Me Papan aesi jali - 16 books and stories free download online pdf in Hindi

मैं पापन ऐसी जली--भाग(१६)

कुछ ही देर में दोनों मंदिर पहुँच गए और सरगम ने मंदिर के भीतर जाते समय अपने सिर पर पल्लू ले लिया फिर दोनों मंदिर के भीतर पहुँचकर पूजा करने लगे,पूजा करने के बाद सरगम आँखें बंद करके और हाथ जोड़कर भगवान से कुछ प्रार्थना करने लगी तो आदेश ने फौरन ही पूजा की थाली से सिन्दूर उठाकर उसकी माँग में भर दिया,आदेश की इस हरकत पर सरगम ने फौरन आँखें खोलीं और आदेश से बोली....
"ये आपने क्या किया आदेश जी?"
तब आदेश बोला....
"जब हम दिल से एक दूसरे को अपना मान ही बैठें हैं तो इस प्रेम के बंधन को भगवान का आशीर्वाद भी मिल ही जाना चाहिए"
"लेकिन ये ठीक नहीं है",सरगम बोली...
"क्या ठीक नहीं है सरगम?"आदेश ने पूछा...
"यूँ मेरी माँग भरना,जो काम बड़ों की अनुमति के साथ और उनके सामने होना चाहिए था वो आपने यहाँ मंदिर में अकेले में कर दिया",सरगम बोली...
"तो क्या तुम मुझसे प्यार नहीं करती सरगम"?,आदेश ने पूछा...
"प्यार करती हूँ लेकिन मैं ये सब इतनी जल्दी नहीं चाहती थी",सरगम बोली...
तब आदेश बोला...
"सरगम हम एकदूसरे को चाहते हैं और कल को हमें एकदूसरे का होना ही है,कल को एकदूसरे से शादी करनी ही है तो अभी क्यों नहीं",आदेश बोला...
"लेकिन आदेश जी आप समझ नहीं रहे हैं,अभी तो हमने अपने आपस के प्यार वाली बात किसी को बताई भी नहीं और आपने मुझसे बिना पूछे मेरी माँग भी भर दी,ये आपने अच्छा नहीं किया",सरगम बोली...
"सरगम!तुम नाहक ही डर रही हो,सबको शादी से लौट आने दो,उन सभी के वापस आते ही मैं उनसे कह दूँगा कि सरगम ही मेरी दुल्हन बनेगी",आदेश बोला....
"ये सब कैसें होगा,आदेश जी!,मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा,",सरगम बोली...
"अरे! इतना परेशान क्यों हो रही हो?,सब मंजूरी दे देगें हमारे रिश्ते को",आदेश बोला...
"सच",सरगम ने पूछा...
"हाँ!और क्या"?,आदेश बोला...
"अगर वें सब ना माने तो",सरगम ने पूछा....
"अगर वें सब नहीं माने तो मैं उनसे कहूँगा कि अगर आप सभी ने मेरी बात नहीं मानी तो मैं जहर खा लूँगा",आदेश बोली...
"छीः...छीः... ऐसी अशुभ बातें मुँह से नहीं निकाला करते",सरगम बोली...
"वें सब तो बाद में मानेगें लेकिन पहले तुम बताओ कि क्या तुम्हें ये शादी मंजूर है कि अब भी तुम्हें इस शादी का कोई पछतावा है",आदेश ने पूछा...
और फिर सरगम ने आदेश की बात सुनकर शरमाकर अपने पलकें झुका दीं,सरगम की झुकीं हुई पलकें देखकर आदेश बोला....
"इसका मतलब तुम्हें ये शादी कूबूल है",
"अब मैं क्या बोलूँ?आपने तो मुझे बिना बताएँ ही ऐसा फैसला कर लिया",सरगम बोलीं...
तब आदेश बोला...
"सरगम!तुम्हें आज साड़ी में देखकर मैं अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सका,तुम आज बेहद खूबसूरत लग रही हो,तुम्हारे इस रूप को देखकर मेरे जी में आया कि तुम्हें आज ही अपनी दुल्हन बना लूँ और फिर ये भगवान का घर था और इस बंधन को नाम देने के लिए इससे अच्छी कोई भी जगह नहीं हो सकती थी,"
"लेकिन एक बार मुझे तो बता दिया होता",सरगम बोली...
"तुम्हें बता देता तो तुम राजी नहीं होती,",आदेश बोला....
"लेकिन फिर भी ये गलत हुआ",सरगम बोली....
"कहा ना!सब लोग दो -एक दिन में लौट आऐगें और तभी मैं उन सबसे हम दोनों के रिश्ते के बारें बता दूँगा",आदेश बोला....
"आप कहते हैं तो ठीक है ",सरगम बोली...
