके सामने आया वाह बहुत ही हैरान कर देने वाला पल था। होटल के बाहर का नजारा दिख रहा था जहां पर सब लोग थोड़ी देर पहले खड़े थे। सामने दो गार्ड्स दिखाई दे रहे थे ,अचानक दोनों पास आए और एक दूसरे के गाल पर जोर-जोर से थप्पड़ मारने लगे। वो दोनों रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे, दोनों के गाल में से खून निकलने लगा था पर वह रुक ही नहीं रहे थे।अचानक से उन दोनों ने अपनी-अपनी गन निकाली और एक दूसरे के गले के आर पार कर दी और फिर वह दोनों वहीं गिर गए। उन दोनों के गले से निकलता हुआ खून वहां पर इकट्ठा होने लगा। कुछ देर बाद स्क्रीन पर "हॉन्टड" लिखा हुआ आया। उसके बाद "डार्क हांटेड नाइट होटल" लिखा हुआ दिखाई देने लगा और फिर प्रोजेक्टर बंद हो गया और रूम की सभी लाइट्स ऑन हो गई।
लाइट्स ऑन होते ही राजीव,धवल और रोबर्ट तीनों अपनी जगह से खड़े हो गए।तीनों के चेहरे पर घबराहट और चिंता के भाव साफ नजर आ रहे थे क्योंकि जो कुछ उन्होंने देखा उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि मानो वह सब सच में हो और वह सबकुछ उनकी आंखों के सामने चल रहा हो। उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो कुछ लोग खड़े थे और कुछ कुर्सी पर बैठे हुए एक दूसरे से बातें कर रहे थे। वह सब राजीव की तरफ ही देख रहे थे। राजीव ने उनकी तरफ देखा तो उन सबकी आंखों में एक सवाल था, जिसका जवाब उसके पास खुद भी नहीं था, राजीव वहां से प्रोजेक्टर रूम की तरफ भागा।
प्रोजेक्टर रूम में निकुंज को कुछ अजीब सी आवाज सुनाई दी, जिसकी वजह से वह थोड़ा सा घबरा गया, उसने पीछे मुडकर देखा तो राजीव खड़ा था। जिसे देखकर वह चौक गया।
"सर आप यहां कैसे? आप चलिए मैं बस अभी फिल्म स्टार्ट करता हूं"निकुंज ने राजीव की तरफ देखते हुए कहा, जिसे सुनकर राजीव उसे घूरने लगा।
"स्टार्ट करता हूं मतलब.....फिल्म तो पूरी भी हो चुकी"राजीव मैं निकुंज से चौंकते हुए कहा।
"पर यह कैसे हो सकता है? अभी तक तो मैंने फिल्म रील प्रोजेक्ट में लगाई भी नहीं है।"
"निकुंज तुम जानते हो तुम क्या कह रहे हो? पिछले 20 मिनट से हम नीचे डॉक्यूमेंट्री देख रहे हैं"
"पर यह सर कैसे हो सकता है? मैंने जब ऊपर से देखा तो मुझे नीचे कुछ नहीं दिखाई दिया, आप सब तो नीचे बैठ कर बातें कर रहे थे और वैसे भी अभी तक तो मुझे रील मिली भी नहीं है तो डॉक्यूमेंट्री स्टार्ट कैसे हो सकती है? आप खुद ही देख लीजिए प्रोजेक्टाइल में रील ही नहीं है" इतना कहकर निकुंज ने प्रोजेक्टर की तरफ इशारा किया।
राजीव आगे बढ़कर प्रोजेक्टर में देखता है 'मैंने कहा था ना कि सर प्रोजेक्टर में रीली नहीं है तो फिर कैसे....' निकुंज इतना बोलकर प्रोजेक्टर की तरफ देखता है तो उसने रील लगी हुई थी, जिसे देख कर उसकी आंखें खुली की खुली रह जाती है।'यह कैसे हो सकता है? जब मैं यहां आया था तो इसमें रील ही नहीं थी' जिसे सुनकर राजीव निकुंज की तरफ देखता है।
'इस रील को बाहर निकालो मुझे कुछ देखना है'राजीव की बात मानकर निकुंज ने रील को बाहर निकाला और राजीव के हाथ में रख दिया। राजीव उसे खोल कर देखने लगा,जिसे देखकर उसके चेहरे पर पसीना आ गया और उसके हाथ कांपने लगे।
'This is Impossible.... यह कैसे हो सकता है?नहीं यह वो नहीं है जो हमने नीचे देखा है'
'क्या हुआ सर? क्या नहीं हो सकता?'अब निकुंज भी परेशान हो चुका था।
'वही सब जो इस फिल्म में है और हमने जो कुछ नीचे देखा वह तो कुछ और ही है यह हमारी बनाई हुई डॉक्यूमेंट्री नहीं है' इतना कहते ही राजीव रुक गया, 'वो गार्ड्स....' राजीव इतना बोला और वह निकुंज को लेकर वहां से बाहर निकल गया दोनों बाहर रूम में पहुंचे और वहां से हॉल में आ गए।
'बाहर जाकर देखो कि गार्ड्स है की नहीं?'राजीव चिल्लाया।
'पर सर हुआ क्या मेरी समझ में तो कुछ नहीं आ रहा?' निकुंज लिए परेशान होते हुए राजीव से पूछा। राजीव परेशानी की वजह से होल में इधर-उधर चक्कर लगा रहा था।
'निकुंज जब तुमने प्रोजेक्टर में डॉक्यूमेंट्री नहीं चलाई तो आखिर जो हमने देखा वह क्या था? कैसे वह फिल्म अपने आप चल पड़ी? किसने चलाई वह फिल्म और वो भी जो हमने बनाई ही नहीं....आखिर क्या हुआ था ऊपर प्रोजेक्टर रूम में?'
