नीम का पेड़ (पार्ट 3) in Hindi Short Stories by किशनलाल शर्मा books and stories Free | नीम का पेड़ (पार्ट 3)

नीम का पेड़ (पार्ट 3)

10--डिलीवरी
"दो तीन घण्टे में डिलिवरी नही हुई तो सिजेरियन करना पड़ेगा।"डॉक्टर दीपा, रुचि का चेकअप करने के बाद कार में बैठकर कहीं चली गई थी।
मेरी बहू रुचि गर्भवती थी।दिन पूरे हो चुके थे।उसे सुबह से ही दर्द शुरू हो गए थे।मैं उसे कॉलोनी के पास बसे नर्सिंग होम में उसे ले आयी।जब मैं उसे यहाँ ला रही थी।तभी कॉलोनी की कुछ औरतो ने मुझे टोका था,"डॉक्टर दीपा के नर्सिंग होम में बहु को मत ले जाना।बहुत लालची है।पैसे के लालच में हर औरत का सिजेरियन कर देती है।"
लेकिन मेरी मजबूरी थी।पति और बेटा बाहर गए हुए थे।हमारी कॉलोनी शहर से दूर थी। इस कोलिनी के पास यही नर्सिंग होम था।शहर के किसी नर्सिंग होम में ले जाने के लिए कोई साधन चाहिए था।जो यहाँ आसानी से उपलब्ध नही था।
रुचि को तकलीफ ज्यादा हो रही थी।मुझसे उसकी पीड़ा देखी नही जा रही थी।डॉक्टर दीपा बाहर गयी हुई थी।मैं काउंटर पर जा पहुंची।वहां तीन नर्स बैठी हुई बाते कर रही थी।मैने उन्हें बहु की पीड़ा बताई तो एक युवा नर्स बोली,"मैं देखती हूं आंटी।"
वह मेरे साथ चली आयी।रुचि का चेकअप करने के बाद बोली,"आप चिंता मत करो।यह इंजेक्शन ले आओ।"
मैं नर्सिंग होम के बाहर  के मेडिकल स्टोर से नर्स का लिखा इंजेक्शन ले आयी।नर्स ने इंजेक्शन लगा दिया और  कुछ देर बाद रुचि की डिलीवरी हो गयी।डॉक्टर दीपा लौटी तो कार से उतरते ही रुचि के पास पहुंची थी।रुचि को देखते ही बोली,"डिलीवरी हो गयी?"
"मेम मैने इंजेक्शन दिया था।"नर्स की बात सुनते ही डॉक्टर दीपा उखड़ गयी,"किसने कहा था तुमसे इन्जेक्शन लगाने के लिए।यहां नौकरी करनी है तो जितना कहा जाए।उतना ही करो।'
नर्स को शाबासी की जगह फटकार मिली थी क्योंकि उसकी वजह से सिजेरियन का पैसा मारा गया था।
11---बेटी
रमजान की गांव के बाहर हाई वे पर साईकल स्कूटर की पंचर जोड़ने की दुकान थी।वह सुबह दुकान जाता तो रात को ही घर लौटता था।एक रात को वह दुकान से घर लौट रहा था कि ट्रक ने उसे टक्कर मार दी।तीन महीने तक बिस्तर में पड़ा रहा।उसकी जान तो बच गयी थी।लेकिन हमेशा  के लिए अपाहिज हो गया था।
बेटा था नही।बेटे की आस में चार बेटियो का बाप बन चुका था।वह काम करने के लायक नही रहा था।इसलिए नौबत भूखे मरने की आ गयी।तब एक दिन बड़ी बेटी रेहाना बोली,"अब्बा दुकान में चलाऊंगी"।
"तू लड़की होकर साईकल स्कूटर के पंचर जोड़ेगी?"बेटी की बात सुनकर रमजान बोला,"बेटी लोग क्या कहेंगे?"
"लड़की ट्रेन बस चला सकती हैं।हवाई जहाज उड़ा सकती है।फौज और पुलिस में नौकरी कर सकती है।औरत हर काम कर सजती है,तो साईकल के पंचर क्यो नही जोड़ सजती?"अपने अब्बा की बात सुनकर रेहाना बोली,"क्या लोगो को दिख नही रहा।बाप अपाहिज हो गया है तो बेटी का फर्ज है परिवार पालना।"
बेटी की बात सुनकर रमजान चुप रह गया।कुछ दिनों तक दुकान पर कोई ग्राहक नही आया।फिर धीरे धीरे दुकान चल निकली।
12---फर्ज
"तू अमेरिका क्यो नहीं जाना चाहता।"
सुरेश और रमेश ने एक साथ बी टेक किया था।सुरेश ने अमेरिका की एक कम्पनी में अप्लाई किया और उसे नौकरी मिल गयी।सुरेश ने रमेश से भी कहा तो वह बोला,"मेरे देश ने मुझे योग्य बनाया है,तो मेरा फर्ज है।अपनी योग्यता का इस्तेमाल देश की उन्नति प्रगति में करूं"