Satya Ashram in Hindi Short Stories by ARUN SINGH books and stories PDF | सत्य आश्रम

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सत्य आश्रम

"सत्य आश्रम "
(1)
बाबा पुष्पेंदु लंगोट पहने हुए हैं।वे एक खुले स्थान पर बैठे हुए हैं।उनका शरीर नग्न है। उन्हें अन्य साधु गण दूध से नहला रहे हैं। बैक ग्राउंड में हल्की ध्वनि के साथ म्यूजिक बज रहा है जिसमें से शिव स्तोत्र निकल रहा है।
आश्रम के बाहर सैकड़ों लोग कतार में खड़े नजर आ रहे हैं। आश्रम के मुख्य द्वार पर दो साधु शिष्य खड़े हैं। कतार में सबसे आगे एक मुस्लिम महिला खड़ी है। जिसका नाम नगमा है।वह बहुत ही परेशान नजर आ रही है।
साधु शिष्य:-"आपको बाबा जी से मिलना है। "
नगमा:-"जी महाराज। बाबा जी का बहुत नाम सुना है। लोग इनकी बहुत तारीफ करते हैं। मैं अपनी जिंदगी से बहुत परेशान हूँ। बहुत उम्मीद लेकर बाबा जी के चौखट पर आइ हूँ। "
साधु शिष्य:-"बाबा जी पर विश्वास रखो। सारे कष्ट दूर हो जाएंगे। "
नगमा:-"सबका कल्याण किया है, तो मेरा भी अवश्य करेंगे। जय बाबा पुष्पेंदु जी महाराज "
नगमा अपना सिर झुका लेती है।
बाबा पुष्पेंदु जी महाराज अपने नंगे बदन पर धोती लपेट लेते हैं।वह आगे आगे व शिष्य गण उनके पीछे पीछे चल रहे हैं।एक शिष्य उनके सिर के ऊपर छतरी लेकर चल रहा है।
बाबा पुष्पेंदु अपने आसन पर पल्थी मारकर बैठ जाते हैं।
तभी एक शिष्य आगे बढ़ता है और बाबा से कुछ निवेदन करता है-
शिष्य:-"महाराज, एक भद्र महिला आपसे मिलना चाहती हैं। वह धर्म से मुस्लिम हैं। परन्तु आप पर उन्हें बहुत भरोसा है। बहुत ही उम्मीद के साथ यहाँ आपके चरणों में पधारी हैं। आप कहें तो उन्हें आपके समक्ष बुलाया जाए। "
बाबा पुष्पेंदु:-"आने दो। "
शिष्य कमरे से बाहर निकल जाता है।बाबा पुष्पेंदु अपनी आँखें बंद किए हुए हैं और बैंक ग्राउंड से "ओम् ओम् " की मधुर ध्वनि आ रही है।कमरे में मौजूद तमाम शिष्य गणों की निगाहें बाबा पुष्पेंदु की तरफ हैं।
ठीक इसी समय शिष्य के साथ मुस्लिम औरत नगमा बाबा पुष्पेंदु के कमरे में प्रवेश करती है और वह बाबा पुष्पेंदु के सामने चटाई के ऊपर बैठ जाती है। पूरे कमरे में सन्नाटा छा जाता है।
बाबा पुष्पेंदु:-"बोलो। आपको क्या कष्ट है? "
नगमा:-"महाराज जी, आप तो अंतर्यामी हैं। मैं बहुत दुखी हूँ। मेरी आत्मा दिन रात बिन पानी की मछली की तरह तड़पती रहती है। बहुत उम्मीद के साथ आपके पास आई हूँ महाराज, बहुत उम्मीद के साथ आपके पास आई हूँ। "
नगमा की आँखों में आँसू भर आते हैं।
बाबा पुष्पेंदु नगमा के सिर पर अपना हाथ रखते हैं और अपनी आँखें बंद कर लेते हैं। कुछ देर बाद बोलते हैं।
बाबा पुष्पेंदु:-"हूँ। तुम्हें इस जन्म में बहुत कष्ट हैं। ये कष्ट पूर्व जन्म के कर्मों के प्रतिफल स्वरूप हैं। "
नगमा:-"लेकिन जब मुझे पिछले जन्म के बारे में कुछ याद नहीं है तो फिर पिछले जन्म के पाप का फल इस जन्म में क्यों महाराज? "
