Hotel Haunted - 09 in Hindi Horror Stories by Prem Rathod books and stories PDF | हॉंटेल होन्टेड - भाग - 9

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हॉंटेल होन्टेड - भाग - 9

पाटिल के जाने के बाद राजीव उन्हीं सब बातों के बारे में सोचता रह गया, उसे अभी भी इसी बात का डर था कि कहीं होटल के Reputation कोई नुकसान ना हो क्योंकि अगर यह बातें कहीं किसी भी तरह से बाहर आई तो होटल की image पर बहुत बड़ा effect हो सकता था और वैसे भी होटल को opening के दिन जो कुछ भी हुआ उस चीज को लेकर वैसे भी लोग बहुत सारी बातें बना रहे थे।इन्हीं सब बातों के बारे में सोचकर राजीव वहीं सोफे पर बैठ गया,बाहर बादलों के गरजने की अभी भी आवाज आ रही थी।

इस बात को 2 हफ्ते बीत चुके थे,13-14 दिनों तक होटल पूरी तरह बंद रहा मीडिया वाले भी अब इस टॉपिक पर ज्यादा कुछ cover नहीं करते थे, पाटिल ने उन सभी लाशों को किसी की नजर में आए बिना पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और इन 14 दिनों तक ना ही राजीव और ना उस होटल से रिलेटेड एक भी आदमी कोई कभी बाहर दिखाई दिया पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी ज्यादा कुछ जानने को नहीं मिला और पहले की तरह इस फाइल को भी बंद कर दिया गया।

कुछ दिन यूं ही बीत रहे होटल वापस से open कर दिया गया, सब कुछ अच्छे से चल रहा था, कहीं कोई हादसा या कोई अजीब घटना किसी ने नोटिस नहीं कि उन तीनों staff boys की बात को यह कह कर टाल दिया गया कि उन्होंने डर की वजह से खुद नौकरी छोड़ दी है और उन दो गार्ड्स की जगह और दो नए लोगों को रख दिया।

ऐसे करते एक महीना बीत गया होटल के ओपनिंग से लेकर आज तक डेढ़ महीना हो गया था। लोग भी अब धीरे-धीरे उन सभी बातों को भूल गए थे और अब वहां पर फिर से लोगों का आना-जाना शुरू हो गया था। राजीव अब खुश था कि सब कुछ ठीक हो गया था।अब उसे किसी भी तरह की कोई टेंशन नहीं थी पर दिल के एक कोने में उसे अभी भी एक अनजाना सा डर सता रहा था, उसके दिमाग से वह सब बातें जाने का नाम नहीं ले रही थी।कभी-कभी सब कुछ ठीक होने के बावजूद इंसान का दिल और दिमाग उन सब बात को मानने से इंकार कर देता है,इंसान का दिल कुछ कहता ओर दिमाग कुछ ओर,और इंसान खुद अपने डर और दिमाग में उलझ कर रह जाता है।शायद राजीव का डर एक तरह से सही था क्योंकि आने वाले वक्त में क्या होने वाला है उसे क्या पता था।

सुबह का वक्त था,आसमान बिल्कुल साफ था, कहीं कोई बादल का नामोनिशान नहीं दिख रहा था, जैसे आसमान में किसी ने नीले रंग की चादर बिछा दी हो, आस-पास बड़े-बड़े हरे रंग के पेड़ थे और उनमें से आती चिड़ियों की चहचहाने की आवाज एक अलग ही आनंद दे रही थी। उन पेड़ों के बीच में से आ रही सूरज की रोशनी इस पल को और खुशनुमा बना रही थी। तभी होटल के गेट के सामने एक गाड़ी आकर रूकती है और उनमें से एक कपल नीचे उतरता है

