Banzaran - 11 in Hindi Thriller by Ritesh Kushwaha books and stories PDF | बंजारन - 11

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बंजारन - 11

रितिक और अमर आपस में बाते कर रहे थे और उधर वीरेंद्र अपने आदमियों से कहता है–" लाश को जीप में डाल दो।"

वीरेंद्र की बात सुन वाहा खड़े दो आदमी आगे आते है और लाश पर एक सफेद कपड़ा डालकर जीप में रखने लगते है। वे अभी लाश को जीप में रख पाते इससे पहले ही वहा पुलिस मे हॉर्न की आवाज सुनाई देती है। हॉर्न की आवाज सुन सब लोग आवाज की दिशा की ओर देखने लगते है। पुलिस की जीप से एक बहुत ही खूबसूरत लड़की निकलती है जिसने पुलिस की बर्दी पहनी हुई है और जिसके कॉलर पर थ्री स्टार चमक रहे थे। उसके पीछे पीछे ही एक मोटा आदमी और तीन पुलिसवाले और आ रहे थे।

वो लड़की आते से ही उस मोटे आदमी को ऑर्डर देती है–" " माखनलाल " , भीड़ को साइड करो।"

" जी पमैडम.." इतना कहकर माखनलाल भीड़ को साइड करने लगता है।

वो लड़की जिसे लोग इंस्पेक्टर प्रीत के नाम से जानते है वो वहा खड़े लोगो से कहती है–" मैने सुना है कल यहां किसी का मर्डर हुआ है, लाश कही दिखाई नही दे रही।"

प्रीत की बात सुन सब लोग एक दूसरे की को देखने लगते है। कोई कुछ नही कहता है। वीरेंद्र भी अपने आदमियों को इशारों इशारों में ही कुछ कहता है और वीरेंद्र का इशारा समझ, दोनो आदमी लाश को जमीन पर रख देते है।

ठाकुर साहब आगे आते है और कहते है–" अच्छा तो आप है अमरपुरा थाने की नई इंचार्ज, काफी नाम सुना है आपका। हमरा नाम " ठाकुर रणवीर सिंह " है और ही हम यहां के सरपंच है।"

प्रीत मुस्कुराते हुए कहते है–" तारीफ के लिए शुक्रिया।" इतना कहकर वो लाश के पास जाने लगती है। " इस जगह को सील कर दो।" इतना कहकर वो हाथ में ग्लव्स पहनती है और लाश को देखने लगती है। एक पुलिसवाला लाश की हर एंगल से फोटो क्लिक करने लगता है। लाश के पास मक्खियां भिनभिना रही थी। प्रीत बड़े गौर से उस लाश को देख रही थी। प्रीत माखनलाल से कहती है–" पता चला ये किसकी लाश है।"

माखनलाल कुछ कह पाता इससे पहले ही वीरेंद्र आगे आता है और कहता है–" ये मेरे बेटे की लाश।"

प्रीत वीरेंद्र कहती है–" ओह.. क्या आपको पता है ये किसका काम हो सकता है।"

इस पर मोहन आगे आता है और कहता है–" ये सब उस बंजारन ने किया है।"

प्रीत चिड़ते हुए मोहन से कहती है–" तुमसे किसने कहा बीच में दखल देने दो, जब तुमसे सवाल किए जाए तब जवाब देना।"

इतना कहकर वो वीरेंद्र की ओर देखने लगती है।

वीरेंद्र कहता है–" पता नही किसने मारा है मेरे बच्चे को।"

वीरेंद्र की बात सुनकर प्रीत लाश की ओर देखती है और कहती है–" इसके जख्म देखकर तो यही लगता है, या तो इसे किसी जंगली जानवर ने मारा है या फिर किसी ने इसका मर्डर किया है।"

इतना कहकर वो माखनलाल से कहती है–" जरा आस पास छानबीन करो, हो सकता है कातिल कोई सुराग छोड़ गया हो।"

" जी मैडम " इतना कहकर माखनलाल आस पास छानबीन करने लगता है। प्रीत खड़ी होती है और मोहन से कहती है–" ए सुनो, तुम इधर आओ.."

