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नीबाबाग

किसी नगर में एक राजा और रानी राज किया करते थे। राजा को एक लड़का था वह बहुत ही सराराती था, रास्ते में आते जाते लोगों को अक्सर परेशान किया करता था। राजा उसका विवाह करा दिए तब पर भी उसका वहीं व्यौहार था एक दिन कुआं पर औरतें पानी भर रही थी कि राजकुमार ने गुलेल से निशाना साधा और एक औरत का नया घड़ा फोड़ दिया। औरत विवशता भरे शब्द में बोली " कौन सा दिन होगा भैया की तुम नीबाबाग चले जाते।
औरत की बात सुन राजकुमार ने कहा हे कहारन यह नीबा बाग कहा पर है ? मुझे पता बताओ मै जाऊंगा, कहारन ने कहा दक्षिण दिशा में है जाओ लेकिन मुझे दोष मत देना। राजकुमार अपना राज पाठ छोड़कर नीबाबाग की ओर चल पड़े। जाते - जाते शाम हो गई राजकुमार एक तालाब के किनारे रुक कर ठंडा पानी पी कर विश्राम करने लगे। रात्रि भर आराम करने के बाद सुबह होते ही राजकुमार फिर नीबाबाग की ओर चल पड़े। रास्ते में चार औरत खेत की सफाई कर रही थी राजकुमार ने पूछा
चारि बहिन मिली खेत गुड़त हैं
एक छण खुरपी रहाउ जी
हम त जाबई निबाबाग रामा
निबाबाग क रस्ता बताउ जी
औरतों ने कहा हे भैया आप नीबाबाग क्यूं जा रहे हैं वहां मत जाइए वह जगह अच्छी नहीं है। फिर भी राजकुमार रस्ता पूछ कर आगे की ओर चल दिए चलते - चलते दोपहर हो गई तभी चार औरतें पानी भरते हुए दिखाई दी राजकुमार ने कहा
चारि बहिन मिली पानी भरइ रामा
एक छन रसरी रहाउ जी
हम त जाबइ नीबाबाग रामा
नीबाबाग क रस्ता बताउ जी
औरतों ने वहां भी मना करते हुए कहा हे राहगीर तुम जो भी हो लेकिन वहां मत जाओ वहां जो भी जाता है वह जिन्दा लौट कर नहीं आता। राजकुमार ने एक नहीं सुनी और रस्ता जान कर आगे बढ़ चला
शाम होने ही वाली थी कि तीन औरत फूल तोड़ते दिखी राजकुमार ने उनसे सवाल किया
तीन सखी मिली फूल तोड़त रामा
एक छन हथवा रहाउ जी
हम त जाबई नीबाबाग रामा
नीबाबाग क रस्ता बताउ जी
एक औरत ने सुनते ही मक्खी बनाकर अपने जुडे़ में बांध लिया और जब रात हुई तब तीनों अपने घर अाई और राजकुमार को आदमी बना दिया। झाड़ू बर्तन करवाने के साथ ही खाना भी बनवाया उन औरतों ने और खाने के बाद तीनों औरतें आसपास और राजकुमार को बीच में कर के सो गई साथ ही राजकुमार के दोनों हाथों की एक - एक उंगली जादूगरनियां अपने दातों से दबाकर सोती थी। राजकुमार का जीवन अत्यंत संकट में पड़ गया था आसपास चारों तरफ सिर्फ नीम के पेड़ ही दिखाई पड़ते थे वहां का एक रहस्य यह भी था कि सुबह सूर्य के निकलते ही सभी नीम के पेड़ सूख जाते थे और संध्या होते ही सभी पेड़ हरे - भरे पत्तों के साथ लहलहाने लगते थे। यह दृश्य देख राजकुमार को समझ आ गई की क्यों लोग नीबाबग आने से कतराते थे और वो औरतें मुझे यहां आने से रोक रही थी। जादूगरनियां राजकुमार को दिन भर मक्खी बनाकर अपने जुडे़ में बांध लिया करती थी और घर आते