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एनालिस मिशेल की हॉरर स्टोरी


दुनिया के कई लोग भूत-पिशाच पर विश्वास करते हैं, तो कई लोग इसे महज वहम मानते हैं। मगर, ये ऐसी सच्ची कहानी है, जिसे सुनकर आपको भी आत्माओं पर यकीन होने लगेगा। यह कहानी इसलिए भी अहम है क्योंकि यह उस देश की कहानी है, जहां विज्ञान पर, तर्क पर विश्वास किया जाता है। जहां अंधविश्वास की कोई जगह नहीं है।

हाल ही में आई हॉरर फ़िल्म Annabelle को देख कई लोगों की रूह कांप गई थी। ब्राजील में तो एक महिला इस फ़िल्म का लेट नाइट शो देखने के बाद अपने आप को ही मारने लगी थी। दुनिया में कम ही ऐसी हॉरर फ़िल्में होती हैं, जो लोगों को इस हद तक प्रभावित कर पाती हैं लेकिन एनालिस मिशेल की ये कहानी Annabelle से भी डरावनी है

2005 में 23 साल की जर्मन लड़की की ज़िंदगी पर आधारित एक फ़िल्म आई थी – The Exorcism of Emily Rose. फ़िल्म डरावनी थी और इसने अच्छा खासा बिज़नेस भी किया था लेकिन क्या आप जानते हैं कि रियल लाइफ़ Emily (वास्तविक नाम ‘एनालिस मिशेल’) की कहानी फ़िल्मी लाइफ़ से कई गुना ज़्यादा भयानक थी?

कहानी है एनालिस मिशेल की। उनका जन्म जर्मनी के बवारिया शहर में 21 सितंबर 1952 को एक बेहद अनुशासित कैथोलिक परिवार में हुआ था। परिवार इसाई धर्म से ताल्लुक रखता था। वे लोग धर्म को लेकर बेहद कट्टर थे। वो ईश्वर को मानते और अपने धर्म का प्रचार करते। परिवार वालों को देखकर एनालिस ने भी यही सोचा था कि वह बड़े होकर अपने धर्म का प्रचार करेगी। मगर, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

Anneliese को स्कूल बहुत पसंद था और वो कई विषयों में बेहद होशियार थी। वो जब 16 साल की थी तो वो एक बार स्कूल में बेहोश होकर गिर गई थी। उसके दोस्तों के मुताबिक, Anneliese कुछ मिनटों के लिए Trance स्टेट में चली गई थी। दरअसल Anneliese के घरवालों के कट्टरपंथी रवैये की वजह से उसकी मानसिक स्थिति खराब रहने लगी थी।

जिस दिन वो बेहोश हुई थी, उस रात वो अपने शरीर में एक भारी फ़ीलिंग के साथ उठी थी। Anneliese ने अगले दिन उसने स्कूल न जाने का फ़ैसला किया। हालांकि कुछ दिनों के बाद सब कुछ सामान्य हो गया।

इस घटना के एक साल बाद ऐसी ही एक घटना हुई। Anneliese को डॉक्टर के पास ले जाया गया। हालांकि डॉक्टर के साथ-साथ एक न्यूरोलॉजिस्ट का भी कहना था कि Anneliese के साथ कुछ भी समस्या नहीं है।

अस्पताल में रहने के दौरान उसके साथ तीसरी बार ऐसा हुआ। ये शायद पहला मौका था जब Anneliese के साथ चीज़ें कुछ ज़्यादा ही भयानक हो रही थी। Anneliese का दावा था कि उसे रंग दिखाई दे रहे हैं, कई तरह की आवाज़ आ रही हैं और बेहद खुशी महसूस हो रही थी। इस दौरान उसका मिर्गी का इलाज किया गया और अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मानसिक हालात दुरुस्त न होने के बाद भी Anneliese ने स्कूल पास किया और कॉलेज के लिए कदम बढ़ा लिए।

