दूरी न रहे कोई ( पार्ट 1) in Hindi Adventure Stories by किशनलाल शर्मा books and stories Free | दूरी न रहे कोई ( पार्ट 1)

दूरी न रहे कोई ( पार्ट 1)

"क्या लेंगे आप?"
"तुम कौन हो?" दरमियाने  कद की युवती  को  अपने साामने खड़ा देखकर राजन बोला था।
"मैं इस बार मे नौकरी करती हूँ"वह औरत बोली,"वेटर हूँ।"
"औरत होकर बार मे वेटर?"राजन ने कहा तो दिया लेकिन उसे अपनी कही हुई बात ही अटपटी लगी थी।उसने औरतो को बहुत काम करते हुए देखा था।उसने यह भी सुना था कि औरते बार मे भी काम करने लगी है।उसे यह बात सच नही लगी थी।लेकिन आज अपनी आंखों से शराब सर्व करते देखकरअविश्वास करने की कोई बात ही नहीं थी।
"क्या औरत के पेट नही होता?क्या औरत को भूख नही लगती?क्या औरत की ज़रूरते नही है?आदमी उदर और अन्य ज़रूरतों के लिए कोई भी काम कर सकता है तो औरत क्यो नही?"
उस युवती की क्यो का जवाब राजन के पास नही था इसलिए वह उसकी बात सुनकर चुप रह गया।
"क्या  लेंगे आप?"राजन को चुप देखकर वह बोली।
"विहस्की"।राजन का आर्डर लेकर वह चली गई।राजन इस बार मे आज पहली बार आया था।शराब उसकी आदत में शुमार हो गया था।वह शराब अपने साथियों के साथ बैठकर पिता था या घर मे अकेला।बार मे कभी कभी जाता था।आज वह सुबह पुणे गया था।लौटते समय रात हो गयी थी।मुम्बई की सीमा में प्रवेश करते ही उसे शराब की तलब महशुस होने लगी।वह घर फहुँच शराब पीना चाहता था।लेकिन बार पर नज़र पड़ते ही वह अपने को रोक नही पाया।कार पार्क करके वह अंदर चला आया था।
"यह लीजिए आपकी विहस्की।"वह युवती गिलास टेबल पर रखते हुए बोली।
"सुनिए"उस युवती को जाता हुआ देखकर राजन बोला"क्या मैं तुम्हारा नाम जान सकता हूँ।"
"क्यो नही"युवती राजन के पास आकर बोली"इला"
बड़ी बड़ी आंखों वाली सुंदर इला को पहली बार देखते ही राजन उस पर मोहित हो गया था।इसी का नतीजा था कि कभी कभी बार मे जाने वाला राजन रोज उस बार मे जाने लगा था।वह बार मे जितनी भी देर  बार मे रहता उसकी नज़र  इला पर ही जमी रह्ती।वह इला को एक टेबिल से दूसरी टेबल पर जाते हुए देखता रहता।वह भी इला को किसी न किसी बहाने से अपने पास बुलाना नहीँ भूलता था।
 बार मे आने वाले इला को तंग करने के लिए उस बार बार बुलाते।कुछ लोग उससे अश्लील  बाते करने और तंग करने स भी बाज नही आते थे।।राजन उसे अपने पास ज़रूर बुलाता था लेकिन बदतमीजी नही करता था।राजन के शालीनता पूर्ण व्यवहार से इला भी प्रभावित थी।इसी का नतीजा था कि शाम ढलते ही इला भी राजन के आने का  इन्तजार करने लगती।राजन किसी दिन नहीं भी आता था।जिस दिन राजन नही आता ठूस दिन इला का मन उदास हो जाता।अगले दिन राजन के आने पर वह पूछना नहीं भूलती,"कल कहाँ रह गए?"
"हां कल नही आ पाया।"
राजन को देखते ही उसका चेहरा खिल उठता।लोगो को शराब सर्व करते समय भी उसका ध्यान राजन पर बना रहता।
एक रात राजन देर से बार मे आया और देर रात तक शराब पीता रहा।एक एक करके सब  ग्राहक चले गए।वह अकेला बार मे रह गया।उसे उठता न देखकर बार का मालिक आकर बोला"सर् बार बन्द करने का समय हो गया।"
और वह उठ कद बाहर आ गया। उसने जेब मे हाथ डाला कार की चाबी।कहाँ गयी।वह सोच हज रहा था।तभी दौड़ती हुई इला आयी,"चाबी भल आये।"
(आगे अगले भाग में)

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