Me Papan aesi jali - 11 books and stories free download online pdf in Hindi

मैं पापन ऐसी जली--भाग(११)

कमलकान्त जब शान्त हो गया और सरगम से कुछ ना बोला तो सरगम उससे बोली...
"क्या हुआ कमलकान्त बाबू!कहिए ना कि क्या बात है?"
"जी!आप बिना बात सुने ही आगबबूला हो रहीं हैं,जब बात सुन लेगीं तो तब ना जाने क्या होगा"?, कमलकान्त बोला...
कमल की इस बात पर सरगम मुस्कुरा कर बोली....
"ऐसी कौन सी बात है जिसे सुनकर मुझे गुस्सा आ जाएगा",
"जी!रहने दीजिए",कमलकान्त बोला...
"कमलकान्त बाबू!आप कहिए ना!,मैं आपसे वादा करती हूँ कि मैं गुस्सा नहीं करूँगी",सरगम बोली...
तब हिम्मत करके कमलकान्त बोला....
"मैं ये कहना चाहता था कि आपका आदेश से नजदीकियांँ बढ़ाना ठीक नहीं,कहीं ऐसा ना हो कि आपको बाद में पछताना पड़े",
"ये क्या कह रहे हैं आप"?सरगम बोली...
"मैं ठीक कह रहा हूँ",कमलकान्त बोला....
"आप ये कहना चाहते हैं कि आदेश जी अच्छे इन्सान नहीं हैं",सरगम बोली....
"जी!ठीक समझा आपने",कमलकान्त बोला....
"आप आदेश जी के दोस्त हैं और तब भी उनके बारें में ऐसा कह रहे हैं",सरगम बोली...
"दोस्त हूँ तभी तो कह रहा हूँ क्योंकि मैं बचपन से उसके साथ पढ़ा हूँ और उसकी हर आदतों के बारें में मैं भली प्रकार से जानता हूँ",कमलकान्त बोला....
"अगर मैं आपकी बातों पर भरोसा ना करूँ तो",सरगम बोली...
"मेरी बात पर भरोसा करना या ना करना ये आपकी मर्जी है,आप मुझे शरीफ घराने की शरीफ लड़की दिखती है इसलिए आपको अगाह करना मेरा फर्ज था सो मैं आपको अगाह कर रहा हूँ,मैं नहीं चाहता कि आपकी जिन्दगी में कुछ गलत हो,"कमलकान्त बोला....
"लेकिन मुझे तो कुछ और ही लगता है",सरगम बोली....
"कहना क्या चाह रही हैं आप?",कमलकान्त ने पूछा...
"मुझे लगता है कि आप मुझे पसंद करते हैं,इसलिए आदेश जी से मेरी नजदीकियांँ आपको पसंद नहीं है,इसलिए आप ईर्ष्या के कारण ऐसा कह रहे हैं",सरगम बोली....
"ये बात सच है सरगम जी ! कि मैं आपको पसंद करता हूँ,जब मैनें आपको पहली बार देखा था तो मैं आपकी सादगी का क़ायल हो गया था,लेकिन ये बात मैं ईर्ष्यावश नहीं कह रहा है,मैं नहीं चाहता कि जब आपको आदेश की सच्चाई का पता चले तो आपके पास सिवाय आँसू बहाने के और कोई रास्ता ना रह जाए", कमलकान्त बोला.....
अब कमलकान्त की बात सुनकर सरगम अपने गुस्से पर काबू ना रख सकी और कमलकान्त से बोली.....
"चले जाइए यहाँ से और आइन्दा फिर कभी मेरे सामने मत आइएगा,अपने दोस्त पर तोहमत लगाते आपको शर्म नहीं आती,वें आपके बचपन के दोस्त हैं और आप उनकी पीठ पीछे मुझसे उनकी बुराई कर रहे हैं",
"आप अभी समझ नहीं रहीं हैं सरगम जी!",कमलकान्त बोला...
"मुझे कुछ नहीं समझना,बस आप अभी यहाँ से चले जाइए",सरगम बोली...
फिर कमलकान्त कुछ ना बोला और वहाँ से चला गया और इधर सरगम कमलकान्त की बातों को लेकर सरगम सोच में पड़ गई क्योंकि उसे कमलकान्त की बातों पर यकीन नहीं था कि आदेश बुरा इन्सान हो सकता है,बस उसे ये फिक्र थी कि कमलकान्त भानूप्रिया की पसंद था और वो नहीं चाहती थी भानूप्रिया ऐसे लम्पट इन्सान को चाहे क्योंकि वो तो हमेशा भानू का भला चाहती थी और जब वो आदेश से मिली तो उसने बातों ही बातों में कमलकान्त का जिक्र किया और आदेश से पूछा....
"अच्छा!आदेश जी!ये बताइए कि कमलकान्त बाबू का स्वाभाव कैसा है?क्योंकि चाची जी तो उन पर हमेशा बड़ी मेहरबान रहतीं हैं"
तब आदेश बोला....
"इन्सान तो अच्छा है कमल,दयालु और दूसरों की हमेशा मदद करने वाला,इसलिए शायद माँ उसे इतना पसंद करतीं हैं,लेकिन दिलफेंक कुछ ज्यादा ही है शायर जो ठहरा,लड़कियांँ तो उसकी शायरी पर फिदा रहतीं हैं बस और फिर अगर कोई लड़की उसके मन को भा गई तो फिर उस लड़की की खैर नहीं,लेकिन तुम क्यों उसके बारें में पूछ रही हो ,उसने तुम से भी कुछ कहा है क्या?",
"ओह...मतलब काफी रसिक मिजाज़ हैं कमलकान्त बाबू!,लेकिन उन्होंने मुझसे तो कुछ नहीं कहा,बस ऐसे ही पूछ रही थी उनके बारें में",सरगम ने झूठ बोलते हुए कहा....
