Me Papan aesi jali - 23 books and stories free download online pdf in Hindi

मैं पापन ऐसी जली--भाग(२३)

बहुत समय पहले की बात है,मनप्रीत और उसका बड़ा भाई किसी गाँव में रहा करते थे, मनप्रीत के माता पिता उसके बचपन में गुजर गए थे जब लगभग वो दस साल की रही होगी ,तब से मनप्रीत की देखभाल उससे पाँच साल बड़े उसके भाई करतार ने की थी,मनप्रीत का बड़ा भाई करतार उसे प्यार से प्रीतो कहता था,धीरे धीरे मनप्रीत बड़ी होने लगी अब वो अठारह साल की हो चली थी लेकिन उसके बड़े भाई करतार ने अभी तक ब्याह नहीं किया था,अगर गाँव का कोई बड़ा-बूढ़ा करतार से ब्याह करने के लिए कहता तो करतार कहता...
"दार जी!पहले प्रीतो का ब्याह होगा,तभी अपना ब्याह रचाऊँगा,अगर मैनें प्रीतो के ब्याह से पहले अपना ब्याह कर लिया और उसकी परजाई अच्छी ना निकली,उसने प्रीतो का ख्याल ना रखा तो तब तो मैं जीते जी मर जाऊँगा और फिर ऊपर जाकर अपनी बीजी और बापू को क्या जवाब दूँगा",?
दिन ऐसे ही गुजर रहे थे मनप्रीत अपने गाँव की सबसे खूबसूरत लड़कियों में गिनी जाने लगी थी,वो घर के काम देखती थी और करतार खेतों को सम्भालता था,मनप्रीत की खूबसूरती पर मर मिटने वालों की कमी ना थी,लेकिन मनप्रीत किसी को भी घास नहीं डालती थी,वो इसलिए कि वो अपने बड़े भाई करतार का बहुत मान करती थी,उसने सोच लिया था कि वो कोई भी ऐसा काम नहीं करेगी जिससे उसके भाई की इज्ज़त पर दाग लगे और उसका भाई जहाँ भी कहेगा वो खुशी खुशी वहीं ब्याह कर लेगी....
लेकिन गाँव मे मनचले लड़को की कमी नहीं थी,जब भी मनप्रीत कुएँ से पानी भरने जाती या अपने भाई को खेतों पर खाना देने जाती तो वो मनचले लड़के कुछ ना कुछ फब्तियाँ कसते और मनप्रीत उनकी बातों को नजरअन्दाज करके आगें बढ़ जाती,मनप्रीत थी भी बहुत खूबसूरत, उसकी कमर के नीचे परान्दे से बँधी लम्बी लटकती चोटी,सुरमा लगीं आँखें,दोहरा और लम्बा चौड़ा बदन सब पर कहर बरपाता था और जब वो अपने पंजाबी परिधान लुँगी और कुर्ते में बाहर निकलती तो गाँव के सारे जवान आहें भर कर रह जाते....
ऐसे ही एक रोज मनप्रीत कुएँ से पानी भरने जा रही थी तो तभी उसकी मटकी में एक मनचले ने गिल्ली चला दी और मनप्रीत के सिर पर रखा पानी से भरा मटका फूट गया और वो गीली भी हो गई,मनप्रीत को उस लड़के पर बहुत गुस्सा आया और वो उसके पास जाकर बोली...
"ओए! सतवीरे!तूने मटका क्यों फोड़ दिया"?
"अब लग गई धोखे से मटके पर गिल्ली तो मैं क्या करूँ?",सतवीर बोला...
"तूने मटका फोड़ा और अब मैं तेरा सिर फोड़ दूँगी",
इतना कहकर मनप्रीत ने सतवीर को मारने के लिए जमीन से एक पत्थर भी उठा लिया,मनप्रीत के जमीन से पत्थर उठाते ही सतवीर बोला...
"तेरे ऊपर तो मैं वैसे भी मर मिटा हूँ और कितना मारेगी,?",
सतवीर ऐसा बोला तो आस पास जितने भी लड़के मौजूद थे वें भी उसकी बात पर हँसने लगें और फिर मनप्रीत को सतवीर की ऐसी बात सुनकर और भी गुस्सा आ गया और वो उससे बोली....
" तू मर जाएँ ना ! तो ही अच्छा हो,कम से कम रोज रोज तेरी ये मनहूस सूरत तो ना देखनी पड़ेगी,कमबख्त ! जब देखो तब यहीं कुएँ के पास ही मँडराता रहता है"
"अब भँवरा फूल के पास नहीं मँडराएगा तो बेचारा कहाँ जाएगा",?
ये कहकर सतवीर फिर से हँसा और उसके हँसने से मनप्रीत के तन और मन में आग सी लग गई और वो फिर से बोली....
"सतवीरे! तू तो इसी कुएँ में डूब मर"
"मर जाऊँगा....कुएँ में भी डूबकर मर जाऊँगा मनप्रीते!,लेकिन पहले तू मुझसे ब्याह के वास्ते हाँ तो कर दे",सतवीर बोला....
"ब्याह और तुझसे,तुझसे ब्याह तो मेरी जूत्ती भी ना करें",
