नीम का पेड़ (पार्ट8) in Hindi Short Stories by किशनलाल शर्मा books and stories Free | नीम का पेड़ (पार्ट8)

नीम का पेड़ (पार्ट8)

26--दिखावा
"पिताजी की शवयात्रा  विमान से निकालेंग।"बड़ा बेटा बोला था .
"सही कह रहे हो भैया।दुनिया वालो को पता  चलना चाहिए कि शिव नारायण हमारे पिता थे।"छोटे भाई ने बड़े भाई की बात का समर्थन किया था।
शिव नारायण के दो बेटे अनिल और विमल थे।अनिल की शादी रमा से और विमल की शादी नीरा से हुई थी।दोनो बहुओ में छत्तीस का आंकड़ा था।एक मिनट को भी उनमे नही बनती थी।सास कमला जिंदा थी तब तक दोनों बहुओ को साधे रही।
पत्नी का देहांत होने के बाद दोनों बहुओ की रोज रोज की चिक चिक से तंग आकर शिव नारायण ने मकान का बंटवारा कर दिया।पैसे और जेवर भी दोनो बेटो में  बांट दिया।बस यही से उनके बुरे दिन शुरू हो गए।
शिव नारायण के पास मकान,पैसा नही रहा तो वे रोटी के लिए भी मोहताज हो गए।बड़ी बहू के यहां से रोटी मिल जाती तो छोटी बहू से सब्जी मांगनी पड़ती।छोटी बहू रोटी दे देती तो सब्जी के लिए बड़ी बहू  के सामने कटोरा करना पड़ता।अगर किसी दिन दोनो बहुये कही चली जाती तो उन्हें भूखा रहना पड़ता।
जिस बाप को   जिंदा रहते बेटे  चेन से रोटी नही दे सके दुनिया को दिखाने के लिए उसी बाप की शवयात्रा धूम धाम से निकालने की तैयारी कर रहे थे।
27----बेबस
शाम लाल दिल्ली में एक कम्पनी में नौकरी करते थे।उनके दो बेटे रोहन और सोहन और एक बेटी सविता थी।
रोहन आगरा में सोहन लखनऊ में और दामाद इलाहाबाद में सर्विस करते थे।शाम लाल की पत्नी का देहांत हो चुका था।शाम लाल रिटायर हुए तो  रोहन उन्हें अपने पास ले आया।वह पिता का बहुत खयाल रखता था।उनकी हर ज़रूरत का ध्यान रखता था।बेटे की  सेवा से प्रभावित होकर शाम लाल ने सारा पैसा जो उनके पास था।बेटे को दे दिया।श्वसुर के पास पैसा नही रहा तो वह बहु की नज़रो में खटकने लगा।वह रोज पति से कहती,"पिताजी हमारे पास ही क्यो रहते है?दूसरा बेटा भी तो है उसके पास क्यो नही जाते?'
बड़ी बहू के तानो से परेशान होकर एक दिन शाम लाल। छोटे बेटे के पास चले गए।छोटे बेटे को पिता का आना रास नही आया।वह रोज कहता,"पैसा तो आपने बड़े भैया को दिया है,तो उन्ही के पास क्यो नही रहते?"
और  रोज रोज  छोटे बेटे की जली कटी बाते सुनकर शाम लाल इतने परेशान हो गए कि एक दिन बेटी के पास जा पहुंचे।बेटी को भी आशा थी कि पिताजी रिटायर होंगे तो उसे भी कुछ न कुछ जरूर देंगे।लेकिन ऐसा नही हुआ।वह भी चाहती थी कि पैसा बड़े भाई को दिया है तो उन्ही के पास रहे।पति की आड़ लेकर वह पिता से कहती,"पापा यह मुझसे कहते है।जब दो बेटे है तो तुम्हारे पापा बेटी के पास क्यो रहते है?"
और एक दिन शाम लाल बेटी के घर से भी चले गए।बेटो और बेटी के दुत्कारने के बाद कहां जाते?यह दुनिया ही छोड़कर चले गए।
28--पत्नी
लाजो की शादी रितेश से हुई थी।शादी के बाद रितेश,लाजो को कार से विदा कराकर अपने घर ले जा रहा था।
रास्ते मे कार का एक्सीडेंट हो गया।
लाजो की मांग में रितेश ने सिंदूर भरा था। लेकिन पत्नी का दर्जा मिलने से पहले ही वह विधवा हो गयी थी।

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