" कौन मै.." मोहन हकलाते हुए कहता है और प्रीत के सामने जाकर खड़ा हो जाता है।

प्रीत मोहन से कहती है–" तुम किसी बंजारन का नाम ले रहे थे।"

मोहन कहता है–" हा मैडम, वो बंजारन एक डायन है जो हर अमावस और पूर्णिमा की रात लोगो को अपना शिकार बनाती है और फिर उनका खून पी जाती है, तभी तो देखिए ना, इस मनोज की लाश एकदम सफेद है, इसमें एक बूंद भी खून नही बचा है।"

मोहन की बात सुन प्रीत चिड़ते हुए उससे कहती है–" ये तुम क्या बकवास कर रहे हो, भला आज के जमाने में भी ये सब चीज़े होती है भला।"

मोहन कहता है–" मैं झूट नही बोल रहा, आप चाहे तो गांव वालो से पूछ सकती है।"

" बस बस.." प्रीत हाथ के इशारे से मोहन को रोकती है और फिर माखनलाल से पूछती है–" कुछ मिला क्या यहां?"

माखनलाल जवाब देते हुए कहता है–" नही मैडम, कातिल ने एक भी सुराग नहीं छोड़ा है।"

माखनलाल की बात सुन प्रीत कुछ देर सोचती है और फिर उसकी नजर कब्र की ओर जाती है।

प्रीत हैरानी के साथ माखनलाल से कहती है–" माखनलाल ये कब्र किसकी है?"

माखनलाल कहता है–" वो मैडम ये मनोज की लाश इसी कब्र के अंदर से बरामद हुई है।"

" अच्छा.." इतना कहकर प्रीत कब्र के पास जाती है और आस पास देखने लगती है।

प्रीत माखनलाल से कहती है–" जरूर उस कातिल ने ही मनोज की लाश को यहां दफनाया होगा। इसका मतलब तो यही है कि कातिल एक नही एक से ज्यादा लोग है, क्योंकि जुर्म को अंजाम देना और लाश को दफनाना एक आदमी के बस की बात नही है। माखनलाल.. इस कब्रे में चैक करो, शायद कोई सुराग हाथ लग जाए।"

प्रीत की बात सुन माखनलाल तुरंत कब्र में कूद जाता है और छानबीन करने लगता है। इधर रितिक और उसके दोस्तो के पसीने छूट रहे थे। ठाकुर साहब की भी हालत कुछ ऐसी ही थी।

अमर घबराते हुए रितिक से कहता है–" अगर इन्हे पता चला कि ये कब्र हमने खोदी है तो सारा शक हम पर ही जाएगा।"

रितिक अमर को समझाते हुए कहता है–" तू चिंता मत कर, जब हमने कुछ किया ही नहीं है तो किस बात का डरना।"

अमर कहता है–" कल रात तेरी उस मनोज के साथ हाथा पाई हुई थी, मुझे डर है कही सारा दोष हम पर ना आ जाए।"

प्रीत आस पास छानबीन कर ही रही थी कि तभी एक पुलिस वाला उसके पास आता है और कहता है–" मैडम.. गांव वालो से पता चला है कि ये कब्र परसो रात खोदी गई है और साथ ही में इस कब्र के ऊपर सात कंकाली खोपड़ियां और टोने टोटके वाले सामान भी मिले है।"

उस पुलिसवाले की बात सुन प्रीत और भी ज्यादा हैरान हो जाती है और हैरानी के साथ कहती है–" क्या... लेकिन है कैसे पॉसिबल है, मर्डर तो कल रात हुआ है।"

प्रीत कुछ देर सोचती है और फिर कहती है–" कही ऐसा तो नहीं है, ये सब एक सोची समझी साजिश थी मनोज का मर्डर करने की। क्या किसी ने देखा था कब्र को खोदते हुए?"

