Hotel Haunted - 11 in Hindi Horror Stories by Prem Rathod books and stories PDF | हॉंटेल होन्टेड - भाग - 11

हॉंटेल होन्टेड - भाग - 11

अंकिता मनीष से अलग होती है उसके चेहरे पर एक मुस्कुराहट थी। मनीष उसके चेहरे को देखता है,वह खुश था कि अंकिता को यहां आकर अच्छा लग रहा था।अंकिता वापस कमरे में आकर फ्रेश होने के लिए चली जाती है और मनीष एक बार फिर वादियों की ओर देखने लगता है। यहां का मौसम उसे एक अलग तरह का सुकून दे रहा थी वह इन सब खयालों में कितनी देर वहां खड़ा रहता है उसे पता ही नहीं चलता कि तभी अंकिता पीछे से आकर उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहती है "अरे तुम अभी तक यहीं पर खड़े हो!"

मनीष अंकिता की ओर देखता है।उसने एक ब्लू कलर का ड्रेस पहना हुआ था, उसके कान में झुमके और होठों पे हल्की सी लिपस्टिक। उसके बाल अभी भी थोड़े भीगे हुए थे, वहां चल रही हवाओ की वजह से उसके बाल हवा में लहरा रहे थे। मनीष एक पल के लिए अंकिता को देखते ही रहता है, वहां बिना पलकें झपकाए बस अंकिता को देख रहा था। अंकिता मुस्कुराते हुए कहती है "हेलो मनीष कहां खो गए?"

मनीष अंकिता की ओर देखते हुए कहता है "सच ही कहा है किसी ने....सादगी की सुंदरता दुनिया के सभी गहनों से कहीं ज्यादा है, तुम जितनी सुंदर Normal Dresses में लगती हो उतनी सुंदर तो शायद शादी के दिन भी नहीं लग रही थी।" अंकिता मनीष की बात सुनकर थोड़ा शर्म आ जाती है और वापस मनीष से कहती है "मैं फ्रेश होकर तैयार भी हो गई और तुम अभी तक यहीं पर खड़े हुए हो और please जल्दी से कुछ खाने के लिए Order कर दो सफर की वजह से भूख और थकान बहुत लगी है"

मनीष कहता है "हां मैं अभी खाने का ऑर्डर दे देता हूं।" इतना कहकर वह कमरे में रखे टेलीफोन के पास जाता है और खाने का ऑर्डर दे देता है।थोड़ी देर में उनके कमरे पर नॉक होता है,
मनीष जाकर दरवाजा खोलता है और एक staff boy अंदर आकर खाना टेबल पर रख देता है। मनीष देखता है कि खाने के साथ एक कार्ड भी रखा हुआ है, वह जाकर उस कार्ड को हाथ में लेकर देखता है तो मुस्कुराने लगता हैं।वो अंकिता की ओर देखता है जो आईने में देखकर अपने बाल सवार रही थी, वह अंकिता से कहता है "मैडम अब रात के लिए भी थोड़ी एनर्जी इकट्ठा कर लो जरूरत पड़ने वाली है"

यह सुनकर अंकिता मनीष की ओर देखते हुए पूछती है "क्यों रात में ऐसा क्या काम है?" मनीष अंकित के पास जाकर अंकिता के कंधे पर अपना सर रख कर आईने में देखते हुए कहता है "मतलब यह कि रात में Dance Party है और होटल वाले ने सभी लोगों को invite किया है इसलिए आज रात के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दो।"

अंकिता मनीष की ओर देखकर कहती हैं "Whatt!!!.....How Exciting...... तब तो आज रात में बहुत मजा आएगा।" मनीष अंकिता से कहता हैं "देखना आज रात की Dance Party में हम ही छाए होंगे"अंकिता मनीषा कहती है "तुम्हें Dance करना भी आता है,कहीं ऐसा ना हो कि तुम्हारा एक पैर किसी ओर दिशा में चले और दूसरा किसी ओर दिशा में" इतना कहकर अंकिता हंसने लगती है।

अभी अंकिता इतना ही बोली थी कि तभी मनीष अचानक उसका एक हाथ पकड़ कर उसे गोल घुमाता है और उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपनी और खींच लेता है। मनीष अंकिता की आंखों में देख रहा था, उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी। वह अंकिता से कहता है "यह तो तुम रात में ही देख लेना" इतना कहकर मनीष फ्रेश होने के लिए बाथरूम में घुस जाता है और थोड़ी देर बाद वह बाहर आता है। वो दोनों खाना खाकर वही Bed पर लेट जाते हैं। ठंडी हवाएं खिड़की से आकर उनके शरीर को छूकर एक अलग ही आनंद दे रही थी, ऊपर से सफर की थकान की वजह से दोनों को कब नींद आ जाती है पता ही नहीं चलता।

बाहर आसमान में सूरज अपनी रफ्तार से चलते हुए पश्चिम की ओर बढ़ रहा था। मनीष और अंकिता मीठी नींद की आगोश में चले गए थे। वक्त धीरे-धीरे बीत रहा था।वक्त एक तरह से अजीब चीज है। वह भूतकाल के राज़ और भविष्य के पर्दों को उठाएं बिना अपनी रफ्तार से चलता रहता है। हम इंसान ही है जो अपने हालात के अनुसार ‌‌‌‌‌उसे अच्छे और बूरे का नाम दे देते हैं।पर उसकी खास बात यह है कि वह किसी के लिए नहीं रुकता।

शाम हो चुकी थी और धीरे-धीरे अंधेरा हो रहा था। होटल में नीचे जल्दी सभी Staff boys बहुत जल्दी में लग रहे थे। निकुंज और उसके साथ रिसेप्शनिस्ट विनय दोनों हॉल में पार्टी के लिए तैयारी कर रहे थे। सभी तैयारियां Almost Complete हो चुकी थी, पर वह दोनों एक बार फिर सब कुछ चेक करके Confirm कर लेना चाहते थे,क्योंकि बाद में कोई गड़बड़ ना हो।

