Pyar bhara Zehar - 7 books and stories free download online pdf in Hindi

प्यार भरा ज़हर - 7

एपिसोड 7 ( काश्वी का सपना ! )

अपनी बहन को , गाड़ी गिफ्ट करने के बाद , राघव फाइनली कमरे के अंदर गया । काश्वि कमरे के बीच में रखे एक किंग साइज बेड पर आराम से घूंघट ले कर बैठी थी ।जैसे ही काशी ने कमरे का दरवाजा खुलने ओ आवाज सुनी , तो उसकी बैचनी बढ़ गई थी । 

काश्वी के हाथ पैर ठंडे पड़ चुके थे । और हारों की हतेलियों में पसीना भी आ गया था । और भी राघव का भी कुछ ऐसा ही बुरा हाल था । राघव की दिल की धड़कनें तेज हो गईं थी । और राघव को काश्वी के साथ अपनी पहली मुलाकात याद आने लगीं । 

काश्वी की बातें , उसका गुस्सा । सब कुछ । और उन सब बातों को याद करते ही , राघव के चेहरे पर स्माइल आ गई थी । धीरे धीरे राघव काशवी के पास जाने लगा । राघव के कदमों की आवाज से , काशवि जल्दी से उठी , और बिस्तर के साइड में जाकर खड़ी हो गई । राघव का मुंह खुला का खुला ही रह गया । फिर काश्वी ने बोलना शुरू किया ।

काशवी :: " देखो सर, मैने ये शादी सिर्फ आपकी मां की कहने पे की है । आप कुछ ऐसा वैसा मत सोचना । में कोई ऐसी वैसी लड़की नही हूं।" 

काशवी सब एक सांस में ही बोल रही थी । और उसकी बातों को सुन , राघव की हसी निकल गई । 

हा हा हा हा हा .... । काशवी को कुछ समझ में ही नही आ रहा था । की राघव इतना क्यों हस रहा है । वो नाराज़ होते हुए बोली । 

"मैने कोई जोक मारा है क्या , जो आप इतना हस रहे हो ?" काशवी को नाराज होता देख , राघव ने खुद को और ज्यादा हसने से रोका । और फिर बोला । 

"ठीक है बाबा , सॉरी।" फिर आई गहरी सांस लेते हुए राघव आगे बोला । 

"तो हम दोस्त ?" काशवी को समझ में नहीं आया । वो अपनी मासूम नजरों से राघव को ही देखती रही । और फिर राघव ने जैसे ही काशवी की नेजरों में सवाल देखे , तो राघव बोला । 

"देखो , हमारी शादी बहुत ही अजीब हालातों में हुई है । तो हम इस रिश्ते की शुरुवात कहीं से तो करनी ही होगी ना । इसलिए दोस्ती से करते हैं ।" 

काशवी को लगा नही था की राघव इतना समझदार भी होगा । वो तो अभी तक राघव को खडूस , अकडू  और ना जाने क्या क्या समझ रही थी ।  फिर स्माइल करते हुए काशवी ने हैं में अपना सर हिला दिया । और फिर पूरी रात दोनो ने खूब बातें की । दोनो कब बातें करते करते सो गए , पता ही नहीं चला । 

आधी रात का समय था , काशवी का सर राघव के सीने पर था । दोनो बहुत सुकून से सो रहे थे । की अचानक से काशवी चीखते हुए उठी । 

काशवी :: " नही ..." काशवी की चीखने की आवाज इतनी डरावनी थी , की राघव की नींद बुरी तरह टूटी । और कशवी की हालत देख , राघव कुछ पलों के लिए सोच में पड़ गया था । वो खुद भी थोड़ा दर गया था । की ऐसा क्या सपना आया काशवी की , जिससे वो इतना घबरा गई है । 

राघव जल्दी से उठा , और काशवी को पानी का गिलास थमा दिया । पर राघव काशवी के कांपते हाथों को देख पा रहा था । कुछ देर काशवी को शांत करने के बाद , राघव कशावी के पास बैठा , और उसका सर अपने कंधों पर रखते हुए , उससे प्यार से बोला । 

राघव :: "कुछ नही हुआ काशवी । सब ठीक है ।" पर वही दूसरी तरफ , काशवी को समझ नही आ रहा था । की उसे क्या सपना आया था । सपने में सब कुछ बहुत धुंधला धुंधला था । घना जंगल , काले साए की तरह अंधेरा । और जंगल के बीचों बीच एक लाल रौशनी । सपने में काशवी खुद को उस अनजान लाल रौशनी की जाने से नही रोक पाई । पर जैसे ही वो उस रौशनी के करीब जा रही थी । उसका दर बढ़ता ही जा रहा था । 

एक अजीब सी घबराहट हो रही थी काशवी को । थोड़ा लाल रौशनी के करीब जाते ही , काशवी ने वहां पर कुछ देखा । कुछ ऐसा , जिसके बाद , काशवी को सांस तक लेने में दिक्कत होने लगी थी । बहुत मुश्किल , हिम्मत कर काशिव चीख पाई थी । 

अब जब काशवी उस सपने के बारे में सोच रही थी , तो उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था । पर थोड़ा ध्यान से सोचने के बाद , काशवी को वो जंगल , उस जंगल के रास्ते , थोड़े जाने पहचाने से लगने लगे । मानो वो पहले भी उस जंगल में जा चुकी हो । यही सब सोचते हुए , काशवी से गई । 

पर राघव की नींद बुरी तरह उड़ चुकी थी । राघव यही सोच रहा था , की काशवी ने ऐसा क्या देखा था अपने सपने में । राघव एक बात अच्छे से जानता था । की किसी भी नाग नागिन को कोई भी सपना , यूं ही नहीं आता । हमेशा उस सपने के पिच्छे कोई न कोई राज़ छिपा होता है | उस सपने की कोई कहानी होती है | राघव जानना चाहता था , की काश्वी को क्या सपना आया था | पर अभी वो काश्वी को ये पता नहीं लगने दे सकता था , की वो भी एक नाग है | 

जब तक शिवजी खुद उन दोनों को एक दुसरे के सामने लाकर खड़ा ना कर दें , राघव काश्वी को अपनी सचाई नहीं बता सकता था | अगली सुबह , जब काश्वी उठी , राघव तब तक उठ चूका था | ओर काश्वी भी जल्दी से उठकर तैयार होकर , किचन में चलाई गई | पर फिर किचन में काश्वी ने कुछ ऐसा देखा , जिससे काश्वी की आँखें नाम हो गईं थी | ओर राघव की माँ ने काश्वी को कास कर गले लगा लिया था |

आखिर किचन में ऐसा क्या हुआ था , जिससे काश्वी रोने लगी थी ? ओर क्या राज़ था , उस अजीब सपने का ? क्यूँ राघव जानना चाहता था , की क्या सपना आया था काश्वी को ? 

इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए बने रहिये मेरे साथ | ओर जानीए क्या होगा आगे, इस ज़हर ओर प्यार से भरी कहानी में |