ही आदमी बना देती। इसी तरह कई वर्ष बीत जाने के बाद जब जादूगरनीयों को यह यकीन हो गया कि अब राजकुमार कहीं नहीं जाएंगे तब उन्हें दिन में भी आदमी बना ही रहने देती थी साथ ही अपने घर पर अकेले रहने के लिए भी छोड़ देती थी। राजकुमार के पास कोई साधन या कोई मित्र भी न था जिससे वह अपने मन की व्यथा कह सके नित्य प्रतिदिन राजकुमार की सारी प्रक्रिया एक तोता रोज देखा करता था एक दिन की बात है जब राजकुमार अकेले थे तभी वह तोता आया और राजकुमार से उनका हाल पूछा और कहने लगा हे मित्र मै तुम्हें सालों से इस जगह बंद हो कर रहते देखता हूं। तुम यहां से भाग क्यूं नहीं जाते ? राजकुमार ने कहा हे मित्र मै यहां मजबूरी में पड़ा हूं क्योंकि मुझे यहां से निकलने का और अपने घर जाने का दिशा नहीं मालूम है। तोता बड़ा होशियार और जानकार भी था उसने कहा हे मित्र मै तुम्हारी हर संभव मदद करूंगा तुम अपने घर का पता बताओ। तब राजकुमार ने कहा हे मित्र यदि तुम मुझे यहां से निकलने के लिए कुछ कर सकते हो तो पहले एक पत्र मेरे घर के आंगन में डाल आओ और मेरी पत्नी जो भी संदेश दे वह मुझे लाकर देना। तोता ने ठीक वैसा ही किया पत्नी पत्र पढ़ते ही राजकुमार की व्यथा समझ गई और एक दूसरे पत्र में लिखने लगी हे प्रियवर आप कैसे भी कर के दो विरा पान लगवा कर रख लीजिए कुछ दिन बाद जब वह पान सूख जाए तब रात्रि में सोते समय पान दोनों के मुंह में डाल कर वहां से रातों रात भाग जाना। तोता से पत्र पाकर राजकुमार बहुत प्रसन्न हुआ और तोते से ही पान के लिए आग्रह किया तोता तुरंत ही गया और अपने चोंच से पान लेकर भाग आया और राजकुमार को आगे का रास्ता भी बतलाया। कुछ दिनों के बाद राजकुमार ने ठीक वैसा ही किया जादूगरनियों के गहरी नीद में सो जाने के बाद राजकुमार ने ठीक वैसा ही किया और वहां से भाग निकले। तोता भी साथ में रास्ता बताते उड़ता जा रहा था तभी जादूगरनी की नीद खुली और राजकुमार को न पाकर तीनों ने पीछा किया। राजकुमार जादूगरनियां को देख बेतहाशा भागने लगे और निबाबग के सरहद पर एक नदी के तट पर जा पहुंचे वहां एक बन्ना हाथी था जो तोते के कहने पर राजकुमार को उस पार छोड़ने के लिए तैयार बैठा था। राजकुमार के पहुंचते ही बन्ना हाथी अपने पीठ पर सवार कर नदी में तैरने लगा तभी जादूगरनियां हाथी का पूछ पकड़ कर तैरने लगी और जोर जोर से चिल्लाने लगी। बन्ना हाथी ने राजकुमार को इशारा किया कि अपने तलवार से मेरी पूछ काट दो नहीं तो बच पाना असम्भव है राजकुमार ने फौरन पूछ को हाथी से अलग कर दिया और नदी पार कर अपने घर आ गए तोता और हाथी राजकुमार की सहायता कर अति प्रसन्न हुए और पुनः अपने स्थान पर चले गए। मित्रों राजा हो या रंक यदि आप किसी असहाय कि सहायता करते हैं तो आपका स्थान उस व्यक्ति की नजर में हमेशा ऊंचा रहेगा और वह आपका आभारी रहेगा। धन्यवाद
।। ज्योति प्रकाश राय।।