बाबा पुष्पेंदु:-"ईश्वर के न्याय की यह एक अकाट्य प्रक्रिया है।ऊपर वाले का आदेश सर्वोपरि है।"
नगमा:-"महाराज, पर जो कुछ भी आप कह रहे हैं, मैं कैसे भरोसा करूँ। मेरी इस गुस्ताखी के लिए मुझे माफ करना महाराज। "
बाबा पुष्पेंदु:-"अब मैं तुम्हें तुम्हारे पूर्व जन्म की यात्रा में ले जाऊंगा। तुम स्वयं अपनी आँखों से सबकुछ घटित होते हुए देखोगी। ओम् वासुदेवाय नम: ! "
बाबा पुष्पेंदु नगमा के सिर पर हाथ रखते हैं। थोड़ी ही देर में नगमा अपने पूर्व जन्म में प्रवेश कर जाती है।
(2)
(नगमा के पूर्व जन्म की कहानी)
रत्ना के साथ कोई व्यक्ति यौन क्रिया कर रहा है। अंधेरे में व्यक्ति का चेहरा ठीक से दिखाई नहीं दे रहा है।
ठीक इसी समय घर के बाहर रत्ना का पति सनोज कार लेकर आता है।सनोज कार से नीचे उतर रहा है।
व्यक्ति:-"तुम्हारे पति आ गये। "
रत्ना:-"आने दो उसे। तुम अपना काम पूरा करो। "
व्यक्ति त्वरित गति से यौन क्रिया करने लगता है। जबकि सनोज बार बार डोरबेल बजाए जा रहा है। रत्ना चरमोत्कर्ष पर पहुंच कर शांत हो जाती है। व्यक्ति पिछले दरवाजे से बाहर निकल जाता है। रत्ना फटाफट कपड़े पहनती है और दरवाजा खोलती है।
रत्ना:-"क्या है बाबा। लगातार डोरबेल क्यों बजाते हो। दो मिनट इंतजार नहीं कर सकते हो क्या? "
सनोज हँसते हुए:-"मेरी जान मुझे दो सेकंड बर्दाश्त नहीं होता, तुम दो मिनट की बात करती हो। "
रत्ना:-"ऐसी क्या है? "
सनोज:-"ऐसी क्या है, ....अरे तुम मेरी जान हो, तुम्हीं जहान हो। तुम हो तो मैं हूँ, वर्ना मेरी हस्ती क्या है। डूबता हुआ तिनका। " सनोज रत्ना को अपने सीने से लगा लेता है।
रत्ना:-"तो इतना प्यार करते हो मुझे! "
सनोज:-" फिर तुम्हें क्या लगता है। मेरी आँखों में झांको। झांको झांको। और गहराई में जाओ। और...... "रत्ना सनोज की आँखों में झांकने लगती है।
सनोज म्यूजिक सिस्टम पर एक रोमैंटिक सांग बजा देता है। सनोज रत्ना के साथ डांस करने लगता है।अंततः दोनों थककर सोफे पर बैठ जाते हैं।नौकरानी गीता उनके सामने टेबल पर चाय रख जाती है।सनोज चाय पीने लगता है।तभी सनोज की मोबाइल की रिंग बजने लगती है।वह कॉल को रिसीव करता है और मोबाइल को अपने कान से लगाता है।
सनोज:-" हाँ बोलो अतुल। "
अतुल:-"सर एकाउंट की पीडीएफ फाइल मैंने आपको भेज दी है। "
सनोज:-"क्या लगता है। उसमें दस लाख रूपये की कहीं एंट्री है। "
अतुल:-"दस लाख की तो नहीं, पर आठ लाख की एंट्री है। मुझे कुछ न कुछ गड़बड़ लगता है सर ।"
सनोज:-"हूँ "
इस बीच रत्ना उठकर वहाँ से चली जाती है।
रत्ना फोन लगाती है। वह व्यक्ति फोन उठाता है।
व्यक्ति:-"हैलो जान, कैसी हो! "
रत्ना:-"मजा आ गया। "
व्यक्ति:-"अच्छा "
रत्ना:-"यार तुम बहुत मजा देते हो। तुम्हारी स्टैमना देखकर मेरा दिल क्या, मेरी आत्मा भी तृप्त हो जाती है। "
व्यक्ति:-"आेह। ऐसा है क्या! "
रत्ना:-"तो तुम्हें क्या लगता है, मैं झूठ बोल रही हूँ। "
