Prem Ratan Dhan Payo - 28 in Hindi Fiction Stories by Anjali Jha books and stories PDF | Prem Ratan Dhan Payo - 28

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Prem Ratan Dhan Payo - 28






राज के मूंह से जानू शब्द सुनकर अमित की खांसी शुरू हो गयी । राज ने तुरंत उसकी ओर पानी का गिलास बढाया । अमित ने पानी पिया और गिलास नीचे रखते हुए बोला " तुमने जानकी को जानू क्यों कहा ? "

" क्योंकि मैं उनका दोस्त हूं और उनके दोस्तों को उनका पेट नेम लेने की इजाजत हैं । ' राज ने तुरंत जवाब दिया ।

" वो तुमसे बडी हैं इसलिए तुम्हें उसका पेट नेम नही लेना चाहिए । " अमित के ये कहने पर राज बच्चों की तरह मूंह बनाकर बोला " अच्छा जी मैं छोटा हूं इसलिए उन्हें जानू कहकर नही बुला सकता और वो जो चुहिया हैं इतनी सी, वो उन्हें जानू कह सकती हैं । " राज ने परी की ओर उगली करके कहा ।

" अपने लिए चुहिया शब्द सुनकर परी गुस्से से उसे घूरने लगी । वो जानकी के गले में अपनी बाहें डालकर बोली " जानू इनको खाना मत दो । इन्होंने मुझे चुहिया कहा । "

" कोई बात नही वैसे भी चुहिया बहुत प्यारी होती है । इसमें नाराज होने वाली कोई बात नहीं है । " जानकी के ये कहने पर परी अपनी बडी बडी पलके झपकाते हुए बोली " सच्ची "

" मुच्ची " जानकी ने प्यार से उसके नाक को खींचते हुए कहा ।

अमित जानकी से बोला " जानकी मैं राज की ओर से सॉरी कहता हूं । वो आइंदा से तुम्हें जानू नही कहेगा । "

" आपको इसके लिए सॉरी कहने की जरूरत नहीं है । हमे बिल्कुल भी बुरा नही लगता । हमारे सब दोस्त बचपन से इस नाम से पुकारते हैं और अब तो राज ने भी हमसे दोस्ती कर ली । " जानकी ने विनम्रता से जवाब दिया । संध्या सबको खाना परोस रही थी । राघव सबकी बाते सुन रहा था , लेकिन उसने कुछ नहीं कहा । परी की प्लेट में रखा नाश्ता देखकर राज ने पूछा " ये क्या हैं ? "

इससे पहले जानकी कुछ कहती संध्या ने कहा " ये ब्रेड पीजा हैं , जानकी ने बनाया है । "

" क्या मुझे एक मिलेगा ? ' राज ने कहा ।

" हां क्यों नही ? " जानकी ने ये कहते हुए संध्या को देने का इशारा किया । संध्या ने राज की प्लेट में रखा । राज एक बाइट ख़ाकर बोला " सीरियसली ये आपने बनाया हैं । इट्स रियली अमेजिंग । " जानकी उसकी बातों पर मुस्कुरा दी । राज ने अमित की ओर देखा जो अजीब नज़रों से उसे ही देख रहा था ।

राज उसे देखते ही बोला " बडे भैया मुझे एसे मत देखिए । आपको चाहिए तो आप भी ले लीजिए । संध्या जी एक इन्हें भी दे दीजिए । " संध्या ने अमित की प्लेट में ब्रेड पिज्जा रखा तो करूणा बोली " ये सचमुच इतना टेस्टी हैं फिर तो संध्या हमे भी एक दीजिए । "

" हां क्यों नही भाभी " संध्या ने करूणा की प्लेट में रखा । अब सबके बीच वो राघव को कैसे छोड सकती थी । उसने राघव से पूछा तो उसने इनकार कर दिया । अमित खाते हुए बोला " मानना पडेगा ये वाकई लाजवाब है । "

" हां जानकी हमे नही पता था आपके हाथों में इतना टेस्ट हैं । " करूणा ने कहा तो संध्या बोली " ये तो कुछ भी नही भाभी हमारी जानू और भी तरह तरह की चीजे बनाती हैं । उसे हर तरह का इंडियन फुड बनाना आता हैं । बाकी फार्सट फुड भी वो घर पर अच्छा बनाती हैं । "

सब लोग जानकी की तारीफ कर रहे थे । वही राघव अब उसके खाने को इंकार कर पछता रहा था । संध्या को तारीफें करते देख जानकी बोली " ऐसा कुछ नहीं है भाभी मां हम बस ठीक ठाक बना लेते हैं । जो भी सीखा वो पापा से सीखा हैं । हमारे पापा हमसे भी ज्यादा अच्छा खाना बनाते थे । "

" बनाते थे से आपका क्या मतलब है ? अब क्यों नहीं बनाते वो ? " राज ने खाते हुए पूछा । जानकी एक पल के लिए चुप हो गयी । करूणा और संध्या दोनों उसकी ओर देखने लगे ।