लेकिन उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ रही थी। 1973 में Anneliese को प्रार्थना के दौरान Hallucinations होने लगे। उसे यकीन हो चला था कि कोई शैतान उसके शरीर में घुसा हुआ है। Anneliese बेहद बेबस हालातों में थी। डॉक्टर्स उसकी किसी तरह से मदद नहीं कर पा रहे थे।

बच्ची की तबीयत दिन ब दिन खराब होती जा रही थी। वह अजीबोगरीब हरकतें करती, कहा जाता है कि Anneliese के हालात इतने ज़्यादा बिगड़ चुके थे कि वो फ़्लोर से उठा कर अपना ही पेशाब पिया करती थी, कोयला और कीड़े खाने लगी थी और कई बार अपने कपड़ों को फ़ाड़ दिया करती थी। जिसे देखकर परिवार और परेशान हो गया. फिर उन्होंने ये समझ लिया कि उनकी बेटी को कोई बीमारी नहीं है। उसके अंदर किसी भूत-प्रेत का वास हो गया है। इसके बाद एनालिस के माता-पिता ने सोचा कि इसे चर्च में किसी पादरी को दिखाना चाहिए।

उससे पहले उन्होंने एस्ट्रो ओड नाम शख्स को घर बुलाया, जो उनकी जान पहचान का था। एस्ट्रो ने देखा कि एनालिस फर्श पर पड़ी हुई है। जैसे ही एनालिस ने एस्ट्रो को देखा, तो फर्श पर ही पेशाब कर दिया और उसे चाटने लगी। इसके बाद वह पास पड़े कोयले के टुकड़े को खाने लगी। इस दौरान एस्ट्रो ने नोट किया कि एनालिस के चेहरे पर एक अजीब सी हंसी है। वो न खुलकर हंसती है और न खुलकर रोती है। वह एक ही एक्सप्रेशन देती है, वो भी अजीब सी हल्की सी हंसी का। वह तुरंत समझ गया कि एनालिस के अंदर किसी शैतानी आत्मा का वास है।

एस्ट्रो ने एनालिस के माता-पिता को सलाह दी एनालिस का झाड़-फूंक (Exorcism) या तंत्र-मंत्र से इलाज करवाना चाहिए। एनालिस के माता-पिता ने एस्ट्रो की बात मान ली। इसके बाद दो पादरियों ने पहली बार एनालिस पर तंत्र-मंत्र की क्रिया की। पादरियों ने बताया कि एनालिस के अंदर एक दो नहीं, बल्कि 6 शैतानी आत्माओं का वास है। जैसे ही पहला झाड़-फूंक का काम किया गया। उसके बाद से ही वे 6 शैतानी आत्माएं गुस्सा हो गईं। एनालिस की हालत पहले से और भी ज्यादा खराब हो गई।

एनालिस की खराब हालत को देखते हुए दोनों पादरियों ने दोबारा झाड़-फूंक किया मगर, परेशानी ये थी कि एनालिस कभी एक जगह टिक कर नहीं बैठती थी। इससे झाड़-फूंक की क्रिया करने में दिक्कत हो रही थी। इसलिए उन्होंने एनालिस को मोटी-मोटी चेन से बांधना शुरू कर दिया, ताकि वह एक जगह टिक कर बैठी रहे।