व्यक्ति:-"बिलकुल नहीं मेरी जान। तुम पर मुझे पूरा ऐतबार है। बस ऐसे ही मेरी बाहों में आती रहो और मैं तुम्हें भरपूर मजे देता रहूंगा। फुल स्टैमना के साथ। "
सनोज लैपटॉप लेकर बैठा हुआ और लैपटॉप पर ही कुछ सर्च कर रहा है और फिर कुछ लिख रहा है। वह लैपटॉप पर ही तमाम फाइलों में बीजी है।
दूसरी तरफ रत्ना अपने महबूब के साथ गप्प सड़ाके लड़ाने में व्यस्त है।
(3)
किट्टी पार्टी चल रही है। तमाम औरतें सजधज कर किसी लड़के के साथ डांस कर रही हैं। रत्ना भी वहाँ पहुंचती है। कुछ औरतें रत्ना के पास पहुँचती हैं।
एक औरत आभा:-"हाय रत्ना। यू आर टू लेट यार। "
रत्ना:-"ओह आय एम सॉरी। व्हेयर इज टूडेस कॉक। "
आभा:-"लुक देयर। सो हैंडसम। "
रत्ना:-"ओह यार, रियली। वी लकी। सो क्यूट बेबी। "
रत्ना दारू का एक गिलास उठा लेती है और कुछ घूँट गले से नीचे ऊतारती है। वह नशीली आँखों से वहाँ मौजूद एक मात्र हैंडसम लड़के को घूरने लगती है।
रत्ना:-"हू इज दिस बेबी आभा ? "
आभा:-"कम "
आभा रत्ना का उस लड़के से परिचय करवाती है।
रत्ना:-"हाय, माय सेल्फ रत्ना। रत्ना रस्तोगी। "
लड़का:-"माय सेल्फ सौरव। "
रत्ना:-"सो स्वीट। "
रत्ना लड़के के साथ डांस करने लगती है। थोड़ी देर बाद रत्ना उस लड़के को लेकर एक कमरे में चली जाती है।
बाहर डांस चल रहा है। वहाँ मौजूद औरतों में एक औरत है-दीया। वह बूरी तरह से शराब के नशे की गिरफ्त में आ चुकी है। उसके पाँव लड़खड़ा रहे हैं। वह उस कमरे का दरवाजा खोलती है जिसमें रत्ना सौरव के साथ पूर्णतया वासना में लिप्त है।
दीया (चीखते हुए) :-"बदतमीज औरत। आई सबसे लेट मगर मजे लूटने में सबसे आगे। आय से गेट लास्ट। "
रत्ना:-"आय से यू गेट लास्ट। वर्ना टांग तोड़कर हाथ में दे दूंगी। जानती नहीँ मैं कौन हूँ। "
दीया:-"ओह, तो तू बहुत बड़ी दादा हो गई है। इडियट। दादागिरी किसी दादा के साथ नहीं करते, पहले तू बाहर चल। "
दीया रत्ना को धक्के मार कर कमरे से बाहर कर देती है। फिर खुद सौरव के साथ लिपट जाती है और अंदर से दरवाजा बंद कर लेती है।
रत्ना बाहर खड़ी है-बेहद गुस्से में। वह दांत पीस रही है और मन ही मन चीख रही है-
रत्ना:-"यू बास्टर्ड। आय वील किल यू। रेमेंबर इट। नागिन से भी ज्यादा
जहरीली हूँ मैं। याद रखना। "
(4)
सनोज मैनेजर अतुल के साथ बैठ कर कंपनी के बारे में कोई चर्चा कर रहा है।
सनोज:-"अतुल पता है तुम्हें, दस करोड़ का ऑर्डर हमारे हाथ से निकलकर आलोक फर्मास्यूटिकल के पास चला गया है। यह एक बहुत बड़ी नाकामयाबी है हमारे मैनेजमेंट के लिए। "
अतुल:-"पर सर इसमें अगर मेरी गलती हो तो बताइये। मार्केटिंग हेड की लापरवाही की वजह से ही ये सब कुछ हुआ है। "
सनोज:-"यदि मार्केटिंग हेड को ही सबकुछ डिसाइड करना है तो फिर मैंने तुम्हें क्यों रखा है कंपनी में,अचार डालने के लिए। तुम्हें जब मैंने सारी सुविधाएं दी हैं। पैसा दिया है। मकान दिया है। कार दिया है,ड्राइवर दिया है,नौकर चाकर दिया है। तो काम कौन करेगा- कंपनी का सुपर वाइजर या कंपनी का जनरल मैनेजर। है जवाब तुम्हारे पास। "