"Wow....wow..... Manish This place is so beautiful"
अंकिता इधर उधर देख कर अपने हस्बैंड से कहती है।
"मुझे पता था कि तुम्हें यार जगह जरूर पसंद आएगी"
"जब तुमने कहा था कि हम लोग किसी पहाड़ों वाली जगह में हनीमून के लिए जाएंगे तब मैंने नहीं सोचा था कि यह जगह इतनी खूबसूरत होगी....जरा देखो तो यहां का नेचर और यह हवाएं कितना प्यारा नजारा है....आई लव it"
"मैंने पूरी तरह से इस जगह के बारे में जानकर ही इस जगह को सिलेक्ट किया है,इस होटल के दूसरी तरफ एक जंगल भी है, जहां हम घूमने जा सकते हैं और किसी जंगली जानवरों का खतरा भी नहीं है"
"सच में इस जगह की बात ही अलग है पर मुझे इस जगह के बारे में एक बात नहीं पसंद आई"
"वह क्या?"मनीष ने चौंकते हुए पूछा।
"इस होटल का नाम....इतनी खूबसूरत जगह पर होटल बनाकर कोई ऐसा नाम थोड़ी रखता है"
"अरे डार्लिंग इस जगह का नाम क्यों ऐसा रखा है,यह तुम इस होटल के अंदर जाओगी तब तुम्हें पता चलेगा" इतना कहकर दोनों होटल के अंदर जाने लगते हैं।

होटल के अंदर जाते ही अंकिता बस चारों ओर देखती ही रह जाती है।होटल का डेकोरेशन, उस की पेंटिंग्स, उसका इंटीरियर सब कुछ इतनी अच्छी और बारिकी से बनाया गया था की कोई भी उसे देखे तो एक पल के लिए अपनी पलक झपकाना भूल जाएं। सूरज की आती हुई रोशनी होटल की खिड़कियों से अंदर आकर होटल को रोशन करती थी और ऊपर झूमर इस तरह से लगाए गए थे कि सूरज की रोशनी सीधे उस पर पड़े और वह पूरे होल को रोशन कर दे।

अंकिता बस इन सब नजारों में जैसे खो ही गई थी,कोई भी आदमी अगर सुबह इस जगह को देख ले तो उसे यकीन ही ना हो कि यह जगह हांटेड है।सुबह की इस खूबसूरती को देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता था कि यही जगह रात में कितनी खौफनाक हो जाती होगी। सुबह का वक्त होने की वजह से होटल में ज्यादा चहल-पहल नहीं थी, ज्यादातर staff boys ही हॉल में दिखाई देते थे।

दोनों रिजर्वेशन पर रूम बुक करने पहुंचते हैं रिसेप्शनिस्ट उन्हें देखकर कहता है कि Hello sir, welcome to our hotel may i help you?
Yesss....हमें 1 week....मनीष अभी इतना ही बोला था कि तभी वह पीछे मुड़कर देखता है तो वह थोड़ा मुस्कुराता है, वह देखता है कि अंकिता अभी भी सभी जगह देख रही थी और वह इन सब नजरों में खोई हुई थी, तभी वह अंकिता को आवाज देकर बुलाता है अंकिता come here darling.....अब कितनी बार देखोगी, हम एक वीक के लिए यहीं पर रहने वाले हैं तुम कहो तो मैं यह होल ही बुक कर लेता हूं फिर जितना चाहो उतना देख लेना।

इतना कहकर मनीष और रिसेप्शनिस्ट दोनों मुस्कुराने लगते हैं, तभी अंकिता मुस्कुराती हुई मनीष के पास आती है उसके कंधे पर हल्के से मारती है और उसका हाथ पकड़ कर उसके कंधे पर अपना सिर रखकर खड़ी रहती है।मनीष रूम बुक करने के लिए सारी डिटेल्स उन्हें देने लगता है‌।

मनीष होटल को देखते हुए कहता है कि वैसे यह जगह वाकई में बहुत खूबसूरत है, इसके बारे में जितना सुना था उससे भी बहुत अच्छी है पर कुछ लोगों का कहना है कि यह जगह हांटेड है? मनीष की बात सुनकर रिसेप्शनिस्ट के चेहरे की हंसी गायब हो जाती है,अंकिता भी अपना सर उसके कंधे से हटाकर उसके चेहरे को देखने लगती है।