'सर जब मैं ऊपर गया तो वहां फिल्म रील थी ही नहीं, तो मैं वहां उसे ढूंढने लगा फिर बस उसके बाद आप आ गए बस इतना ही हुआ, पर आप कह रहे हैं कि आप सब ने कोई और डॉक्यूमेंट्री देखी है यह कैसे हो सकता है?'
'मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा है...अगर बाहर खड़े दोनों गार्ड्स को कुछ हो गया तो मैं सबको क्या कहूंगा?'इस वक्त राजीव के चेहरे पर इतना डर था कि मानो उसने कोई डरावना सपना देख लिया हो।
'सर बाहर दोनों गार्ड्स दरवाजे पर ही खड़े हैं'तभी स्टाफ में से एक लड़के ने राजीव के पास आकर कहा, जिसे सुनकर राजीव को बहुत शांति मिली।उसने एक गहरी सांस ली और वापस रूम में पहुंच गया।उसने अपने चेहरे पर मुस्कुराहट लाई, शायद उसे पता था कि अंदर जाते ही सब लोग उससे क्या सवाल पूछेंगे।
'So, Ladies and Gentlemen कैसी लगी आपको हमारी यह फिल्म?' राजीव ने मुस्कुराते हुए कहा, जिसे सुन कर सब चौंक गए।
'अरे आप सब बड़े परेशान लग रहे हैं हमम..मैं वजह जानता हूं, अरे यह सब भी हमारे सेलिब्रेशन का एक पार्ट था अब आप सब इस होटल में आए हैं तो थोड़ा बहुत एंटरटेनमेंट फील करवाना भी तो जरूरी था... इतना बोल कर राजीव हंसने लगा।
'Nice and Scary Film, Like it' एक लड़का खड़े होते हुए बोला और ताली बजाने लगा,जिसे देख कर सब ने ताली बजाने शुरू कर दी।
'Thank you everyone,I hope you like the show अब मैं आप सब से गुजारिश करता हूं कि आप सभी डिनर के लिए चलिए' बोलते हुए राजीव धवन और रोबर्ट के साथ बाहर जाने लगा और सभी लोग उसके पीछे चलते हुए जाने लगे। सभी लोग चलते हुए बाहर निकल रहे थे कि तभी एक लड़की चलते चलते रुक गई। उसके साथ जो लड़का था उसे महसूस हुआ कि वह अकेले चल रहा है तो उसने पीछे मुड़कर देखा तो पाया कि उसकी वाइफ एक जगह पर खड़ी है।वह उसके पास जाकर बोला।
'Hey.... Sweetheart क्या हुआ तुम्हें? तुम अचानक यूं चलते-चलते क्यों रुक गई?' पर उस लड़की ने कोई जवाब नहीं दिया 'क्या हुआ चलो भी अब....' पर फिर भी वह कुछ नहीं बोली और अपना सिर झुका कर खड़ी रही। उस लड़के को यह बात बहुत अजीब लग रही थी कि अचानक इसे क्या हो गया?