अतुल (गुस्से में) :-"सर इस तरह से आप मेरे ऊपर इल्जाम नहीं लगा सकते। इसमें मेरी गलती बिलकुल नहीं है। आप खामख्वाह इस केस में मुझे क्यों घसीट रहे हो। "
ठीक इसी समय वहाँ रत्ना पहुँच जाती है और वह अतुल को जोर जोर से डाँटती है।
रत्ना:-" यू इडियट, तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तू साहब के सामने ऊँची आवाज़ में बात कर रहा है। शरम नहीं आती तुम्हें। गेट लॉस्ट, आय से यू गेट लॉस्ट। "
सनोज:-"रत्ना, तुम अपने कमरे में जाओ। यहाँ तुम्हारा कोई काम नहीं है।दिस इस टोटली मैटर अॉफ कंपनी, नॉट अॉफ फैमिली,प्लीज"
रत्ना तुनक कर वहाँ से चली जाती है।
सनोज:-"अतुल, आय एम सॉरी। रत्ना ने तुम्हें भला बुरा बोला, मुझे अच्छा नहीं लगा। "
अतुल:-"कोई बात नहीं सर। भाभी को मुझे बोलने का हक है। इतना तो वो बोल ही सकती हैं। मुझे भी आवाज ऊंची करके नहीं बोलना चाहिए था। मेरी भी गलती है सर ! "
सनोज रत्ना के कमरे में पहुंचता है। वह रत्ना के पास बेड पर बैठ जाता है। रत्ना कुछ खफा खफा सी नजर आ रही है।
सनोज:-"अरे इतना गुस्सा करने की क्या जरूरत है। ऑफिस के कामों में जरा ऊँची नीची आवाज होती रहती है। इट इस द पार्ट ऑफ अवर जॉब।"
रत्ना:-"पर कोई दो कौड़ी का आदमी आपसे ऊँची आवाज़ में बात करे मुझे बिलकुल पसंद नहीं। उसे समझा देना आइंदा सिर झुका कर आपसे बात करे, वर्ना मुझे उसकी औकात बताने में दो मिनट भी नहीं लगेंगे। "
सनोज:-"बी रिलैक्स। ये टिकट लाया हूँ, पहले इसे देखो। "
रत्ना टिकट देखकर खुश हो जाती है।
रत्ना:-"ओह माय गॉड। यूरोप के टूर पर जाना है हमें। और अगले ही महीने। सनोज रियली यू आर माय बेस्ट लाइफ पार्टनर। थैंक यू वेरी मच। " रत्ना सनोज को किस कर लेती है।
सनोज:-" पूरे पंद्रह दिनों का टूर है। साथ में दुनिया की सबसे कीमती इंसान मेरे साथ होगी, तो यह टूर मेरी जिंदगी की बेहतरीन यादगार बन जाएगी। "
सनोज रत्ना की आँखों में झाँकते हुए बोलता है।
(5)
रात के अंधेरे में रत्ना के घर के पीछे का दरवाजा खुलता है और रत्ना के कमरे में एक अनजान व्यक्ति घुसता है। वह रत्ना के साथ काम वासना में लिप्त हो जाता है जबकि दूसरे कमरे में सनोज लैपटॉप पर ऑफिस के काम में व्यस्त है।
थोड़ी देर बाद वह अनजान व्यक्ति कमरे से बाहर निकल जाता है, पर उसे बाहर निकलते हुए घर का नौकर नरेश देख लेता है। वह दूर खड़ी रत्ना को भी देखता है जो अनजान व्यक्ति के बाहर जाने के बाद दरवाजे की कुंडी लगाती है।रत्ना तेज कदमों से अपने कमरे की तरफ चली जाती है जबकि नरेश फटी आँखों से अपने आस पास कुछ अजीब होते हुए देख कर हैरान और परेशान हो रहा है।
अगले दिन नौकर नरेश के हाथ में चाय की ट्रे है वह जरा मस्ती के मूड में दिखाई दे रहा है। बालकनी में रत्ना के ब्रा व पैंटीज लटक रहे हैं जिन्हें देखकर नरेश रूकता है और उन्हें अपने होठों से चूम लेता है। फिर मुसकुराने लगता है। जबकि दूर खड़ी रत्ना नरेश को ऐसी हरकतें करते हुए देख लेती है।
