Me Papan aesi jali - 34 books and stories free download online pdf in Hindi

मैं पापन ऐसी जली--भाग(३४)

शास्त्री जी ने सोचा अब मैं कैसें भी करके सरगम को ही अपने घर की बहू बनाऊँगा और यही सपना वो दिन रात देखने लगे,लेकिन सरगम इस बात के लिए कतई तैयार नहीं थी,ऐसी बात नहीं थी कि वो राधेश्याम को पसंद नहीं करती थी ,बस वो खुद को राधेश्याम के लायक नहीं समझती थी,लेकिन राधेश्याम के मन में ऐसा कुछ भी नहीं था,वो तो सरगम को उसी दिन से पसंद करने लगा था जिस दिन वो उसे रेलवें प्लेटफॉर्म के बाहर मिली थी,बस उसने आज तक अपने मन की बात सरगम से कही नहीं थी,क्योंकि वो सोचता था कि पहले उसे अच्छी सी सरकारी नौकरी मिल जाएं फिर वो इस बारें में सरगम से कहेगा,लेकिन उसको नौकरी मिलने से पहले ही शास्त्री जी ने सरगम की शादी की बात छेड़ दी इसलिए राधेश्याम के मन की बात में ही रह गई,इसलिए फिर वो सरगम से कुछ ना कह सका,लेकिन अब जब सरगम को लेकर इतना बड़ा बखेड़ा खड़ा हो ही गया था तो फिर राधेश्याम ने सोचा क्यों ना मैं सरगम को अपने मन की बात बता दूँ,इसलिए वो एक दिन सरगम के पास पहुँचा,जब घर में शास्त्री जी नहीं थे और सरगम अपने कमरें में बैठी कोई किताब पढ़ रही थी,वो सरगम के कमरें के दरवाजे पर पहुँचा और बोला...
"सरगम जी! क्या मैं भीतर आ सकता हूँ"?
"हाँ...हाँ....राधेश्याम जी! आइए ना!",सरगम बोली....
और फिर राधेश्याम सरगम के कमरें में पहुँचा और बिस्तर के बगल में रखी कुर्सी पर बैठते हुए बोला...
"सरगम जी! मुझे आपसे कुछ कहना था",
"जी!कहिए!",सरगम बोली...
"जी! वो मैं आपसे ये कहना चाहता था कि....", ये कहते कहते राधेश्याम रुक गया तो सरगम बोली....
"कहिए ना कि क्या कहना चाहते हैं आप"?,
"जी! कैसें कहू्ँ,समझ नहीं आ रहा",राधेश्याम बोला...
"मुँह से कहिए और कैसें कहेगें,",सरगम बोली...
फिर सरगम की बात सुनकर राधेश्याम हँस पड़ा और उससे बोला...
"सरगम जी! मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि मैं किसी दबाव में आकर आपसे शादी नहीं कर रहा,मैं आपको सच में पसंद करता हूँ,मैनें जब आपको पहली बार रेलवे प्लेटफार्म के बाहर देखा था तो तभी उसी वक्त से आप मुझे भा गईं थीं,लेकिन मैं कभी आपसे ये बात कह नहीं पाया क्योंकि मेरे पास नौकरी नहीं था,सोचा था कि जब मैं अपने पैरों पर खड़ा हो जाऊँगा तो आपसे पूछूँगा कि क्या आप मेरी जीवनसाथी बनेगीं?,लेकिन उससे पहले ही बाबा ने आपकी शादी की बात छेड़ दी और मेरी बात मेरे मन में ही रह गई,लेकिन आज मैं आपसे पूछ रहा हूँ कि क्या आप मेरी जीवनसाथी बनना पसंद करेगीं",?
"नहीं! मैं आपकी जीवनसाथी बनना पसंद नहीं करूँगीं", सरगम ने फौरन सख्त लहजे में दो टूक जवाब देते हुए कहा...
"लेकिन क्यों? मुझ में क्या बुराई है सरगम जी?",राधेश्याम ने पूछा...
"बुराई आप में नहीं मुझ में हैं राधेश्याम जी",सरगम बोली...
"वो आपका कल था सरगम जी! और बीते कल को भूल जाने में ही भलाई है सरगम जी! ",राधेश्याम बोला...
"वो एक दाग है मेरे ऊपर, जो कभी नहीं छूट सकता फिर चाहे आप जैसा पवित्र मन वाला भी उसे छुटाने क्यों ना आ जाएं,वो दाग मेरी जिन्दगी और आत्मा में हमेशा के लिए लग चुका है और उसे कोई नहीं छुटा सकता राधेश्याम जी!", सरगम बोली...
"ऐसा ना कहें सरगम जी! मैं आपसे वादा करता हूँ कि आपका अतीत कभी भी हमारे भविष्य के बीच नहीं आएगा",राधेश्याम बोला...