'अब तुम्हें क्या हुआ? जवाब क्यों नहीं दे रही हो?' इस बार वह लड़का थोड़ी ऊंची आवाज में बोला, जिसे सुनकर सब लोग चलते चलते रुक गए और उन्हीं की तरफ देखने लगे।तभी निकुंज ने उनसे पूछा 'क्या हुआ सर Any Problem? क्या मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूं?' जिसे सुनकर उस लड़के ने रिप्लाई दिया 'नहीं नहीं सर ऐसी कोई परेशानी की बात नहीं है पर पता नहीं क्यों अचानक यह अजीब सा Behave कर रही है'तभी उस लड़की ने अपना सिर उठाकर उस लड़के की तरफ देखा,जैसे ही उस लड़के ने उस लड़की की तरफ देखा, उसके होश उड़ गए, वह डर के मारे जमीन पर गिर गया और जोर से चिल्लाया,उस लड़के की तरफ सभी लोगों का भी यही हाल था क्योंकि सामने का नजारा ही कुछ ऐसा दिल दहला देने वाला था।
उस लड़की की आंखें बिल्कुल काली पड़ गई थी और उसकी आंखों में से खून निकल रहा था।जिसे देखकर सभी लोगों की रूह कांप गई और कुछ लोगों की चीखें भी निकल गई। इस नजारे को देखकर राजीव समेत सभी लोगों की सांसें थम गई। वह लड़का खड़ा हुआ और उस लड़की के कंधे को पकड़ते हुए बोला 'यह क्या हुआ तुम्हें?' वह बस इतना ही बोल पाया था कि तभी उस लड़की ने उसे पकड़ा और दूर फेंक दिया वह जोर से चिल्लाई 'आखिरकार यह दिन आ ही गया' और होटल की सभी लाइट्स ऑफ हो गई।जिससे वहां खड़े सभी लोगों में अफरा-तफरी मच गई, निकुंज ने सभी लोगों को शांत रहने के लिए कहा और एक स्टाफ को जनरेटर चेक करने के लिए भेजा।
वह जनरेटर की तरफ जाने ही वाला था कि तभी सभी लाइट ऑन हो गई जिसे देखकर निकुंज ने राहत की सांस ली, पर अगले ही पल उन सबके सामने जो नजर आया उसे देखकर सब लोगों की सांसे वहीं थम गई। सामने उस लड़की के शरीर के टुकड़े पड़े थे, उसका शरीर छोटे-छोटे टुकड़ों में बट गया था और उसका खून फर्श पर चारों तरफ फैला हुआ था, जिसे देखकर वह लड़का जोर से चिल्लाया। 'नहीईईईई......'और दौड़ कर उस लड़की के शरीर के पास पहुंचा,उसे पता ही नहीं चला कि अचानक यह सब कैसे हो गया?वह उसके पास बैठकर रोने लगा।
'मुझे लगता है कि यह होटल सचमुच हॉन्टेड है, हमें फॉरन यहां से चले जाना चाहिए' भीड़ में से एक आदमी बोला और सभी लोग उसकी तरफ देखने लगे।आखिरकार वही हो रहा था जिस बात का राजीव को सबसे ज्यादा डर था सभी लोग जल्द से जल्द वहां से अपने घर की तरफ जाने लगे।

कुछ देर बाद.....

'सर आप बिल्कुल टेंशन मत लीजिए सब ठीक हो जाएगा आप आराम से घर जाइए...'राजीव ने धवल को समझाते हुए कहा।
'लेकिन राजीव आज जो कुछ भी हुआ वह नहीं होना चाहिए था, देखा नहीं तुमने क्या हुआ वहां अगर यह बात.....' धवल बोलते बोलते रुक गया और राजीव की तरफ देखने लगा।
'कुछ नहीं होगा सर निकुंज सब कुछ संभाल लेगा और किसी को कुछ नहीं पता चलेगा।आप बेफिक्र रहिए और अपने घर जाइए' राजीव की बात मानकर धवल अपने घर की तरफ निकल गया।राजीव ने निकुंज को अपने पास बुलाया और उससे कुछ बातचीत करके,वह भी अपने घर की तरफ चला गया।
राजीव कुछ घंटों तक अपने घर में घूमता रहा, उसका दिमाग खराब हो चुका था।उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर वहां यह सब कैसे हो गया? वह सोचते सोचते परेशान हो गया और वह सोफे पर जाकर बैठ गया। उसने एक ड्रिंक बनाई है और उसे पी गया, 'तुम सबको उसका नतीजा भुगतना होगा' उसके दिमाग में यही सब आवाज गूंज रही थी।यह सब सोचते सोचते वह सो गया, तभी उसके फोन बजा और वह उठ गया उसने अपना फोन उठाया।
'हेलो राजीव स्पीकिंग....' नींद में उसने बोला। सामने से जैसे ही कोई बोला उसकी सारी नींद उड़ गई और उसकी आंखें बड़ी हो गई 'क्या..... क्या बकवास कर रहे हो तुम?'....पर कैसे?.... कहां?... ठीक है मैं अभी आ रहा हूं.....'उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह सब आखिरकार कैसे हो गया? उसने अपनी कार की चाबी ली और अपने घर से निकल पड़ा।
राजीव की ड्राइंग बता रही थी कि इस वक्त उसे कहीं जाने की बहुत जल्दी थी, वह बहुत तेजी से कार चला रहा था, उसके चेहरे पर पसीने की बूंदें थी और परेशानी में वह तेजी से सुनसान रास्ते पर कार चलाए जा रहा था, आखिरकार वह अपनी मंजिल पर पहुंच गया और गाड़ी से उतरकर सामने की बिल्डिंग में घुस गया बिल्डिंग पर लिखा था 'सिटी हॉस्पिटल....'