नौकर नरेश रत्ना के कमरे में पहुंचता है और चाय की ट्रे टेबल पर रखते हुए बोलता है-
नरेश:-"मैम, आपके लिए चाय। "
रत्ना:-"हूँ, चाय वहीं रख दो, और तुम जरा इधर आना। "
नरेश रत्ना के पास पहुंचता है-
नरेश:-"जी मैम, कुछ काम है। "
रत्ना नरेश का कॉलर पकड़ लेती है और उसका चेहरा अपने चेहरे के बेहद करीब लाती है। ऐसा लगता है जैसे वह नरेश के होठों को चूम लेगी। नरेश पसीना पसीना हुए जा रहा है। उसकी तेज साँसे चल रही हैं। ठीक इसी समय रत्ना नरेश को एक जोरदार धक्का मारती है और चीखती है-
रत्ना:-"गेट आवुट।दफा हो जाओ यहाँ से। "
नरेश वहाँ से भाग खड़ा होता है।
(6)
एक क्लब पार्टी में म्यूजिक की थाप पर सभी औरतें डांस करने में व्यस्त हैं। बहुत ही भद्दे तरीके से डांस चल रहा है। सभी औरतें बारी बारी से बंटी के साथ चिपक चिपक कर डांस कर रही हैं। वहाँ दीया भी मौजूद है। वह शराब के नशे में है। अचानक बंटी को पकड़ती है और अपने साथ ले जाने लगती है। आभा इस बात का विरोध करती है।
आभा:-"दीया, तुम्हारा ये तरीका बिलकुल ठीक नहीं है। यार अभी पार्टी चल रही है और तुम बीच में ही शुरू हो जाती हो।अपनी पार्टी का कुछ सिस्टम है उसको फॉलो तो करो। "
दीया:-"मुझे जो करना है वो करना है। कब करना है कैसे करना, दैट आय विल डिसाइड। "
दीया बंटी के साथ एक कमरे में चली जाती है। रत्ना सब कुछ बहुत ही गौर से देख रही है। सभी औरतें भौचक्की हैं। कुछ देर बाद रत्ना दीया के कमरे का दरवाजा खोलती है और अंदर प्रवेश करती है। दीया रत्ना को गालियाँ देने लगती है-
दीया:-"ओए, तू इधर कैसे, बाहर चल। तुझे मेरे हाथों पिटने में मजा आता है क्या! आँ "
रत्ना अपनी जेब से रिवाल्वर निकालती है और उसे दीया की तरफ तान देती है-
रत्ना:-"बाहर मैं नहीं, तू जाएगी। अब निकलती है या यहीं ठोक दूँ। साली कुतिया"
दीया:-"निकलती हूँ निकलती हूँ, प्लीज प्लीज गोली मत चलाना, प्लीज। "
दीया घबरा जाती और डर के मारे कमरे से बाहर निकल जाती है। वह बुरी तरह से पसीने से भीगी हुई है।
दीया को कमरे से बाहर आते हुए देखकर वहाँ मौजूद तमाम औरतें हँसने लगती हैं और उसका उपहास करने लगती हैं।
आभा:-"अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे। हाहाहाहाहा..... "
दीया सरमा जाती है।
(7)
सनोज कार से ऊतर कर घर के अंदर प्रवेश करता है। वह रत्ना के पास पहुँचता है और बोलता है-
सनोज:-"रत्ना अॉफिस के काम से कल मैं लंडन जा रहा हूँ। "
रत्ना:-"अचानक, ये कैसे? "
सनोज:-"बहुत बड़ा डील है। बस दुआ करो कि यह डील कामयाब हो जाए। "
रत्ना:-"मेरी दुआएँ तो हमेशा आपके साथ होती हैं। कामयाबी आपके चरण चूमे। यही प्रार्थना है ईश्वर से। "
सनोज मुस्कुराते हुए रत्ना के गालों को चूम लेता है।
(8)