" नही मैडम, गांव वालो का कहना है, ये कब्र रात के बख्त खोदी गई है और किसी को नही पता, किसने इस कब्र को खोदा है।"

पुलिस वाले की बात सुन प्रीत वीरेंद्र के लास जाती है और कहती है–" कल रात मनोज कहा गया था?"

वीरेंद्र कहता है–" पता नही, वो घर से बिना बताए ही निकल गया था।"

" क्या आपको किसी पर शक है, या फिर किसी से कोई दुश्मनी।"

इस कर वीरेंद्र एक पल ठाकुर साहब की ओर देखता है और लिए प्रीत से कहता है–" जी नहीं..."

" मैने सुना है, आपकी और अमरपुरा गांव के सरपंच की कोई खानदानी दुश्मनी है, क्या आपको नहीं लगता ये काम उनका भी हो सकता है?"

" जी नहीं, ये काम रणवीर सिंह का नही है, अगर उसने मेरे बेटे को मारा होता तो अब तक वो यहां जिंदा नही खड़ा होता।"

तभी वीरेंद्र को कुछ याद आता है और वो कहता है–" हा एक बात और , कल रात मेरे बेटे ने किसी लड़की के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की थी। मुझे शक है कि उसी लड़की के परिवार वालों ने ही मेरे बेटे को मारा है।"

ये सुनकर तो प्रीत चौक जाती और गुस्से के साथ कहती है–" फिर तो इसका यही हाल होना था, किसी स्त्री के सम्मान को ठेस पहुंचना कायरता की निशानी होती है, खैर मुजरिम ने कानून को अपने हाथ में लिया है, इसकी सजा तो उसे जरूर मिलेगी।"

प्रीत की बात सुनकर वीरेंद्र को गुस्सा आ जाता है लेकिन उसकी हिम्मत नही थी कि प्रीत को कुछ कह सके।

वीरेंद्र के बाद प्रीत ठाकुर साहब के पास जाती है और उससे कहती है–" आप तो यहां के सरपंच है, आपके होते हुए यहां एक मर्डर हो गया और आपको भनक तक नहीं लगी।"

ठाकुर साहब जवाब देते हुए कहते है–" हमारे पास देखने को और भी काम है, ये तो उन्हे सोचना चाहिए जो बिना हमारी इजाजत के हमारे गांव में घुसकर, हमारे ही गांव की इज्जत से खिलवाड़ करे।"

प्रीत कहती है–" मनोज ने कल रात, आपके गांव की किसी लड़की के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की है, क्या मैं जान सकती हूं वो लड़की कौन है?"

प्रीत का सवाल सुन ठाकुर साहब का चहरा शर्म से लाल हो जाता है। वो चुप चाप खड़े रहते है, पलटकर कुछ नही कहते है।

ठाकर साहब को चुप चाप खड़ा देख प्रीत दोबारा उनसे पूछती है–" क्या हुआ आप चुप क्यूं हो गए?"

ठाकुर साहब जवाब देते हुए कहते है–" ये किसी लड़की की इज्जत का सवाल है, मैं यहां खुले में नही बता सकता। आप चाहे तो मेरी हवेली में आकर पूछ सकती है।"

प्रीत को ठाकर साहब की परेशानी समझ आ जाती है और ये भी कि किसी लड़की की इज्जत उसके लिए क्या मायने रखती हैं। आखिरकार वो भी एक लड़की है और एक लड़की होते हुए वो दूसरी किसी लड़की के साथ अन्न्याय होते हुए कैसे देख सकती है?