अंदर जाकर उसने रिसेप्शनिस्ट से कुछ पूछा और तेजकदमों से चलते हुए कॉरीडोर में चलने लगा। रात के 3:15 बज रहे थे,इसलिए पूरा कोरिडोर खाली पड़ा था। 'ठप्प्....ठप्प......' उसके कदमों की आवाज पूरे कॉरीडोर में गूंज रही थी, उसने अपना रुमाल निकाला और पसीने को साफ किया। उसके चेहरे पर अजीब सा डर दिख रहा था ,उसने दिल की धड़कनें तेज चल रही थी।वह चलते-चलते रुक गया और ऊपर की तरफ देखा वहां पर लिखा था 'वोर्ड नंबर 23' आखिरकार वह वहां पर पहुंच गया, जहां वह कभी नहीं आना चाहता था, तभी उसके कानों में आवाज पड़ी 'कौन है वहां?...'जिसे सुनकर वहां चौक गया।
'नहीं मैं हूं राजीव..... आपने फोन किया था' डर की वजह से उसके मुंह से ठीक से शब्द नहीं निकाल रहे थे।
'अच्छा आप आइए आइए,मैं आपका ही इंतजार कर रहा था'सामने से आवाज आई। रोशनी ज्यादा ना होने की वजह से साफ साफ दिख नहीं रहा था कि सामने कौन है?बस देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता था कि कोई खड़ा है। वह चलते-चलते राजीव की तरफ जाने लगा, उसे देखकर राजीव ने कहा 'डॉ. संजय'।
'जी....हां,आईए'ईतना बोलकर राजीव को अपने साथ ले गया।दोनों चलते चलते एक कमरे के अंदर चले गए।
'कैसे हुआ यह सब डॉक्टर? मुझे तो अभी तक यकीन ही नहीं हो रहा है,कुछ देर पहले तो सब ठीक था, फिर अचानक......'
'कुदरत राजीव साहब कुदरत, इसे कुदरत का खेल कहते हैं ,मौत वक्त बता कर नहीं आती वह तो बस आती है और जिसकी जिंदगी छीननी होती है वह लेकर वापस चली जाती है' संजय जी ने इस तरह बात कही कि राजीव उसके चेहरे को देखता ही रह गया।
'डरिए मत राजीव साहब यह सब तो छोटी बात है,बड़ी बात तो है इसके मौत की वजह..... जिसे सुनकर आप हैरान हो जाएंगे' संजय ने सामने पड़ी लाश की तरफ देखते हुए कहा।
'ऐसा क्या हुआ है डॉक्टर?....'
'हार्ट अटैक से मौत हुई है इसकी'
'तो इसमें बड़ी बात क्या है?'
'यह तो सिर्फ रिपोर्ट में लिखने के लिए हार्टअटैक है,बाकी असली वजह तो......' बोलते हुए संजय लाश की तरफ बढ़ने लगा। जो स्ट्रेचर पर पड़ी हुई थी, राजीव के उसके साथ चलने लगा, संजय ने राजीव को एक मास्क दिया, जो उसने पहन लिया। संजय ने लाश के ऊपर से कपड़ा हटाया।जहां पर धवल की लाश पड़ी हुई थी। उसके शरीर पर एक भी घाव का एक निशान नहीं था, संजय ने उसके हार्ट के पास एक कट मारा और राजीव को दिखाया।
जिसे देखकर राजीव एकदम चौंक गया और बस देखता ही रह गया कि आखिर यह कैसे हो सकता है? यह कभी संजय कि तरफ देखता तो कभी धवल की लाश की तरफ। आखिरकार वह बोला,
'क्या मजाक है यह? दिल कहां है इनका....???'

To be Continued.........