मोबाइल की रिंग बज रही है। अंधेरे में खड़ा एक व्यक्ति मोबाइल कॉल को रिसीव करता है तत्पश्चात मोबाइल को अपने कान से लगाता है।
रत्ना:-"हाय जानम कैसे हो! "
अनजान व्यक्ति का चेहरा स्पष्ट नहीं है।
अनजान व्यक्ति:-"बिलकुल ठीक नहीं हूँ। तुमसे मिलने के लिए परेशान हूँ। "
रत्ना:-"आ जाओ। रास्ता खाली है। सनोज लंडन के लिए घर से निकल गया है।अब तक तो वह एअरपोर्ट भी पहुँच गया होगा। "
अनजान व्यक्ति:-" फिर तो आज की रात हमारे लिए अब तक की सबसे खुशनुमा और खूबसूरत रात होगी जानेमन। "
रत्ना:-" यस, फिर देर किस बात की"
रत्ना के घर का पिछला दरवाजा खुलता है। अनजान व्यक्ति घर के अंदर प्रवेश करता है और सीधा रत्ना के कमरे में पहुँचता है। वह रत्ना को अपनी बाहों में भर लेता है। दोनों एक दूसरे को किस करने लगते हैं। थोड़ी देर बाद रत्ना बोलती है-
रत्ना:-"चोरी छुपकर हमने बहुत खेल खेल लिया। अब किस बात का डर। पूरी रात हमारी है। हमारी मुट्ठी में है। अब लाइट जला दो। अंधेरे का बहुत मजा ले लिया, अब तो बस उजाले का मजा चखना है। "
अनजान व्यक्ति:-"ठीक है तो लाइट जलाता हूँ।"
अनजान व्यक्ति लाइट जलाता है।
रत्ना अनजान व्यक्ति के सिर को अपनी तरफ घुमाती है। वह व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि मैनेजर अतुल है।
अतुल:-"कितना बेहतरीन दिन है आज का। बस तुम हो और मैं हूँ, तीसरा कोई नहीं है यहाँ। "
रत्ना:-"आज तक हमने छुप छुप कर मजे लूटे हैं, मगर आज हम खुल कर मजे लूटेंगे। "
अतुल:-"तो बन जाऊं बेसरम। "
रत्ना:-"बेसरम कहीं के! " दोनों हँसने लगते हैं और एक दूसरे की बाहों में समा जाते हैं।
(9)
एक मॉल के अंदर दीया अपने पति शेखर के साथ सॉपिंग कर रही है तभी उधर रत्ना भी पहुँच जाती है। उसकी नजर दीया व उसके पति के ऊपर पड़ती है। तो वह एक गहरी साँस लेती है फिर एक प्लानिंग के तहत वह अपनी आँखों से चस्मा नीचे उतारती है और शेखर को आँख मारती है। शेखर मानों रत्ना की नजरों की तीखी तीर से घायल हो जाता है। रत्ना एक रैक पर रखे एक पैकेट के ऊपर अपना मोबाइल नंबर लिख देती है। शेखर चुपचाप उस रैक तक पहुँचता है और रत्ना का मोबाइल नंबर अपनी मोबाइल में सेव कर लेता है। फिर रत्ना को फोन लगाता है। रत्ना की मोबाइल की रिंग टोन बजने लगती है। शेखर के चेहरे पर मुसकुराहट फैल जाती है। रत्ना कॉल को रिसीव करती है और बोलती है-
रत्ना:-"हैलो, हाऊ आर यू। "
शेखर:-"आय एम फाइन। "
रत्ना:-"आप बाद में मुझे फोन करो।ओके। बाय। "
रत्ना के चेहरे पर भारी मुसकुराहट है।
ठीक इसी समय वहाँ शेखर की पत्नी दीया पहुँचती है। वह शेखर से पूछती है-
दीया:-"क्या हुआ। तुम इतना परेशान क्यों हो? "
शेखर:-"कुछ नहीं, बस एक दोस्त का फोन आ गया था। उसी से बात कर रहा था। "
दीया:-"ठीक तो हो ना। "
शेखर:-"हाँ हाँ, नो प्रॉब्लम। "
(10)
अगले दिन शेखर एक पार्क में बैठा हुआ है। वह वहीं से रत्ना को फोन लगाता है।