और इतना कहकर मनप्रीत वहाँ से चली आई,सतवीर यूँ ही अपने लफंगे दोस्तों का झुण्ड बनाकर कुएंँ के आस पास या फिर मनप्रीत के खेत जाने के रास्ते में किसी पेड़ के नींचे हमेशा जुआंँ खेलने बैठ जाया करता था और सतवीर को देखकर मनप्रीत को डर भी लगता था कि क्या पता सतवीर के मन में क्या चल रहा हो और उसे देखकर वो गुस्सा भी होती थी कि जब देखो तब मेरे पीछे ही पड़ा रहता है....
और इधर मनप्रीत की इतनी गालियाँ खाने के बाद भी सतवीर नहीं सुधर रहा था और एक दिन खेत में करतार को खाना देने जाते समय सतवीर फिर मनप्रीत का रास्ता रोककर बोला...
"ओए...सोनिओ! कित्थे चल दी?"
"तुझसे मतलब,मैं कहीं भी जाऊँ",मनप्रीत बोली...
"कभी हम पर भी कोई मेहरबानी कर दिया कर सोनिओ !",सतवीर बोला...
"ओए....सतवीरे! छोड़ मेरा रास्ता और मुझे जाने दे,प्राजी मेरी राह तकते होगें",मनप्रीत बोली....
"और हमारा क्या?जो हम रोज रोज तेरी राह तकते हैं",सतवीर बोला....
"तू कहीं जाके मर क्यों नहीं जाता,मेरे पीछे ही क्यों पड़ा रहता है"?,मनप्रीत बोली...
"कहाँ जाके मरूँ मनप्रीते? बस अब तो तुझ पर मर मिटने को जी चाहता है", सतवीर बोला...
अब मनप्रीत के गुस्से का पार हो चुका था और उसने अपने सिर पर रखी टोकरी जमीन पर रखी और सतवीर के गाल पर जोर का झापड़ मारते हुए बोली....
"अब आज के बाद मेरा रास्ता रोका ना तो प्राजी से कहकर तेरी ताँगें तुड़वा दूँगीं"
और फिर मनप्रीत ने अपनी टोकरी उठाई और अपने रास्ते चली गई और फिर करतार जब खाना खा रहा था तो उसने प्रीतो को उदास देखा और उससे उसके उदास होने का कारण पूछा....
तब प्रीतो बोली ...
"प्राजी! पहले तुस्सी रोटी खा लो,फिर आपको सब बताती हूँ,नहीं तो बात सुनकर तुस्सी रोटी ना खा पाओगें"
फिर प्रीतो की बात सुनकर करतार चुपचाप रोटी खाने लगा ,खाना खाने के बाद करतार के पूछने पर मनप्रीत ने सतवीर के बारें में सब कुछ बता दिया,मनप्रीत की बात सुनकर करतार बोला....
"उस नामुराद की इतनी हिम्मत कि मेरी बहन को छेड़ता है"
और ऐसा कहकर उसी समय करतार लट्ठ लेकर सतवीर की अकल ठिकाने लगाने दौड़ पड़ा और उसने देखा कि सतवीर कुएँ के पास अपने दोस्तों के साथ बैठा ताश खेल रहा है और फिर करतार उसके पास गया और बिना कुछ बोले उस पर लट्ठ बरसाने लगा,सतवीर पूछता रहा कि क्या बात है लेकिन करतार बिना बोले उस पर लट्ठ बरसाता रहा और जब करतार थक गया तब वो रुका और सतवीर से बोला....
"खबरदार!जो आज के बाद मेरी बहन पर बुरी नजर डाली,आँखें नोच लूँगा मैं तेरी"
उस समय तो सतवीर कुछ ना बोला लेकिन उसके मन में करतार और मनप्रीत के लिए बेहिसाब नफरत पैदा हो गई और फिर उस दिन के बाद सतवीर मनप्रीत से कुछ नहीं बोला,लेकिन फिर एक रोज़ जब मनप्रीत खेतों में करतार को खाना देने जा रही थी वो उसका रास्ता रोककर खड़ा हो गया और उससे बोला....
"कहाँ जा रही है मनप्रीते!"
"छोड़ मेरा रास्ता,उस दिन प्राजी के लट्ठ खाकर अकल नहीं आई क्या तुझे?",मनप्रीत बोली....
और फिर उस दिन सतवीर ने मनप्रीत का रास्ता भी रोका और वो उसे गन्ने के खेत में घसीटकर ले गया और अपने मन की करके ही दम लिया,फिर जब मनप्रीत को होश आया तो वो भागी भागी अपने भाई के पास पहुँची और करतार गुस्से में आगबबूला होकर सतवीर के पास दौड़ चला,फिर सतवीर और करतार के बीच हाथापाई हुई और इस हाथापाई में सतवीर ने करतार को बहुत जोर का धक्का दिया और करतार का सिर एक पत्थर से जा टकराया और वहीं उसकी जान चली गई,ये सब गाँव वालों के सामने हुआ था इसलिए सबने सतवीर के खिलाफ गवाही दे दी और सतवीर को करतार के खून के जुर्म में उम्रकैद की सजा हुई....

क्रमशः....
सरोज वर्मा...