Prem Ratan Dhan Payo - 23 in Hindi Fiction Stories by Anjali Jha books and stories PDF | Prem Ratan Dhan Payo - 23

Featured Books
Share

Prem Ratan Dhan Payo - 23





जानकी हल्की मुस्कुराहट के साथ बोली " हमारा नाम जानकी झा हैं । वैसे तो हमारे दोस्त और करीबी लोग ही हमें इस नाम से पुकारते हैं । आप हमे जानू कह सकते हैं , हमे कोई एतराज़ नहीं । " जानकी के ये कहते ही राज के होंठों पर मुस्कुराहट तैर गई । दो लोग थे जिन्हें इस बात से जलन हो रही थी । पहला राघव जिसे इस फीलिंग का एहसास ही नही था और दूसरी हमारी परी । अब उसकी जानू पर कोई और हक जमाएगा तो वो गुस्सा नही होगी क्या ? ऐसा लग रहा था मानो राज उसकी प्यारी सी डोल छीन रहा है ।

राघव अपना नाश्ता खत्म कर आफिस के लिए निकल गया । जानकी परी को लेकर स्कूल के लिए निकल ही रही थी की तभी राज बोला " जानू मैं भी आपके साथ चलूगा । " जानकी ने हां में अपना सिर हिला दिया । राज परी को गोद में लेते हुए बोला " ओ हल्लो मैडम क्यों सबका बोझ बढाती रहती है । अब तो अपने पैरों का इस्तेमाल करो । जब देखो तब गोद में घूमना हैं । " परी गुस्से से राज को घूरने लगी । राज ने उसके गालों पर किस किया और प्यारी सी स्माइल पास की । परी ने अभी भी मूंह फुला रखा था । परी को स्कूल ड्राप करने के बाद राज और जानकी हवेली के लिए निकल गए । राज का नेचर काफी मिलनसार था । कुछ ही घंटे तो बीते थे जानकी के साथ लेकिन उन्हें देख ऐसा लग रहा था जैसे मानों पुरानी दोस्ती हो । राज इस वक्त गाडी ड्राइव कर रहा था । जानकी उसकी ओर देखकर बोली " राज आप हमारा एक काम करेंगे । "

" हां कहिए न क्या करना मुझे ? " राज ने कहा ।

" यहां धोडी ही दूरी पर हॉस्पिटल हैं । क्या आप वहां गाडी रोकेंगे ।‌‌ "

" हॉस्पिटल ..... लेकिन आपको वहां क्यों जाना हैं ? क्या कोई प्रोब्लम है । " राज ने पूछा तो जानकी बोली " नही हमे कोई प्रोब्लम नहीं है । वो दर असल दो दिन पहले हमने एक घायल आदमी को हॉस्पिटल पहुंचाया था , बस उसी के बारे में हम जानना चाहते हैं । वो ठीक है या नही । "

राज गाडी राइट टर्न करते हुए बोला " ऑल राइट हम पहले वही चलते हैं । "

__________

दोपहर का वक्त , राघव का कैबिन




राघव इस वक्त अपने कैबिन में बैठा लैपटॉप पर काम कर रहा था । कैबिन के डोर को किसी ने नॉक किया तो राघव ने अंदर आने के लिए कहा ‌‌। दीपक अंदर आते हुए बोला " सर आपको एक जरूरी बात बतानी थी । जिस लडकी ने प्रणय को हॉस्पिटल में एडमिट करवाया था उसकी तस्वीर मिल चुकी हैं । हॉस्पिटल के सी सी टी वी फुटेज से हमे वो तस्वीर मिली है और सर वो ..... दीपक कहते कहते रूक गया ।

" तुम रूक क्यों गए और वो तस्वीर कहां है ? " राघव ने कहा ।

दीपक के चेहरे पसीने से भर गया था । चिंता की लकीरें माथे पर साफ पता चल रही थी । उसने डरते हुए अपने साथ लाया लिफाफा राघव की ओर बढा दिया । राघव ने उसके हाथों से लिफाफा और तस्वीरें देखी । राघव का चेहरा उन तस्वीरों को देखकर गुस्से से भर गया ‌‌।

दीपक तस्वीर वाली लडकी को नही जानता था , लेकिन उसके साथ संध्या को देखकर वो हैरान था । अब राघव का गुस्सा किसपर कैसे बरसेगा ये तो राम जी ही जानते थे । राघव ने तस्वीर वही टेबल पर रखी और बिना दीपक की ओर देखे कहा " यू में गो नाउ ‌‌। "

दीपक को ये बात सुनकर थोडी हैरानी हुई । क्यूं राघव ने उसे उस तस्वीर वाली लडकी का पता लगाने के लिए नही कहा ? क्यों राघव ने उससे ये नही पूछा की उस लडकी के साथ संध्या क्या कर रही थी ? दीपक ये सब सोच ही रहा था की तभी उसे राघव की आवाज आई " क्या तुम्हें सुनाई नही दिया मैंने क्या कहा ? "

