Hotel Haunted - 10 in Hindi Horror Stories by Prem Rathod books and stories PDF | हॉंटेल होन्टेड - भाग - 10

हॉंटेल होन्टेड - भाग - 10

जयदीप के जाते ही मनीष ने तुरंत ही रूम का दरवाजा जल्दी से बंद कर दिया, क्योंकि अगर जयदीप कुछ देर ओर यहां रुकता तो मनीष पक्का उस से लड़ पड़ता। पर मनीष को एक बात समझ नहीं आ रही थी कि "इस होटल के स्टाफ का एक मेंबर होकर, इसी होटल में ही काम करते हुए,कोई होटेल के बारे में ऐसी बातें क्यों करेगा?जिससे इसी की होटल वालों को नुकसान हो। ऐसी बात करने से जो लोग यहां आए हैं, वह भी दोबारा डर की वजह से नहीं आएंगे।"पर उसे जयदीप की एक बात याद आती है उसने कहा था कि यह होटल का Theme ही Horror सिलेक्ट किया गया था, यह बात आते ही मनीष को लगता है 'क्या पता शायद होटल वालों ने ही उन्हें ऐसा करने के लिए कहा हो।' यह सब सोच रहा था कि तभी उसका ध्यान अंकिता की तरफ जाता है, जो बेड पर बैठकर कुछ सोच रही थी, उसे देखकर ऐसा लग रहा था जैसे कहीं खो सी गई हो और उसके चेहरे पर थोड़ा डर भी साफ नजर आ रहा था।

अंकिता को देखकर मनीष जयदीप को मन ही मन कोसने लगता है,पर सबसे पहले उसने अंकिता का मूड ठीक करना बेहतर समझा। इसलिए वह चलते हुए अंकिता के पास पहुंचता है और उसके पास जाकर बैठ जाता है।मनीष को देखकर अंकिता थोड़ा मुस्कुराती है। मनीष उससे पूछता है कि "क्या हुआ अंकिता तुम कुछ खोई-खोई सी लग रही हो?"

अंकिता कहती है कुछ नहीं वह स्टारब्वॉय की बातों से मुझे लगा कि "कहीं लोगों का कहना सही तो नहीं? क्या यह जगह सचमुच......." अभी अंकिता इतना ही बोली थी कि तभी मनीष उसकी बात को बीच में से काटते हुए कहता है "तुम भी अंकिता कहा उसकी बातों में आ गई,उसका तो काम ही यही है।"अंकिता हैरानी भरी नजरों से देखते हुए मनीष से पूछती है "उनका यही काम है मतलब?"

मनीष उसके पास बैठते हुए, उसे समझाते हुए कहते हैं "देखो तुमने या तो नोटिस किया होगा कि यहां सभी सजावट और चीज है ऐसे रखी हुई है जैसे यह जगह हॉन्टेड लगे तो क्या पता उन सभी स्टाफ बॉयज को भी कहां गया हो कि ऐसे behave करना जैसे यह जगह, यहां के आने वालों को Strange के साथ कुछ Special भी लगे।"

मनीष की बात सुनकर अंकिता सोचने लगती है, मनीष अंकिता के चेहरे को देखकर यहां समझ गया था कि अंकिता को उसकी बातों पर यकीन हो रहा है, इसीलिए वह अंकिता के कान के पास जाते हुए उसके कान में धीरे से कहता है "ओर वैसे भी लड़कियां ऐसी horror paintings और चीजों को देखकर कुछ ज्यादा ही डर जाती है,फिर आकर हम लड़कों से चिपक जाती है। कुछ भी कहो वैसे फायदा तो हमारा ही है, इन होटल वालों का तो मुझे बहुत शुक्रियादा करना चाहिए।" अपनी बात करते हुए अंकिता के गले पर हल्के से काट लेता है, जिससे अंकिता पूरी तरह सहम जाती है और मनीष उसे देख कर फर्श पर बैठे हुए जोर जोर से हंसने लगता है, क्योंकि मनीष ने मजाक में उसे चिढ़ाने के लिए यह बात कही थी, जिससे अंकिता का ध्यान उन सभी बातों से हटकर उस पर आ जाए।

अंकिता बेड पर से उठते हुए उसे मुक्के मारने लगती है,पर मनीष भी हंस रहा था।हंसते हुए मनीष फिर अंकिता से कहता है "अरे कम से कम यहां आने से पहले नाखून तो काट लिए, होते किसी जंगली बिल्ली के जैसे बढ़ रखे हैं,यह सुनकर अंकिता मनीष के छाती पर लेट जाती है और उसके चेहरे को पकड़कर अपने नाखूनों उसकी ओर बढ़ाते हुए कहती है "अभी बताती हूं यह जंगली बिल्ली क्या क्या कर सकती है।"