" अब नही बनाते क्योंकि वो इस दुनिया में नही हैं ।" जानकी ने सिर झुकाए धीरे से ये बात कही । राघव के खाते हुए हाथ एक पल के लिए रूक गए और वो जानकी की ओर देखने लगा ।

अमित गुस्से से राज को ही देख रहा था । वही राज भी गिल्ट फील कर रहा था कि उसने ये सवाल क्यों पूछा ? अमित जानकी से बोला " मैं इसकी तरफ से सॉरी कहता हूं जानकी ? हमे सच में नही पता था इस बारे में । "

" नही आपको सॉरी कहने कि जरूरत नहीं हैं । " जानकी ने कहा ।

" आज सब सॉरी वाला गेम खेल रहे है । मुझे भी खेलना है । " परी ने बीच में कहा तो सबको हंसी आ गई । परी राघव से बोली " चाचू आज तो संडे हैं । हम बाहर घूमने चलेंगे । "

" चलो कभी कभी ये सही बात करती हैं । क्यों न हम सब शॉपिंग पर चले । " राज ने कहा ।

राघव परी को देखते हुए बोला " आपको बाहर चलना तो ठीक हैं । पहले नाश्ता कर लो फिर चलेंगे । "

" भयी आप जाइए हमे कुछ काम हैं । " करूणा ये बोल वहां से उठकर चली गई ।

राज जानकी से बोला " जानू आप भी जाकर तैयार हो जाइए । "

" हमे भी जाना होगा । " जानकी ने पूछा तो राज बोला " अफकोर्स वरना इस मुसीबत को संभालेगा कौन । " ये बोल राज ने परी की और देखा , तो वो उसे मुंह फुलाए गुस्से से देख रही थी । परी को नाश्ता करवाने के बाद जानकी तैयार होने के लिए चली गई । राज ने संध्या से भी जाने के लिए कहा लेकिन उसने इनकार कर दिया । इस वक्त राज , अमित और राघव बाहर गाडी के पास खडे थे । परी गाडी की बोनट पर बैठी हुई थी और राज के दोनों गाल पकड़कर खींच रही थी । राघव और अमित आपस में बातें कर रहे थे । इसी बीच परी की नज़र जानकी पर पडी , तो वो राज के गालों को छोड मुस्कुराते हुए बोली " जानू .......

परी की आवाज सुनकर सबने पहले परी की ओर देखा और फिर उस ओर देखा जहां परी देख रही थी । जानकी ने लाइट पिंक कलर का चूड़ीदार सलवार सूट पहना हुआ था । सारे बाल खुले थे जिसे उसने कंधे के एक ओर टिका रखा था । बिना मेकअप के भी वो बहुत प्यारी लग रही थी । बस कानो में झुमके और होंठों पर हल्की गुलाबी रंग की लिपस्टिक थी । राघव की पलके एक पल के लिए भी नही झपकी । अमित की नज़र राघव पर गयी तो उसे थोडा अचरज लगा । परी ने हाथों के इशारे से जानकी को अपने पास बुलाया । जानकी उसके पास आई तो परी ने उसके गालों पर किस कर दिया । " यू आर सो ब्यूटीफुल । "

' you are also very beautiful ' ये कहते हुए जानकी ने भी उसे किस किया । अमित ने राघव के कंधे पर हाथ रखा तब कही जाकर उसका ध्यान टूटा । राघव झेंपते हुए बोला " चले हमे देर हो रही हैं । " राघव ये बोलता हुआ ड्राइविंग सीट पर बैठ गया । अमित ने राज और जानकी को आने का इशारा किया और खुद राघव के बगल वाली सीट पर बैठ गया । राज ने पीछे वाली सीट का दरवाजा खोला तो जानकी परी को लेकर अंदर बैठ गयी । राज के बैठते ही राघव ने गाडी स्टार्ट कर दी । उनकी गाडी के पीछे तीन गाड़ियां और निकली जिनमें उनके गार्डस थे ।

___________

MBS Shopping Mall




सब लोग शाॅपिग मॉल पहुंच चुके थे । राज परी से बोला " मिस क्विन क्या शॉपिंग करनी हैं आपको ? "

" डॉल " परी ने कहा ।

" बस डॉल अरे तुम्हारे चाचू इतना कमाते हैं और तुम सिर्फ डॉल खरीदोगी । "

" नही मैं सारी डॉल खरीदूंगी । " परी ने जवाब दिया ।

अमित जानकी से बोला" चलो जानकी इसके लिए डॉल्स खरीदनी हैं न सैकिंड फ्लोंर पर हैं । " अमित ये बोल आगे बढ गया और बाकी सब उसके पीछे । राघव सबसे पीछे था । इस वक्त सब लोग टॉय शॉप में चले आए । पहले तो राज को बहुत हंसी आई क्योंकि परी ने सिर्फ एक टेडी उठाया । राज हंसते हुए बोला " मतलब चाचू के पैसे बचाने हैं । "