" येस सर " ये बोल दीपक वहां से चला गया । उसके जाने के कुछ देर बाद राघव ने दोबारा वो तस्वीर देखी । जानकी और संध्या दोनों ही उस तस्वीर में नज़र आ रही थी । राघव उसे देखते हुए बोला " तुम्हें ऐसा नही करना चाहिए था ? मेरे रास्ते में जो भी आया हैं मैंने उसे साफ़ कर दिया । तुम्हें समझाना बहुत जरूरी हैं । '

इधर दूसरी तरफ राज और जानकी हॉस्पिटल पहुच चुके थे । रिसेप्शनिस्ट से पूछने पर जानकी को कोई सही इन्फोर्मेशन नही मिली ‌‌। न तो उसे पेंशट का नाम पता था और न ही डाक्टर का । जानकी परेशान होकर इधर उधर नजरें दौडाने लगी । राज उसके कंधे पर हाथ रखकर क्या ? " जानू आप इतनी परेशान क्यों हो रही हैं ? हो सकता है उस पेशेंट के घरवाले उसे दूसरी जगह ले गए हो ? " राज ये कह ही रहा था की तभी जानकी की नज़र उस डाक्टर पर पडी जिसने कल प्रणय का ऑपरेशन किया था । जानकी भागते हुए उनके पास पहुंची और उनका रास्ता रोककर बोली " डाक्टर मुझे आपसे कुछ पूछना हैं । " राज भी जानकी के पास चला आया था ।

डाक्टर जो की अपने कलीग से बात करते हुए चल रहे थे इस तरह अचानक किसी लडकी के सामने आने पर रूक गए । उन्होंने एक जानकी को देखकर कहा " Who are you ? "

" डाक्टर आपको याद होगा दो दिन पहले एक पेंशट आया था जिसके दोनों पैरों में गोली लगी थी ।‌ मैं उसे हॉस्पिटल लेकर आई थी । आपको शायद याद हो ? " जानकी ने कहा तो डाक्टर कुछ सोचते हुए बोला " जहां तक मुझे याद हैं ऐसा केस आया था परसों । "

" मैं उसी के बारे में आपसे पूछना चाहती हूं । अब उनकी कंडीशन कैसी हैं ? " जानकी ने आशा भरी नजरों से पूछा हालांकि डाक्टर के जवाब से उसे थोडा डर भी लग रहा था ।

डाक्टर अपना चश्मा उतारते हुए बोले " सॉरी बट हम उन्हें बचा नही पाए । उन्हें लाने में आपने काफी देर कर दी । जहर पूरी बॉडी में फैल चुका था । आपरेशन के बीच में ही उनकी सांसें थम गयी । "

डाक्टर का जवाब सुनकर जानकी को धक्का लगा लेकिन उसने खुद को संभाल लिया । जिंदगी बचाने वाला इंसान किसी की मौत की खबर इतनी आसानी से सहन नही कर पाता । जानकी खुद एक डाक्टर थी इसलिए उसने किसी आम इंसान की तरह रियेक्ट नही किया लेकिन दूसरे डाक्टरस के मुकाबले काफी भावुक भी थी । डाक्टर अपनी बात खत्म कर वहां से जा चुके थे । राज जानकी से बोला " आप परेशान मत होइए जानू । आपने तो अपनी तरफ से पूरी कोशिश की , अब अगर उसकी किस्मत में सिर्फ इतनी सांसें लिखी थी तो कोई क्या कर सकता हैं ? "

" नही राज उसकी सांसें ईश्वर ने नही एक शैतान ने छीनी हैं जो इंसान का रूप लेकर हमारे बीच रहता हैं । उसके दोनों पैरों में गोली लगी थी और वो बुरी तरह से जख्मी था । कोई कैसे इतना बेरहम बन सकता है । ' जानकी के सवाल का राज के पास कोई जवाब नही था और न ही उसे समझ आ रहा था जानकी को कैसे संभाले । कुछ देर बाद दोनों हॉस्पिटल से बाहर निकल आए । गाडी जैसे ही हवेली के आगे रूकी जानकी बिना किसी से कुछ बोले अंदर चली आई । संध्या की नज़र जानकी पर पडी जो भागती हुई सीढ़ियां चढ रही थी ।

" इसे क्या हो गया ? बहुत परेशान लग रही हैं । ' ये सब खुद से बोल संध्या उसके कमरे की ओर बढ गयी । वो जब अंदर आई तो देखा जानकी खिडकी के पास खडी बाहर की ओर देख रही थी । संध्या अंदर आते हुए बोली " जानू क्या बात हैं तूं कुछ परेशान सी लग रही हैं ? "

संध्या की आवाज सुन जानकी उसकी ओर पलटी । इस वक्त उसका चेहरा काफी उदास था । संध्या उसके पास चली आई । जानकी ने संध्या का हाथ अपने हाथों में लेकर कहा " मैं आज हॉस्पिटल गयी थी संध्या उस आदमी के बारे मे पता करने । वो बच नही पाया । "