दोनों जमीन पर लेटे हुए थे अंकिता मनीष के छाती के ऊपर थी दोनों के चेहरे ज्यादा दूरी पर नहीं थे। अंकिता के चेहरे पर अब एक शरारती मुस्कान थी, जिसे देखकर मनीष हम समझ गया था कि अंकिता अब उन सब बातों के बारे में भूल चुकी है।जिसे देखकर अब वह भी रिलैक्स फील कर रहा था।मनीष फिर अंकिता से कहता है कि "देखो मैडम इतनी दूर से आए हैं Journey की वजह से थकान भी लगी है इसीलिए अभी आपकी यहां दाल नहीं गलने वाली।"

अंकिता की मनीष के ऊपर से उठते हुए कहती है "Same here...." तभी अंकिता की नजर पूरे कमरे की ओर जाती है। जिस पर वह कुछ देर पहले ध्यान नहीं दे पाई थी। उस पूरे कमरे को देख कर उसके मुंह से बस इतना ही निकलता है How Beautiful !!! This room is......." उसकी बात सुनकर मनीष भी फर्श पर से उठता है और कहता है "वही तो मैडम मैं कब से आपको यह सब दिखाना चाहता था पर आप है कि कहीं खोई हुई मुंह लटका कर बैठी हुई थी।"

पूरा कमरा Well Furnished था जमीन पर Carpet भी थी हुई थी साइड में बेड के ऊपर Heart वाले Cushion और उसके दोनों तरफ नाइट लैंप रखे हुए थे, कमरे में थोड़ी दूर पर एक टेबल पर टेलीफोन रखा था और कहीं जगह पर छोटे-छोटे स्टैचूष रखे गए थे।ऊपर छत की ओर लाइट्स लगाई हुई थी। कमरे की बालकनी और खिड़की पर अब भी पर्दे लगे हुए थे,मनीष चलते हुए बालकनी के पास जाता है और उस पर लगे पर्दो को हटा देता है।

पर्दों के हटते ही पूरा कमरा रोशन हो जाता है, पर अभी भी एक कांच का दरवाजा लगा हुआ था। मनीष वह भी खोल देता है और अंकिता को कहता है "अंकिता जरा यहां आकर भी तो देखो" मनीष की बात सुनकर अंकिता बालकनी में चली जाती है,बाहर का नजारा देखकर वह बस उसे देखती रहती है।

उसके सामने होटल का एक खूबसूरत गार्डन था,वह देखने में ऐसा लग रहा था कि जैसे मुलायम घास की परत हो। उसके अलावा Garden में कई जगह पर अलग-अलग Flowers उगाएं गए थे। कोई भी उसका एडमिन को देखकर यह कह सकता था कि यह किसी Professional ने बहुत Planning के साथ Decorate किया होगा। मनीष और अंकिता का कमरा 4th फ्लोर पर था इसलिए गार्डन से थोड़ी दूर एक जंगल भी उन्हें दिखाई देता था और जंगल में थोड़ी दूर पहाड़ भी दिखाई देते थे।

मनीषा अंकिता की ओर देखकर कहता है जो अभी भी पहाड़ों की ओर नजर गड़ाए उस ओर देख रही थी "मैडम कहीं इन नजारों के चक्कर में मुझे मत भूल जाना" अब अंकिता भी मनीष की ओर देखकर कहती है "अब यह जगह ही इतनी अच्छी है तो आप का Chance शायद लगने से रहा" यह सुनकर मनीष उदास होते हुए कहता है "ohhh....nooo क्यों लाया मैं तुम्हें यहां वैसे इसमें गलती भी तो मेरी ही है,मैं भूल कैसे गया कि यह मैडम तो Nature Lover है तो obviously यह पति से ज्यादा नजारों पर ही ध्यान देगी।" यह सुनकर अंकिता हंसने लगती हैं। वह मनीष के पास आती है और उसके गले में बांहे डालकर मनीष से कहती है "सच में इससे बेहतर जगह हनीमून के लिए शायद ही कहीं होगी, जिंदगी के यह पल, यह दिल मुझे हमेशा के लिए याद रहेंगे" यहां कहकर अंकिता मनीष की बाहों में समा जाती है और बाहर चल रही हल्की ठंडी हवाएं दोनों महसूस करने लगते हैं।

To be continued.......

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