"हाँ! ये शब्द सही है,तुम ऐसा भी कह सकती हो कि वो रसिक मिजाज़ है ",आदेश बोला....
"तो क्या उनके लड़कियों के साथ अंतरंग सम्बन्ध भी हैं"सरगम ने पूछा....
"अब ये तो वो ही जाने,इस बारें में तो मैं कुछ नहीं बता सकता",आदेश बोला....
अब आदेश की बातें सुनकर सरगम को भानूप्रिया के बारें में फिक्र होने लगी,क्योंकि भानूप्रिया कमलकान्त को चाहती थी और कमलकान्त अच्छा इन्सान नहीं था,अब जब भी भानूप्रिया सरगम के सामने कमलकान्त का जिक्र करती तो सरगम गुस्सा होकर कहती कि.....
"क्या यही सब बातें रह गई हैं करने के लिए ,कभी पढ़ाई भी कर लिया करो"
"लेकिन दीदी!पहले तो तुम कमल बाबू की बातें खुद किया करती थी लेकिन अब क्या हो गया है तुम्हें"?,भानूप्रिया बोलती.....
भानूप्रिया के पूछने पर सरगम ये ना कह सकी कि कमल उसके लायक नहीं है,वो तो बस इतना बोली...
"कुछ नहीं हुआ भानू!पढ़ाई करोगी तब तो अपने पैरों पर खड़ी हो सकोगी और तभी तुम अपने मनपसंद लड़के से शादी कर सकोगी और तुम्हें पता है ना कि कमल बाबू ना तो इतने अमीर हैं और ना ही उनके पास कोई बड़ी नौकरी है,शायरी बस से जिन्दगी बसर नहीं होगी,जिन्दगी जीने के लिए रुपया कमाना पड़ता है और फिर दोनों ही नाकारा होगे तो जिन्दगी की गाड़ी कैसे चलेगी?",
तब भानू बोलती...
"तुम शायद सही कहती हो दीदी!कमल बाबू की किताबों की दुकान है जो उनके पिता जी की है,वें ही उसी को चलाते हैं,भला कितना कमा लेते हो उस दुकान से,राशन-पानी का खर्चा ही बस निकलता होगा उस दुकान से"
"हाँ!मैं तुमसे यही तो कहना चाहती थी",सरगम बोलती...
और भानू सरगम की बात समझ भी जाती थी और फिर वो पढ़ाई में ध्यान लगाने लगती थी,इसी तरह दिन गुजरे और इधर आदेश और सरगम की मौहब्बत परवान चढ़ी,फिर कुछ दिनों के लिए सरगम अपने घर गई और दो हफ्ते बाद लौट भी आई और इन पन्द्रह दिनों में आदेश के लिए सरगम से दूर रह पाना मुश्किल हो गया और जब रात को सभी सो गए तो आदेश सरगम के कमरें में आकर सरगम से बोला.....
"मेरा तो यहाँ मन ही नहीं लग रहा था तुम्हारे वगैर",
"तो मन को समझा लेते",सरगम बोली...
"कैसें समझा लेता अपने मन को सरगम?तुम बिन अब एक पल भी रह पाना मुश्किल सा लगता है",आदेश बोला....
"ऐसी भी क्या बेचैनी"?,सरगम ने हौले से पूछा....
"क्यों तुम्हें मेरे बिना बैचेनी नहीं हुई वहाँ"?,आदेश ने पूछा....
"नहीं!,मैं भला आपके लिए क्यों बेचैन होने लगी"?सरगम आदेश को चिढ़ाते हुए बोली....
"झूठ मत बोलो सरगम!",आदेश बोला...
"मुझे झूठ बोलने की क्या जरूरत है भला?",सरगम बोली....
"कह दो कि तुम मुझे नहीं चाहती",आदेश ने पूछा...
"नहीं!चाहती",सरगम बोली...
"सच कह रही हो",आदेश ने पूछा...
"हाँ!बिल्कुल सच!,",सरगम बोली...
"तो फिर ठीक है,जब तुम मुझे नहीं चाहती तो फिर यहाँ रुककर क्या फायदा"?
और ऐसा कहकर आदेश सरगम के कमरें से जाने लगा तो सरगम दौड़कर आदेश की पीठ से लगकर बोली....
"मत जाइए ना!"
"तो ये बताओ कि मुझे चाहती हो या नहीं",आदेश ने पूछा....
"जी!चाहती हूँ,अपनी जान से भी ज्यादा चाहती हूँ"सरगम बोली...
"सच!",आदेश बोला...
"हाँ!सच!,सरगम बोली...
और फिर आदेश पलटा और सरगम के चेहरे को अपने हाथों में लेकर बोला....
"अब मेरी आँखों में आँखें डालकर कहो कि तुम मुझे चाहती हो"
और फिर सरगम शरम से अपनी पलकें झुकाकर बोली....
"कहा ना चाहती हूँ"
और फिर ना जाने आदेश को क्या हुआ उसने एकाएक सरगम के होठों का प्रगाढ़ चुम्बन ले लिया,इस बात से सरगम झुँझला गई और खुद को छुड़ाने के बाद उसने आदेश के गाल पर एक झापड़ रसीदते हुए कहा....
"जानवर कहीं के"
अब आदेश अपना गाल पकड़कर रह गया और बिना कुछ बोले वो सरगम के कमरें से चला गया,ना सरगम ने उसे रोका और ना वो रूका,आदेश के जाते ही सरगम बिस्तर पर जाकर तकिये में मुँह छुपाकर रोने लगी....

क्रमशः....
सरोज वर्मा....