उसके बाद प्रीत मखानला से कहती है–" माखनलाल बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दो, मुझे ठाकुर साहब से कुछ सवालों के जवाब जानने है, इसीलिए मैं बाद में आती हूं।"

माखनलाल सर हिलाते हुए कहता है–" जी मैडम.." इतना कहकर माखनलाल अपने काम पर लग जाता है। इधर प्रीत भी ठाकुर साहब के साथ हवेली की ओर जाने लगती है। एक एक कर वहा खड़े लोग भी अपने अपने घर की ओर चले जाते हैं। रितिक और उसके दोस्त भी प्रीत के पीछे पीछे हवेली की ओर जाने लगते है। वे चारो घबराए हुए थे, आखिर गहबराए भी क्यों ना, ये सारा किस्सा उन लोगो से जो जुड़ा था। अगर प्रीत को जरा सा भी उन पर शक होता है तो पूरा किस्सा सामने आ जाएगा और ये उन चारो के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं होगा। वे लोग तो बिना किसी जुर्म के ही जेल को हवा खा रहे होंगे।

बात करते करते कुछ ही देर में वे लोग हवेली पहुंच जाते है। ठाकर साहब प्रीत को लेकर हॉल में ले आते है। हॉल में पहुंचकर ठाकुर साहब शालिनी को आवाज लगाते है। अपने पापा की आवाज सुन शालिनी और चांदनी तुरंत वहा आ जाती है और जब उन दोनो की नजर प्रीत पर पड़ती है तो वो दोनों ही काफी ज्यादा हैरान हो जाती है। इधर प्रीत की नजर जब उन दोनो पर पड़ती है तो उसके चहरे के एक्सप्रेशन ही बदल जाते है। उसके चहरे पर शक वाले एक्सप्रेशन की जगह एक मुस्कान ने ले ली थी।

शालिनी आते से ही ठाकुर साहब से कहती है–" जी पापा, आपने मुझे बुलाया।"

ठाकुर साहब शालिनी से कहते है–" हा, इनसे मिलो, इनका नाम इंस्पेक्टर प्रीत है और ये अमरपुरा थाने की नई इंचार्ज है, ये बहुत होनहार और ईमानदार है।"

ठाकुर साहब अपनी बात खत्म कर पाते इससे पहले ही प्रीत चांदनी के पास जाती है और खुश होते हुए कहती है–" अरे चांदनी, तुम यहां..."

इतना कहकर वो चांदनी को गले से लगा लेती है और प्रीत की इस हरकत देख तो वहा खड़े सभी लोग शौक हो जाते है। चांदनी मुस्कुराते हुए कहती है–" मैं ठीक हूं प्रीत दीदी, आप बताइए, आप कैसी है?"

प्रीत कहती है–" तुम मेरी छोड़ो और ये बताओ, तुम यहां क्या कर रही हो?"

" वो में.." चांदनी कुछ कहना चाहती है लेकिन चुप हो जाती है। प्रीत चांदनी की हिचक समझ जाती है और वो बात को बदलते हुए कहती है–" अच्छा हुआ तुम मुझे यहां मिल गई, मेरा कल ही यहां ट्रांसफर हुआ है।"

" अच्छा फिर तो आप कुछ सालो तक यही रहेंगी।"

चांदनी प्रीत से पूछती है, इस कर प्रीत चांदनी के गाल खींचते हुए कहती है–" हा मेरी प्यारी डॉल।"

इन दोनो का बहनों वाला प्यार देख तो रितिक को सोसाइड करने का मन कर रहा था। एक परेशानी कम थी जो अब ये भी आ गई है। अगर प्रीत को पता चला कि रितिक उसकी छोटी बहन से प्यार करता है तो प्रीत तो उसे कच्चा ही चबा जाएगी। इधर अमर करन और रोमियो की तो हसी ही कंट्रोल नही हो रही थी। कुछ पल पहले जहा सब लोगो के मन में घबराहट हो रही थी तो वही अब वे लोग रितिक पर हस रहे थे।