और ऐसे ही कुछ बातों के बाद दोनों घर आ गए और फिर वापस आकर सरगम ने दोनों के लिए रात का खाना बनाया और साथ बैठकर खाया,फिर खाना खाने के बाद सरगम अपने कमरें में चली गई और पढ़ाई करने लगी,तभी उसके कमरें के दरवाजे पर दस्तक हुई,सरगम ने पूछा...
"कौन"?
"मैं",आदेश बोला...
"सोए नहीं आप अब तक?",सरगम ने पूछा...
"नींद नहीं आ रही",आदेश बोला...
"क्यों",सरगम ने पूछा...
"यूँ ही",आदेश बोला...
"आपको नींद नहीं आ रही तो मैं क्या करूँ?,मुझे पढ़ाई करनी है और आप मुझे पढ़ाई करने दीजिए", सरगम बोली...
"प्लीज दरवाजा खोलो ना!",आदेश बोला...
"नहीं!मैं दरवाजा नहीं खोलूँगी",सरगम बोली...
"अरे खोल दो ना यार!",आदेश बोला...
"लेकिन क्यों"?सरगम ने पूछा...
"बस ऐसे ही ,थोड़ी देर तुमसे बात करके चला जाऊँगा",आदेश बोला...
"ठीक है,लेकिन थोड़ी देर में जरूर चले जाइएगा",सरगम बोली...
"हाँ!वादा करता हूँ ,बस थोड़ी देर में बात करके चला जाऊँगा",आदेश बोला....
और फिर सरगम ने दरवाजा खोला और आदेश कमरें के भीतर आया फिर उसने दरवाजा बंद कर दिया और बिस्तर पर आकर बैठ गया तब सरगम ने कहा...
"कहिए,क्या बात करनी है जल्दी कीजिए,मेरे पास टाइम नहीं है,पढ़ाई करनी है इग्जाम आने वाले हैं",
"अरे!कर लेना पढ़ाई,थोड़ी देर मुझसे भी तो बातें कर लो",आदेश बोला...
"तो कीजिए बातें,मैं सुन रही हूँ",सरगम बोली....
और फिर आदेश ने सरगम का हाथ पकड़ लिया तो सरगम बोली...
"ये क्या कर रहे हैं आप"?
"सरगम!अब हमारी शादी हो चुकी है तो मैं तुम्हारा हाथ तो पकड़ ही सकता हूँ",आदेश बोला...
तब सरगम मुस्कुराते हुए बोली....
"लेकिन इस शादी पर सबकी मोहर तो लग जाने दीजिए,तब पकड़िएगा मेरा हाथ",
"मोहर तो लग ही जाएगी इस शादी पर ,लेकिन तुम इतना क्यों घबरा रही हो",?,आदेश सरगम के और करीब आकर बोला...
"आदेश जी!आप मुझसे दूर रहिए,ये क्या कर रहे हैं आप?" सरगम ने पूछा...
"सरगम!मना मत करो प्लीज"!आदेश बोला...
"नहीं!आदेश जी ये सब नहीं",सरगम बोली...
"मैं तुम्हारा पति हूँ सरगम!,इतना हक़ तो बनता है ना मेरा",आदेश बोला...
"मेरा मन नहीं मानता",सरगम बोली...
"तो मनाओ ना अपने मन को",आदेश बोला...
"आदेश जी!प्लीज!मुझे इतनी जल्दबाजी ठीक नहीं लग रही",सरगम बोली...
और फिर क्या था सरगम आदेश को इसी तरह से रोकती रही ,लेकिन आदेश ना माना और उसने अपनी जिद पूरी कर ही ली ,बेचारी सरगम भी क्या करती वो भी आ गई आदेश की मीठी मीठी बातों में और उसने खुद को आदेश के हवाले कर दिया और जब तक सभी शादी से वापस ना आ गए तो वो हर रात सरगम के कमरें में आता रहा और फिर एकाध दो दिन बाद सभी लोग शादी से लौट आए और उनके आते ही सरगम ने आदेश से शादी की बात करने को कहा और आदेश ने सरगम को झूठा दिलासा देते हुए कहा....
"बस!कल सुबह ही नाश्ते की टेबल पर मैं ये बात सभी को बता दूँगा",
ये बात सुनकर सरगम बड़ी खुश हुई और रात को खुशी के मारे सो ना सकी और सुबह होने का इन्तजार करने लगी,सुबह भी हो गई लेकिन आदेश नाश्ते की टेबल पर ना आया,सरगम ने भानू से पूछा तो वो बोली....
"भइया!अपने दोस्त कमलकान्त बाबू से मिलने गए हैं शायद कोई जरूरी काम था"
ये सुनकर सरगम कुछ उदास सी हो गई लेकिन फिर मन में सोचा शायद कोई जरूरी काम होगा तभी आदेश नाश्ते पर नहीं आया और अनमने मन से वो काँलेज चली गई और जब दोपहर के बाद वो काँलेज से लौटी तो आदेश सामान के साथ कहीं जाने को तैयार था,तब शीतला जी सरगम से बोलीं....
"आदेश!कारोबार के सिलसिले में दो महीनों के लिए विदेश जा रहा है"
ये सुनकर सरगम के होश उड़ गए...

क्रमशः....
सरोज वर्मा....