"मुझे आप पर पूरा यकीन है राधेश्याम जी ! लेकिन इस बैरी संसार पर मैं यकीन नहीं कर सकती,फिर कभी कोई रामरति काकी और मिसराइन काकी जैसी मेरी जिन्दगी में जहर घोलने आ ही पड़ेगीं",सरगम बोली...
"ऐसा नहीं होगा सरगम जी! आप ऐसा भ्रम अपने मन में क्यों पाले बैठीं हैं",राधेश्याम बोला...
"ये भ्रम नहीं सच्चाई है",सरगम बोली....
"इसका मतलब है कि आप मुझे पसंद नहीं करतीं",राधेश्याम बोला...
"मैनें ऐसा तो नहीं कहा",सरगम बोली...
"तो फिर क्या बात है? जब आप मुझे पसंद करतीं हैं तो शादी के लिए हाँ करने में आपको कौन सी परेशानी है", राधेश्याम ने पूछा....
"मैं आपको सब बता तो चुकीं हूँ,तो बार बार आप मुझ से वही सवाल क्यों करते हैं?", सरगम बोली....
"सरगम जी! मैं आपको चाहता हूँ और आपकी खुशी के लिए कुछ भी करूँगा",राधेश्याम बोला...
"आप मुझे चाहते हैं तो फिर आप मुझसे शादी का इरादा छोड़ दीजिए,इसी में मेरी खुशी है",सरगम बोली...
"ये मैं कभी नहीं कर पाऊँगा",राधेश्याम बोला....
"मैं आपको कैसें समझाऊँ कि मैं आपके काबिल नहीं हूँ",सरगम बोली....
"आप खुद को सजा क्यों दे रहीं हैं ?,मैं जानता हूँ कि आप मुझे पसंद करतीं हैं",राधेश्याम बोला...
"राधेश्याम जी! भगवान के लिए आप यहाँ से चले जाइए",सरगम बोली...
"मैं आज आपका जवाब पाकर ही यहाँ से जाऊँगा",राधेश्याम बोला...
"मैं अपना जवाब दे चुकी हूँ, आप मुझे और परेशान मत कीजिए",सरगम बोली...
"मुझे मालूम है ये आपका जवाब नहीं है,आप खुद को धोखा दे रहीं हैं सरगम जी!",राधेश्याम बोला...
"मैं खुद को कोई धोखा नहीं दे रही, राधेश्याम जी!",सरगम बोली...
"आपको मेरा प्रेम स्वीकार करने में क्या आपत्ति है सरगम जी! आप ऐसा क्यों कर रहीं हैं"?,राधेश्याम बोला...
"भगवान के लिए आप ऐसी कोई बात ना कहें जिसे मैं स्वीकार ना कर सकूँ",सरगम बोली...
और तभी घर के दरवाजों पर दस्तक हुई,शायद शास्त्री जी आ गए थे इसलिए राधेश्याम दरवाजा खोलने गया और जैसे ही शास्त्री जी ने राधेश्याम का उतरा हुआ चेहरा देखा तो शास्त्री जी ने उससे फौरन पूछा....
"क्या हुआ रे!चेहरा क्यों उतरा है तेरा"?
"कुछ नहीं! यूँ ही सिर में दर्द है",राधेश्याम बोला...
"अच्छा! तो बाम लगा लें,दर्द मिट जाएगा",शास्त्री जी बोलें...
"बाम मिल नहीं रही है",राधेश्याम बोला...
"तो जाकर सरगम से पूछ ले,उसे पता होगी,",शास्त्री जी बोले...
"मैं बाद में लगा लूँगा बाम,अभी मैं अपने कमरे में जाकर आराम करता हूँ" राधेश्याम बोला...
और फिर राधेश्याम अपने कमरें जाकर लेट गया और शाम होने के बाद भी वो अपने कमरे से बाहर ना निकला,सरगम ने सोचा शायद राधेश्याम जी उससे नाराज हैं इसलिए अपने कमरें से बाहर नहीं आएं और जब रात का खाना बन गया और उसने शास्त्री जी को खाना खिला दिया तो तब भी राधेश्याम अपने कमरें से बाहर ना निकला तो फिर सरगम उसे खाना खाने के लिए बुलाने उसके कमरें में गई तो राधेश्याम लाइट बंद करके लेटा था,सरगम ने कमरें की लाइट जलाई तो देखा राधेश्याम अब भी सो रहा था,उसने आवाज लगाई तो राधेश्याम ना जागा,तब सरगम ने हाथ लगाकर उसे जगाना चाहा तो देखा कि उसे तो बहुत तेज बुखार था और फिर सरगम ने एक बार राधेश्याम का माथा छूकर देखा जो कि बुखार से तप रहा था,तब वो भागकर शास्त्री जी के पास आई और उनसे बोली...
"बाबा! राधेश्याम जी को बहुत तेज बुखार है",

क्रमशः....
सरोज वर्मा....