रत्ना:-"हाय डार्लिंग। कहाँ हो। मैं तुमसे अभी मिलना चाहती हूँ। "
शेखर:-"हाँ डार्लिंग, मैं भी तुमसे मिलने के लिए बेताब हूँ। कल रात भर मुझे नींद नहीं आई। बस तुम्हारे बारे में ही सोचता रहा। तुम्हारा ही ख्वाब देखता रहा पूरी रात।तुम्हारी खूबसूरत आँखों में मैं डूब जाना चाहता हूँ, प्लीज इंकार मत करना।"
रत्ना:-"ओह, तो इतना ज्यादा उतावले हो रहे तुम। कोई बात नहीं। मैं भी तुमसे मिलने के लिए उतावली हूँ। सच। "
शेखर के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई पड़ने लगती है।
जबकि रत्ना के चेहरे पर भी एक विजयी मुस्कान है।
करीब आधे घंटे बाद दोनों होटल के एक कमरे में मौजूद हैं।एक दूसरे की बाहों में आलिंगनबद्ध।रत्ना अपनी मोबाइल से किसिंग करते हुए कुछ फोटो क्लिक करती है फिर मन ही मन बड़बड़ाती है-
रत्ना:-"अब मजा आएगा।हूँ। "
(11)
रत्ना अपना और शेखर का किसिंग सीन वाला फोटो दीया को वाट्सएप करती है।
दीया चाय पी रही है। उसके बगल में शेखर भी बैठकर चाय पी रहा है।तभी दीया की मोबाइल पर वाट्सएप मैसेज का ट्यून बजता है। दीया वाट्सएप चेक करती है और फोटो डाउनलोड करती है। फोटो में शेखर व रत्ना के बीच किसिंग सीन है। दीया गुस्से से लाल पीली हो जाती है। वह शेखर को दिखाते हुए पूछती है-
दीया:-"ये क्या है?..... बोलो ये क्या है.... क्या माजरा है ये.... "
शेखर के गले से आवाज नहीं निकल रही।
दीया:-"तो इस चुड़ैल के साथ ऐय्याशियाँ चल रही हैं तुम्हारी। आँ। जुबान से आवाज क्यों नहीं निकल रही तुम्हारे! "
शेखर बूरी तरह से घबरा जाता है।उसे समझ नहीं आ रहा है कि ये सब क्या हो रहा है।
तभी दीया की मोबाइल पर रत्ना का कॉल आता है। दीया कॉल को रिसीव करती है-
दीया:-"हैलो। "
रत्ना:-"शायद पहचान लिया होगा मुझे। रत्ना बोल रही हूँ। रत्ना रस्तोगी। फोटो देख लिया होगा। वाट्सएप किया हूँ तुम्हें। हूँ। मुझसे उलझने का नतीजा बहुत बुरा होता है। मैं इंसान को जड़ से खोखला कर देती हूँ। डू यू अंडरस्टैंड। "
दीया:-"या या यस "
रत्ना तुरंत फोन काट देती है।जबकि दीया बुरी तरह से झुंझलाई हुई है।
(12)
सनोज लंडन के एक होटल में बेड पर बैठा हुआ है।उसके सामने बहुत सारे सूट्स, कपड़े व सोने के आभूषण रखे हुए हैं।सनोज स्वत: मन ही मन सोचता है-
सनोज:-"रत्ना को ये सारे गिफ्ट मैं दूँगा तो वह बहुत खुश होगी।मैं उसको बहुत प्यार करता हूँ। और वह भी तो मुझे बहुत चाहती है। रत्ना को पाकर मैं धन्य हो गया। देखने में जितनी खूबसूरत है वह, उतने ही खूबसूरत उसके संस्कार हैं।उसकी गोद को मैं खुशियों से भर दूँगा। दुनिया जहाँन की सारी दौलत मैं रत्ना के कदमों में डाल देना चाहता हूँ। आखिर वह मेरी धर्म पत्नी है। मेरा फर्ज है उसके प्रति हमेशा वफादार रहना। पर क्या रत्ना भी मेरे प्रति उतना ही वफादार है जितना मैं उसके प्रति हूँ।..... निश्चित रूप से है। मुझे उसके ऊपर शक नहीं करना चाहिए। तौबा तौबा।........."