"कहते हैं ना कि कोई चीज जितनी खूबसूरत होती है तो उसके चाहने वाले से ज्यादा नफरत करने वाले होते हैं"मनीष,अंकिता और रिसेप्शनिस्ट तीनों का ध्यान उस आवाज की ओर जाता है, रिसेप्शनिस्ट उस आदमी को देखकर कहता है 'गुड मॉर्निंग सर'

मनीष के सामने सूट पहने एक आदमी चेहरे पर मुस्कान लिए खड़ा था, वह चलता हुआ मनीष के पास आता है और अपना हाथ मनीष की और बढ़ाते हुए कहता है 'हेलो सर आई एम निकुंज....ईस होटल का मैनेजर'मनीष भी अपना हाथ उससे मिलाते हुए कहता है 'हेलो मैं मनीष और यह मेरी वाइफ अंकिता'
निकुंज मनीष की ओर देखते हुए कहता है 'इस जगह पर रहने वाले ज्यादातर लोग या तो मजदूर है या तो फिर कम पढ़े हुए पर हम तो educated हैं,सही गलत का knowledge रखते हैं आपने अगर नोटिस किया हो तो ऐसा होटेल यहां पूरी ऊंटी में कहीं नहीं है इसलिए competitors इस होटेल का नाम खराब करने के लिए ऐसी ही अफवाह बनाते रहते हैं।'

मनीष कहता है 'आप सही कहते हैं यह जगह कहीं भी किसी भी तरह से हांटेड नहीं लगती' निकुंज उसकी बात सुनकर मुस्कुराने लगता है तभी रिसेप्शनिस्ट उनकी सारी डिटेल्स fill कर लेता है और एक staff boy को आवाज लगाता है 'जयदीप इधर आओ यह सुनकर एक लड़का उधर आकर खड़ा रह जाता है'
निकुंज जयदीप से कहता है 'सर और मैडम का सामान लेकर उन्हें उनके रूम तक पहुंचा दो' इतना कहकर निकुंज जयदीप के हाथ में रूम की चाबी रख देता है मनीष जाते हुए निकुंज से कहता है 'थैंक यू सर आपसे मिलकर अच्छा लगा' निकुंज भी मुस्कुराते हुए कहता है 'मुझे भी....have a nice day'

इतना कहकर मनीष और अंकिता जयदीप के साथ जाने लगते हैं। मनीष और अंकिता जयदीप के साथ चलते हुए चारों तरफ होटल को ही देख रहे थे। होटल का वह फ्लोरिंग, उसकी पेंटिंग्स, ऊपर जाने के लिए stairs कि वह डिजाइन वाकई में बहुत अलग थी। तभी अंकिता चलते हुए रुक जाती है और होटल में लगी एक पेंटिंग को देखने लगती है।होटल के सेंटर में एक तस्वीर होती है जिसमें एक painter अपने हाथ में paint brush लेकर खड़ा हुआ होता है, वह तस्वीर जितनी realistic और खूबसूरत दिख रही थी,उससे कहीं ज्यादा डरावनी भी लग रही थी,उसकी आंखें और उसमें भरे हुए रंग कुछ इस तरह से बनाए गए थे कि वहां से गुजरने वाला उसे देखे बिना रह ना पाए और रोमांच के साथ साथ उसे डर भी लगे।

जयदीप कहता है या इस होटल की सबसे खास पेंटिंग है यह इसलिए खास नहीं है कि वह इतनी खूबसूरत और डरावनी बनाई गई है। परंतु इस पेंटिंग को बनाते हुए वह पेंटर इसमें इतना डूब सा गया था कि उसने अपने हाथ की कलाई को काटकर अपने खून से इसमें रंग भरा था इस बात को सुनकर मनीष और अंकिता को एक झटका सा लगता है और अंकिता के दिल में एक डर सा लगने लगता है। वह मनीष के पास जाते हुए कहती है 'कहीं लोगों का कहना सच तो नहीं?यह जगह वाकई में कहीं होंटेड तो नहीं है?'
मनीष उस बात को टालते हुए कहता है अरे नहीं नहीं तुमने सुना ना लोग तो कुछ भी बोलते रहते है, तुम कहां इन सब बातों पर ध्यान दे रही हो'इतना कहकर वह तीनों लिफ्ट की ओर बढ़ने लगते हैं।