परी उस टैडी को साइड करते हुए बोली " इसको रिमूव कर दो और बाकी सारा पैक कर दो ‌‌। " परी के ये कहते ही सेल्स गर्ल के साथ बाकी सब भी हैरान हो गए ।

राज आश्चर्य से आपके दोनों गालो पर हाथ रखकर बोला " बाप रे ये तो आज लुटवा के मानेगी । "

परी सेल्स गर्ल की हाथों की उंगलियां खींचते हुए बोली " आपको पैसे राज चाचू देंगे । " ये बोल उसने राज की ओर इशारा कर दिया । ये था दूसरा झटका । राज अपने दोनों हाथ खड़े करते हुए बोला " नही ... नही .... मैं तो कमाता भी नही हूं । "

" कोई बात नही मॉल में बैठकर कप प्लेट धो लेना । ये लोग अपना पैसा वसूल कर लेंगे । " अमित ये बोल वहां से चला गया । परी जानवी का हाथ पकड़कर बाहर की ओर खींचते हुए बोली " जानू चलो न मुझे वो ड्रेस चाहिए । .... चाचू आप भी चलो । " परी जानकी और राघव दोनों को का एक एक हाथ पकड अपने साथ बाहर ले गयी । इस वक्त वो दोनों के बीच में थी । वहां से गुजर रहे कुछ लोग उन्हें देखकर मुस्कुरा रहे थे । वजह जाननी हैं चलो आगे बताती हूं ‌‌।

परी उन दोनों को अपने साथ सामने कपड़ों की शॉप में ले आई । उसे दूर से ही एअ व्हाइट कलर की ड्रेस पसंद आई थी । जिसे एक छोटी सी डॉल वाली डमी ने पहना हुआ था । व्हाइट कलर की फ्राक ओर पिंक रोजिस से बना डिजाइन बहुत प्यारा लग रहा था । परी की बस एक हां पर राघव ने उसे पैक करवाने के लिए कह दिया । राघव ने बिल पे किया । सेल्स गर्ल उसका कार्ड वापस करते हुए बोली " नाइस कपल सर , आपकी बेटी भी आप लोगों की तरह प्यारी हैं । "

" पता नहीं सेल्स गर्ल की बात परी को समझ आई या नहीं । उसने बस एक बडी सी स्माइल उसे पास कर दी । वही राघव और जानकी ये सुन कर एक दूसरे की ओर देखने लगे । जानकी ने तुरंत अपनी नजरें फेर ली । वो परी का हाथ पकडते हुए बोली " परी चलिए हम बाहर चलते हैं । "

उनके जाने के बाद राघव सेल्स गर्ल से बोला " she was not my wife "

' ओह सॉरी सर आप तीनो की ड्रेस काफी मैच कर रही थी , इसलिए मुझे लगा की ..... सेल्स गर्ल अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाई और राघव उसे इग्नोर कर चला गया ।

अमित और राज भी परी के पास चले आए । अमित जानकी से बोला " जानकी तुमने अपने लिए कुछ नही लिया । "

" नही हमे कुछ नही चाहिए । " जानकी ने कहा ।

" ऐसे कैसे जानू आज पहली बार आप हमारे साथ बाहर आए हो और मॉल आने के बाद कोई खाली हाथ थोडी न जाता हैं । चलिए हम आपके लिए ड्रेस सिलेक्ट करते हैं । " राज ने कहा तो जानकी इनकार करते हुए बोली " नही राज हमे कुछ नही चाहिए । "

" ऐसे कैसे नही चाहिए कुछ न कुछ तो लेना ही पड़ेगा । "

" राज जब उसका मन नही हैं तो क्यों जिद कर रहे हो ? " राघव ने कहा । राज उसकी बातों को इग्नोर कर बोला " आप न रहने ही दो मेरी दोस्त को मैं खाली हाथ कैसे जाने दे सकता हूं । " राज ये बोल जबरदस्ती जानकी को अपने साथ ले गया । कुछ भी कहो लेकिन राघव को ये जबरदस्ती अच्छी नहीं लगी ।

" ये राज भी न बिल्कुल बच्चों की तरह जिद करने लगता हैं । " अमित ने कहा ।

परी राघव का हाथ पकड़ते हुए बोली " हम भी जानू के पास चलेंगे । " परी उसे खींचते हुए उसी शॉप में ले जाने लगी जहां राज जानकी को ले गया था । अमित भी उसके पीछे चल दिया ।

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एक बात तो सही हैं राघव और जानकी जब भी साथ में रहते हैं तो कपल्स की तरह ही लगते हैं । वो बात अलग हैं इनके बीच खामोशियां अपनी जगह बनाकर बैठी हैं । अब इनका रिश्ता किस मोड पर जाएगा ये हम आगे जानेंगे

प्रेम रत्न धन पायो

( अंजलि झा )


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