friends in Hindi Motivational Stories by Bhanuben Prajapati books and stories PDF | सहेलियां

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सहेलियां

सहेलियां
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रेशमा आज खोई हुई सी लग रही थी । उसके आंखों से आंसू बह रहे थे पता नहीं । यह क्यों रो रही थी उसके अंदर से आवाज आई और बोली तुम्हारी सहेली किस काम की है ।तुम उसको बताना ।तब रेशमा को लगा मैं मेरी सहेली को बताऊंगी तो मेरा सवाल का जवाब मिल जाएगा ।ऐसा सोचकर रेशमाने उसकी सहेली नजमा को फोन किया और बताया कि आज मैं बहुत दुखी हो रही हूं । मुझे तुमसे मिलना है । मैं बहुत ही परेशान हो चुकी हूं ।मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा है घर में बच्चे और पति हैं , लेकिन तब भी मेरा मन नहीं लग रहा है ।पता नहीं ।आज किसी तरह तुम मुझे मिलने आ जाओ ।

नजमाने बोला अच्छी बात है मैं तुम्हें मिलने के लिए आ रही हूं लेकिन मैं मेरी सहेली कोमल भी मेरे साथ आने वाली है क्योंकि मुझे इस को मिलना था तो वैसा करती हूं हम दोनो साथ में तुम्हारे घर पर मिलते हैं । रेशमा ने का अच्छी बात है तब तो मुझे कोमल भी मिल जाएगी और तुम दोनों के साथ मेरा मन लग जाएगा ।यह कह कर इन्होंने फोन रख दिया और वह रेशमा दोनों की राह देखने लगी )उन्हें दिलमें ऐसा लग रहा था कब रेशमा और नजमा आएंगे और मैं उसको सारी बात बताऊंगी ऐसा सोच रही थी । तब नजमा और कोमल दोनों आ गए दोनों को मिलकर वह खुश हुई कोमल और नजनाने देखा तो रेशमा थोड़ी सी चेहरे से उदास लग रही थी । कोमलने पूछा ऐसा क्यों लग रहा है कि तुम खुश नहीं हो तब रेशमा ने बताया इसलिए तो मैं तुमको बुला रही थी कि मुझे मन क्यू नहीं लग रहा है ।मेरे घर में कोई तकलीफ नहीं है । मेरे दो बच्चे हैं मेरे पति भी मुझे बहुत प्यार करते हैं तब भी मुझे पता नहीं ऐसा क्यों लग रहा है कि मेरे पास सब कुछ होते हुए कुछ भी नहीं है ।

कोमलने बताया ऐसा नहीं है लेकिन तुम मन से हारी चुकी हो 'तुम घर में अकेली रहती हो बच्चे स्कूल में चले जाते हैं तुम्हारे पति काम पर चले जाते हैं और तुम अकेली रह जाती हो इसलिए तुम को बार-बार ऐसा वैसा विचार आ जाता है और तुम मन से कमजोर हो जाती हो ऐसा नहीं है कि पैसे होते हैं तो जॉब नहीं करनी चाहिए । तुम अभी घर पर अकेली रहती हो तुम्हारे पास कोई काम नहीं है तुम पढ़ी लिखी हो ऐसा करो तुम जॉब किया करो ।या तो समाज सेवा का काम करना शुरू करो । किसी भी लड़की को पढ़ी लिखी हो कर अकेले ऐसे बेकार घर पे नहीं बैठे रहना चाहिए । जब अकेले रहते हो तो तुम को बार-बार अच्छे बुरे विचार आते हैं और तुम शरीर से बीमार हो जाते हो मन से बीमार हो जाते हो । रेशमा ने कहा तुम्हारी बात मुझे समझ नहीं आती है लेकिन मैं ऐसा कौन सा काम करूं जिससे मेरा मन लग जाए ।
कोमलने बताया तुम गरीब लड़कियों को पढाने का काम शुरू करो इसके पास पैसे नहीं है ट्यूशन कराने के लिए और पढ़ने के पैसे नहीं है उन बच्चों को तुम सड़क पर जाकर पढ़ा सकती हो । तुम्हारा मन भी अच्छा लगेगा तुम को मन से शांति मिलेगी ।

रेशमा ने बताया कि कल से वही काम करूंगी । तुमको मे अगले हप्ते मिलूंगी तब बताऊंगी कि मेरा मन अब कैसा लग रहा है

कोमल ने बताया कि जो कोई भी लड़की हो काम करने लगती है तब पीछे मुड़कर नहीं देखती है और आगे बढ़ती है। तुम भी ऐसा करना कोई काम करना मगर पूर करके रखना अपने जीवन से मतलब मत रखो दूसरों के जीवन का मूल्य समझो उनको अपनी जरूरत है हम अपने घर पर बैठे हुए कुछ कर नहीं रहे हैं तो गरीब बच्चों को पढ़ाना ही अच्छी बात है । तब रेशमा ने सोचा कि मैं वैसा ही करूंगी दोनों सहेलियां अपने घर चली गई ।



रेशमाने दूसरे दिन गरीब बच्चों को पढ़ाने का लिए शुरू किया और उसका मन लगने लगा वह खुश होने लगी । उसने पति ने कहा कौन सा चमकता हीरा तुम्हें मिल गया है तुम्हारे चेहरे पर तो कभी मैंने मुस्कुराहट भी नहीं देखी थी तुम तो बहुत मुस्कुरा रही हो पति भी खुश हो गया दोनों बच्चे भी खुश हो गए और उनसे बोला मुझे एक अच्छा वक्त बिताने का काम मिल गया है मैं गरीब बच्चों को पढ़ाती हूं और इतने बच्चे खुश होते हैं ।मुझे इनके साथ पता ही नहीं चलता कब समय हो जाता हो ।
रेशमाके पति ने कहा : मैंने कब मना किया था ।अच्छा किया कि तुमने काम शुरू कर लिया तुम पढ़ी लिखी हो ऐसा क्यों सोचती हो कि घर पर रहना चाहिए और भी कुछ काम हो तो दूसरा भी काम कर लो । सिर्फ तुम खुश रहो बस मैं वैसा ही चाहता हूं । यह दोनों बात करें तब देखा तो रेशमा के चेहरे की रौनक बढ़ गई थी और तब दोनों सहेलियों ने आकर पूछा अब तो तुम्हें कोई प्रॉब्लम नहीं है अबे कोई मुश्किल नहीं है '

रेशमा ने कहा तुम दोनों का आभार व्यक्त करती हूं जैसे कि तुमने आज मेरी अंदर की रोशनी को जगाया है और मैं खुश हूं । पता नहीं इन बच्चों में कौन सी जादुई झप्पी थी जो मुझे एक सुंदर रोशनी दे दी और अब मैं खुश होने लगी हूं । साथ में तीनों सखियां बैठे चाय पी रही थी और गप्पे मारने लगी ।रेशमा को खुश होने का एक जादुई चिराग भी मिल गया ।


आभा२

प्रजापति भानूबेन बी.