Atit ke chal-chitra - 8 in Hindi Moral Stories by Asha Saraswat books and stories PDF | अतीत के चल चित्र - (8)

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अतीत के चल चित्र - (8)



अतीत के चलचित्र (8)

पड़ौस में रहने वाली मौसीजी के यहाँ उनके बेटे के टीके का कार्यक्रम था ।हमारे परिवार को भी निमंत्रित किया मौसीजी ने बताया कि ग्यारह लोग बनारस से बड़े बेटे का टीका करने आ रहे हैं ।तुम समय से पहले आकर मेरी सहायता कर देना ।

कार्यक्रम शाम पाँच बजे होना तय हुआ ।मैं मौसीजी की मदद करने के लिए दिन में ही उनके घर पहुँच गई।सब मेहमान आ चुके थे और लड़की वाले भी कार्यक्रमानुसार पहुँच गए ।मेहमानों का नाश्ता हो गया तो लड़की के पिता और भाई ने सामान सजाना प्रारंभ कर दिया ।अब पूरी तैयारी हो चुकी थी,बस एक ही कमी थी जिस लड़के का टीके का कार्यक्रम था वह नहीं पहुँचा।सब इंतज़ार कर रहे थे तभी उसका फ़ोन आया कि बंगलौर से चलने वाली फ़्लाइट में कोई कमी आ गई है वह नहीं आ रही ।अब जो दूसरी फ़्लाइट आयेगी उस से मैं आऊँगा ।मुझे पहुँचने में सुबह हो सकती है ।

अब यह सब सुनकर वह लोग बहुत नाराज़ हुए,अपना सभी सजाया हुआ सामान उठाने लगे ।वहॉं एक रिश्तेदार बुजुर्ग थे ,उन्होंने एक सुझाव दिया कि नियत समय पर लड़के के छोटे भाई का टीका कर दिया जाये और कल सुबह लड़के का टीका कर दीजिएगा ।

ऐसा करने से कार्यक्रम सुचारू रूप से हो जाएगा और किसी को परेशानी भी नहीं होगी।उन लोगों को बहुत समझाया लेकिन वह कुछ भी मानने को तैयार नहीं थे ।

यह सब सुनकर वह लोग बहुत नाराज़ हुए,सभी ग्यारह लोग बिना कार्यक्रम किये,बिना भोजन किये अपना सभी सामान लेकर चले गये...
सारा इंतज़ाम बेकार हो गया ।मेहमानों का मन बहुत दुखी हुआ ।

यह सब देख कर मेरा मन बहुत दुखी हुआ, मुझे अतीत में हुई घटना चलचित्र की तरह सामने आने लगी ।
बात उन दिनों की है जब फ़ोन नहीं थे ,तार की व्यवस्था थी लेकिन वह भी तुरंत नहीं पहुँच पाता था ।

मेरे बड़े भाईसाहब का टीके का कार्यक्रम था,घर में पूरी तैयारियाँ हो रही थी ।टीका करने के लिए हाथरस से लोग आये थे।भाईसाहब कोटा में नौकरी करते थे ।सभी मेहमान आ चुके थे खाने-पीने की तैयारी हो चुकी थी ।लाइटिंग की पूरी व्यवस्था हो गई ।समय होने पर स्थानीय लोगों का आना शुरू हो गया ।
हम सभी बच्चे खेल-कूद के साथ आनंद ले रहे थे ।तभी देखा मॉं-पिताजी बहुत चिंतित है,सभी भाईसाहब का इंतज़ार कर रहे थे,वह आयें और कार्यक्रम संपन्न हो ।

स्टेशन पर छोटे भाई साहब ने जाकर देखा कि रेल का समय होने पर भी रेल नहीं आई ।दस घंटे की देरी से आने की सूचना मिली।मॉं-पिताजी बहुत चिंतित थे समझ नहीं आ रहा था क्या किया जाये।
अब सुनकर सभी घबरा गए,घर में माहौल कुछ ख़राब सा लगने लगा, तभी लड़की वालों की ओर से एक सज्जन सामने आये ।

उन्होंने कहा कि यह किसी के वश में नहीं है यदि रेल देरी से चल रही है तो इसमें किसी का कोई दोष नहीं है ।बेटा तो कल आ ही जायेंगे,आज हम लोग नियत समय पर टीका छोटे बेटे के कर देते है कल आने पर उनका कर देंगे ।आप तैयारी करिये,अपने सभी मेहमानों को भोजन कराइये और हमें बताते जाइए कि हमें क्या करना है ।
सभी कार्य सुनिश्चित समय पर पूरे हुए और मेहमानों को भी ख़ुशी से भोजन कराया...

✍️क्रमश:


आशा सारस्वत