लिफ्ट आते ही जयदीप के साथ मनीष और अंकिता तीनों लिफ्ट में चले जाते हैं। लिफ्ट के अंदर जाते ही जयदीप कहता है यह जगह ऐसे ही खास नहीं बनी, इसको बनाने के लिए कितने लोगों ने कुर्बानियां दी है' यह बात बोलते ही जयदीप के चेहरे का एक्सप्रेशन कुछ अलग था। उसकी बात सुनकर अब मनीष को भी थोड़ा डर में लगने लगा था, वह जयदीप से कहता है क्या मतलब है आपका?

'मेरा मतलब कि इन 5 सालों में सभी लोगों ने दिन-रात एक करके इस होटल को बनाया है,इसलिए यह जगह इतनी सुंदर बनी है' यह सुनकर दोनों को कुछ राहत सी महसूस होती है, तभी उनका फ्लोर आ जाता है और वह सभी लिफ्ट से बाहर निकलते हैं, लेकिन अब डर की वजह से अंकिता बहुत ज्यादा नहीं बोल रही थी।मनीष चुप्पी को तोड़ते हुए कहता है 'वैसे तो यह जगह बहुत बड़ी है तो इसके बनाते हुए भी बहुत मेहनत लगी होगी।'

जयदीप कहता है 'हां लगी है ना सर बहुत से मजदूर लगे थे, कई हादसे भी हुए थे और कुछ मजदूर की जान जाने के बाद भी जगह बनकर तैयार हुई है, वैसे आपने तो सुना होगा कि यहां के लोग कहते हैं कि यह जगह हांटेड है, क्या आप भूत प्रेत में मानते हैं?' इतना बोल कर जयदीप चुप हो जाता है। मनीष को अब गुस्सा आने लगा था,क्योंकि उसकी बातों की वजह से अंकिता को एक डर सा लगने लगा था।वह तीनों कॉरीडोर में चलते हुए आखरी रूम तक पहुंच जाते हैं, मनीष रूम की ओर देखता है जिस पर 366 नंबर लिखा हुआ था।

जयदीप वह रूम खोलता है और सामान अंदर रख देता है, उसके साथ मनीष और अंकिता भी अंदर चले जाते हैं। जयदीप बोलता है 'वैसे आपने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया सर' मनीष और अंकिता का ध्यान वापस उसकी ओर जाता है,मनीष उसके पास पहुंचता है और जेब में से 2000 का नोट निकालकर उसके हाथ में रखते हुए उसे चुप रहने का इशारा करता है।यह देखकर जयदीप रूम की चाबी उन्हें देकर वहां से चला जाता है और मनीष रूम का दरवाजा बंद कर देता है।

जयदीप होटेल के कॉरिडोर में चल रहा था, उसके चेहरे पर एक मुस्कान थी और हाथ में 2000 का नोट। धीरे-धीरे उसके चेहरे की वह मुस्कान गायब हो जाती है, उसके चेहरे की सारी नसें फूलने लगती है,उसकी आंखें एकदम लाल हो जाती है जैसे आंखों में खून उतर आया हो। उसके हाथ में रखी नोट को वह मुठ्ठी में भींच लेता है और धीरे-धीरे उसके चेहरे की चमड़ी फटने लगती है,साथ ही उसके चेहरे पर कई काले निशान भी दिखाई देने लगते हैं।

उसका चेहरा देखने में बहुत खौफनाक हो जाता है, उसके हाथ में रखी नोट जलने लगती है और जलकर वही राख हो जाती है।वह चलते हुए लिफ्ट तक पहुंचता है, लिफ्ट का दरवाजा खोलते ही वह उस में चला जाता है। लिफ्ट का दरवाजा बंद होता है और लिफ्ट दीवार में ही कहीं गायब हो जाती है।

To be continued.....