कई बार झाड़-फूंक की क्रिया की गई मगर, एनालिस की हालत में जरा भी सुधार नहीं हो रहा था। दोनों पादरियों को इस दौरान एनालिस के शरीर में कब्जा कर चुकी आत्माओं के बारे में पता चल गया। दोनों पादरियों ने एनालिस के माता-पिता को बताया कि उनकी बेटी के अंदर छह लोगों की आत्माएं रह रही हैं उनके नाम हैं— नीरो (Nero) जो कि रोमन राज्य के जूडियन साम्राज्य का आखिरी शासक था। जूडस इस्कारिओट (Judas Iscariot) भगवान यीशू का शिष्य, जिसने महज 20 चांदी के सिक्कों के लिए उन्हें धोखा दिया था। केन (Cain) एडम और ईव का छोटा बेटा। हिटलर (Hitler) जर्मनी का सबसे बदनाम तानाशाह। वेलंटीन फलिशमैन (Valentin Fleischmann)- 16वीं शताब्दी का बदनाम पादरी, जिसे शराब पीने, हंगामा करने और हत्या करने के आरोप में रोमन साम्राज्य से बर्खास्त कर दिया गया था। लूसीफर (Lucifer) बुराई के प्रतीक के रूप में इसे जाना जाता है। इसे शैतानों का शैतान भी कहा जाता है।


बताया जाता है कि जब एनालिस पर झाड़-फूंक की क्रिया की जाती थी तो पादरियों को भी कई बार उन शैतानी आत्माओं से दो-चार होना पड़ता था। ये दोनों झाड़-फूंक की पूरी प्रक्रिया को अक्सर ऑडियो कैसेट में रिकॉर्ड भी करते थे। दोनों को शैतानी आत्माओं के नाम भी इसी तरह पता चला। ‌

दरअसल, जब वे एनालिस पर झाड़-फूंक कर रहे थे, तो उन्होंने उससे पूछा कि तुम्हारे अंदर किसकी आत्माएं हैं। एनालिस ने तब उन 6 लोगों के नाम लिए। एक ऑडियो में एनालिस की ये बात रिकॉर्ड भी हुई थी। इसमें उसकी आवाज भी बेहद डरावनी और भयानक सुनाई दे रही थी। ये ऑडियो यू-ट्यूब पर भी मौजूद है।

एनालिस के अंदर शैतानी ताकतें इतनी हावी हो चुकी थीं, कि वह अपने माता-पिता को भी उठाकर पटक देती। उन्हें नाखूनों से नोंच लेती थी। एक समय आया, जब कोई भी एनालिस के पास जाने ही हिम्मत नहीं दिखा पाता था। सब उससे डरने लगे थे।

यहां तक कि एनालिस खुद पर कई बार हमला कर लेती और घायल हो जाती। इसी बीच एनालिस की हालत में थोड़ा सुधार हुआ। मगर, ये खुशियां महज कुछ ही दिनों के लिए थीं। थोड़े समय बाद उसने खाना-पीना भी छोड़ दिया। उससे जब पादरी पूछते कि वो ऐसा क्यों कर रही है, तो एनालिस कहती कि उसके अंदर के शैतान उसे कुछ भी खाने-पीने नहीं देते।

धीरे-धीरे एनालिस कुपोषण का शिकार हो गई। उसकी हालत बहुत ज्यादा खराब हो गई थी। 30 जून 1976 के दिन उस पर अंतिम बार (67वीं बार) झाड़-फूंक की क्रिया की गई। इस दौरान एनालिस ने कहा कि वह अब थक चुकी है। अब उसे इस शरीर से छुटकारा पाना है बस! फिर 1 जुलाई 1976 की सुबह एनालिस की मौत हो गई। उस समय वह महज 23 साल की थी।

इसके बाद जब एनालिस का पोस्टमार्टम किया गया, तो पता चला कि उसकी मौत कुपोषण का शिकार होने की वजह से हुई है। फिर डॉक्टर्स ने उन दोनों पादरियों पर एनालिस के माता-पिता को गुमराह करने का आरोप लगाया। डॉक्टरों ने कहा कि समय रहते यदि एनालिस को मेडिकल ट्रीटमेंट दिया जाता, तो वह बच जाती।

पादरियों और Anneliese के परिवार का मानना था कि उसकी आत्मा को मुक्ति मिल चुकी है हालांकि इन दोनों पादरियों और Anna के माता-पिता को उसकी मौत का ज़िम्मेवार माना गया और इन सभी को जेल की हवा खानी पड़ी।











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