उधर रत्ना अतुल के साथ अपने बेडरूम में रंगरेलियां मना रही है।
(13)
सनोज एक कार में बैठ कर अपने घर पर पहुंचता है और घर के अंदर पहुँचकर रत्ना को अपनी बाहों में भर लेता है। दोनों के चेहरे पर बहुत खुशी नजर आ रही है।
रत्ना:-"ओह माय गॉड। तुम आ गए, मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है। "
सनोज:-"मैंने सोचा था तुम्हें सरप्राइज दूंगा। बस इसलिए बगैर बताए मैं लंडन
से सीधा मुंबई तुम्हारे पास आ गया। "
रत्ना:-"आेह। वाकई तुम्हारा सरप्राइज मुझे बहुत पसंद आया सनोज। पर लंडन से मेरे लिए कुछ लाए भी हो? "
सनोज:-"बहुत सारी चीजें लाया हूँ, आओ तुम्हें दिखाता हूँ। "
सनोज बैग खोलता है और कपड़े ,गहने ,अंगूठी, सूट्स आदि रत्ना को दिखाने लगता है। रत्ना बहुत खुश नजर आ रही है। तभी अचानक बेड के पीछे से अतुल बाहर निकलता है और वह सनोज का गला दबाने लगता है। रत्ना भी उसका साथ देती है। सनोज उनके चंगुल से मुक्त होने का भरपूर प्रयास करता है मगर उसकी सारी कोशिशें नाकामयाब साबित होती हैं और वह वहीं बेड के ऊपर छटपटा कर दम तोड़ देता है।
(14)
(नगमा का वर्तमान जीवन में वापसी)
नगमा मानों गहरी नींद से जग गई हो।वह अपनी आँखें खोल देती है। उसके सामने बाबा पुष्पेंदु बैठे हुए हैं और एकटक नगमा की तरफ ही देख रहे हैं।
नगमा फूट फूट कर रोने लगती है। कमरे में सन्नाटा छाया हुआ है। जबकि बाबा पुष्पेंदु महाराज का हाथ अब भी नगमा के सिर पर है।
नगमा:-"मैं एक तुच्छ पापी औरत हूँ। मैं समझ गई। इस जन्म के सारे कष्ट मेरे पिछले जन्म के पापों का फल है। मैं बहुत बुरी औरत हूँ। मैंने बहुत पाप किए हैं। " नगमा हिचक हिचक कर रोए जा रही है।
बाबा पुष्पेंदु:-"तुम्हें यदि इन पाप के बंधनों से पूर्ण रूप से मुक्त होना है, तो प्रभू वासुदेव के शरण में आना होगा। इसके अतिरिक्त और इससे अच्छा उपाय व निदान कोई दूसरा नहीं है।"
नगमा:-"महाराज जी। यदि ऐसा कोई मंत्र है तो कृपया मुझे बताएं। मैं अपने पूर्व जन्म के घृणित कुकर्मों पर बहुत शर्मिंदा हूँ। मैं प्रायश्चित करना चाहती हूँ महाराज। कृपया मुझे सही रास्ता दिखाएं। "
बाबा पुष्पेंदु:-"ओम् वासुदेवाय नम: ......... इस मंत्र का प्रतिदिन एक हजार एक बार जप करो। छह महीने के अंदर तुम्हें अपने जीवन में एक बड़ा परिवर्तन स्वयं दृष्टिगोचर होगा। जाओ तुम्हारा कल्याण होगा।"
नगमा अपना सिर बाबा पुष्पेंदु के चरणों में समर्पित कर देती है।
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