जानकी के हॉस्पिटल जाने की बात सुनकर संध्या को बहुत गुस्सा आया । वो उससे अपना हाथ छुड़ाकर बोली " मैंने मना किया था न तुझे। कहा था न इन सबसे दूर रह । फिर तूं क्यों गयी हॉस्पिटल ? हम उसे जानते तक नही कोई रिश्ता नही हमारा फिर भी तूं इंसान के लिए इतनी फिक्रमंद हो रही हैं । "

" संध्या रिश्ता तो डाक्टर और मरीज के बीच भी नही होता फिर भी डाक्टर उसका इलाज करता हैं । मेरे अंदर भी वही भावनाए हैं । जानती हैं मैं बच्चों की डाक्टर क्यों बनना चाहती थी ताकी उनकी मुस्कुराहट देखकर मैं मुसकुराऊ । मेरी कोशिश यही रहती थी की जिसका भी इलाज करू वो ठीक होकर घर वापस जाए , लेकिन आज फहली बार मैं एक जिंदगी नही बचा पाई । बहुत बुरा लग रहा हैं मुझे । खुद पर बहुत गुस्सा आ रहा हैं ..... जानकी ये कहते कहते चुप हो गयी तभी उसे कुछ ध्यान आया तो वो फिर से बोली " संध्या ये सरकार कौन हैं ? याद हैं जब हम लोग उस घायल आदमी को ऑटो में बिठा रहे थे तो काफी लोगों के मूंह से सरकार शब्द सुना मैंने । कौन हैं वो ? "

संध्या की आंखें बडी हो गयी । दिल की धड़कनें भी बढ चुकी थी । उसकी कोशिश यही थी की जानकी को सरकार के बारे मूड कुछ न पता चले । राघव का क्रोधित रूप जानकी के बर्दाश्त से बाहर होगा । शायद इस वजह से वो ये घर भी छोड़कर जा सकती हैं । संध्या ने खुद को नोर्मल किया और बात संभालते ही बोली " मुझे नही पता और तू भी ये फालतु बाते सोचना बंद कर । जाकर चेंज कर ले एक घंटे बाद परी को स्कूल से भी लाना है । " ये बोल संध्या कमरे से बाहर चली गई । जानकी अभी भी सरकार के बारे में सोच रही थी आखिर ये हैं कौन ?

___________

दोपहर का वक्त , रागिनी का क्लास रूम




प्रोफेसर तो अपने लेक्चर में बिजी थीं । कोई ध्यान से पढ़ रहा था तो कोई बार बार अपनी घडी देख रहा था । कब ये प्रोफेसर जाए और बोरिंग लेक्चर से उनकी जान छूटे । दिशा का पूरा ध्यान लेक्चर पर था लेकिन उसके पीछे दो बैंच छोड़कर राकेश बैठा था । उसका ध्यान सिर्फ दिशा पर था । उसने एक चिट बनाई ओर अपने आगे बैठे लडके को पास करने के लिए कहा । लडके ने चिट दिशा तक पहुंचा दी । दिशा ने एक नज़र पीछे देखा तो राकेश ने उसे चिट खोलने का इशारा किया । दिशा ने चिट खोलकर पढा ' इसका अगला वाला लेक्चर खाली हैं । मेरे साथ फिल्म देखने चलोगी चोरी चोरी चुपके चुपके ..... ' दिशा को ये लाइन पढ़कर हंसी आ गयी लेकिन अपना रिएक्शन चेहरे पल बिल्कुल नही आने दिया । उसने चिट फोल्ड कर अपनी किताब में रख लिया । न तो पीछे मुड़कर देखा और न ही कोई जवाब दिया । राकेश तो इसी का वेट कर रहा था । वो अपने सिर पर हाथ रख मन में बोला " न तो इनकार हैं और न ही इनकार हैं । शब्द न सही इशारे से ही बता दो । " कुछ ही देर बाद लेक्चर खत्म हुआ और प्रोफेसर बाहर चले गए । बाकी स्टूडेंट्स भी एक एक कर जाने लगे । दिशा अपनक सामान समेटने में लगी थी । वो निकलने को हुई तो राकेश ने आगे बढ़कर उसकी कलाई पकड ली । कुछ बच्चे अभी भी क्लास रूम में ले जो की निकल ही रहे थे । दिशा ने राकेश को आगे दिखाई और हाथ छोडने का इशारा किया , लेकिन राकेश ने उसका हाथ नही छोडा । सारे बच्चों के जाने के बाद ही राकेश ने उसकी कलाई छोडी ।

" ये क्या बदतमीजी थी राकेश , सब कैसी कैसी बाते बनाएंगे मेरे बारे में । ' ये बोल दिशा जाने के लिए आगे बढ गयी ।

***********

जानकी सरकार के बारे में जानना चाहती हैं । क्या होगा जब जानकी को पता चलेगा वो सरकार कोई और नही राघव ही हैं । राघव जानकी के बारे में जान चुका है ‌‌। अब आगे क्या होगा ? क्या करेगा वो जानकी के साथ जानने के लिए अगला अध्याय जरूर पढे

प्रेम रत्न धन पायो

( अंजलि झा )


**********