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कुएं का राज़

कुएं का राज़

तहेरानपुर गांव, जहां लोगों में बहोत संप था और सब हसी खुशी मिल झुलके रहते थे। गांव के बहार एक बड़ा चबूतरा था और वहां पास ही में एक कुवा था जहां से लोग पीने का पानी निकालने सुबह सुबह इकठ्ठे हुआ करते थे। पर जैसे दिन बीतता जाता वहां वाटेमार्गू और राहदारी के अलावा ज्यादा कोई आता नहीं था। कभी कभी शाम के वक्त वहां खेलते बच्चे या दोपहर के वक्त वहां से गुजरने वाला कोई पानी पीकर अपनी प्यास बुझा लेता। खेतों में पानी भी कभी कभी इस ही कुएं से लेजाया जाता था। गांव के पास और कुएं के थोड़ी दूर ही पर एक पुराना किला भी था पर अब वो बंद था और सरकार के कब्जे में था।

एक दिन कुएं के पास एक राहदार पानी पीने आया तो उसे किसी आत्मा ने अंदर खींच लिया। वहां से गुजरते किसी गांव के बंदे ने उसकी चीख सुनी तो वो वहां चला आया पर उसे कुएं में कुछ नहीं दिखा। उसने गांव में सरपंच को बुलाकर सबको बताया की उसकी नज़र के सामने क्या हुआ। पर किसीने उसकी बात का भरोसा नहीं किया क्योंकि कुएं में से उस इंसान को लाश नही मिली थी। पर सबको तब यकीन हो गया जब एक दिन गांव के बच्चे वहां खेल रहे थे और उनमें से एक बच्चे परेश ने वहां पानी की आवाज़ सुनी पर वहां कोई नहीं था तो वो पास जाकर देखने गया कि आसपास कोई दिख नहीं रहा तो पानी की आवाज़ कैसी? पर जैसे ही वो पास गया उस आत्मा ने परेश को कुएं में खीच लिया और बाकी सारे बच्चे वहां से भाग कर सीधा अपने अपने घर चले गए और जब सबके माता पिताने परेश के मां बाप को बताया तो उन्हों ने सरपंच को कहकर ख़ोज करवाई पर वहां से परेश की भी लाश नहीं मिले। उसके मां बाप और सब बहोत डर गए थे। उसके बाद लगातार तीन हादसे इसी तरह से हुए। अब वहां से सबने गुजरना बंद कर दिया था।

उस बात को पुरा एक महीना बीत चुका था। पर तब ही एक दिन गांव के ही एक बेटे सदानंद को कुछ दिमाग में आया और वो अपने एक दोस्त को लेकर उस कुएं के पास गया। उसका दोस्त डर गया की ये तो वही भूतिया कुआ हे हम यहां क्या करने आए है?

तब सदानंद ने कहा तु बस मेरी मदद करना। बाकी सब तुम्हे समझ आ जाएगा। जब मैं कुएं के अंदर देखूं तब तुम नीचे बैठकर मेरे पैर पकड़ लेना। उसके दोस्त ने हामी भरी। जैसे ही सदानंद कुएं के पास गया उस आत्मा ने उसे अंदर खींचा पर बाहर से उसके पैर उसके दोस्त ने पकड़े थे इसी लिए वो आत्मा का हाथ उसे अंदर नहीं ले पाया। सदानंद का दोस्त तो बहोत डर गया पर सदानंद समझ गया के ये कोई जाल है। वो दोनों कुएं में कूद गए और अंदर देखा एक हाथ वहां लटका हुआ था दोनों समझ गए के असल में कोई भूत है ही नहीं। क्योंकि वहां लटका हाथ वही था जो लोगों को कुएं में खीच लेता था। तब ही उनकी नज़र वहां एक दरवाज़े पर पड़ी। जो कुएं के पानी के भाग से थोड़ा ऊपर था। दोनों चढ़कर वहां गए तो देखा जितने लोग कुएं में गिर गए थे वो सब वही बंदी बनाए हुए थे। और अंदर एक सुरंग बनाई हुए थी। उनमें से एक ने पूछा, जनाब आपने पुरानी हवेली तक पहुंचने का यही रास्ता क्यूं ढूंढा? तो दूसरे ने जवाब दिया क्यूंकि, हवेली में जो जेवरात और सोना है वो अरबों का है। पर वो हवेली सरकार के कब्जे में है और वहां सीधे जाना खतरे से खाली नहीं। पर ये सुरंग सीधी हवेली के अंदर जाती है। और किसीको कानोकान भनक तक नहीं होगी। क्योंकि हमने हवेली के भूत का खौफ सबमें फैला जो रखा है।

दोनों समझ गए के यहां क्या चल रहा है। सीधे सरपंच के पास गए और उन्हें पुलिस के साथ कुएं के बारे में सब बताया और पुलिस ने वहां के सारे चोरों को गिरफ्तार कर लिया। और सुरंग को बंद करवा दिया। और उस कुएं का पानी फिर से पीने लायक हो गया और सब वहां फिर से बिना किसी डर के जाने लगे। क्योंकि जो दहशत फैली थी वो तो बस एक जूठ था जिस पर सच्चाई की हुकूमत चली और सच सबके सामने आ गया।

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