ईस वक्त सभी Couples नीचे Dinner Hall में Dinner कर रहे थे, उनके साथ मनीष और अंकिता भी थे। मनीष ने इस वक्त Black Suite और Party-Wear Shoes पहन रखे थे। साथ ही अंकिता ने Red Dress, होठों पर लाल लिपस्टिक और अपने बाल खुले रखे थे। दोनों इस वक्त एक साथ बहुत सुंदर लग रहे थे, कोई भी उन्हें देखकर Perfect Couple कह सकता था। उनके साथ वहां कई ओर couples डिनर कर रहे थे, वो सभी लोग भी पार्टी के लिए तैयार होकर आए थे।

मनीष अंकिता की ओर देखते हुए कहता है "लगता है दूसरी लड़कियों की तैयार होने की मेहनत तो गई पानी में।"अंकिता पूछती है "क्यों?" मनीष कहता है "अरे तुम जो इतनी सवर कर, तैयार होकर आई हो सभी का ध्यान तो सिर्फ तुम पर ही होगा, तो कहां अपनी बीवियों पर ध्यान दे पाएंगे और शायद आज कुछ लोगो का अपनी बीवियों के साथ झगड़ा भी हो जाएं" इतना कहकर मनीष हंसने लगता है।

अंकिता मनीष की और घूरते हुए कहती है "wow......तारीफ करके बेइज्जती करना तो कोई तुमसे सीखे।" मनीष कहता है "मैंने कहा तुम्हारी बेज्जती की, मैं तो तुम्हारी तारीफ ही कर रहा था।" अंकिता कहती है "हां सब पता है तुम्हारी निगाहें कहीं ओर होती है और निशाना कहीं और लगाते हो, गोल गोल घुमा के बातें कहने का तरीका मुझे अच्छे से पता है पर तुम्हारी शायद इसी बात के लिए मैं तुमसे प्यार कर बैठी।"

मनीष कहता है "क्या सिर्फ इसी बात के लिए!!...ohhh God...लगता है इस cute चेहरे की तो कोई कदर ही नहीं करता।" इतना कहकर दोनों हंसने लगते हैं। अंकिता कहती है "तुम्हारी बातें और खाना हो गया हो तो पार्टी में चले देखो सभी का लोग धीरे-धीरे करके उसी और जा रहे हैं।" मनीष वहां बैठे सभी कपल्स की और देखने लगता है,जो एक-एक करके होल से बाहर पार्टी हॉल की तरफ जा रहे थे, इसीलिए मनीष और अंकिता की बाकी सब के साथ उस ओर जाने लगते हैं अब पूरा होल धीरे-धीरे करके खाली हो गया था।

पर अभी भी हॉल में एक Staff Boy था,जो अभी भी अपने काम में लगा हुआ था। एक-एक करके सभी की खाने की plates किचन में रख रहा था। किचन में Present Staff को भी निकुंज ने पार्टी हॉल में बुला लिया था। वह भी जल्द से जल्द अपना काम खत्म करके उसी और जाने की सोच रहा था कि तभी उसे लगता है कि कोई उसके पीछे खड़ा है। वो पीछे मुड़कर देखता है तो जयदीप उसके पीछे खड़ा है। वो एक चैन की सांस लेता है और कहता है "ohh... जयदीप तुम हो मुझे तो लगा शायद......." अभी वह इतना ही बोल पाया था कि तभी उसके पेट के आरपार एक चाकू हो जाता है। वहां अभी कुछ कर पाता उससे पहले ही जयदीप उसका मुंह दबा देता है। उसStaff Boy की चीख जयदीप के हाथो में ही दबकर रह जाती है। दर्द की वजह से उसकी आंखों से आंसू निकल जाते हैं,वह दर्द की वजह से छटपटा रहा था पर जयदीप ने उसे अपनी पूरी ताकत से जकड़ रखा था। ऐसी ताकत किसी आम इंसान में नहीं हो सकती है। तभी जयदीप अपनी पूरी ताकत से वह चाकू ऊपर की ओर खींचता है, चाकू ऊपर खींचने की वजह से उसकी पेट की चमड़ी पूरी तरह फट जाती है। ईसके साथ उसकी पेट से खून के साथ कुछ आंते भी बाहर आ जाती है। दर्द की वजह से उसकी आंखों फट जाती है और लाल हो जाती है।अब वह दर्द बर्दाश्त नहीं कर सकता था इसलिए वह जमीन पर गिर जाता है। उस में अब चीखने की ताकत नहीं बची थी। वह कुछ देर ऐसे ही जमीन पर छटपटा कर वहीं अपना दम तोड़ देता है और धीरे-धीरे करके उसका खून फर्श पर पानी की तरह फैलने लगता है।

जयदीप वहीं खड़े होकर उसे देखते हुए कहता है "इस बार यह सब थोड़े अलग तरीके से खत्म करना पड़ेगा।" इतना बोल कर वह मुस्कुराता है। वह चाकू पूरा खून से सना हुआ था और जयदीप का हाथ भी खून से लथपथ था। धीरे-धीरे फर्श पर जमा खून जमीन में जाने लगता है जैसे होटल की जमीन खून की प्यासी हो और वह खून पी रही हो। अब जयदीप स्टाफ बॉय की लाश को किचन की और घसीटकर कर ले जाता है, पर चौंकाने वाली बात यह थी कि उसके खून के निशान जमीन पर नहीं पड़ रहे थे। जैसे उसके शरीर का सारा खून किसी ने निचोड़ लिया हो।

To be continued......

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