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में और महराज - 3

जगह राजकुमारी शायरा का कमरा

" उदास मत होइए राजकुमारी जी।" मौली ने उसका हाथ पकड़ते हुए कहा।

" हम कर क्या सकते है मौली? एक राजकुमारी होते हुए इतने बेबस है हम। कुछ ही दिनों पहले बड़े राजकुमार को शादी करनी पड़ी हमारी ही बड़ी बहन से और अब हमारी बारी है इस कुर्बानी को देने की।" उसने रोते हुए अपना दर्द बताया।

" बड़े राजकुमार अभी भी आप से प्यार करते है। उन्होंने आखरी खत मे लिखा था ना वो जल्द आपको वहा से ले जाएंगे। आप वजीर साहब को जो चाहिए वो ला दीजीए मेरी राजकुमारी फिर आप इस कैद से आजाद हो सकती है।" मौली ने उसे समझाने की कोशिश कि।

" अगर आत्महत्या के वक्त मर गए होते। तो आज इस दर्द से आज़ाद होते हम। इस दुनिया मे दिल टूटने से ज्यादा ख़तरनाक कोई बीमारी नहीं है मौली। हमे उसी वक्त मर जाना चहिए था। किसी और का होने से तो ये अच्छा होता।"

" राजकुमारी ये कैसी बाते कर रही है आप...." मौली ने रोते हुए कहा।


"सही कहा, उस वक्त मर जाती तो हम से बच जाती आप। सुना आपने वजीर साहब आपकी दूसरी बेटी क्या कह रही है। इन्हे ना तो हमारी इज्जत की परवाह है। ना अपने पिता का डर । लगता है ये हमारे महल के अनुशासन भूल गई है। इन्हे याद करवाना पड़ेगा।" उसकी बड़ी मां और वजीर की पहली पत्नी ने वजीर के साथ शायरा के कमरे मे कदम रखा।


" सही कह रही है आप। आज दरबार मे इन्होंने जो किया उसके बाद तो इन्हे अनुशासन का पाठ पढ़ाना बनता है।" वजीर की हा सुनते ही बड़ी मां ने अपनी दसियो को हुक्म दिया और उन्होंने राजकुमारी पर कोड़े बरसाना शुरू किया। मौली ने बीच में आकर कुछ कोड़े सेहन किए पर जल्द ही राजकुमारी ने उसे भी दुसरी तरफ कर दिया। १५ कोडो के बाद वो वहीं बेहोश हो गई।


रिहान ने राजकुमार के कहे मुताबिक इस पूरी घटना को देखा और जल्द ही जाकर राजकुमार को खबर सुनाई।

सिराज ने चाई की प्याली हाथ में ली। अपने दरबार के ख़ास कमरे में बैठ उसने उस चाई को सूंघा , " मैने नहीं कहा था तुमसे बाप - बेटी सब मिल कर तमाशा कर रहे है। हम भी तो देखे आखिर वो चाहते क्या है।"

"हमे लगा राजकुमारी की सुन्दरता आपको भा गई। इसलिए बड़े भाई के साथ उनके संबंधों को जानने के बावजूद आप इस शादी के लिए तैयार हो गए " वीरप्रताप ने अपनी राय रखी।

" यहां इस जगह तुम होते तो शायद उसकी बातों मे आ जाते वीर। पर सिराज ऐसे नहीं है। हमेशा याद रखना तुम्हे सबसे ज्यादा सचेत एक औरत के सामने रहना है। क्यों कि वो कभी भी ख़ूबसूरत के साथ साथ खतरनाक हो सकती है। जहा तक रही शादी की बात तो खुद पिताश्री महराज ने हमे आज्ञा दी है। में उनके खिलाफ कभी नहीं जाऊंगा।" राजकुमार सिराज अपनी बातो पर स्पश्ट थे।

"जैसा आप कहें भाई। इजाजत दीजिए चलता हूं। जल्द मिलेंगे आपकी शादी के जश्न मे" विरप्रताप वहां से चले गए।

" मेरे लिए कोई आज्ञा राजकुमार" रिहान सर झुकाए खड़ा था।

कुछ सोचने के बाद उसने कहा, " अभी तो बस वजीर साहब पर नजर रखो, और हा हमारे शादी के नौते सब तक पोहचा दो। बड़े भाई को कहना में उनका इंतजार करूंगा शादी वाले दिन।"

उसके हाथ का इशारा मिलते ही रिहान वहा से चला गया।





"कौन है? सामने आओ। अभी" उसने गुस्से से अपनी दाई ओर देखा।

अंधेरे मे से दो लोग सामने आए। काला पोषाख पहने हुए उन्होने अपनी शक्ल छुपा रखी थी।

" आठवें राजकुमार। इस तरह से आने के लिए माफी चाहते है। पर आपके काम की बात करनी थी।"उनमें से एक ने कहा।

" इस तरह या तो चोर आते हैं या फ़िर कातिल। इसलिए माफी तो तुम्हे मिलने से रही। तुम्हारे पास कुछ पल है। जो भी बात करनी हो अभी कह दो।" सिराज अभी भी चाई का प्याला हाथ मे पकड़े वहीं खड़ा था।

" हमे पता है आप एक अच्छे महाराज साबित होंगे। इसीलिए हम आपकी मदद करना चाहते है राज गद्दी पाने मे। जिसके बदले आप को बस राजकुमारी हमारे हवाले करनी होगी।" दूसरे आदमी ने कहा।

" हम ना उन लोगो में से है ना कभी होंगे जो किसी और के कंधो पे चढ़ कर दीवार कुदे। इस से पहले की में तुम्हे यही ज़मीन मे गाढ़ दू चले जाओ यहां से और अगर राजकुमारी के आस पास भी दिखे तो यह याद रखना हर बार में किसी की जान बख्श नहीं देता" उसने गुस्से मे एक सांस छोड़ी।

" हम अंधेरों के सरताज के गुलाम है। मालिक जल्द वापस लौटेंगे और तुम्हारी इस बदसलूकी के बदले तुम्हे सजा मिलेगी राजकुमार याद रखना हमे।" इतना कह वो दोनो फिर अंधेरों मे गुम हो जाते है ।



" आखिर आप है कौन राजकुमारी ? कहा से है ? ये लोग क्यो पड़े है आपके पिछे ? लगता है आपको जल्द से जल्द हमारे साये मे आने की जरूरत है।" उसने कुछ सोचते हुए अपनी चाई की प्याली आखिरकार मुंह से लगाई।
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